VIDEHA

मजूरी नहि माँगह

In पञ्जी, पद्य, मैथिली, रचना, विदेह, maithili, music, videha on जुलाई 17, 2008 at 4:21 पूर्वाह्न

मजूरी नहि माँगह
भरि दिन खटि हम गेलहुँ,
माँगय अपन मजूरी।
कहलन्हि जौँ मजूरी मँगबह,
मारि देबह हम छूरी।
कहल नहि बरू दिय मजूरी,
मारू नहि परञ्च ई छूरी।
जियब जखन हम करब काज,
कय आनो ठाम जी-हजूरी।

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