VIDEHA

विदेह दिनांक 15 फरबरी, 2008 (वर्ष: 1 मास: 2 अंक: 4 ) 5.पद्य (आँगा)

In कोष, पञ्जी, पद्य, मैथिली, रचना, विदेह, व्यंग्य, संस्कृत, maithili, music, samskrit, sanskrit, videha on जुलाई 23, 2008 at 4:21 पूर्वाह्न

5.पद्य (आँगा)

74. एस.एम.एस.
कहू एहिमे अहाँ छी,
सहमत आ’ की छी
अहाँ असहमत,
दुनू रूपमे दिय’ अहाँ,
अपन विचार कय
एस. एम.एस.।
आहि कमाऊ अहाँ रुपैय्या,
हम बूरि छी भाइ,
न्यु टेक्नोलोजी छी ई सभ,
बूरि क्यो नहि आइ।

75. अल्हुआ
खाइत भेलहुँ हम अकच्छ तखन,
ई अकाल छल भेल भारि।
वेदपाठक सुनि कय आग्रह,
अएलहुँ हरिद्वार भुखालि।
भरि दिन मंत्र भाखि सोचल,
खीर पूड़ी सभ खायब।
मुदा ओतुक्का पंडित सभ,
खा’ ई सभ छल अघायल।
कएलक मेनू परिवर्त्तन कहलक,
आइ अल्हुआ अहि लायब।
बूझल नहि छल हमरा ई,
हाथ धोने छलहुँ बैसल।
आयल अल्हुआ देखि कर जोड़ि,
विनती कए हम पूछल (अल्हुआसँ),
हमतँ छी ट्रेनसँ आयल,
अहाँ कथीसँ अयलहुँ।
हमरासँ पहिने अहाँ एतय,
कोन सवारी सँ पहुँचलहुँ।

76. दीया-बाती

आयल दीया बाती,
कतेक अमावस्या अछि बीतल,
जकर अन्हारमे लागल चोट,
कतेक जीव थकुचायल पैरहि,
अन्हारक छल थाती।
दीया बाती अनलक प्रकाश,
ज्ञान-ज्योतिक अकाश,
नमन करय छी हम एहि बातक,
अंधकार-तिमिर केर होबय नाश।

77. इटालियन सैलून
घर भेल समस्तीपुर,
दिल्लीमे छी आयल,
खोलि सैलून इटालियन,
अयलहुँ कमायले’।
पुलिसक रोक देखि कय
गेलहुँ गाम घुरि,
पुनः छी आयल,
सैलून कतय बानाओल?
ईटा पर जे छी अहाँ बैसल,
सैह कहबैछ, इटालियन,
रोक अहू पर अछि पुलिसक,
सेहो अखनो धरि नहि बूझल यौ अहाँ।

78. शव नहि उठत

गामक कनियाँ मूइलि शव
अँगनामे राखल,
सभ युवा कएने अछि
नगर दिशि पलायन,
जे क्यो रहथि से घुमैत
रहथि ब्लॉक दिशि,
साँझमे अयलाह देखल
कहल गेलथि मुइल।
गामपर क्यो नहि उठेलक
शवकेँ किएक,
हम कोना छुबितहुँ भाबहु
ओ’ होयतीह ।
मुइल पर भाबहु की
भैसुर केलहुँ अतत्तह,
समय बदलल नहि
बदलल ई गाम हमर।

79.खगता
गोर लागि मौसीकेँ निकलैत,
पूछथि अछि किछु खगता,
आइ नहि पूछल जखन,
बैसल फेर ओ’ तखन।
फेर उठल फेर नहि पुछलन्हि,
सोचि जे रहैत नहि
छन्हि काज।
जाइ कोना पाइक
बड्ड अभाव।
लोक कहैछ,
आयल छथि खगते,
ओना दर्शनहुँ दुर्लभ,
अहीँ कहू,
खगतामे अछि
पुछैत क्यो आगूसँ।

80. अतिचार
तीन साल छल अतिचार,
नहि होयत एहि कारण।
पंडितबे सभ बुझथुन्ह,
छन्हि पत्रा सभ बिकाइत,
पकड़त सभ बनारसी पत्राकेँ,
सेहो नहि बिकायत ,
समय अभावेँ होयत ई,
जौँ अतिशय भ’ जायत।

