VIDEHA

गैस सिलिण्डरक चोरि

In पञ्जी, पद्य, मैथिली, रचना, विदेह, maithili, music, videha on जुलाई 17, 2008 at 4:49 अपराह्न

गैस सिलिण्डरक चोरि
गेलहुँ रपट लिखाबय,
भेल छल सिलिण्डरक चोरि।
मोंछ बला थानेदार बजलाह,
बूरि बुझैत छी हमरा सभकेँ,
डबल सिलिनडर चाही,
एफ. आइ. आर. सस्ता नहि,
अछि एतेक हे भाइ।
हम कहल डबल सिलेण्डर,
तँ अछिये हमरा,
अच्छा तँ
तेसर सिलेण्डर लेबाक अछि देरी।
तकल कतय चोरकेँ अहाँ,
अहाँक तकनाइ अछि जेना,
चैत अछि कोल्हूक बरद।
भरि दिन घुमैछ नहि बढ़ैछ,
एको डेग,अहँ नहि करू सैह,
प्रगतिक नाम पर एहि बेर।
स्कूटरक चोरिक बेर कहलक,
इंस्योरेंसक पाइ चाही,
कहू अहाँसँ कोर्टमे भ’ पायत,
देल अहाँसँ गबाही।
फेरी पड़ि जायत अहाँकेँ,
पुनः कोर्टमे जायब,
उलटा निर्णयो भ’ जायत,
बूझि फेर से आयब।
संग गेल ड्राइवर कहलक नोकरी,
छैक एकरे ठीक,
पाइयो अछि कमाइत करि,
रंगदारी,फेकैत पानक पीक।

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