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‘विदेह’ ०१ जून २००८ ( वर्ष १ मास ६ अंक ११ )

In विदेह, videha on जुलाई 27, 2008 at 6:51 अपराह्न


‘विदेह’ ०१ जून २००८ ( वर्ष १ मास ६ अंक ११ ) एहि अंकमे अछि:-
महत्त्वपूर्ण सूचना: २० म शताब्दीक सर्वश्रेष्ठ मिथिला रत्न श्री रामाश्रय झा ‘रामरंग’ जिनका लोक ‘अभिनव भातखण्डे’ केर नामसँ सेहो सोर करैत छन्हि, ‘विदेह’ केर हेतु अपन संदेश पठओने छथि आऽ ताहि आधार पर हुनकर जीवन आऽ कृतिक विषयमे विस्तृत निबंध विदेहक संगीत शिक्षा स्तंभमे ई-प्रकाशित करबाक हमरा लोकनिकें सौभाग्य भेटल अछि।
१.नो एंट्री: मा प्रविश श्री उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’
मैथिली साहित्यक सुप्रसिद्ध प्रयोगधर्मी नाटककार श्री नचिकेताजीक टटका नाटक, जे विगत २५ वर्षक मौनभंगक पश्चात् पाठकक सम्मुख प्रस्तुत भ’ रहल अछि। सर्वप्रथम विदेहमे एकरा धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित कएल जा रहल अछि। पढ़ू नाटकक दोसर कल्लोलक दोसर खेप।
२. शोध लेख: मायानन्द मिश्रक इतिहास बोध (आगाँ)
३. उपन्यास सहस्रबाढ़नि (आगाँ)
४. महाकाव्य महाभारत (आगाँ) ५. कथा (सं‍गीत)
६. पद्य अ. विस्मृत कवि स्व. रामजी चौधरी,
आ. श्री गंगेश गुंजन, इ.ज्योति झा चौधरी आऽ ई. गजेन्द्र ठाकुर
७. संस्कृत शिक्षा(आगाँ)
८. मिथिला कला(आगाँ)
९.पाबनि-संस्कार-तीर्थ- नूतन झा
१०. संगीत शिक्षा -श्री रामाश्रय झा ‘रामरंग’ ११. बालानां कृते- गोनू झा आऽ दस ठोप बाबा
१२. पञ्जी प्रबंध (आगाँ) पञ्जी-संग्राहक श्री विद्यानंद झा पञ्जीकार (प्रसिद्ध मोहनजी )
१३. संस्कृत मैथिली मिथिला १४.मैथिली भाषापाक
१५. रचना लेखन (आगाँ)
16. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS -Videha Mithila Tirbhukti Tirhut…
महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) विस्मृत कवि स्व. रामजी चौधरी (1878-1952)पर शोध-लेख विदेहक पहिल अँकमे ई-प्रकाशित भेल छल।तकर बाद हुनकर पुत्र श्री दुर्गानन्द चौधरी, ग्राम-रुद्रपुर,थाना-अंधरा-ठाढ़ी, जिला-मधुबनी कविजीक अप्रकाशित पाण्डुलिपि विदेह कार्यालयकेँ डाकसँ विदेहमे प्रकाशनार्थ पठओलन्हि अछि। ई गोट-पचासेक पद्य विदेहमे नवम अंकसँ धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित भ’ रहल अछि।
महत्त्वपूर्ण सूचना:(२) ‘विदेह’ द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर मैथिली-अंग्रेजी आऽ अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश (संपादक गजेन्द्र ठाकुर आऽ नागेन्द्र कुमार झा) प्रकाशित करबाओल जा’ रहल अछि। प्रकाशकक, प्रकाशन तिथिक, पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत।
महत्त्वपूर्ण सूचना:(३) ‘विदेह’ द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा’ रहल गजेन्द्र ठाकुरक ‘सहस्रबाढ़नि'(उपन्यास), ‘गल्प-गुच्छ'(कथा संग्रह) , ‘भालसरि’ (पद्य संग्रह), ‘बालानां कृते’, ‘एकाङ्की संग्रह’, ‘महाभारत’ ‘बुद्ध चरित’ (महाकाव्य)आऽ ‘यात्रा वृत्तांत’ विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे प्रकाशित होएत। प्रकाशकक, प्रकाशन तिथिक, पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत।
महत्त्वपूर्ण सूचना (४): श्री आद्याचरण झा, श्री प्रफुल्ल कुमार सिंह ‘मौन’ श्री कैलाश कुमार मिश्र (इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र), श्री श्याम झा आऽ डॉ. श्री शिव प्रसाद यादव जीक सम्मति आयल अछि आऽ हिनकर सभक रचना अगिला १-२ अंकक बादसँ ‘विदेह’ मे ई-प्रकाशित होमय लागत।
महत्त्वपूर्ण सूचना (५): महत्त्वपूर्ण सूचना: अगिला अंकमे मैथिली हैकू पद्य देल जायत।

विदेह (दिनांक ०१ जून, २००८)
संपादकीय
वर्ष: १ मास: ६ अंक:११
मान्यवर,
विदेहक नव अंक (अंक ११ दिनांक ०१ जून २००८) ई पब्लिश भ’ रहल अछि। एहि हेतु लॉग ऑन करू http://www.videha.co.in |
नचिकेताजीक नाटक नो एंट्री: मा प्रविश दोसर कल्लोलक दोसर खेप ई-प्रकाशित भ’ रहल अछि। गगे श गुंजन जीक कविता आऽ विस्मृत कवि रामजी चौधरीक अप्रकाशित पद्य सेहो ई-प्रकाशित भए रहल अछि।
एहिमे कोनो संदेह नहि जे २०म शताब्दीमे जतेक मिथिला विभूति भेलाह ओहिमे श्री रामाश्रय झा ’रामरंग’ सर्वोपरि छथि। विदेह हेतु हुनकर स्पठाओल संदेशक आधार पर हुनक जीवनी आऽ कृतिकेँ विदेहक संगीत शिक्षा स्तंभमे पाठकक समक्ष अनबामे हमरा सभ गर्व अनुभव कए रहल छी।
शेष स्थायी स्तंभ यथावत अछि।
अपनेक रचना आ’ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे। वरिष्ठ रचनाकार अपन रचना हस्तलिखित रूपमे सेहो नीचाँ लिखल पता पर पठा सकैत छथि।
गजेन्द्र ठाकुर
389,पॉकेट-सी, सेक्टर-ए, बसन्तकुंज,नव देहली-११००७०.
फैक्स:०११-४१७७१७२५
०१ जून २००८ नव देहली
http://www.videha.co.in
ggajendra@videha.co.in
ggajendra@yahoo.co.in
c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।

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