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विदेह १५ अक्टूबर २००८ वर्ष १ मास १० अंक २०

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विदेह १५ अक्टूबर २००८ वर्ष १ मास १० अंक २०

विदेह १५ अक्टूबर २००८ वर्ष १ मास १० अंक २०

‘विदेह’ १५ अक्टूबर २००८ ( वर्ष १ मास १० अंक २० ) एहि अंकमे अछि:-
१.संपादकीय २.संदेश
३.मैथिली रिपोर्ताज- १. जितेन्द्र झा / २. प्रीति / ३. नवेन्दु कुमार झा
४.गद्य
४.१.कथा १.सुभाषचन्द्र यादव(अपन-अपन दुख) २. विभारानी (आऊ कनेक प्रेम करी माने बुझौअल जिनगीक)
४.२.१. रिस्क आऽ मैथिल- ब्रज कु. कर्ण २. कोना बचत मिथिलाक स्मिता?-ओमप्रकाश झा
४.३.१. महाप्रकाश श्री सुभाषचन्द्र यादव पर, २. जितेन्द्र झा सुश्री अंशुमालापर
४.४. १.जीवन झाक नाटकक सामाजिक विवर्तन- प्रेमशंकर सिंह (आगाँ) २.स्व. राजकमल चौधरी पर – डॉ. देवशंकर नवीन (आगाँ)
४.५. दैनिकी-ज्योति
५.पद्य
५.१.श्यामल सुमनक-अभियान
५.२.श्री गंगेश गुंजनक- राधा (पाँचम खेप)
५.३.डॉ पंकज पराशरक ४ टा कविता आऽ ज्योतिक कविता-पतझड़क आगमन
५.५.विनीत उत्पलक ५ गोट कविता
५.६. महेश मिश्र “विभूतिक” कविता गङ्गा-स्तुति

६. मिथिला कला-संगीत(आगाँ)
७.पाबनि-संस्कार-तीर्थ -प्रफुल्ल कुमार सिंह मौन- मिथिलांचलक शैव क्षेत्र/ आऽ दीयाबाती पर जितमोहन झा / नूतन झा
८. बालानां कृते-
१.प्रकाश झा- बाल कविता २. गांगोदेवीक भगता- गजेन्द्र ठाकुर ३. देवीजी: ज्योति झा चौधरी

९. भाषापाक रचना लेखन (आगाँ)
10. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS (Festivals of Mithila date-list)-
10.1. 1.Worn- out fifty paise coin- Maithili poem “Ghasal Athanni” by Late Sh. Kashikant Mishra Madhup 2. The Fundamentals-maithili short story “moolbhoot” by Sh. Taranand Viyogi
10.2.The Comet-English translation of Gajendra Thakur’s Maithili Novel Sahasrabadhani
11. VIDEHA MAITHILI SAMSKRIT EDUCATION(contd.)

विदेह (दिनांक १५ अक्टूबर २००८)
१.संपादकीय (वर्ष: १ मास:१० अंक:२०)
मान्यवर,
विदेहक नव अंक (अंक २०, दिनांक १५ अक्टूबर २००८) ई पब्लिश भऽ गेल अछि। एहि हेतु लॉग ऑन करू http://www.videha.co.in |

जीन मेरी गुस्ताव ली क्लाजियो (1940-)केँ एहि सालक साहित्यक ८ लाख १५ हजार पौंडक साहित्यक नोबल पुरस्कारसँ सम्मानित कएल जएबाक घोषणा भेल अछि। मानवतापर राज कए रहल सभ्यतासँ नीचाँ आऽ आगू जाऽ कए देखबाक प्रवृत्ति छन्हि क्लाजियोक। न्यू-डिपार्चर्स,पोएटिक एडवेंचर आ सेंसुअल एक्सटेसीक लेखक छथि क्लाजियो।

ली क्लाजियो मूलतः फ्रांसीसी भाषाक उपन्यासकार छथि, ओना हिनकर पिता अंग्रेज आऽ माता फ्रांसीसी छथिन्ह, दुनू गोटे मारीशससँ सम्बन्धित। आऽ क्लाजियो नाइजीरियाक समुद्री यात्रासँ नेनपनहिमे साहित्यिक जीवनक प्रारम्भ कएलन्हि। १९६३ ई. मे हिनकर पहिल उपन्यास प्रकाशित भेल जे आधुनिक समाजक प्रति एक तरहक विद्रोह छल। फ्रेंच लेखक सभमे क्लाजियो स्वीकृत नहि भऽ सकलाह आऽ एखन ओऽ न्यू मेक्सिकोमे रहैत छथि।

थर्ड वर्ल्डक नजरिसँ देखब हिनकर रचनाक एकटा विशिष्टता छन्हि। मारीशसक उपन्यासकार अभिमन्यु उनुथक आ ताहि क्रममे रामायणक चरचा सेहो क्लाजियो करैत छथि।

हिनकर पहिल उपन्यास ले-प्रोसेस-वर्बल- द इनटेरोगेशन (जांचक पूछताछ)१९६३ ई. मे आयल जे अस्तित्ववादक बादक समयक उपन्यास छल। दिन-प्रतिदिनक भाषणबाजीक बदला सत्याताकेँ देखबय बला शक्ति ओ शब्द सभकेँ देलन्हि। फेर आयल हुनकर दू टा कथा संग्रह ला-फीवर आ ला-देल्यूज, एहि दुनू संग्रहमे पाश्चात्य नगरक समस्या आ ओतुक्का डरक यथार्थ चित्रण भेल अछि।
टेरा-अमाटामे हुनकर पारस्थितिकी-तंत्रसँ जुड़ाव स्पष्ट अछि तँ डेजर्टसँ ओ उपन्यासकारक रूपमे स्थापित होइत छथि, एहिमे ओ उत्तर अफ्रीकाक लुप्त होइत संस्कृतिक चित्रण करैत छथि। क्लाजियो दार्शनिक लेख सेहो लिखने छथि आऽ बच्चा लोकनिक लेल लुलाबी सेहो। अमेरिकी साहित्य जाहि प्रकारेँ अनुवादसँ दूर आऽ अपनामे मग्न भऽ गेल अछि सैह कारण अछि फिलिप रॉथक एहि रेसमे हाइपक रूपमे शामिल होएबाक बावजूद पाछू छूटि जएबाक। अर्थशास्त्रमे अमेरिकाक मोनोपोलीक विपरीतक ई साहित्यक क्षेत्रक घटनाक्रम अछि।
एहि अंकमे:
श्री गगेतश गुंजन जीक गद्य-पद्य मिश्रित “राधा” जे कि मैथिली साहित्यक एकटा नव कीर्तिमान सिद्ध होएत, केर पाँचम खेप पढ़ू संगमे हुनकर विचार-टिप्पणी सेहो। सुभाष चन्द्र यादव आऽ विभा रानी जीक कथा, महेश मिश्र “विभूति”-श्री पंकज पराशर- विनीत उत्पल- श्यामल जीक पद्य आऽ प्रेमशंकर सिंह, मौनजी, जितमोहन, प्रकाश झा, ओमप्रकाश जीक रचना सेहो ई-प्रकाशित कएल गेल अछि।
श्री राजकमल चौधरीक रचनाक विवेचन कए रहल छथि श्री देवशंकर नवीन जी। सुभाषचन्द्र यादव जी पर श्री महाप्रकाश लिखि रहल छथि। जितेन्द्र झा, नवेन्दु आ प्रीतिक रिपोर्ताज छन्हि तँ युवा प्रतिभा अंशुमालाक विषयमे लिखने छथि जितेन्द्र।
ज्योतिजी पद्य, बालानांकृते केर देवीजी शृंखला, बालानांकृते लेल चित्रकला आऽ सहस्रबाढ़निक अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत कएने छथि।
मधुप जीक “घसल अठन्नी” आऽ तारानन्द वियोगी जीक “मूलभूत” केर अग्रे जी अनुवाद सेहो प्रस्तुत कएल गेल अछि।
“विदेह” केँ एखन धरि (१ जनवरी २००८ सँ १२ अक्टूबर २००८) ५९ देशसँ ८५,२०१ बेर देखल गेल अछि (गूगल एनेलेटिक्स डाटा)- धन्यवाद पाठकगण।
शेष स्थायी स्तंभ यथावत अछि।
अपनेक रचना आऽ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे।
गजेन्द्र ठाकुर

