VIDEHA

लोली

In पञ्जी, पद्य, मैथिली, रचना, विदेह, maithili, music, videha on जुलाई 17, 2008 at 4:03 पूर्वाह्न

लोली
एहि शब्द पर भेल धमगिज्जर,
लोल हम्मर अछि नहि बढ़ल,
एतेक सुन्दर ठोढ़केँ छी,
अहाँ लोली कहि रहल।
हँसल हम नहि स्मृतिकेँ,
छोड़ि छी सकलहुँ अहाँ,
फैशन-लिपिस्टिक युगोमे,
लोलीकेँ खराब बुझलहुँ अहाँ।

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