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विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ३.उपन्यास सहस्रबाढ़नि -गजेन्द्र ठाकुर

In उपन्यास, Maithili Novel on जुलाई 27, 2008 at 5:58 अपराह्न

३.उपन्यास
सहस्रबाढ़नि -गजेन्द्र ठाकुर

आब ओऽ छौड़ा कानय खीजय लागल, आऽ पैघ वर्गक कोनो बदमाश विद्यार्थीकेँ बाजाबए हेतु गेल। फेर घुरि कए जे आयल तँ ओकर कानब-खीजब बन्न भए गेल छलैक, हमरा कहलक जे हमर भाग्य नीक अछि जे जकरा ओऽ बजाबए गेल छल से आइ स्कूल नहि आएल अछि।
दू तीन दिन धरि हम ई गुन-धुन करैत रहलहुँ जे ओऽ ओहि बदमाशकेँ बजाऽ कए नहि आनि लए। ओहिना किछु दिनुका बाद ओकरा फेर कोनो दोसर छौड़ासँ झगड़ा भेलैक आऽ ओहि दिन ओऽ हीरो छौड़ा स्कूल आएल छल। हमरे सोझाँमे ओऽ हमर कक्षामे आएल आऽ एक फैट पेटमे दोसर विद्यार्थीकेँ मारलकैक। क्यो बचबए लेल तँ नहि गेलैक मुदा बादमे जखन एकटा क्लासमे शिक्षक नहि अएलाह आऽ विद्यार्थी सभ खाली गप शप कए रहल छल तखन एहि बातक निर्णय भेल जे आब ओहि विद्यार्थीसँ क्यो गप नहि करत आऽ क्लास टीचरसँ एहि गपक शिकाइत कएल जायय जाहिसँ ओऽ ओहि बदमाश विद्यार्थीक क्लास टीचरकेँ एहि घटनाक विषयमे बताबथि। आब ओऽ पिनकाह विद्यार्थी शुक-पाक करए लागल।फेर ओहि विद्यार्थीक लग गेल ओकरा कान भड़ि कए आयल जे सभ ओकरा विरुद्धमे चालि चलि रहल अछि। ओऽ बदमाश आबि कए सभकेँ उठबाक लेल कहलक, मुदा क्यो नहि उठल। तख्न ओऽ हमरा कहलक जे उठू। हम उठि गेलहुँ आऽ तखन ओहिना एक-एक कऽ कए तीन चारि गोते केँ उठेलक आऽ फेर सभकेँ उठबाक लेल कहलक। सभ उठि गेल। तखन सभकेँ धमकी देमय लागल। मुदा एहि बेर हमर सभक क्लास मोनीटर किछु हिम्मतसँ काज लेलक आऽ ओकरा ओहि छौड़ाक विषयमे कहए लागल। हमरा देखाय कए कहलक जे एकरा देखैत छी? कनियो बदमाश लगैत अछि, एकरो अहाँक नाम लऽ कए दबाड़ि रहल छल। ओऽ छौड़ा तँ हुण्ड छल से ओकर पारा चढ़ि गेलैक आऽ हमर वर्गक पिनकाहा छौड़ाकेँ चेतौनी देलकैक जे आइ दिनसँ कनैत खिजैत ओकरा लग नहि आओत आऽ ओकर नाम लऽ कए ककरोसँ झगड़ा नहि करत।
एहिना स्कूल चलि रहल छल आकि एक दिन एकटा छौड़ा वर्गमे पिहकी मारि देलकैक। ओऽ छौड़ा बीचहिमे बम्बई भागि गेल छल बाल कलाकार बनि कए। घुरि कए आयल तँ वर्ग शिक्षक पुछलन्हि जे किएक घुरि अएलहुँ तँ कहलकन्हि जे सभ कहलक जे एतय तँ सभ बी.ए., एम.ए. अछि, अहाँ कमसँ कम मैट्रिको कए लिअह। आब पिहकीक बाद वर्ग शिक्षक पढ़ाइ छोड़ि कए ओकर अन्वेषणमे लागि गेल। पिहकी कोन दिशिसँ आयल। बहुमतक आधार पर एक कातकेँ छाँटि देल गेल। आब आगूसँ आयल आकि पाछूसँ। ताहि आधार पर सेहो एकटा बेंच निर्धारण भए गेल। ओहि बेंच पर छह गोटे छलाह। आब ई निर्धारण होमए लागल जे बाम कातसँ आयल आकि दहिनसँ। फेर छहमे सँ दू गोटेक निर्धारण बहुमतक आधार पर कएल गेल। ओहिमेसँ एकटा हमरा लोकनिक बम्बइया हीरो छलाह, जनिकर बम्बइक खिस्सा टिपिनसँ लऽ कए लीजर क्लास धरि चलैत रहैत छल। मुदा एहि दुनू गोटेमे १:१ केर टाइ भए गेल कारण क्यो मानए हेतु तैयार नहि जे पिहकी के मारलन्हि।
एकर बाद डायरी खाली छल। नन्द बेटाकेँ बजा कए डायरी दए देलन्हि आऽ मात्र ई कहलन्हि जे पढ़ाई पर ध्यान दिअ। एहि बात पर लज्जित होएबाक कोनो बात नहि छल मुदा आरुणिकेँ हुनकर भाए बहिन एहि गपक लेल बहुत दिन धरि किचकिचाबैत रहलाह। अस्तु एक दिन ओऽ डायरीकेँ फाड़ि देलन्हि, आऽ ई आत्मकथात्मक उपन्यास पूर्ण होएबासँ पहिनहि खतम भए गेल।
(अनुवर्तते)
c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।

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