ggajendra@videha.co.in ggajendra@yahoo.co.
२.संदेश
१.श्री प्रो. उदय नारायण सिंह “नचिकेता”- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल “विदेह” ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।
२.श्री डॉ. गंगेश गुंजन- “विदेह” ई जर्नल देखल। सूचना प्रौद्योगिकी केर उपयोग मैथिलीक हेतु कएल ई स्तुत्य प्रयास अछि। देवनागरीमे टाइप करबामे एहि ६५ वर्षक उमरिमे कष्ट होइत अछि, देवनागरी टाइप करबामे मदति देनाइ सम्पादक, “विदेह” केर सेहो दायित्व।
३.श्री रामाश्रय झा “रामरंग”- “अपना” मिथिलासँ संबंधित…विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।…शेष सभ कुशल अछि।
४.श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका “विदेह” केर लेल बाधाई आऽ शुभकामना स्वीकार करू।
५.श्री प्रफुल्लकुमार सिंह “मौन”- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका “विदेह” क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।
६.श्री डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि “विदेह”क सफलताक शुभकामना।
७.श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
८.श्री विजय ठाकुर, मिशिगन विश्वविद्यालय- “विदेह” पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।
९. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका ’विदेह’ क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आऽ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।
१०.श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका ’विदेह’ केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।
११.डॉ. श्री भीमनाथ झा- ’विदेह’ इन्टरनेट पर अछि तेँ ’विदेह’ नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।
१२.श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमर, जनकपुरधाम- “विदेह” ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत से विश्वास करी।
१३. श्री राजनन्दन लालदास- ’विदेह’ ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक एहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रि‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।
१४. डॉ. श्री प्रेमशंकर सिंह- “विदेह”क निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी।
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आऽ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
महत्त्वपूर्ण सूचना (१):महत्त्वपूर्ण सूचना: श्रीमान् नचिकेताजीक नाटक “नो एंट्री: मा प्रविश” केर ‘विदेह’ मे ई-प्रकाशित रूप देखि कए एकर प्रिंट रूपमे प्रकाशनक लेल ‘विदेह’ केर समक्ष “श्रुति प्रकाशन” केर प्रस्ताव आयल छल। श्री नचिकेता जी एकर प्रिंट रूप करबाक स्वीकृति दए देलन्हि। प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (ISBN NO.978-81-907729-0-7 मूल्य रु.१२५/- यू.एस. डॉलर ४०) आऽ पेपरबैक (ISBN No.978-81-907729-1-4 मूल्य रु. ७५/- यूएस.डॉलर २५/-) मे श्रुति प्रकाशन, १/७, द्वितीय तल, पटेल नगर (प.) नई दिल्ली-११०००८ द्वारा छापल गेल अछि। e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com website: http://www.shruti-publication.com
महत्त्वपूर्ण सूचना:(२) ‘विदेह’ द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश आऽ ३.मिथिलाक्षरसँ देवनागरी पाण्डुलिपि लिप्यान्तरण-पञ्जी-प्रबन्ध डाटाबेश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत।
महत्त्वपूर्ण सूचना:(३) ‘विदेह’ द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा’ रहल गजेन्द्र ठाकुरक ‘सहस्रबाढ़नि'(उपन्यास), ‘गल्प-गुच्छ'(कथा संग्रह) , ‘भालसरि’ (पद्य संग्रह), ‘बालानां कृते’, ‘एकाङ्की संग्रह’, ‘महाभारत’ ‘बुद्ध चरित’ (महाकाव्य)आऽ ‘यात्रा वृत्तांत’ विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे प्रकाशित होएत। प्रकाशकक, प्रकाशन तिथिक, पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत।
महत्त्वपूर्ण सूचना (४): “विदेह” केर २५म अंक १ जनवरी २००९, ई-प्रकाशित तँ होएबे करत, संगमे एकर प्रिंट संस्करण सेहो निकलत जाहिमे पुरान २४ अंकक चुनल रचना सम्मिलित कएल जाएत।
महत्वपूर्ण सूचना (५): १५-१६ सितम्बर २००८ केँ इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, मान सिंह रोड नई दिल्लीमे होअयबला बिहार महोत्सवक आयोजन बाढ़िक कारण अनिश्चितकाल लेल स्थगित कए देल गेल अछि।
मैलोरंग अपन सांस्कृतिक कार्यक्रमकेँ बाढ़िकेँ देखैत अगिला सूचना धरि स्थगित कए देलक अछि।
रिपोर्ताज- १. जितेन्द्र झा / २. प्रीति / ३. नवेन्दु कुमार झा

१. जितेन्द्र झा (साल भरिक लेखा-जोखा)
मधेशी श्रमिक फ़ोरम शुक्र दिनसं नेपालमे एकमात्र रेलवे सर्विसकेँ बंद केलक अछि। ई रेलवे सर्विस नेपालमे जनकपुरसं भारतके जयनगर तक चलइत छई। मधेशी श्रमिक फ़ोरम अपन सात सूत्री मांग पूरा करय के ल क एहि रेलवे सर्विस के बंद करय के फैसला केलक अछि। गौरतलब छई जे मधेशी श्रमिक फ़ोरम रेलवे ईकाई द्वारा अपन सात सूत्री मांग के ल क पछिला 30 अक्टूबर क मुसाफ़िरखाना मे सेहो धर्ना पर बैसल छलाह संगहि महा प्रबन्धक कार्यालय घेराव कयने छलाह।
पूर्वांचल के उधोग व्यवसायी सब वर्षो स भारतक जोगवनी धरि रेलवे परिचालनक आवश्यकता महसूस करैत छलाह। हुनकर सबहक ई इच्छा अगिला मार्च महिनामे पूरा भऽ जायत जखन भारतक जोगवनी धरि ब्राडगेज रेल सेवा शुरु होयत। विराटनगर सँ जोड़ि जोगबनि धरि ब्राडगेज रेलसेवा चालू भेला के बाद आयात-निर्यात व्यापार ढोनाई खर्च सस्ता भेला सँ पूर्वांचलक उधोग व्यवसायी केँ बहुत फ़ायदा होयतन्हि।
बारा के पत्रकार बीरेन्द्र साहक अपहरण लेल गठित संसदीय छानबीन समिति अपन प्रतिवेदन सभामुख सुभाष नेबांग के सौंपि देलक अछि। प्रतिवेदनमे पत्रकारक अपहरणमे माओवादी के जिम्मेवार मानल गेल अछि। समिति अपन प्रतिवेदनमे कानूनक अनुसार दोषी पर कारवाई कराबक सिफारिश कएलक अछि। गौरतलब छई जे वृहस्पतिक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सेहो बतेने छल जे बाराक पत्रकार बिरेन्द्र साहक अपहरण नेकपा माओवादी द्वारा कैल गेल अछि।
सरकार के कहब छैक जे माओवादी द्वारा अपहरित पत्रकार बिरेन्द्र साहक अवस्थाक बारेमे किछु महत्वपूर्ण सूचना भेटल अछि मगर ओकरा तत्काल सार्वजनिक नहि कयल जायत। व्यवस्थापिका संसदक महिला समूहक बैठकमे गृह मंत्रालयक सचिव उमेश प्रसाद मैनाली कहलनि जे पत्रकार साह केँ ताकबा लेल सरकार हर संभव प्रयास कऽ रहल अछि आ अपहरणक आशंका मे चारि गोटा के पकड़ल गेल अछि। संगहि बैठकमे पेट्रोलियम पदार्थक मूल्यवृद्धिक बारेमे उधोग वाणिज्य आ आपुर्ति मंत्रालयक अधिकारी के कहब छलनि जे मूल्यवृद्धि बाध्यात्मक अवस्थामे कयल गेल। गृह और उधोग दूनू मंत्रालयक कार्यभार सम्भारिनिहार कृष्ण प्रसाद सिटौला~केँ सेहो बैठकमे बजाओल गेल छलन्हि मुदा राजनीतिक व्यस्तताक चलते ओ नहि आबि सकलाह।
अंतरिम व्यवस्थापिका संसदक विशेष अधिवेशन~केँ सकारात्मक ढंगसं संपन्न करबा लेल शीर्ष नेताक बीच विचार विमर्श चलि रहल अछि।
अंतरिम व्यवस्थापिका संसदक विशेष अधिवेषनकेँ सकारात्मक ढंगसँ संपन्न करबा लेल शीर्ष नेताक बीच विचार विमर्श संपन्ना भऽ गेल।
मोटरसाइकिल दुर्घटनामे परल पत्रकार रोशन कर्णक उपचारक क्रम मे वृहस्पति दिन भोरे पटनामे निधन भ गेल अछि। 29 वर्षीय कर्णक कार्तिक 3 गते के राति सिर्सिया मे मोटरसाइकिल दुर्घटना भऽ गेल छलनि। उपचारक लेल भारतक बिहार राज्यक सीतामढीसं पटना गेल रहथि। जनकपुरक स्थानीय एफ एम आ स्थानीय पत्रिका मे ओ काज करैत आएल रहथि। पत्रकारिता विकास प्रतिष्ठान एकटा प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित कऽ कय पत्रकार कर्णक असामयिक निधन प्रति शोक प्रकट कएलक अछि।

