VIDEHA

रचना लेखनhttp://www.videha.co.in/

In पञ्जी, पद्य, मैथिली, रचना, विदेह, maithili, music, videha on जून 18, 2008 at 6:30 अपराह्न

उदात्त, उदात्ततर, अनुदात्त, अनुदात्ततर, उदातानुरक्तस्वरित, अनुदात्तानुरक्तस्वरित आ’ प्रचय केर विषयमे हमरा सभ परिचय प्राप्त कएने छलहुँ। स्वरित दू प्रकारक अछि- अनुदातानुरक्त आ’ उदातानुरक्त। एहिमे अनुदात्तानुरक्तस्वरित केर 3 प्रकार छैक। ह्र्स्व दीर्घ आ’ प्लुत।
आब एकर विस्तृत विवरण दैत छी।
1.उदात्त- जे अकारादि स्वर कण्ठादि स्थानसँ उर्ध्व भागमे बाजल जाइत अछि- जेना अग्नेयम् मे अ आ’ यम् उदात्त अछि। उदात्तक हेतु कोनो चेन्ह नहि देल जाइत अछि। 2. उदात्ततर- जे कण्ठादिक अति उर्ध्व भागसँ बाजल जाइछ। गृभीतान् वौ3षट् एहि मे वौ3षट् उदात्ततर अछि। 3. अनुदात्त- जे कण्ठादिक अधः स्थानसँ बाजल जाइत अछि। अ॒न॒व॒द्यैः – एतय अ॒ आ’ न॒ अनुदात्त अछि।
४.अनुदत्ततर- जे कण्ठादिक अत्यत अधः स्थानसँ बाजल जाइत अछि। अ॒न॒व॒द्यैः मे व॒ अनुदात्त अछि।
व॒रि॒वो॒धात॑मोभव मे वो॒ अनुदात्ततर अछि।
+ जाहिमे एकहि स्वरमे किछु उदात्त आ’ किच्हु अनुदात्त उच्चारण होय, से स्वरित भेल।
५.उदातानुरक्त- पु॒रोहि॑तम् मे हि॑ उदातानुरक्त अछि।
६.अनुदातानुरक्त- जाहि स्वरितस् उदात्त वा स्वरित किवा दुनू बादमे होय। ई तीन प्रकारक अछि-
ह्र्स्व- अ॒प्स्व॒ एक॑(१) न्त एहिमे स्व स्वरितक बाद न्त उदात्त अछि। ताहि लेल स्वमे नीचां ऊपर दुनू चेन्ह लागल।
दीर्घ-रथा॑ना॒ नये॑१राः॒ मे ये॑१ जकरा ये२ सेहो लिखल जाइत अछि दीर्घ भेल।
प्लुत- अ॒भी॒ ती॒न॑(३)ममघ्न्या॑ ममघ्न्या उदात्त स्वरित अछि।
७.प्रचय- स्वरितक बादक अनुदात्तकें एकटा श्रुति स्वर भ’ जाइत छैक, एकरा प्रचय किवा तान कहल जाइत अछि।
दे॒वेषु॑ गच्छति । एतय गच्छतिमे श्रुति स्वर अछि, ऎकर कोनो चेन्ह नहि होइत छैक। मुदा जाहि स्वरित पर अनुदात्तक आगू उदात्त वा स्वरित होयत ओ’ अनुदात्त बनल रहत। ह्यो॑ वर्तनिः एतय ह्यो॑ स्वरितक आंगा व एक श्रुति भेल मुदा त अनुदात्त रहल कारण आगां निः उदात्त अछि।
ऋगवेदमे उदात्त पर कोनो चेन्ह नहि अछि। सामवेदमे ओहि पर 1 संख्या अछि। ऋगवेदमे स्वरित पर ऊपर ठाढ़ रेखा, सामवेदमे संख्या 2 अछि। अनुदात्तमे ऋगवेदमे पड़ल रेखा तँ सामवेदमे संख्या 3 अछि।स्वरितक बादक अनुदात्त(प्रचय) पर दुनू वेदमे कोनो चेन्ह नहि छैक। प्रत्येक वेदक अपन प्रतिशाख्य अछि, जे मोटा-मोटी वेदक व्याकरण अछि। मने पूर्णतया व्याकरणक संगे एहिमे संगीतक ध्वनि सेहो अछि।
सामवेद गेय अछि, बुझू जे ऋगवेदक ऋचाकेँ म्युजिक नोटेशनमे बदलि मात्र देल गेल अछि। सामवेद दू भागमे विभक्त अछि। 1. पूर्वार्चिक, 2.उत्तरार्चिक।
विशेष जानकारीक हेतु http://www.videha.co.in देखू।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: