VIDEHA

विदेह दिनांक 15 फरबरी, 2008 (वर्ष: 1 मास: 2 अंक: 4 ) 2.उपन्यास सहस्रबाढ़नि

In कथा, कविता, पञ्जी, पद्य, मैथिली, रचना, विदेह, व्यंग्य, संस्कृत, maithili, music, samskrit, sanskrit on जुलाई 23, 2008 at 4:14 पूर्वाह्न

2.उपन्यास
सहस्रबाढ़नि

हमर पुरान जीवनक ई एकटा नीक अनुभव छल। बादमेतँ दुर्घटना तँ हँसी-खेल भ’ गेल, नहि एकरासँ कोनो दुःख होइत छल नहिये कोनो लक्ष्यक प्रति तेना भ’ कय पड़ैत छलहुँ। खेल सेहो वैह नीक लागय जाहिमे टीम नहि रहैत छल वरन व्यक्तिगत स्पर्धा बला क्रीडा नीक लगैत छल। एकर कारण सेहो छल, किएकतँ एहिमे टीमक प्रदर्शन पर व्यक्तिगत प्रदर्शन निर्भर नहि करैत छल आ’ जे बड़ाइ आकि बुराइ भेटैत छल से व्यक्तियेकेँ भेटैत छल। अहाँ ई नहि कहि सकैत छी, जे ओकरा कारण हम हारलहुँ, हमतँ नीक प्रदर्शन कएने रही। स्कूल आ’ पढ़ाइक अतिरिक्त ओना क्रीडाक स्थान न्यूने छल। लक्ष्यक प्रति जे निरपेक्षता बादमे हमरामे आयल छल, से ओहि समयमे नहि छल। ओहि समयमे तँ जगतकेँ जितबाक धुनि छल। द्वितीय स्थानक तँ कोनो प्रश्ने नहि छल। द्वितीय स्थानक माने छल अनुत्तीर्ण भेनाइ। खेलोमे,पढ़ाइयोमे, मारि-पीटमे सेहो।
गाम आन-जान खूब होइत छल। ओहि क्रममे गाम जाइत रही तँ महादेव पोखरि परक स्कूलमे काका शिक्षककेँ कहि अबैत छलाह, आ’ हम चुट्टीयो मे स्कूल जाइत रही। कबड्डी, सतघरिया, लाल-छड़ी ई सभ खेलक नामो तँ शहरक बच्चाकेँ बूझल नहि होयतैक। अस्तु ओतुक्का पढ़ाइक सभ प्रणाली अलग छला। प्रतिदिन करची कलमसँ लिखना लिखयमे देह सिहरि जाइत छल, आ’ रोजनामचा सेहो एहि प्रारे लिखैत रही-भोरे-सकाले उठलहुँ नित्य कार्यक उपरांत जलखइ क’ कय पढबाक हेतु बैसलहुँ, फेर स्कूल गेलहुँ, ओतय सँ एलहुँ, पुनः खेनाइ खेलहुँ। फेर स्कूल गेलहुँ, फेर गाम पर एलहुँ अ’ फेर जलखै कएलहुँ। फेर खेलाइ लेल गेलहुँ। फेर आबि कय लालटेनक शीशाकेँ साफ केलहुँ, फेर पढ़लहुँ आ’ फेर भगवनक नाम लय सूति गेलहुँ।रवि दिनक छुट्टीक बदला सोम दिन दू दिनक रोजनामचा लिखि कए ल’ जाय पड़ैत छल। 15 अगस्तक उत्साह सेहो दोसरे तरहक छल। साँझ-आ’ भोरमे 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस, भारत माताक जय केर संग सभ महापुरुष लोकनिक जय करैत जाइत छलहुँ। मुदा मास्टर साहबक ई गप नहि बुझना गेल छल जे मारि-पीट नहि करैत जइह’। मुदा जखन भोरमे जयक नाद गामक सीमान पर सँ जाय काल जखन भेल त्खन पता चलल जे ई गप मास्टर साहब किएक कहने छलाह। महिनाथपुरक स्कूलक बच्चा सभ जखने ओम्हरसँ अबैत रहय आकि मारि बजरि गेल। कोनहुना झोप ताप कएल गेल। फेर गाम पर जे अएलहुँ तखन पुरनका बैचक विद्यार्थी सभ अपन खिस्सा शुरू कएलक ज कोना पोखरिमे घुसा-घुसाकेँ केराक थम पानिमे द’ कय स्वतंत्रता दिवस दिन मार्ने रहथिन्ह अनगौआँ केँ, फेर ओहो सभ दोसर साल बदला लेबाक ताकिमे छल मुदा अहू बेर…।

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