VIDEHA

विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8

In मैथिली, विदेह, First Maithili Language Blog, Ist Maithili Blog, maithili, videha on जुलाई 27, 2008 at 5:54 पूर्वाह्न

विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8

महत्त्वपूर्ण सूचना: (1) विस्मृत कवि स्व. रामजी चौधरी (1878-1952)पर शोध-लेख विदेहक पहिल अँकमे ई-प्रकाशित भेल छल।तकर बाद हुनकर पुत्र श्री दुर्गानन्द चौधरी, ग्राम-रुद्रपुर,थाना-अंधरा-ठाढ़ी, जिला-मधुबनी कविजीक अप्रकाशित पाण्डुलिपि विदेह कार्यालयकेँ डाकसँ विदेहमे प्रकाशनार्थ पठओलन्हि अछि। ई गोट-पचासेक पद्य विदेहमे अगिला अंकसँ धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित होयत।
महत्त्वपूर्ण सूचना: (2) मैथिलीक वरिष्ठ रचनाकार श्री गंगेश गुंजनजीक कविता अगिला अंकसँ (01 मई 2008) विदेहमे।
महत्त्वपूर्ण सूचना: (3) मैथिलीक वरिष्ठ कवि आ’ नाटककार श्री उदयनारायण सिंह ‘नचिकेता’ जीक नाटक ‘नो एंट्री :मा प्रविश’ 15 अपैल 2008 सँ ‘विदेह’ ई पत्रिकामे धारावाहिक रूपमे ई-प्रकाशित कएल जा’ रहल अछि।
महत्त्वपूर्ण सूचना:(4) ‘विदेह’ द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश आऽ ३.मिथिलाक्षरसँ देवनागरी पाण्डुलिपि लिप्यान्तरण-पञ्जी-प्रबन्ध डाटाबेश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत।१.मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश, २.अंग्रेजी-मैथिली शब्दकोश आऽ ३.पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आऽ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण) (तीनू पोथीक संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर , नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा)
महत्त्वपूर्ण सूचना:(5) ‘विदेह’ द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा’ रहल गजेन्द्र ठाकुरक ‘सहस्रबाढ़नि'(उपन्यास), ‘गल्प-गुच्छ'(कथा संग्रह) , ‘भालसरि’ (पद्य संग्रह), ‘बालानां कृते’, ‘एकाङ्की संग्रह’, ‘महाभारत’ ‘बुद्ध चरित’ (महाकाव्य)आऽ ‘यात्रा वृत्तांत’ विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद – कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आऽ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर
महत्त्वपूर्ण सूचना (6): महत्त्वपूर्ण सूचना: श्रीमान् नचिकेताजीक नाटक “नो एंट्री: मा प्रविश” केर ‘विदेह’ मे ई-प्रकाशित रूप देखि कए एकर प्रिंट रूपमे प्रकाशनक लेल ‘विदेह’ केर समक्ष “श्रुति प्रकाशन” केर प्रस्ताव आयल छल। श्री नचिकेता जी एकर प्रिंट रूप करबाक स्वीकृति दए देलन्हि। प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (ISBN NO.978-81-907729-0-7 मूल्य रु.१२५/- यू.एस. डॉलर ४०) आऽ पेपरबैक (ISBN No.978-81-907729-1-4 मूल्य रु. ७५/- यूएस.डॉलर २५/-) मे श्रुति प्रकाशन, १/७, द्वितीय तल, पटेल नगर (प.) नई दिल्ली-११०००८ द्वारा छापल गेल अछि। e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com website: http://www.shruti-publication.com
महत्त्वपूर्ण सूचना (7): “विदेह” केर २५म अंक १ जनवरी २००९, ई-प्रकाशित तँ होएबे करत, संगमे एकर प्रिंट संस्करण सेहो निकलत जाहिमे पुरान २४ अंकक चुनल रचना सम्मिलित कएल जाएत।

एहि अंकमे अछि:-15 अप्रैल 2008वर्ष 1 मास 4 अंक 8
1.मैथिली मंथन श्री गंगेश गुंजन
2.नो एंट्री: मा प्रविश श्री उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’
मैथिली साहित्यक सुप्रसिद्ध प्रयोगधर्मी नाटककार श्री नचिकेताजीक टटका नाटक, जे विगत 25 वर्षक मौनभंगक पश्चात् पाठकक सम्मुख प्रस्तुत भ’ रहल अछि।सर्वप्रथम विदेहमे एकरा धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित कएल जा रहल अछि।पढ़ू नाटकक प्रथम कल्लोलक पहिल खेप।
3. शोध लेख: मायानन्द मिश्रक इतिहास बोध (आगाँ)
4. उपन्यास सहस्रबाढ़नि – गजेन्द्र ठाकुर (आगाँ)
5. महाकाव्य महाभारत –गजेन्द्र ठाकुर(आगाँ) 6. कथा(भैयारी बिसरब नहि )-गजेन्द्र ठाकुर
7. पद्य ज्योति झा चौधरीक पद्य आधुनिक जीवन-दर्शन
गजेन्द्र ठाकुर- मिथिलाक ध्वज गीत
8. संस्कृत शिक्षा(आँगा)-गजेन्द्र ठाकुर
9. मिथिला कला(आँगा)
10. संगीत शिक्षा-गजेन्द्र ठाकुर 11. बालानां कृते- गजेन्द्र ठाकुर ज्योति पँजियार-लोकगाथा
12. पञ्जी प्रबंध –गजेन्द्र ठाकुर (आगाँ) पञ्जी-संग्राहक श्री विद्यानंद झा पञ्जीकार (प्रसिद्ध मोहनजी )
13. संस्कृत मिथिला बच्चा झा(भाग-3)
-गजेन्द्र ठाकुर
14.मैथिली भाषापाक –गजेन्द्र ठाकुर 15. रचना लेखन-गजेन्द्र ठाकुर(आगाँ)
16. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS . VIDEHA MITHILA TIRBHUKTI TIRHUT…
17.मिथिला आ’ मैथिलीसँ संबंधित किछु मुख्य साइट18. मिथिला रत्न19.मिथिलाक खोज

