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विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ १०. संगीत शिक्षा-गजेन्द्र ठाकुर/ श्री रामाश्रय झा ’रामरंग’

In विद्यापति संगीत, First Maithili Language Blog, Ist Maithili Blog, music on जुलाई 27, 2008 at 6:32 अपराह्न

१०. संगीत शिक्षा-गजेन्द्र ठाकुर
श्री रामाश्रय झा ’रामरंग’

भारतीय शास्त्रीय संगीतक समर्पित आऽ विलक्षण ओऽ विख्यात संगीतज्ञ पं रामाश्रय झा ’रामरंग’ केर जन्म ११ अगस्त १९२८ ई. तदनुसारभाद्र कृष्णपक्ष एकादशी तिथिकेँ मधुबनी जिलान्तर्गत खजुरा नामक गाममे भेलन्हि। हिनकर पिताक नाम पं सुखदेव झा आऽ काकाक नाम पं मधुसदन झा छन्हि। रामाश्रयजीक संगीत शिक्षा हिनका दुनू गोटेसँ हारमोनियम आऽ गायनक रूपमे मात्र ५ वर्षक आयुमे शुरू भए गेलन्हि। तकरा बाद श्री अवध पाठकजीसँ गायनक शिक्षा भेटलन्हि।
१५ वर्ष धरि बनारसक एकटा प्रसिद्ध नाटक कम्पनीमे रामाश्रय झा जी कम्पोजरक रूपमे कार्य कएलन्हि। पं भोलानाथ भट्ट जी सँ २५ वर्ष धरि ध्रुवपद, धमार, खयाल, ठुमरी, दादरा, टप्पा शैली सभक विधिवत शिक्षा लेलन्हि।
पं भट्ट जीक अतिरिक्त्त रामाश्रय झा जी पं बी.एन. ठकार (प्रयाग), उस्ताद हबीब खाँ (किराना), पं बी.एस. पाठक (प्रयाग) सँ सेहो संगीतक शिक्षा प्राप्त कएलन्हि।
पं झा १९५४ सँ प्रयागमे स्थाई रूपसँ रहि रहल छथि। १९५५ ई.मे हिनकर नियुक्त्ति लूकरगंज संगीत विद्यालयमे संगीत अध्यापक रूपमे भेलन्हि। १९६० ई.मे हिनकर नियुक्त्ति प्रयाग संगीत समितिमे भेलन्हि, जतए १९७० धरि प्रभाकर आऽ संगीत प्रवीण कक्षाक शिक्षक रहलाह। १९७०मे इलाहाबाद विश्वविद्यालयक संगीत विभागाध्यक्ष श्री प्रो. उदयशंकर कोचकजी पं झाक संगीत क्षेत्रक सेवासँ प्रभावित भए विश्वविद्यालयमे हिनकर नियुक्त्ति कएलन्हि। पं झा उत्कृष्ट शिक्षक, गायक आऽ आकाशवाणीक प्रथम श्रेणीक कलाकार छथि। हिनकर अनेक शिष्य-शिष्या आकाशवाणीक प्रथम श्रेणीक कलाकार आऽ उत्तम शिक्षक छथि, जेना-
डॉ. गीता बनर्जी, श्रीमति कमला बोस, श्रीमति शुभा मुद्गल, श्रीकान्त वैश्य,श्री शान्ता राम कशालकर, श्री शान्ता राम कशालकर, श्री कामता खन्ना, श्रीमति सत्या दास, डॉ. रूपाली रानी झा, डॉ इला मालवीय, श्री अनिल कुमार शर्मा, श्री रामशंकर सिंह, श्रीमति संगीता सक्सेना, श्री राजन पर्रिकर, श्रीमति रचना उपाध्याय, श्री नरसिंह भट्त, श्री भूपेन्द्र शुक्ला, श्री जगबन्धु इत्यादि।
पं झा संगीत शास्त्र केर श्रेष्ठ लेखक छथि आऽ हिनकर लिखल अभिनव गीतांजलि केर पांचू भाग प्रकाशित भए चुकल अछि, जाहिमे २००सँ ऊपर रागक व्याख्या अछि आऽ दू हजारक आसपास बंदिश अछि।
मिथिलावासी श्री रामरंग राग तीरभुक्त्ति, राग वैदेही भैरव, आऽ राग विद्यापति कल्याण केर रचना सेहो कएने छथि आऽ मैथिली भाषामे हिनकर खयाल ’रंजयति इति रागः’ केर अनुरूप अछि।
१९८२ मे उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कारक संगे ’रत्न सदस्यता’ सेहो देल गेलन्हि। संगीत लेखनक हेतु काका हाथरसी पुरस्कार, आऽ भारतक सर्वोच्च संगीत संस्था आइ.टी.सी. केर सम्मान सेहो हिनक भेटि चुकल छन्हि। २०० ई. मे स्वर साधना रत्न अवार्ड, २००५ मे संगीत नाटक अकादेमीक राष्ट्रीय पुरस्कार, भारत संगीत रत्न, राग ऋषि, संत तुलसीदास सम्मान, प्रायाग गौरव एवं सोपरी अकादेमीक ’सा म प वितस्ता’ इत्यादि सम्मान श्री झाकेँ प्राप्त छन्हि। श्री रामरंग जी प्रयागमे ’वारिन दास संगीत परिषद’ केर स्थापना कए अनेकानेक संगीत समारोहक आयोजन सेहो कएने छथि। ’इलाहाबाद विश्वविद्यालय संगीत सम्मेलन’ ३० वर्षसँ बन्द पड़ल छल जकरा वार्षिक रूपसँ १९८० मे पुनः श्री झा आरम्भ करबओलन्हि। किएक तँ श्री झा लग कोनो औपचारिक डिग्री नहि छलन्हि, इलाहाबाद विश्वविद्यालय अपन नियममे परिवर्त्तन कएलक आऽ हिनका ओतए संगीत विभागाध्यक्ष बनाओल गेलन्हि, जतएसँ ओऽ १९८९ ई. मे सेवानिवृत्त भेलाह। तुलसीक मानसक आधार पर श्री झा सात काण्डक संगीत रामायणक सेहो रचना कएलन्हि। पं झा मुख्य रूपसँ खयाल, ठुमरी, दादरा, टप्पा आऽ संगहि ध्रुवपद, धमार, तराना, तिरवट, चतुरंग, रागमाला, रागसागर, रागताल सागर, भजन आऽ लोकगीत गायनमे सिद्ध छथि।
अखन ८० वर्षक आयुमे प्रयागमे श्री झा संगीत साधनामे रत छथि।
c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।

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