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विदेह दिनांक 15 फरबरी, 2008 (वर्ष: 1 मास: 2 अंक: 4 )

In कथा, कविता, पञ्जी, पद्य, मैथिली, रचना, विदेह, व्यंग्य, संस्कृत, maithili, music, sanskrit, videha on जुलाई 23, 2008 at 4:09 पूर्वाह्न

विदेह दिनांक 15 फरबरी, 2008
संपादकीय
वर्ष: 1 मास: 2 अंक: 4
विदेहक एहि अंकमे सभ नियमित स्तंभ देल गेल अछि। आब ई पत्रिका चलि पड़ल अछि। पहिलुका अंक सभमे किछु टंकणक अशुद्धता दृष्टिगोचर भेल छल। एहि अंकमे ओकर विशेष ध्यान राखल गेल अछि, कारण साहित्यिक पत्रिकामे अशुद्धिक कोनो स्थान नहि छैक।
विश्वक कोन-कोनसँ ई-मेल प्राप्त भेल, आ’ हम आह्लादित भय गेल छी। ई पत्रिका बिना कोनो विलंबक सालक- साल चलैत रहत, से हम अपने लोकनिकेँ विश्वास दैत छी, आ’ ओ’ आबय बला काल सिद्ध करत।
विशेष की कहू। अगिला सप्ताह हम दरभंगा जायब, अपन भतीजीक विवाहमे। ओतय मिथिला रिसर्च इंस्टीट्युट आ’ संस्कृत विश्वविद्यालयक भ्रमण करब आ’ देखैत छी, जे कोन नव अलभ्य चीज लभ्य होइत अछि।
चित्रक पौतीकेँ दू भाग कए देल गेल अछि, मिथिलाक खोजमे चित्रकलाक संग पुरातत्त्वक वस्तु सभक आ’ दर्शनीय स्थान सभक संकलन अछि। मिथिला रत्नमे ऐतिहासिक आ’ वर्त्तमान महापुरुषक चित्रक प्रदर्शनी अछि।एहि संकलनकेँ एहिना सहयोग दय बढ़ाऊ। मैथिलीमे एनीमेशनक घोर अभाव अछि, आ’ जौँ कही जे अछिये नहि, तँ झूठ नहि होयत। संगीत आ’ संस्कृत शिक्षा सेहो ध्वन्यात्मक सामग्रीक बिना अपूर्ण लगैत अछि। अहू दुनू दिश हमर प्रयास शीघ्रे जायत, अपने लोकनिसँ तकनीकी सहयोगक आशा करैत छी। हमर इच्छा अछि, जे बालानां कृतेमे देल गेल खिस्साकेँ एनीमेट करी।
डा. धनकर ठाकुर हमरा एकटा ई-मेलमे हमर गामक (मेहथ, झंझारपुर) एकटा नाटककार आनंदक विषयमे पुछने छलाह, जे ओ’ आइ काल्हि कतय छथि। से ओ गामेमे रहैत छथि। संभव होयत तँ हुनकर कोनो कृति शीघ्रे ‘विदेह’मे ई-प्रकाशित होयत। हम 1993-94 मे राँचीमे नोकरी करैत छलहुँ। अपन एकटा परिचितक संग श्यामलीमे एक गोट डॉक्टर साहेबसँ भेँट भेल छल, ओ’ धनकरे जी छलाह । अस्तु धनकरजीक पिताजीकेँ भगवान उच्च भगवत पद देथुन्ह, से कामना करैत छी।
एनीमेशन आ’ माइक्रोसॉफ्ट एस. क्यु. एल. डाटाबेसमे ई लोकनि, आ’ ज्योति नारायण लालजी,ब्रज कर्ण, मणि ठाकुर आ’ आन पाठक हमरा तकनीकी मदति करताह से हम आशा करैत छी। श्री गंगेश गुंजनक ईमेल आ’ मार्ग निर्देशन प्राप्त भेल, ओ’ अपन रचना पठेबाक आश्वासन सेहो देलन्हि अछि। विद्यानंद जी पञ्जीकार जी अपन निबंध पठेने छथि, से आब बुझना जाइत अछि जे रचनाक भरमार लागय बला अछि। सभटा रचना उच्चस्तरीय रहत आ’ पत्रिका पाक्षिक आधार पर नियमित चलैथ रहत से आशा करैत छी।

साइटक खोज सर्च इंजन पर आसानीसँ होय ताहि हेतु किछु विशेष प्रयास कएल गेल अछि। एहि संबंधमे कोनो तकनीकी सुझाव जौँ अपनेक समक्ष होय, तँ से आमंत्रित अछि।

अपनेक रचनाक आ’ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे।
नई दिल्ली 15/02/08 গজেন্দ্র ঠাকুব

विदेह 15 फरबरी 2008 वर्ष 1 मास 2 अंक 4
एहि अंकमे अछि:-
1. शोध लेख: मायानन्द मिश्रक इतिहास बोध (आँगा)
2. उपन्यास सहस्रबाढ़नि (आँगा)
3. महाकाव्य
महाभारत (आँगा)
4. कथा
5. पद्य (आँगा)
6. संस्कृत शिक्षा (आँगा)
7. मिथिला कला- चित्रकला (आँगा)
8. संगीत शिक्षा
9. बालानां कृते
10. पंजी प्रबंध (आँगा) – लेखक- विद्यानंद झा पञ्जीकार
11. मिथिला आ’ संस्कृत

12. भाषा आ’ प्रौद्योगिकी
13. रचना लिखबासँ पहिने… (आँगा)
14. प्रवासी मैथिल English मे

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