कपिलवस्तु घटनाक पीड़ित सभ अपन मांग केँ पूरा करवाबए लेल सरकार द्वारा ध्यान नहि देबाक कारणे काल्हि सँ महेन्द्र राजमार्ग बंद करबाक चेतावनी देने छथि। ओ सभ अइ घटनाक मृतककेँ शहीद घोषित करबाक. मृतकक परिवार केँ उचित क्षतिपूर्ति देबाक आ विस्थापित केँ पुर्नस्थापना आ दोषीक उपर कारवाई जेहन पाँच सूत्री माँग रखने छथि। घटनाक पीड़ित सभ असोज बारह गते~केँ सरकारकेँ पत्र लिखि अपन माँग रखने छलाह। गत भादव तीस गते~केँ अज्ञात समूह द्वारा कपिलवस्तुक मोइद खाँक हत्या कयलाक बाद ओतय भेल हिंसात्मक घटनामे दू दर्जन आदमीक जान गेल छल। घटनामे सौओ घरमे आगजनी लूटपाट आ तोड़फ़ोड़ सँ करोड़ो रुपयाक क्षति भेल छल। एखन तक हजारो लोक सभ विस्थापित भेल छथि।
बीरगंजमे वृहस्पतिकेँ भेल बम विस्फोटक जिम्मा दोश्रो जनतांत्रिक तराई मुक्ति मोर्चा लेलक अछि। दोश्रो मोर्चा के कार्यकर्ता सभ बीरगंज कुकर बम विस्फोट केलक, ई जानकारी दोश्रो मोर्चाक प्रमुख विस्फोट सिंह टेलीफोनसं जानकारी देलथि।
सर्लाही बरहथवा बजारमे सांझमे एक आदमीक गोली मारि कय घायल कऽ देल गेल। बरहथवा बजारमे किरानाक समान बेचए आओल बरहथवा वार्ड नंबर 8 घर रहल 40 वर्षीय वीरेन्द्र साह केँ बजारे~मे सांझ साढे 6 बजे गोली मारल गेल प्रहरी जनौलक अछि। घटनामे संलग्न रहल आशंकामे प्रहरी एक गोटे के पकडबाक संगहि पेस्तोल सेहो बरामद कएलक अछि। एहि तरहे बरहथवामे बितल सप्ताह तीन दिनक अंतरमे दू गोटेक हत्या भऽ चुकल अछि।
भारतीय दूतावासक सहयोगसँ पाँच महिना पहिने निर्माण भेल झापाक भद्रपुर स्थित सुविधा समपन्न प्रसुति गृह अखन तक संचालित नहि भऽ सकल अछि। करीब सत्तर लाखक लागत सँ बनल ई हास्पिटल चिकित्सक अभावमे नहि चलि रहल अछि।
पाकिस्तानक सूबा सरहदक स्वात घाटीमे चरमपंथी आ सुरक्षाबलक बीच घमासान जारी अछि। वृहस्पति केँ सेना दिस सं 70 टा चरमपंथी केँ मारय के दावा करय के बाद चरमपंथीक दिस सं दावा कएल गेल छई जे ओ 40 टा सैनिक केँ बंदी बना लेने छई। चरमपंथी किछु सुरक्षाकर्मी के मारय के बात सेहो कहलक अछि। वृहस्पतिक राति भरि स्वातक विभिन्न इलाकामे गोलीबारीक आवाज आबइत रहलई मुदा कोनो बडका कारवाई के खबरि नहि अछि। दूनू ओर सं ई कारवाई दू दिन पहिने भेल अनाधिकारिक संघर्ष विराम के बाद भेलैया।
पश्चिमी तैवानमे एकटा गैरकानूनी तरीका सँ चलि रहल पटाखा फ़ैक्ट्रीमे आगि लागि गेल जाहि सँ चारि गोटे मारल गेल आर छह लोग घायल भऽ गेल। ई धमाका हाउलोंग शहरमे भेल अछि। धमाकाक बाद छोट-छोट कै टा विस्फ़ोट भेल। धमाका सँ आसपासक बिल्डिंगक शिशा सभ सेहो टुटि गेल। ई पटाखा फ़ैक्ट्री जतय अवस्थित अछि ओतय चारु तरफ़ धानक खेत होय के कारण बचाव काजमे काफ़ी दिक्कत भऽ रहल छल। स्थानीय वासिन्दा सभ के कहब अछि जे विस्फ़ोट सँ पहिले ई फ़ैक्ट्री मे कि बनैत अछि एकर जानकारी हुनका सभ के नहि छलनि। एखन तक अहि बातक जानकारी नहि भेटल अछि जे अहि विस्फ़ोटक की कारण छल। एखन तक प्रशासन आर जाँच आयोग सँ अहि बातक जानकारी नहि भेटल अछि जे ई विस्फ़ोट स्वनियोजित तँ नहि ने छल।
ओना तँ घरमे गाए या महीषक बच्चा भेलासं ओकर पालनकर्ता व्यक्ति खुश होइत छथि। एनाहिते भैरहवामे सेहो एकटा कृषकक घर मे महीष , एकटा नहि बल्कि जुडवा बच्चा देलक मुदा दूनू बच्चा केँ पाडा रहबाक कारणे महीषक मालिक वासुदेव यादव दुखी छथि।
भैरहवा मे ” नया बेंजिग नया ओल्मपिक” नामक चीनक फ़ोटो प्रदर्शनी शुरु भेल अछि। चीनक राजदूत चंग सियांगलिन एहि फ़ोटो प्रदर्शनीक उद्घाटन केलनि। एहि अवसर पर चीनक राजदुत कहलनि जे आदिए काल सँ चीन नेपालक हित प्रगति आ उन्नति देखय चाहैत अछि। सिद्धार्थनगर नगरपालिकाक सभाकक्षमे आयोजित एहि प्रदर्शनीमे 79 टा फ़ोटो राखल गेल अछि। प्रदर्शनीमे 2008 मे चीनक बेजिंगमे आयोजित होयवाला ओलम्पिक खेलकूद लेल ओत्तहि भऽ रहल विभिन्न गतिविधिक जानकारी फ़ोटो द्वारा देबाक प्रयास कयल गेल अछि। ई नेपाल चीन मैत्री समाज लुम्बिनी द्वारा आयोजित ई प्रदर्शनी शनि दिन धरि चलत।
प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला गणतंत्र आ समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली के बारे मे संसद सं होबय बला निर्णय के प्रजातांत्रिक हेबाक बात कहलाह। काठमांडूमे महिला पत्रकार सभहक राष्ट्रीय सम्मेलन के संबोधित करैत प्रधानमंत्री कोइराला संसद के निर्णय के प्रजातांत्रिक प्रक्रिया द्वारा मजबूत बनेबाक विश्र्वास व्यक्त कयलाह। प्रधानमंत्री कोइराला विभिन्न क्षेत्र सं प्रेस के उपर होबय बला दमनक चर्चा करैत सरकार के अई तरहक प्रवृति नहि सहबाक बात सेहो कहलाह। ओ कहलाह जे संसद द्वारा संविधानक तिथिक घोषणा होयत।
नेकपा माओवादी के कार्यकर्ता सब नुवाकोट काँग्रेसक कार्यकर्ता के वृहस्पति दिन अपहरण केला के बाद मारि पीट के छोड़ि देलक। नुवाकोट काँग्रेसक कार्यकर्ता रामकुमार धिमिरे के माओवादी कार्यकर्ता स्थानीय विकास मंत्रालय सँ अपहरण कएने छल। रामकुमार धिमिरेक कहब छैक जे नुवाकोट ओखरपौवा चारि के सार्वजनिक जमीन कोनो खास व्यक्त्तिक नाम पर अहि करय देबाक दुश्मनी मे हुनका पर आक्रमण कयल गेल छलन्हि। ओहि सार्वजनिक जमीन के अपना नाम पर करय चाहिनिहार राममणि धिमिरे आ माओवादी कार्यकर्ता नवराज दुंग़ाना आदि पर आरोप लगबैत ओ कहलनि जे YCL कार्यालय लऽ जा कऽ हमरा मारल -पीटल गेल। धिमिरे पर भेल माओवादीक ज्यादती के विरोधमे आई बालाजुमे प्रदर्शन कयल गेल।
नेपाली महिला उध्मी सभ द्वारा तैयार कयल गेल समान केँ बाजार भेटलाक बाद आब महिला उधमी सभ अलग सँ औधोगिक क्षेत्रमे उतरऽ के सोच बना रहल छथि। नेपाल उध्मी महासंघक नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रमिला रिजाल महासंघ के पन्द्रह महिना पहिले संचालन मे आनि, सार्क महिला क्राफ्ट भिजेल द्वारा महिला उध्मी सभ सेहो अंतर्राष्ट्रीय बाजारमे जा सकैत छथि एकरा प्रमाणित केली।
पैसा के अभावमे उपचारक लेल शहर नहि जा बिमारी दबेनाई अधिकांश ग्रामीणक बाध्यता अछि। मुदा आब घर आँगनमे डाक्टर के ऐला सँ ऐहन लोक सभ राहत महसूस कऽ रहल छथि। पर्वत के दुर्गम फ़लेबास खानी गाँवमे आयोजित निशुल्क स्वास्थय शिविरमे दू हजार सँ बेसी लोक उपचार करा चुकलाह।
नेपाल स्थित राष्ट्रसंघीय मिशन अनमिन प्रमुख इयान मार्टिन अनमिनक कार्य अवधि बढेबाक लेल प्रधानमंत्री समेत सम्बन्धित पक्ष संग विचार विमर्श करताह। राष्ट्रसंघीय सुरक्षा परिषद के बैठक सँ वापस अएला के बाद मार्टिन कहला जे पूस महिना के मध्यमे अनमिन के कार्यकाल खत्म भेला के बादो समया अवधि बढेबाक लेल राष्ट्रसंघीय सुरक्षा परिषद इच्छुक अछि। ओ कहलनि जे नेपाल मे शान्ति प्रक्रिया के आंगा बढेबाक लेल राष्ट्रसंघीय महासचिव बन की मून, प्रतिबद्ध छथि।