विदेह (दिनांक 15 अपैल 2008)
संपादकीय
वर्ष: 1 मास: 4 अंक:8

मान्यवर,
विदेहक नव अंक (अंक 8 दिनांक 15 अप्रैल 2008) ई पब्लिश भ’ रहल अछि। एहि हेतु लॉग ऑन करू http://www.videha.co.in |
एहि अंकमे नचिकेता अपन 25 सालक चुप्पी तोड़ि नो एंट्री: मा प्रविश नाटक मैथिलीक पाठकक समक्ष विदेह ई-पत्रिकाक माध्यमसँ पहुँचा रहल छथि।धारावाहिक रूँपे ई नाटक विदेहमे ई-प्रकाशित भ’ रहल अछि।
श्री गंगेश गुंजन जीक वैचारिक मंथन एहि बेर पाठकक समक्ष अछि। अगिला अंकसँ पाठक हुनकर कविताक वैचारिक रस ल’ सकताह।बालानां कृतेमे ज्योति पँजियारक लोकगाथा प्रस्तुत कएल गेल अछि। हमर कथा ‘भैयारी बिसरब नहि’ नव पीढ़ीक विजयक प्रति लगावकेँ दर्शा रहल अछि।शेष सभ स्तंभ वर्त्तमान अछि।
मिथिलाक रत्न स्तंभकेँ नाम आ’ वर्षसँ जतय तक संभव भ’ सकल विभूषित कएल गेल अछि। एकर परिवर्द्धनक हेतु सुझाव आमंत्रित अछि।
अपनेक रचना आ’ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे।वरिष्ठ रचनाकार अपन रचना हस्तलिखित रूपमे सेहो नीचाँ लिखल पता पर पठा सकैत छथि।
गजेन्द्र ठाकुर 15 अप्रैल 2008
389,पॉकेट-सी, सेक्टर-ए, बसन्तकुंज,नव देहली-110070.
फैक्स:011-41771725
http://www.videha.co.in
ggajendra@videha.co.in
ggajendra@yahoo.co.in

(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
२.संदेश
१.श्री प्रो. उदय नारायण सिंह “नचिकेता”- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल “विदेह” ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।
२.श्री डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह|
३.श्री रामाश्रय झा “रामरंग”- “अपना” मिथिलासँ संबंधित…विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।…शेष सभ कुशल अछि।
४.श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका “विदेह” केर लेल बाधाई आऽ शुभकामना स्वीकार करू।
५.श्री प्रफुल्लकुमार सिंह “मौन”- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका “विदेह” क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।
६.श्री डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि “विदेह”क सफलताक शुभकामना।
७.श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
८.श्री विजय ठाकुर, मिशिगन विश्वविद्यालय- “विदेह” पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।
९. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका ’विदेह’ क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आऽ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।
१०.श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका ’विदेह’ केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।
११.डॉ. श्री भीमनाथ झा- ’विदेह’ इन्टरनेट पर अछि तेँ ’विदेह’ नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।
१२.श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमर, जनकपुरधाम- “विदेह” ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत से विश्वास करी।
१३. श्री राजनन्दन लालदास- ’विदेह’ ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक एहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रि‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।
१४. डॉ. श्री प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका “विदेह” प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भ’ गेल।

  1. मान्यवर,
    1.अहाँकेँ सूचित करैत हर्ष भ’ रहल अछि, जे ‘विदेह’ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका http://www.videha.co.in/ पर ई-प्रकाशित भ’ रहल अछि। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ’ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ’ सातो दिन उपलब्ध होए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होए आ’ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ’ भौगोलिक दूरीक अंत भ’ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ’ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ’ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। पुरान अंक pdf स्वरूपमे डाउनलोड कएल जा सकैत अछि आ’ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ’ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
    2. अहाँ लोकनिसँ ‘विदेह’ लेल स्तरीय रचना सेहो आमंत्रित अछि। कृपया अपन रचनाक संग अपन फोटो सेहो अवश्य पठायब। अपन संक्षिप्त आत्मकथात्मक परिचय, अपन भाषामे, सेहो पठेबाक कष्ट करब, जाहिसँ पाठक रचनाक संग रचनाकारक परिचय, ताहि प्रकारसँ , सेहो प्राप्त कए सकथि।
    हमर ई-मेल संकेत अछि-
    ggajendra@videha.com

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: