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विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 9. पाबनि नूतन झा;जानकी नवमी)13 मई 2008) पर विशेष

In पाबनि-तिहार, First Maithili Language Blog, Ist Maithili Blog on जुलाई 27, 2008 at 4:44 अपराह्न

9. पाबनि नूतन झा; गाम : बेल्हवार, मधुबनी, बिहार; जन्म तिथि : ५ दिसम्बर १९७६; शिक्षा – बी एस सी, कल्याण कॉलेज, भिलाई; एम एस सी, कॉर्पोरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर; फैशन डिजाइनिंग, निफ्ट, जमशेदपुर।“मैथिली भाषा आ’ मैथिल संस्कृतिक प्रति आस्था आ’ आदर हम्मर मोनमे बच्चेसॅं बसल अछि। इंटरनेट पर तिरहुताक्षर लिपिक उपयोग देखि हम मैथिल संस्कृतिक उज्ज्वल भविष्यक हेतु अति आशान्वित छी।”

जानकी नवमी)13 मई 2008) पर विशेष
निबंध – नूतन झा
जानकी-नवमी
वैशाख मासक शुक्ल पक्षक नवमी तिथि केँ जानकी-नवमी मनाओल जाइत अछि। लोक ओहि दिन व्रत राखैत छथि आ’ सीताजीक पूजा अर्चना करैत छथि। सीता माता लक्ष्मीजीक अवतार मानल गेल छथि, तैँ ई मान्यता अछि जे ई व्रत कएलासॅं सुख एवम्‌ सम्पत्तिक प्राप्ति होइत अछि। एहि वर्ष ई पाबनि अंग्रेजी तारिख १३ मई, २००८ मंगलवार केँ अछि।
कथा अछि जे राजर्षि जनकजी केँ सीताजी शैशवावस्थामे अही दिन प्राप्त भेल रहथिन्ह।राजा जनक जनकपुरक राजा छलाह आ’ संतानहीन जाहिसँ एहि दु:ख सॅं पीड़ित छलाह।एक दिन कोनो शुभ कार्यक प्रयोजन सॅं ओ’ खेतमे हर जोतए गेलाह। ओही बीच हुनकर हरसॅं लागि एक स्वर्णक कलशमे सॅं एक दिव्य बालिका प्रकट भेलीह, जिनका राजा जनक आ’ हुनकर पत्नी सुनयना गोद लऽ लेलखिन। बालिकाक नाम सीता राखल गेल जकर अर्थ होइत अछि हर। देवी सीताक जानकी नाम सेहो पड़ल अछि।
किन्वदन्ति अछि जे सीताजी लक्ष्मी माताक अवतार देवी वेदवतीक पुनर्जन्म रूप छलीह। ऋषि कुषध्वजक पुत्री वेदवती परम सुन्दरी छलीह आ स्वयम्‌ केँ विष्णु देव केँ प्रति अर्पित कएने छलीह। अनेको राजासॅं आयल विवाहक प्रस्ताव अस्वीकृत कऽ दैत छलीह। अहि कारणसँ ओ अहंकारी रावण के सेहो मना कऽ देलन्हि जाहि द्वारे हुनका रावणक अत्याचार सहऽ पड़लन्हि।दुःखी भय वेदवती प्रतिज्ञा लेलन्हि जे ओ अपन पुनर्जन्ममे रावणक विनाशक कारण बनतीह आ स्वयम्‌केँ अग्निमे भष्म क’ लेलन्हि।एहि बीच मन्दोदरि गर्भवती भेलीह। अपन पतिक कुकृत्य दऽ सुनलाक बाद ओ’ अपन भावी संतानकेँ लऽ कऽ आशंकित भऽ गेलीह।ओ’ अपन नइहर गेलीह आ’ अपन माता पिताक संग तीर्थ करय लगलीह। जन्मक समय नजदीक अएला पर ओ’ अपन संतानक लेल आश्रय ताकए लगलीह। तखने संजोगसॅं संतानहीन राज जनकक खिस्सा सुनलन्हि आ’ समय पाबि अपन पुत्रीकँ राजाक पथमे नुकाबएमे सक्षम भऽ गेलीह।किछु लोक इहो कहैत छथि, जे संभवत: सीताजीक जन्मक बाद हुनका पानिमे बहा’ देल गेल छल आ’ संयोगसँ ओ’ जनकजीक खेत लग कात लगलीह।
कथा इहो प्रचलित अछि जे राक्षसक अत्याचारसॅं हताहत ऋषि मुनिक शोणित एक कलशमे एकत्रित कऽ भूमिमे गाड़ि देल गेल छल। बादमे ओहि कलशसॅं सीताजीक जन्म भेल। जन्मक पाछाँ खिस्सा चाहे जे होए उद्देश्य तऽ रावणक नाशे रहए। एकर सांकेतिक अर्थ यैह अछि जे ‘यत्र नार्येस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’। अर्थात्‌ जतए स्त्रीक आदर होइत अछि ततए देवताक निवास होइत अछि आ’ ओकर विपरीत स्त्रीक अपमान करनिहार दुखद अंत पाबैत छथि।
किछु लोक मानैत छथि जे सीताक जन्म फाल्गुन मासक कृष्ण पक्षक अष्टमी तिथिकेँ भेल छन्हि।
c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।

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