VIDEHA

विदेह दिनांक 15 फरबरी, 2008 (वर्ष: 1 मास: 2 अंक: 4 ) 9. बालानां कृते बहुरा गोढ़िन नटुआदयाल

In कथा, कविता, पद्य, मैथिली, रचना, विदेह, व्यंग्य, संस्कृत, maithili, samskrit, sanskrit, videha on जुलाई 23, 2008 at 4:34 पूर्वाह्न

9. बालानां कृते
बहुरा गोढ़िन नटुआदयाल
एकटा छलि बहुरा गोढ़िन आ’ एकटा छलाह नटुआ दयाल। बहुरा गोढ़िन नर्त्तकी छलि आ’ ओकरा जादू अबैत छलैक। नटुआ दयाल बहुरा गोढ़िनक प्रशंसक छल किएक तँ ओ’ छल प्रेमी, बहुरा गोढ़िनक पुत्रीक। छल ओहो तांत्रिक।
कमला-बलानक कातक केवटी छलि बहुरा, बखरी, बेगूसरायक रहनिहारि। हकलि छलि ओ’ कमरू सँ सीखलक जादू। दुलरा दयाल छल मिथिला राज्यक भरौड़क राजकुमार, ओकरे नाम छल नटुआ दयाल। नृत्य जे ओ’ बहुरासँ सिखलक तँ सभ नामे राखि देलकैक ओकर नटुआ। नटुआ दयालक गुरू छलाह मंगल। सिद्ध पुरुष। अकाशमे बिन खुट्टीक धोती टँगैत छलाह, सुखला पर उतारैत छलाह। बहुरा गाछ हँकैत छलि, जकरासँ झगड़ा भेल ओकरा सुग्गा बना पोसि लैत छलीह। कमला कातमे रहैत छलाह आ’ भजैत छलाह,
कमलेक आसन,ओहीमे बास हे कमला मैय्या।
बहुरा वरकेँ मारि सीखने छल जादू। राजकुमारक विवाहक प्रस्तावकेँ नहि ठुकरा सकलि मुदा। बरियाती दरबज्जा लागल तँ भ’ गेलैक कह सुनी आ’ सभकेँ बना देलक ओ’ बत्तु। मंत्री मल्लक एक आँखिक रोश्नी खतम।आहि रे बा। व्यापारी जयसिंह छल मोहित महुराक बेटी पर,ओकरे खड्यंत्र।आहि रे बा। गुरू लग गेल राजकुमार आ’ आदेश भेलैक, जो कामाख्या, सीखय लेल षट् नृत्य, आ’ जादू। चण्डिका मंदिरमे योगिनीसँ षट्नृत्य सिखलक आ’ आदेश भेलैक संरया ग्रामक भुवन मोहिनीसँ षट् नृत्यक एक अंग सीखबाक। ओहि गामक सिद्ध देवी रहथि वागेश्वरी। नरबलि चढैत छल ओतय। दैत्य अबैत छल ओतय। सिखलक राजकुमार सिद्ध नृत्य अनहद आ’ आज्ञा चक्र। करिया जादूकेँ काटय बला मंत्रफुकलक राजकुमारक कानमे। कमला बलानमे आयल राजकुमार। बहुरा सुखेलक धारक पानि। राजा पता लगेलक जूकियासँ, अनलक बहुराकेँ, मुदा ओ’ तँ लगा देलक दोष राजकुमार पर। यज्ञ भेल तैयो कमलामे पानि नहि आयल, नटुआ पठेलक सभटा पानिकेँ पताल? नटुआकेँ पकड़ि कय आनल गेल। ओ’ अपन नृत्यसँ जलाजल केलक कमलाकेँ।मुदा कहलक बहुराकेँ माफी दियौक। बहुरा कहलक आब तोँ भेलह हमर बेटीक योग्य। आबह बरियाती ल’कय। नटुआ बरियाती ल’ क’ पहुँचल। तीटा पान अयलैक,एक कमलाक पानिक हेतु,दोसर बहुराकेँ माफ करबाक
हेतु। आ’ तेसर ओकर बेटीसँ व्याह करबाक हेतु। तीनूटा पान उठेलक नटुआ आ’ शुरू भेल गीत-नाद। पियास लगलैक नटुआकेँ शिष्य झिलमिलकेँ पठेलक इनार पर। डोरी छोट भय गेलैक। अपने गेल नटुआ डोरी पैघ भ’ गेलैक। फूलमती छलि ओतय,पतिक प्रतिभासँ प्रसन्न छलि ओ’। मल्लक आँखि ठीक कएलक बहुरा। कमला पहुँचल कनियाँक संग नटुआ, मुदा आहि रेबा।
नटुआकेँ चक्कू मारलक बहुरासँ दूर भेल ओकर शिष्य। मुदा नटुआ चढ़ेने छल पटोर कमला मैय्याकेँ। कमलाक धार खूने-खूनामे। मुदा कामाख्याक जदूगरनी अयलीह आ’ जीवति कएलन्हि नटुआकेँ। दुश्मनक बलि चढ़ेलक कमलाकेँ। —-

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