नेकपा माओवादी के भातृ संगठन YCL विघटित राजपरिषद के सदस्य द्वारिकामान सिंह प्रधान के मारी पीट कऽ अपहरण कऽ लेलक अछि। पचास-साठि के समूहमे आयल YCL कार्यकर्ता जनहित नागरिक समाजक श्यामकृष्ण मास्के के घर सँ हुनक अपहरण केलकन्हि। चैत्य स्तूप के जीर्णोद्धार करबा लेल दोलखा के भेल मीटिंग के बाद ओ मास्के के घरमे रुकि गेल छलाह। इटालियन चैत्य स्तूप नामक संस्था के सहयोग सँ दोलखा के पुरान चैत्य स्तूपक जीर्णोद्धार करबाक टोली संग दोलखा पहुँचल सिंह पर दरबारक नाम पर सामाजिक काज करबा के आरोपमे YCL हुनकर अपहरण केने अछि। YCL कार्यकर्ता द्वारा तैयार दरबारिया अपराधी के सूचिमे सिंहक नाम सब सँ उपर होयबाक कारणे पूर्व योजना के तहत हुनक अपहरण कयल गेल।
माओवादी द्वारा सिरहा मे आयोजित अनिश्चितकालीन बंद आई सं वापस ल लेल गेल अछि। अपन दू जिला स्तरीय नेता के गिरफतार केलाक विरोध मे मंसिर 4 गते सं माओवादी बंदक आहवाहन केने छल। बंदक कारणे पूर्व पश्चिम राजमार्ग के लहान खंड मे सवारी साधन के अवरूध्द भेला सं ह.जारो यात्री के भारी असुविधा भ गेल रहनि।
सिरहा मे माओवादी द्वारा अपिश्चितकालीन बंद वापस करिते रौतहट के माओवादी सेहो बंद वापस करबाक घोषणा क देलनि। आई स्थानीय प्रशासन आ माओवादी जिला कमिटि केबीच भेल सहमति के बाद बंद वापसी के घोषणा कएल गेल।
राजमार्ग आ सहायक राजमार्ग पर बंद हड़ताल नहि करबाक कानूनक बादो एकर कार्यान्वयन नहि भेला सं यातायात मजदूर नाराज छथि। हुनका सभहक द्वारा राजमार्ग मे अवरोध आ यातायात साधन पर हमला आ अगिलगी जारी रहला सं जानक खतरा पर ध्यान दियाबैत सरकार सं हस्तक्षेप करबाक मांग कएल गेल अछि।
अपराधी आ भूमिगत समूह द्वारा फोनक मार्फत चंदा के नाम पर पैसा मांगबा आ नहि देला पर जान सं मारबाक धमकी भेटलाक बादो प्रशासनक लापरवाही के विरोध मे आंदोलन पर उतरल बीरगंजक सोना चानी व्यवसायी आई टायरा जरा अपन विरोध प्रदर्शित केलनि। व्यवसायी के कहब छन्हि जे प्रशासन के बेर बेर आग्रह करेलाक बादो मामला के गंभीरता के प्रति प्रशासन के धियान नहि देला सं हमरा सबके ई कदम उठाबई पड़ल अछि।
भरदुतिया के दिन सं शुरू भेल भए बहिन के स्नेह के पाबइन के रूप मे प्रख्यात पावइन सामा चकेबा संपन्न भेल। मधेशक बहिन बेटी सब द्वारा बड़ महत्वक संग माइटक मूर्ति के आई धइर पूजा क क सामा के भंसाओल गेल। तराई के थारू समाजक महिला सब सामा पावइन के बड़ धूमधाम के संग मनाओल करै छइथ। अपन अपन गाम सं काठमांडू मे आइब क रहि रहल थारू महिला समाज आ मैथिल महिला समाज आई हटले कार्यक्रम के आयोलना क क सामा पर्व काठमांडू मे मनौलक अछि।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन जनकपुर गंगासागर,अरगजा पोखरि दशरथ तलाउ लगायतक पोखरि सभ नेपाल आ भारतक विभिन्न स्थान सं आयल श्रध्दालु भक्तजन सभ स्नान क जानकी मंदिर, राम मंदिर, जनक मंदिर आ दर्शन आ पूजापाठ कैलथि। कार्तिक स्नान कैल सं भूतप्रेत डायन जोगैनि सं होबई बला कष्ट सं मुक्ति हेबाक विश्र्वास अछि। तहिना प्रत्येक साल जंका धनुषा आ सिरहा सीमा पर रहल कमला नदी तट पर हजारो डायन आ धामी मेला लागल छल। एहि मेला के भूत मेला के नाम सं सेहो जानल जाइत अछि। एहि बेर 10 ह.जार सं बेसी धामी सभहक सहभागिता रहल बात जनाओल गेल अछि। मेला मे नेपाल के धनुषा, महोत्तरी, सिरहा आ सर्लाही लगायत के विभिन्न जिला एवं भारत के मधुबनी आ दरभंगा जिला के धामी, डायन, जोगिन आ श्रध्दालु भक्तजन के सहभागिता रहल बात कमला मेला आयोजक समिति जनौलक अछि। आधुनिक युग मे जत कानूनी रूप मे डायन के आरोप लगौनाई अपराध मानल जाइत अछि त प्रत्येक साल लागैय बला ई मेला विज्ञान आ कानून दुनु के चुनौती बनल अछि।
कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सं जनकपुरक जानकी मंदिर के प्रांगन मे श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ पुर्णाहुति के बाद संपन्न भेल अछि। समापन के अवसर मे जनकपुर मे शोभा यात्रा मे नेपाल आ भारत के विभिन्न स्थान सं आएल साधु संत, बुध्दीजीवी एवं समाजसेवी सभहक अपार सहभागिता छलै।
झापा जिला के महिला जिनका ईलाजक लेल भारत या धरान आ विराटनगर जाए पड़ैत छलन्हि हुनक समस्या के अस्थायी समाधान भेल अछि। भद्रपुरक मेची अंचल अस्पताल मे प्रसूति डाक्टरक व्यवस्था रहलाक बादो डाक्टर उपलब्ध नहि छलथि। मुदा आब स्वास्थ्य मंत्रालय एक महीना लेल डाक्टर मिथिला शर्मा के ओहिठाम पठा क अस्थायी समाधान केलक अछि। अस्पताल मे महिला डाक्टर के एला सं प्रसूति मरीज के अस्पताल मे भीड़ शुरू भेल अछि। भारतीय दूतावास द्वारा 2 करोड़ 74 लाख रूपैया के लागत सं 25 सैया के सुविधा संपन्न भवनक निमार्णक बादो डाक्टरक अभाव मे ई अस्पताल बेहाल अछि।
चूल्हा पर भानस क अपना परिवार के खुएनाइ, अपन बाल बच्चा के पोसनाई एवं पालनाई आ अपन घरक देखभाल करैत अपन जीवन बितौनिहार अधिकांश मधेश मे रहि रहल मधेशी महिला के दिनचर्या अइछ। मुदा आब किछु दिन सं विभिन्न संघ संस्था के प्रयासक बाद, मधेशक महिला सब सेहो अपन आ अपना परिवार के बारे मे सोचबाक लेल सजग भ रहल छइथ। गाम गाम मे चलाओल जा रहल बचत समूह मे नियमित रूप मे उपस्थित हेबाक एकटा प्रमुख काज भ गेल छइन्ह हुनका सबके।
पूर्वांचल के प्रमुख व्यापारिक केन्द्र झापा के बिर्तामोड़ शहर गंदगी साफ करबा लेल स्थानीय लोक जागरूक नहि अछि आ नहिए स्थानीय निकाय सेहो क्रियाशील अछि। एहन स्थिति मे एक सामाजिक संस्था द्वारा बिर्तामोड़क साफ सफाई शुरू कएल गेल अछि।
बारा नीजगढ़ स्थित पूर्व पश्चिम राजमार्ग पर ट्रक मे बस ठोकर मारि देलक। जाहि मे बसक ड्राइवर समेत आठ गोटे घायल भ गेलाह। घायल सब मे सं बस चालक सिंधुली के तारा तामांग, हेल्पर दिपेश आचार्य आ एक टा अंजान यात्री के हालत गंभीर छन्हि। हुनकर सबहक उपचार बीरगंज के नारायण क्षेत्रीय अस्पताल मे भ रहल छन्हि।
पर्सा के सेढ़वा सं तीन ह.जार किलोग्राम गांजा सशस्त्र प्रहरी बल क्षेत्र नबंर पांचक टोली बरामद केलक अछि। चेकजांच के क्रम मे शुक्र के राति संढ़वा जाइत समय सशस्त्र के टोली के देखला के बाद गांजा लोड क रहल लोक सब भगि गेल। प्रहरी के शंका भेला पर जांचक पश्चात भारी मात्रा मे गांजा बरामद केलक। सीमा सुरक्षा बल के प्रमुख सशस्त्र प्रहरी उपरीक्षक कमान सिंह जानकारी देलनि जे घटनास्थल सं एक थान नलकटुवा बंदूक सेहो पड़ल छल।
भारतीय राजदूत शिवशंकर मुर्खजी दावी केलनि अछि जे तराई क्षेत्र मे भ रहल आपराधिक गतिविधि मे भारतीय समूहक कोनो संलग्नता नहि अछि। प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला द्वारा सीमा पार सं आबई बला अपराधी सब नेपाली सशस्त्र समूह संग मिल क तराई मे हिंसा मचेबाक अभिव्यक्ति देलाक तुरंते बाद भारतीय राजदूत मुखर्जी एहि तरहक वक्तव्य देलनि। दूतावास के सहयोग सं संचालित योजना सब के निरीक्षण के लेल भोजपुर पंहुचल भारतीय राजदूत तराई हिंसा मे भारतीय तत्वक संलग्नता नहि रहबाक बात कहलनि। ओ कहलनि जे नेपाल जे अखन आंतरिक समस्या के सामना क रहल अछि, ओकर सामाधान मे सरकार के सहयोग करबाक लेल भारत तत्पर अछि।
पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर मे भेल दू टा विस्फोट मे कम सं कम 35 लोक के मारई जाए के ख़बर छई। दूनू विस्फोट सैन्य ठिकाना के निशाना बना क कएल गेलई। पहिल विस्फोट सेना के छावनी के बाहर एकटा नाका पर आत्मघाती हमलवार केलकै। एहि मे सेना के एकटा जवान मारल गेलई। दोसर विस्फोट सेना के मुख्यालय के बाहर तखन भेलई जखन सेना के कर्मचारी के ल जा रहल एकटा बस के पाछां कार ल जा क ओहि मे विस्फोट क देल गेलई। तीन महीना मे ई तेसर बेर छई जखन सेना के मुख्यालय पर हमला कएल गेल छई। एहि हमला के .जिम्मेदारी कियौ नहि लेलक अछि। अधिकारी शक .जाहिर केलक अछि जे इ हमला तालेबान समर्थक चरमपंथी केने हेतई। हुनक मानब छई जे तालेबान समर्थक सेना के ओहि कारवाई के बदला लेबई के कोशिश क रहल छई जे ओ उत्तर पश्चिमी प्रांत मे क रहल छई। हालक महीना मे पाकिस्तान मे कतेको बड़का आत्मघाती हमला भेलया। कराची मे एक टा बड़का विस्फोट मे कम सं कम 135 लोक के जान गेल रहई।
पूर्व प्रधानमंत्री नवा.ज शरीफ घोषणा केलैथ जे ओ रविवार यानी 25 नबंबर क लाहौर वापस लौटताह। नवा.ज शरीफ के राजनीतिज्ञ भाए शाहबा.ज शरीफ लंदन सं एहि ख़बर के पुष्टि केलैथ। दूनू भाए एकै संग पाकिस्तान पंहुचई बला छइथ। ओना अखन ई तय नई छई जे पाकिस्तान मुस्लिम लीग जनवरी मे होभई वला चुनाव मे हिस्सा लेताह कि नहि। गौरतलब छई जे नवा.ज शरीफ पछिला 10 नबंबर क पाकिस्तान लौटल छलाह मुदा हुनका सउदी अरब भेज देल गेल रहई। मु दा किछु दिन पहिने पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट हुनका स्वदेश लौटई के अनुमति द देने रहई। 1999 मे नवा.ज शरीफ के तख्ता पलटि देल गेल रहई। आ अगिला साल हुनका पाकिस्तान सं निर्वासित क देल गेल रहई।
पूर्व प्रधानमंत्री आ नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेर बहादुर देउबा गणतंत्रक मुख्य बाधक हेबाक आरोप नेकपा माओवादी पर लगेलनि अछि। ओ मंसिर छह गते क निर्धारित कएल गेल संविधान सभा चुनाव नहि हेबई देबाक आ माओवादी द्वारा गणतंत्र के आयु बढ़ेबाक आरोप लगेलनि।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर के कहब छन्हि जे अहि ठामक अधिकांश राजनीतिक दल आ समुदाय त गणतंत्रक पक्ष मे अछि मुदा अहि लेल वैधानिक तरीक़ा स्थापित करई पडत। प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला संग भेंट मे कार्टर हुनका जल्दी सं जल्दी संविधान सभा के निर्वाचन करबाक सुझाव देलखिन। प्रधानमंत्री के विदेश मामला संबंधी सलाहकार आदित्य बराल के अनुसार प्रधानमंत्री कार्टर के स्वयंम संविधान सभा के चुनाव लेल आतुर आ चुनाव के बाद गणतंत्र संबंधी निर्णय लेबाक बात कहलखिन।
अमेरिकी पूर्व राद्वट्रपति जिम्मी कार्टर राजनीतिक दल आ सरकार के सुझाव देलखिन अछि जे राजनीतिक गतिरोध के समाप्त क 2064 साल के भीतरे संविधान सभा के चुनाव करा क नेपाल मे दीर्घ शान्ति के स्थापना करथि। कार्टर कहलनि जे नेपालक माओवादी सं संबंध सुधारबाक लेल ओ अमेरिकी सरकार सं बात करताह।
चीन के थाई जार्जस डैम सोर्ड के नजदीक भेल भूस्खलन मे एकटा बस के चपेट मे एला सं ओहि मे सवार 31 लोकक मौत भ गेलई। भूस्खलन के घटना मंगलवार क भेलई आ ओहि के तीन दिन बाद इ बस भेटलई। भूस्खलन के समय बस मे 31 लोक सवार रहइथ। अधिकारी के मुताबिक दुघर्टना के तीन दिन बीत गेलाक बाद ककरो जीबई के संभावना नहि छई आ बस पूरा तरहे क्षतिग्रस्त छई। संगहि बोडांग काउंटी के हुबई प्रांत मे भेल भूस्ख्लन मे रेल निमार्ण स्थल के नजदीक के सड़क के सेहो एकर चपेट मे आबई के बात कहल गेल छई।
प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला 2064 साल के भितरे संविधान सभा चुनाव करेबाक बात कहलाह। नेपाल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल संग बात करैत प्रधानमंत्री ई प्रतिबध्दता व्यक्त केलनि। ट्रेड यूनियन के पदाधिकारी सब प्रधानमंत्री के ज्ञापन पत्र द क आई बालुबाटार पंहुचल छलाह। एहि अवसर पर संविधान सभा निर्वाचन के बाद पहिल बैठक सं गणतंत्र के घोषणा करबाक लेल आ एहि सं पहिलका सहमति के अनुसार मिश्रित निर्वाचन प्रणाली लागू करबाक लेल प्रधानमंत्री के सुझाव देबाक बात ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष लक्ष्मण बस्नेत कहलाह। ज्ञापन पत्र मे संविधान सभा चुनाव के निश्चित तिथि तकबाक श्रम आयोग गठन करबाक युनियन के एकीकरण करबाक लेल आ शांति बहाली करबाक लेल सरकार सं मांग कैल गेल अछि।
ब्राजील मे एकटा 15 वर्षीय किशोरी के चोरी के आरोप मे एकटा अनोखा आ दर्दनाक स.जा देल गेलई। 15 वर्षीय एहि लड़की के स.जा के तौर पर कतेको हफता तक 21 लोक के संग जेल मे राखल गेलई जे ओहि किशोरी के खाए लेल तखने दई जखन कि बदला मे ओकरा संग संबंध स्थापित कएल जाए छलई। एहि कम उम्रक लड़की के संग .जबरदस्ती बलात्कार कएल जाई छलई आ अधिकारी किछो नहि क पेलैथ जाधरि कि राष्ट्रीय मिडिया मे ई ख़बरि नहि एलई आ ब्राजीलवासी एहि लड़की के रिहाई के मांग नहि केलकै। एहि लड़की के उंगली पर आ तलवा पर जलइत सिगरेट लगा क किशोरी के प्रताड़ित कएल जाई छलई आ ओकरा संग राखल गेल 21 टा बलात्कारी लड़का जंका ओकर केस काटि देने रहई, ताकि ओकर पहचान नहि भ पाबई। लड़की आ ओकर परिवारवाला के मुताबिक हुनका सबके लगातार जान सं मारई के धमकी भेटई छलई। शुक्रवार क संघीय सरकार, मानवाधिकार अधिकारी के एकटा प्रतिनिधि मंडल के एहि मामला के जांच के लेल भेजलक अछि।
रूपन्देही के कृषक सब के बीच एखन बेमौसमी प्याजक खेती ख़ास लोकप्रिय बनल अछि। कनीके ख़र्च सं मोनक अनुरूप आमदनी भेला सं कृषक सब एहि दिस आकर्षित भेल अछि।
२. प्रीति
(प्रीति नेपाल १ टी.वी. मे दैनिक मैथिली कार्यक्रमक होस्ट छथि।)
१.
वियाह एकटा रिश्ता के एहन अटूट बंधन अछि जकरा सामाजिक मान्यता प्राप्त छैक आ एक खास अवस्था में सब स्वेच्छा सअ अहि बंधन में बंधय चाहैत अछि। प्राचीनकाल में स्वयंबर के प्रचलन छल। यानि महिला के स्वयं वर चुनवाक सामाजिक आजादी छलन्हि। कालांतर में सामाजिक स्थिति में बदलाव आयल। बहु विवाह या दोसर वियाह पहिनुहुं व्याप्त छल मुदा महिला के नहि भेटल ई आजादी। आइयो कमोवेश दोसर वियाह पर समाज महिला के प्रति ओतेक उदार शायद नहि अछि जतेक उदार ओ पुरूषक दोसर वियाह पर अछि।
