VIDEHA

विदेह वर्ष-1 मास-1 अंक-1 1.शोध लेख.

In कथा, मैथिली, विदेह, maithili on जुलाई 20, 2008 at 7:23 पूर्वाह्न

1.शोध लेख.
1.विस्मृत कवि- पं. रामजी चौधरी(1878-1952)
जन्म स्थान- ग्राम-रुद्रपुर,थाना-अंधरा-ठाढ़ी,जिला-मधुबनी. मूल-पगुल्बार राजे गोत्र-शाण्डिल्य
वंशावली-
जीवन चौधरी(जन्म स्थान-पंचोभ-दरिभङ्गा)
1801 ई.मे रुद्रपुर आगमन
-दुइ पुत्र–श्री रंगी चौधरी(रुद्रपुरमे जन्म) आ’ श्री कंत चौधरी(रुद्रपुरमे जन्म)
-कंत चौधरीकेँ तीन पुत्र-श्री चुम्मन चौधरी,श्री बुधन चौधरी आ’ श्री रूदन चौधरी
-चुम्मन चौधरीकेँ दुइ पुत्र श्री गोनी चौधरी आ’ श्री पं कवि रामजी चौधरी.

श्री जीवन चौधरी जे कविक वृद्ध-पितामह छलाहतनिकर दोखतरी रुद्रपुरमे रहन्हि,जाहि कारणसँ ओ’ 1801 ई.मे पंचोभ छोड़ि रुद्रपुर बसि गेलाह।
कविजीक पितामह बहुत पैघ गवैय्या रहथिन्ह।हुनकर गायनक मुख्य क्षेत्र युगल सरकार सीतारामक भक्ति गीत होइत छल,तजकर प्रभाव कविजी पर खूब पड़ल।ओ’ अप्पन पौत्रक नाम रामजी एहि कारणसँ रखलन्हि। स्व.कविजी अपन नामक अनुरूप तुलसीकृत श्रीरामचरित मानस कंठस्थ कय गेल छलाह। ओ’ प्रत्येक प्रश्नक उत्तर रामायणक चौपायसँ करैत छलाह। हुनकर जीवनक सभसँ दुःखद घटना छन्हि जे ओ’ तीन विवाह कएल मुदा कोनो पत्नी चारि सालसँ बेशी नहि जीबि सकलखिन्ह।अंतिम विवाह ओ’ 53 वर्षक अवस्थामे कएल ,जे एक पुत्र, जनिकर नाम दुर्गानाथ चौधरी (दुखिया चौधरी)छन्हि,,,,केर जन्मदेलाक 15 दिनक भीतरे स्वर्गवासी भय गेलीह।
कविजी अप्पन जीवनकालमे दरिभङ्गा राजक अंतर्गत जेठ रैय्यतक पद पर कार्यरत छलाह,तथा तेसर पत्नीक मृत्युक उपरांत ओ’ ईहो पद त्यागि कय भगवद भक्तिमे लागि गेलाह। हिनकर एकमात्र प्रकाशित पोथीमे मैथिलीक संगे ब्रजबुलीक कविता सेहो अछि।
हिनकर एहि कविता सभमे हिनाक पितामहक देल राग बोधक संगहि मिथिलाक महेशवाणी,चैतक ठुमरी आ भजन प्रभाती(परती) सेहो भेटैछ।

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