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विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ११. बालानां कृते-गजेन्द्र ठाकुर

In बालानां कृते on जुलाई 27, 2008 at 5:35 अपराह्न

११. बालानां कृते-गजेन्द्र ठाकुर
बालानां कृते

-गजेन्द्र ठाकुर
बगियाक गाछ
चित्र ज्योति झा चौधरी
एकटा मसोमात छलीह आ’ हुनका एकेटा बेटा छलन्हि। ओ’ छल बड्ड चुस्त-चलाक।
एक दिनुका गप अछि। ओ’ स्त्री जे छलीह, अपना बेटाकेँ बगिया बना कए देलखिन्ह। ओहि बालककेँ बगिया बड्ड नीक लगैत छलैक। से ओ’ एहि बेर ओ’ एकटा बगिया बाड़ीमे रोपि देलक। ओतए गाछ निकलि आएल। बगियाक गाछ, नञि देखल ने सुनल।
माय बेटा ओहि बगियाक गाछक खूब सेवा करए लगलाह। कनेक दिनमे ओहि गाछमे खूब बगिया फड़य लागल। ओ’ बच्चा गाछ पर चढ़ि कए बगिया तोड़ि कए खाइत रहैत छल।
एक दिनुका गप अछि। एकटा डाइन बुढ़िया रस्तासँ जा’ रहल छल। ओकरा मनुक्खक मसुआइ बना कए खायमे बड्ड नीक लगैत रहैक। से ओ’ जे बच्चाकेँ गाछ पर चढ़ल देखलक, तँ ओकर मोन लुसफुस करए लगलैक। आब ओ’ बुढ़्या मोनसूबा बनबए लागल जे कोना कए ई बच्चाकेँ फुसियाबी आ’ एकरा घर ल’ जा कए एकर मसुआइ बना कए खाइ।
बच्चाकेँ असगर देखि ओ’ लग गेल आ’ बच्चाकेँ कहलक-

“ बौआ एकटा बगिया हमरा नहि देब। बड्ड भूख लागल अछि।
बच्चा ओकर हाथ पर बगिया देबय लागल।

“बौआ हम हाथसँ कोना लेब बगिया हथाइन भ’ जायत”।
बच्चा बगिया माथ पर राखए लागल।
“हँ हँ माथ पर नहि राखू। मथाइन भ’ जायत”।
बच्चो छल दस बुधियारक एक बुधियार। खोइछमे बगिया देबए लागल।
”ई की करैत छी बौआ। बगिया खोँछाइन भ’ जायत, अहाँ झुकि कए बोरामे दए दिअ”।
मुदा बच्चा तँ छल गोनू झाक बुझू जे गोनू झाक मूल-गोत्रेक।
बाजल-
“नञि गए बुढ़िया। तोँ हमरा बोरामे बन्द कए भागि जेमह। माय हमरा ठग सभसँ सहचेत रहबाक हेतु कहने अछि”।

मुदा बुढ़ियो छल ठगिन बुढ़िया। ठकि फिसिया कए बोली-बाली दए कए ओकरा मना लेलक। जखने बच्चा झुकल ओ’ ओकरा बोरामे कसि कए चलि देलक। बुढ़िया रस्तामे थाकि कए एकटा गाछक छहरिमे बैसि गेलि।
कनेक कालमे ओकरा आँखि लागि गेलैक। बच्चा मौका देखि कोनहुना कए ओहि बोरासँ बाहर बहरा गेल आ’ भीजल माटि, पाथर आ’ काँट-कूस बोरामे ध’ कए ओहिना बान्हि कए पड़ा गेल।
बुढ़िया जखन सूति कए उठल आ’ बोरा ल’ कए आगू बढ़ल तँ ओकरा बोरा भरिगर बुझएलैक। मोने-मोन प्रसन्न भ’ गेलि ई सोचि जे हृष्ट-पुष्ट मसुआइ खएबाक मौका बहुत दिन पर भेटल छैक ओकरा। रस्तामे भीजल माटिसँ पानि खसए लागल तँ ओकरा लगलैक जे बच्चा लगही कए रहल अछि। ओ’ कहलक जे-
”माथ पर लहुशंका कए रहल छह बौआ। कोनो बात नहि। घर पर तोहर मसुआइ बना कए खायब हम”।

कनेक कालक बाद काँट गरए लगलैक बुढ़ियाकेँ। कहलक-
”बौआ। बिट्ठू काटि रहल छी। कोनो बात नहि कतेक काल धरि काटब”।
बुढ़्याक एकटा बेटी छलैक। गाम पर पहुँचि कए बुढ़िया ओकरा कहलक, जे आइ एकटा मोट-सोट शिकार अछि बोरामे। माय बेटी जखन बोरा खोललक तँ निकलल माटि, काँट आ’ पाथर। कोनो बात नहि।

बुढ़िया भेष बदलि पहुँचल फेरसँ बगियाक गाछ तर।
एहि बेर बच्चा ओकरा नञि चीन्हि सकल। मुदा जखन ओ’ झुकि कए बगिया बोरामे देबाक गप कहलक तँ बच्चाकेँ आशंका भेलैक।
”गए बुढ़िया। तोँही छँ ठगिन बुढ़िया”।
मुदा बुढ़िया जखन सप्पत खएलक तँ ओ’ बच्चा झुकि कए बगिया बोरामे देबए लागल। आ’ फेर वैह बात।
एहि बेर बुढ़िया कतहु ठाढ़ नहि भेल। सोझे घर पहुँचल आ’ बेटी लग बोरा राखि नहाए-सोनाए चलि गेल।बेटी जे बोरा खोललक तँ एकटा झँटा बला बच्चाकेँ देखलक। ओ’ पुछलक-
”हमर केश नमगर नहि अछि किएक”।
”अहाँक माय अहाँक माथ ऊखड़िमे दए समाठसँ नहि कुटने होयतीह। तैँ”।बच्चा तँ छल दस होसियरक एक होसियार तैँ।

बुढ़ियाक बेटी अपन केश बढ़ेबाक हेतु अपन माथ ऊखड़िमे देलन्हि, आ’ ओ’ बच्चा ओकरा समाठसँ कॉटए लागल। ओकरा मारि ओकर मासु बनेलक। बुढ़िया जखन पोख्रिसँ नहा कए आयल तँ बुढ़ियाक आगू ओ’ मासु परसि देलक।
जखने ओ’ खेनाइ पर बैसलि तँ लगमे एकटा बिलाड़ि छल से बाजि उठल-
”म्याँऊ। अपन धीया अपने खाँऊ।म्याँऊ”।
”बेटी एकरा मासु नहि देलहुँ की।तँ बाजि रहल अछि”।
ओ’ बच्चा बिलाड़िक आँगा मासु राखि देलक मुदा बिलाड़ि मासु नहि खएलक।
आब बुढ़ियाक माथ घुमल। ओ’ बेटीकेँ सोर कएलक तँ ओ’ बच्चा समाठ ल’ कए आयल आ’ ओकरा मारि देलक।
फेरसँ बच्चा बगियाक गाछ पर चढ़ि बगिया खए लागल। बड्ड नीक लगैत छल ओकरा बगिया।
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२.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्तितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥

करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।

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