दोसर वियाह के बारे में जौं सच पुछी त समाज पुरूख के संग दैत अछि। पहिने त समाज में बहु वियाहक प्रथा छल मुदा आब यद्यपि एकरा मानयता नहि छैक तथापि समाज सअ ई प्रथा पूर्णत: खत्म नहि भेल अछि। दोसर वियाह जौं विधुर द्वारा या कोनो खास विशेष परिस्थिति में कयल जाय त एकर कारण बुझवा में अबैत अछि पर यदि मात्र शौक, दहेजक लोभ या छद्म आधुनिकता के होड़ में कयल जाय त ई अक्षम्य अपराध अछि। अहि मादे समाज आ स्वयं पुरूष के अपन सोच बदलबाक आवश्यकता अछि ।
समय बदलल संगहि लोक के सोच सेहो बदलल अछि। मुदा एखनो नहि बदलल अछि महिला के मादे पुनर्विवाह या दोसर वियाह पर समाजक नजरिया। जौं पुरूष क सकैत छथि दोसर वियाह त किएक नहि परित्यक्ता, विधवा महिला के सेहो भेटबाक चाही ई अधिकार। कतेक नींक महिला होयत जौं जवान के संतानहीन विधवा के पुनर्विवाह के अनिवार्य बना देल जाय आ बाकियो के स्वेच्छा पर छोड़ि देल जाय। जौं ई भ सकय संभव त नहि सिर्फ समाज सअ महिला आ पुरूषक भेदभाव किछु कम होयत अपितु बल्कि समाज द्वारा उपेक्षित आ एक तरहे त्यागल महिला पुन: समाज के मुख्यधारा में शामिल भय अपन जीवनक नैराश्य सअ मुक्ति पाबि सकलीह।
२.
कोजागरा पावनि आश्र्िवन शुक्ल पूर्णिमा के मनाओल जाइत अछि। नवविवाहित लड़का लेल अहि पावनि के विशेष महत्व अछि या कहू त ई पावनि खासकय हुनके सभक लेल छन्हि। नवका बरक लेल ई पावनि तहिने महत्वपूर्ण अछि जेहन नवविवाहिता लेल मधुश्रावनी। फर्क यैह अछि जे मधुश्रावनी कतेको दिन लम्बा चलैय बला पावनि अछि आ अहि में नव कन्या लेल बहुत रास विधि-विधान अछि जखनकि कोजागरा मुख्यतःमात्र एक दिन होइत अछि।
जहिना मधुश्रावनी में कनिया सासुरक अन्न-वस्त्रक प्रयोग करैत छथि तहिना कोजागरा में बर सासुर सं आयल नव वस्त्र धारण करैत छथि। कोजागरा के अवसर पर बर के सासुर सं कपड़ा-लत्ता, भार-दोर अबैत छन्हि। अहि भार में मखानक विशेष महत्व रहैत अछि। यैह मखान गाम-समाज में सेहो बरक सासुरक सनेस के रूप में देल जाइत अछि। सासुर सं आयल कपड़ा पहिरा बरक चुमाओन कयल जाइत अछि। बरक चुमाओन पर होइत अछि बहुत रास गीत-नाद।
कोजागरा में नींक जकां घर-आंगन नीपी-पोछि दोआरी सं भगवतीक चिनवारि धरि अरिपन देल जाइत अछि। भगवती के लोटाक जल सं घर कयल जाइत अछि। चिनबार पर कमलक अरिपन दय एकटा लोआ में जल भरि राखि ओहि पर आमक पल्लव राखि तामक सराई में एकटा चांदी के रूपैया राखि लक्ष्मी के पूजा कयल जाइत अछि। राति में अधपहरा दकखि बरक चुमाओन कयल जाइत अछि। आंगन में अष्टदल अरिपन द ओहि पर डाला राखि कलशक अरिपन द ताहि में धान द कलश में आमक पल्लव राखल जाइत अछि। एकटा पीढ़ी पर अरिपन देल जाइत अछि जे अष्टदलक पश्चिम राखल जाइत अछि। चुमाओनक डाला पर मखान, पांच टा नारियल, पांच हत्था केरा, दही के छांछ, पानक ढोली, गोटा सुपारी, मखानक माला आदि राखि पान, धान आ दूबि सं वर के अंगोछल जाइत अछि तहन दही सं चुमाओन कयल जाइत अछि। चुमाओन काल में बर सासुर सं आयल कपड़ा पहिरि पीढ़ी पर पूब मुंहे बैसैत छथि।
पुरहरक पातिल के दीप सं वर के चुमाओन सं पहिने सेकल जाइत छथि। फेर कजरौटा के काजर सं आंखि कजराओल जाइत छन्हि। तकर बाद पांच बेर अंगोछल जाइत छन्हि। तखने होइत छन्हि चुमाओन। चुमाओनक बाद वरकें दुर्वाक्षत मंत्र पढ़ि कम सं कम पांच टा ब्राह्मण दूर्वाक्षत दैत छन्हि। फेर पान आ मखान बांटल जाइत अछि। आ अगिला दिन धरि मखान गाम घर में बांटल जाइत अछि।
३.नवेन्दु कुमार झा
आब प्रवासक आश-
कोसी क्षेत्रमे आएल भीषण बाढ़िसँ ई क्षेत्र तबाह भऽ गेल अछि। वर्तमान परिदृश्य महान कथाकार फणीश्वर नाथ रेणुक “परती परिकथा” दिस लोक ध्यान खींचि रहल अछि। कोसीक मारि सहैत कतेको लाखक आबादीकेँ ओहि दिन राहत भेटल छल जखन कि बिहारक शोक कहल जाएवाला नदी कोसीपर तटबंधक निर्माण भेल छल। आशा जागल जे ई क्षेत्र आब सोना उगलत। ई भेबो कएल। मुदा १८ अगस्त २००८ केँ पूरा परिदृश्य बदलि गेल। सरकारक लापरवाही चाहे ओ केन्द्र सरकारक हो कि राज्य सरकारक ई क्षेत्र एक बेर फेरसँ बालूक ढेर बनि गेल। जे नदी एहि क्षेत्रकेँ बसौलक ओहि नदीक कारण एक बेर फेर क्षेत्र विरान भऽ गेल। विकास दौरसँ ई क्षेत्र चलि गेल पचास वर्ष पाछाँ।
एशिया क्षेत्रमे सभसँ उपजाऊ मानल जाएबला एहि क्षेत्रमे एखन बाँचल अछि तँ ओऽ छथि अपन घर-घरारी छोड़ि शरणार्थी बनल बाढ़ि पीड़ित आ पसरि रहल बिमारी आ बाँचल अछि जिनगी कटबाक आशा। मलेरिया सन महामारीक लेल बदनाम एहि क्षेत्रमे किछु वर्षसँ जे हरियरी देखाइत छल ताहिपर पानि पसरि गेल। गहूम, मकई आ धानक लहराइत खेत देखबाक चिन्तामे लागल अछि लोक। खेतीपर निर्भर एहि क्षेत्रक अर्थव्यवस्थापर जे घाव भेल अछि से कतेक दिनमे भरत से निश्चित नहि बुझि पड़ैत अछि।
ओना तँ एहि क्षेत्रक एकटा पैघ आबादी एखनो प्रवासी छल मुदा जे एखन छलाह तिनको ई बाढ़ि प्रवासी बनबापर विवश कएलक अछि। खेतीक बाद जाहिसँ एहि ठामक अर्थव्यवस्था चलैत छल ओ अछि मनीआर्डर। मनीआर्डरक भरोसे लोक कहुना जिनगी कटैत छल। आब ओकरो अपन जिनगी पहाड़ लागि रहल अछि। राहत शिविर आ सुरक्षित स्थानपर शरण लेने एकटा पैघ आबादीकेँ अपन भविष्य प्रवसी बनबामे बुझि पड़ैत अछि। ओऽ आब बिचारि लेने अछि जे घर गृहस्थीकेँ पटरीपर आनब बिनु प्रवासी बनने संभव नहि अछि। कोसी क्षेत्रक कतेको रेलवे-स्टेशनपर लगातार बढ़ि रहल भीड़ एकर प्रमाण अछि। कतेको माय-बाप-भाइ-बहिन अपन-अपन परिजनकेँ घर-घरारीक चिन्ता नहि करबाक आशा देआ प्रदेशक लेल बिदा कऽ रहल छथि। किएक तँ जिनगी कटबाक एकमात्र रास्ता ओकरा मनीआर्डर बुझि पड़ैत अछि। एहि ठाम तँ सभ किछु उजड़ि गेल अछि। आब एकमात्र आशा प्रवासी बनि रहल परिजनक मनीआर्डर मात्र अछि जाहिसँ फेरसँ घर गृहस्थीकेँ पटरीपर आनल जाऽ सकैत अछि। ओकरा एहि बातक कोनो चिन्ता नहि अछि जे देशक कतेको भागमे बिहारी सभक विरुद्ध गतिविधि चलाओल जा रहल अछि। ओऽ तँ आब ई मानि लेलक अछि जे एहि ठाम एखन कोन जिन्दा छी जे प्रदेशमे कोनो अनहोनी घटनाक शिकार भऽ जाएब। ई एहि बातक प्रमाण अछि जे पेट आगिक सोझाँ प्रदेशमे होमए वाला कोनो तरहक अनहोनीक कोनो मोल नहि अछि। अपन आँखिसँ कोसीक धारमे बहैत अपन लोक, आर-परोस आ परिचितक लहाससँ एहि क्षेत्रक लोक हृदय पाथर भऽ गेल अछि। बाँचल जिनगी कटबाक लेल मृत्युक सामना करएसँ आब कोनो घबराहटि ओकरा नहि छै।
कोसीक तटबन्ध टुटलाक बाद आब सरकारी स्तरपर जाँच, कार्वाई आ आयोगक गठन आदि खानापूर्ति भऽ रहल अछि आ होएत एहिसँ ओकरा कोनो माने मतलब नहि रहि गेल छै। आब चिन्ता छै तँ बस अपन घर-घरारी बसेबाक आ अपन परिवारक भविष्य रक्षा करबाक। बाढ़ि पीड़ितक लहासपर राजनीति, राहत आ बचाव काजक नामपर सरकारी खजाना लुटाएत, वोटक लेल गोलबन्दी होएत मुदा अगिला साल फेर कोसीक तांडव नहि होएत आ राजनेता, अधिकारी आ सरकार अपन जिम्मेदारी निर्वाह करताह एकर कोनो गारंटी नहि अछि।