81. रबड़ खाऊ

रबड़ खाऊ आ’ वमन करू चट्टी,
अपचनीय तथ्य सभ देखल भ्रात,
बड़ छल बुधियार,केलक घटकैती,
शुरू जखन भेल सिद्धांत,
विवाद, विवाहठीक भेलाक
बादक दोसर सिद्धांत,
लड़का विवाह कालमे
बिसरलाह भाषण,
नव सिद्धांतक सृजन
कय केलन्हि सम्मार्जन।

82.मुँह चोकटल नाम हँसमुख भाइ

मुँह चोकटल नाम
छन्हि हँसमुख भाइ,
बहुत दिनसँ छी
आयल करू कोनो उपाय,
मारि तरहक डॉक्युमेंट
देलन्हि देखाय, पु
नः-प्रात भ’ जायत देल
नीक जेकाँ बुझाय,
शॉर्ट-कट रस्ता सुझाय
देलन्हि मुस्काय,
मुँह चोकटल नाम हँसमुख भाय।

83. बाजा अहाँ बजाऊ
मेहनति अहाँ करू,
फल हमरा दिय।
चित्र अहाँ बनाऊ,
आवरण सजाऊ,
हमर किताबक।
नृत्य हम करू,
बाजा अहाँ बजाऊ।
कृति हमर रहत,
मेहनति करब अहाँ,
आइसँ नहि ई बात,
अछि जहियासँ शाहजहाँ।

84.पिण्डश्याम
दहेज विरोधी प्रोफेसर,
केर सुनू ई बात,
पुत्री विवाहमे कएल,
एकर ढेर प्रचार।
पुत्रक विवाहमे बदलि सिद्धांत,
वधू रहय श्याम मुदा,
मारुति भेटय श्वेत,
सिद्धांतक मूलमे,
छोड़ू विवेक।

85. राजा श्री अनुरन्वज सिंह
एक सुरमे बाजि देखाऊ,
नहि अरुनन्वन,
नहि सिंह,
पूरा एकहि बेर बताऊ,
राजा श्री अनुरन्वज सिंह।

86.पाँच पाइक लालछड़ी
परिवार छल चला रहल,
बेचि भरि दिन,
पाँच पाइक लालछड़ी,
दस पाइमे कनेक मोट लपेटन।
देखैत नहाइ साँझमे,
ठेला चला कय आयल,
बेटाकेँ पढ़ायल,
आइ.आइ.टी.मे पढ़ि,
निकलल कएलक विवाह,
जजक छलि ओ’ बेटी।
पिता कोन कष्टसँ पढाओल,
गेल बिसरि,
पिताक स्मृतिसँ दूर।
नशा-मदिरामे लीन,
कनियाँ परेशान,
लगेलन्हि आगि,
झड़कलि, ओकरा बचेबामे
ओहो गेला झड़कि।
कनियाँतँ गुजिरि गेलीह ठामे,
मुदा ओ’ तीन मास धरि,
कष्ट काटि पश्चात्ताप कए,
मुइलाह बेचारे ।

87. थल-थल
कतबो दिन बीतल,
गद्दा जेकाँ थलथल,
पट्टी टोलक ओ’ रस्ता,
भेल आइ निपत्ता।
मटि खसा कय लगा खरंजा,
पजेबाक दय पंक्ति,
नव-बच्चा सभ कोना झूलत,
ओहि गद्दा पर आबि।
थल-थल करैत ओ’ रस्ता,
लोकक शोकक कहाँ भेल बंद,
माँ सीते की अहाँ बिलेलहुँ,
ओहि दरारिमे अंत।

88. चोरुक्का विवाह
सिखायब हिस्सक छूटत,
नहीं आनब कनियाँकेँ,
भायक माथ टूटत।
भेल धमगिज्जर सालक
साल बीतत,
युवक-युवती दुनू भेल
चोर विवाहक कैदी,
नहीं छल कोनो हाथ परंच,
छल सजा पबैत।
भागल घरसँ युवक आब
पछतायल घरबारी,
मुदा की होयत आब,
ओ’ समाजक व्यभिचारी।
एलेक्शनक झगड़ामे
भाय-भायकेँ मारल,
चोरुक्का विवाहक
घटनामे ओकरा दोहरायल।

89. भ्रातृद्वितीया
कय ठाँऊ बैसलि,
आसमे छलि,
भाय आयत,
बीतल, साँझ आयल।
आँखि नोर छल सुखायल,
चण्डाल कनियाँक गप पर,
सालमे एक बेर छल अबैत,
सेहो क्रम ई टूटल।
कय ठाँऊ बैसलि,
धोखरि अरिपन विसर्जित,
छल साँझ आयल।

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