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विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ ३.उपन्यास सहस्रबाढ़नि -गजेन्द्र ठाकुर

In उपन्यास, सहस्रबाढ़नि, Maithili Novel on जुलाई 27, 2008 at 6:47 अपराह्न

३.उपन्यास
सहस्रबाढ़नि -गजेन्द्र ठाकुर

नन्दक अव्यव्स्थाक विरुद्ध शुरू कएल गेल संघर्ष किछु दिनका विराम लेने छल। गाममे बच्चा सभ डेढ़ साल रहल छलन्हि, दरमाहा बहुत दिन धरि बन्द छलन्हि। गाममे पैघ भाय एकटा भावी राजनीतिज्ञकेँ कहि कए नन्दक पदस्थापन क्षेत्रीय काजसँ हटा कए ऑफिसमे चित्र परियोजना डिजाइनमे करबाए देने छलखिन्ह। संगे ईहो कहने छलखिन्ह जे अपन ऑफिस जाऊ आऊ आऽ बच्चा सभ पर ध्यान दिअ। सभसँ मिलि जुलि कए रहू।
नन्द पटना आबि कए भायक सभ गप पर ध्यान देने छलखिन्ह। पटनामे बेटीक कॉलेजमे नामांकन करबाए महाविद्यालयक पार्श्वमे किराया पर घर ताकलन्हि। दुनू बेटाक नामांकनक हेतु प्रवेश परीक्षा केर फॉर्म सभ भरबाय सभकेँ पटना बजा लेलखिन्ह। भातिजकेँ कहलखिन्ह जे सभकेँ लए कए आबि जाऊ, आऽ पहलेजाघाटमे बिहार सरकारक स्टीमर पकड़बाक सेहो आदेश देलखिन्ह। कारण एकटा निजी स्टीमर बच्चा बाबूक सेहो चलैत छल, मुदा ओऽ बेशी पसेन्जर लए कऽ चलैत छल, संगहि सरकारी स्टीमर अपन समयसँ चलैत छल, ओहिमे पैसेंजर होए वा नहि। सरकारी स्टीमरमे यात्रीक संख्या सीमित छल ताहि हेतु टिकट केर नियमित हिसाब छाल आऽ सभ यात्रीक बीमा होइत छल, ई बात निजी स्टीमरमे नहि छल।
भातिजक सग पत्नी आऽ पुत्र-पुत्री सभ आबि गेलखिन्ह। गंगा ब्रिज कॉलोनीमे नन्द एकाकी रहैत छलाह। परिवारक लोककेँ सेहो आसपड़ोससँ बेशी मेल-जोल करबाक अनुमति नहि देने छलाह। मुदा पटनामे सभटा उनटि गेल छल। पड़ोसमे एकटा रिटायर्ड फौजी छलाह, एकटा बिहार सरकारक पुलिस छलाह आ एकटा बिहार सचिवालयक कर्मचारी। नन्द दुनू बेटाकेँ लए अगिला दिन तीनू गोटेक घर गेला आऽ सभसँ नमस्कार-पाती करबओलखिन्ह। बेटा-बेटी सभ स्कूल जाए लागल छलन्हि। नन्द पाँच किलोमीटर ऑफिस पएरे जाथि आऽ घुरती काल घरक काज-उद्यम सेहो करैत आबथि, जेना बृहस्पतिकेँ हाट लगैत छल, तँ ओतएसँ हरिएर-तरकारी, चाउर दालि इत्यादि आनब ई सभ। हाट रविक छुट्टीक दिन सेहो लगैत छल, आऽ ओहू दिन अपने जाऽ कए सभ टा घरक काज करैत छलाह। बच्चा सभक काज मात्र पढ़बा धरि सीमित छल। दूध पैकेट बला अबैत छलन्हि, कारण उठाना दुहबाए कए अनबामे बच्चा सभक पढ़ाईमे भाँगठ पड़ैत। बड़का बेटा जे गगा ब्रिज कॉलोनीमे कहियो ककरो फूल उखाड़ि लैत छल आऽ कहियो ककरो खिड़की पर गिट्टी फेंकि दैत छल, डेढ़ सालक ग्राम प्रवासक बाद शान्त भए गेल छलन्हि। नन्दकेँ मोन छन्हि जे कॉलोनीमे एक बेर बेटाकेँ लए कए पड़ोसीक ओहिठाम गेल छालाह आऽ पड़ोसीक पत्नीसँ बेटा क्षमा याचना कएने छलखिन्ह, कारण कार्यालयसँ अएला उत्तर ज्ञात भेल छलन्हि, जे बेटा हुनका पर गिट्टी फेँकने छलखिन्ह, जखन ओऽ बेचारी खिड़की लग ठाढ़ि बाहर दिशि किछु देखि रहल छलीह। छोट बेटा कोनो पैघ बच्चाकेँ पाथर फेंकि कए मारने छलखिन्ह, जखन ओऽ बच्चा साइकिल पर चढ़ल छल, भेल ई छल जे ओऽ पैघ बच्चा कॉलोनीक एक चक्कर काटि कए सायकिल लौटेबाक अपन वचनक पालन नहि कएने छल आऽ घुरलाक बाद दोसर चक्कर लगाऽ कए अबैत छी ई बजैत-बजैत सायकिल लए आगू बढ़ि रहल छल। छोटका बेटा क्षमा याचना करबासँ सेहो मना कए देने छलखिन्ह कारण ओऽ सोचैत छलाह जे हुनकर कोनो गलती नहि छलन्हि। बेश तखन एहि बेर बच्चा सभकेँ जखन नन्द पड़ोसी सभसँ भेँट करबाबए लेल गेल छलाह तावत धरि बड़का बेटा तँ पूर्णतया पन चञ्चल स्वभावक विपरीत स्वभावक भए गेल छलाह, मुदा छोट बेटा अपन स्वभाव पर दुराग्रह करैत स्थिर छलाह।
(अनुवर्तते)

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