बिहारमे क्रिकेट

भारतीय क्रिकेट बोर्ड द्वारा बिहारकेँ एसोसिएट सदस्य बनेबाक घोषणाक बाद क्रिकेट खिलाड़ी आ क्रिकेट प्रेमीक मध्य खुशीक लहरि पसरल अछि। मुदा प्रदेशमे कतेको वर्षसँ असली संघ होएबाक दावा करएवला क्रिकेट संघक मध्य वाक युद्ध तेज भऽ गेल अछि। बिहारमे एखन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादवक नेतृत्व बला बिहार क्रिकेट एसोसिएशन, पूर्व भारतीय क्रिकेटर कीर्ति आजादक नेतृत्व बला एसोसिएशन आफ बिहार क्रिकेट तथा पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी सभक क्रिकेट एसोसिएशन आफ बिहार सक्रिय भऽ अपन-अपन संघक मान्यता देएबाक प्रयास कऽ रहल छल। झारखण्ड प्रदेश अलग भेलाक बाद क्रिकेट एसोसिएशनक सेहो बँटवारा भेल। मुदा न्यायालयक लड़ाइक चक्करमे छह वर्षसँ बिहारक प्रतिभाशाली कतेको क्रिकेटरकेँ अपन प्रतिभा देखेबाक अवसर नहि भेटि सकल छल। लालू प्रसादक नेतृत्व बाला बी सी ए केँ कन्ट्रोल बोर्ड द्वारा मान्यता देबाक घोषणाक संगहि एक बेर फेर विवाद बढ़बाक संभावना देखाई दऽ रहल अछि किएक तँ कीर्ति आजादक नेतृत्व वाला एबीसी एहि मामलाकेँ न्यायालयमे लऽ जएबाक बात कहलक अछि।
वर्ष दू हजार एक मे बी. सी. सी. आइ. क तात्कालिक अध्यक्ष ए.सी.मुथैय्या द्वारा लालू प्रसादक बी.सी.ए.केँ बोर्डक पूर्ण सदस्यता बहाल कएने छल मुदा तकर बाद बी. सी. ए. क सचिव द्वारा जगमोहन डालमियाक विरुद्ध मतदान करबाक कारण श्री डालमिया अध्यक्ष बनिते बिहारकेँ पूर्ण सदस्यता समाप्त कऽ देलनि आऽ तहियासँ क्रिकेट खिलाड़ी आऽ क्रिकेट प्रेमी सदस्यताक बहाली करबाक लेल संघर्ष करैत छलाह। एहि मामिलाक जल्दी निपटारा करबाक बदला गुटमे बटल क्रिकेट संघ अपना-अपना केँ असली क्रिकेट चिन्तक जनबैत न्यायालयक पीचपर लड़ाई लड़ैत छलाह आ एहि बहाने कन्ट्रोल बोर्ड एहि मामिलापर मूकदर्शक बनल रहल जाहिसँ प्रतिभाशाली क्रिकेटरक नोकसान भेल।
बोर्डक ७९म वार्षिक आम बैसकमे बिहारकेँ भेटल मान्यतासँ बिहारक क्रिकेट प्रेमी राहत महसूस कऽ रहल छथि। हालाँकि जाऽ धरि पूर्ण सदस्यक मान्यता नहि भेटत खिलाड़ीक संग न्याय नहि होएत। एखन बिहारकेँ बोर्ड द्वारा आयोजित १७, १९ आऽ २२ वर्षक वाला प्प्रतियोगितामे भाग लेबाक अवसर भेटत। बोर्ड आर महत्वपूर्ण प्रतियोगिता रणजी ट्राफी आदिमे ओ तखनहि भाग लऽ सकत जखन कि पूर्ण सदस्यता भेटि जाएत। बोर्डक एहि निर्णयपर अपन प्रतिक्रिया व्यक्त करैत बी.सी.ए.क कोषाध्यक्ष अजय नारायण शर्मा कहलनि अछि जे एहिसँ बिहारक खिलाड़ीकेँ प्रतिभा देखएबाक अवसर भेटत। एखन धरि जे नोकसान भेल अछि ओकरा पूरा करबाक प्रयास लालू प्रसादक सहयोगसँ करब। दोसर दिस कीर्ति आजादक नेतुत्व बाला ए.बी.सी. बोर्डक एहि निर्णयसँ असंतुष्ट अछि। एसोसिएशनक महासचिव मिथिलेश तिवारी कहलनि अछि जे बोर्ड द्वारा गठित तीन सदस्यीय स्टीयरिंग कमिटि जखन ए.बी.सी.केँ प्रदेशमे क्रिकेट गतिविधिक संचालनक जिम्मेदारी देने छल तँ बोर्ड द्वारा पक्षपात कएल गेल ई निर्णय अस्वीकार अछि आ एकर विरुद्ध न्यायालयक शरणमे जेबाक अलावा कोनो उपाय नहि अछि। ओ दुर्गापूजाक बाद ए.बी.सी.क विशेष आम सभा बजेबाक बात सेहो कहलनि अछि।
देरीसँ सही बिहार क्रिकेटकेँ आधा न्याय तँ भेटल अछि। आब १९३५क बिहार क्रिकेट एसोसिएशनक बँटवाराक बात सेहो होएत। जाहि तरहेँ राज्यक सभ किछुक बँटवारा भेल तहिना बी.सी.ए. जकर मुख्यालय जमशेदपुरमे छल, बँटवारा होबाक चाही। सभ क्रिकेट संघकेँ अपन हठधर्मिता छोड़ि प्रदेशमे क्रिकेटक गतिविधिकेँ पटरीपर अनबाक प्रयास करबाक चाही। ज्योँ फेर विवाद उठल तँ एक बेर फेर क्रिकेटपर ग्रहण लागि जाएत। आब क्रिकेटक मठाधीश संघर्ष छोड़ि भारतीय टीममे बिहारक प्रतिनिधित्व देयबाक संगठित भऽ प्रयास करथि जाहिसँ बिहारमे क्रिकेटक भविष्य बनि सकए।
४.गद्य
४.१.कथा १.सुभाषचन्द्र यादव(अपन-अपन दुख) २. विभारानी (आऊ कनेक प्रेम करी माने बुझौअल जिनगीक)
४.२.१. रिस्क आऽ मैथिल- ब्रज कु. कर्ण २. कोना बचत मिथिलाक स्मिता?-ओमप्रकाश झा
४.३.१. महाप्रकाश श्री सुभाषचन्द्र यादव पर, २. जितेन्द्र झा सुश्री अंशुमालापर
४.४. १.जीवन झाक नाटकक सामाजिक विवर्तन- प्रेमशंकर सिंह (आगाँ) २.स्व. राजकमल चौधरी पर – डॉ. देवशंकर नवीन (आगाँ)
४.५. दैनिकी-ज्योति
कथा
१. सुभाषचन्द्र यादव २. विभारानी

चित्र श्री सुभाषचन्द्र यादव छायाकार: श्री साकेतानन्द
सुभाष चन्द्र यादव, कथाकार, समीक्षक एवं अनुवादक, जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल- मधुबनी। आरम्भिक शिक्षा दीवानगंज एवं सुपौलमे। पटना कॉलेज, पटनासँ बी.ए.। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्लीसँ हिन्दीमे एम.ए. तथा पी.एह.डी.। १९८२ सँ अध्यापन। सम्प्रति: अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, पश्चिमी परिसर, सहरसा, बिहार। मैथिली, हिन्दी, बंगला, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, स्पेनिश एवं फ्रेंच भाषाक ज्ञान।
प्रकाशन: घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित।
भूतपूर्व सदस्य: साहित्य अकादमी परामर्श मंडल, मैथिली अकादमी कार्य-समिति, बिहार सरकारक सांस्कृतिक नीति-निर्धारण समिति।
अपन-अपन दुख
ओहि राति पत्नी दुखित छ्लीह । पीठ मे दर्द होइत रहनि। घरक भितरिया बरंडा पर खाट पर पड़ल छलीह। निन्न नहि होइत छलनि। धीयापूता क आवाजाही, गपशप, खटखुट निन्न नहि होअय दनि। ओ अति ध्वनिग्राही छथि। सेंसिटिव माइक्रोफोन जकाँ छोट-छोट ध्वनि-तरंग सँ कम्पित भs जाइत छथि। धीयापूता केँ बरजैत धथिन — अनेरो टहल-बूल नहि, हल्ला-गुल्ला नहि कर, रेडियो नहि बजा। कतेको बेर अड़ोस-पड़ोस सँ अबैत टी.वी. या रेडियोक आवाज सुनि कs पुछैत छथिन—‘अपन रेडियो बाजि रहल अछि ?’
सभक अपन-अपन संसार होइत छैक। धीयोपूतोक अपन संसार छैक। ओ सभ कखनो मायक बात सुनैत अछि, कखनो नहि सुनैत अछि आ संसारक अपन कल्पनाक रमणीयता मे डूबल रहैत अछि। अवहेलना सँ पत्नीक खौंझ बढ़s लगैत छनि। तनाव चरम सीमा पर पहुँचि जाइत छनि तs चिकरि उठैत छथि आ धीयापूता केँ सरापS लगैत छथि। धीयापूताक कोमल भावुक संसार आइना जकाँ चूर भs जाइत अछि। ओहि राति हम कनेक देरी सँ घर घूरल रही। देर सँ घुरब पत्नीकेँ पसिन्न नहि छनि। हमर ई दिनचर्या हुनका लेल घोर आपत्तिजनक आ विपतिजनक। देर सँ घुरबाक अर्थ अछि देर सँ सूतब आ देर सँ सुतबाक अर्थ अछि पत्नीकेँ देर धरि कम्पित करैत रहब।
तs ओहि राति घर पहुँचला पर परिस्थिति बूझबा मे भांगठ नहि रहल जे भानस –भात नहि भेल अछि, पत्नी कोनो कारणे सूतलि छथि। एना कतेको बेर भेल अछि। सूतलि रहथु , विघ्न नहि होनि ई चेष्टा करैत धीयापूताक सहयोग सँ हम भानसक उधोग मे लागि गेल रही । मुदा पत्नी निन्न्मे नहि छलीह; कलमच पड़ल छलीह। एहि परिस्थितिक लेल जेना सफाइ दैत आ अपन जागरण तथा कष्ट केँ जनबैत पत्नी अचानक चनकि उठलीह — ‘आब अखन सँ शुरू भs गेलैक गाँड़ि घुमौनाइ। हौ बाप, ई सभ कखनो चैन नहि दैत अछि। भगवान, मौगति दैह !’
एकटा सनसनाइत तीर सन शांति पसरि गेल । पत्नी उठि कs दोसर कोठली चल गेलीह।
घंटा- दू घंटा बीतल। ओहि दिन बहुत थाकल रही। सोचलहुँ खा कs सूति रही। पत्नी केँ जखन निन्न टुटतनि, खा लेतीह। निन्न मे उठा देला पर हुनका फेर निन्न आयब कठिन होइत छनि। तेँ हुनक भिड़काओल केबाड़ केँ आस्ते-आस्ते ठेलि चछरि लेबा लेल भीतर गेलहुँ। मुदा हमर पदचाप आ उपस्थिति सँ हुनक निन्न टूटि गेलनि। हुनका जागल बूझि हम कहलियनि- ’खा लियs।’ ओ करोट फेरलीह, बजलीह किहु नहि।
हम दोसर कोठली मे जा कs सूति रहलहुँ। पता नहि कतेक राति भेल हेतैक । हमरा क्यो जगा रहल छल । निन्न केँ ठेलैत हम अख्यास करs लगलहुँ के अछि, की कहि रहल अछि। ठीक-ठीक मोन नहि पड़ैत अछि, मुदा लगैत अछि हमर आँखि नहि खुजल रहय। कान मे पत्नीक स्वर आयल, लेकिन बुझायल नहि ओ की कहि रहल छथि । पुछलियनि – ‘की कहैत छी?’
कहलनि— ‘की भेल अछि? एना कियैक करैत छी?’
हम सोचय लगलहुँ , हमरा की भेल; हम कोना करैत रही। तखन ध्यान गेल, गला मे कफ फँसल अछि। खखारि कs ओकरा गीड़ैत अन्दाज कयलहुँ हम घर्राइत रहल होयब आ पत्नी डरि गेल हेतीह।
हम फेर लगले निन्न पड़ि गेलहुँ। पता नहि कतेक समय बीतल हेतैक। घंटा कि आध घंटा । पत्नीक आवाज कानमे आयल- ‘सुनै नइँ छिऐ ?’
पुछ्लियनि—‘की?’
कहलनि—‘लोककेँ सूतs देबैक कि नहि ?’ देखलियनि चौकी सँ कने हटि कs ठाढ़ि छलीह । हमरा भेल हम फेर घर्राय लागल होयब। गरामे अटकल कफ केँ घोंटैत स्नेह सँ पत्नी केँ पुछलियनि- ‘भोजन कयलहुँ?’
पत्नी कोनो जवाब नहि देलनि आ चल गेलीह। भेल जे खा लेने हेतीह तेँ नहि बजलीह। एहि बेर निन्न तुरन्ते नहि आयल। चिन्ता भेल कफ किएक बढ़ि गेल अछि । मोन पड़ल पत्नी कतेक डेरा गेल छलीह। फेर पता नहि कखन निन्न पड़ि गेल ।
भोरमे पत्नी सँ पुछलियनि— ‘रातिमे दू-दू बेर किएक जगौने छलहुँ’, तs कहलनि- ‘पारा जकाँ डिकरैत छलहुँ तेँ।’
हमरा एहि जवाबक आशा नहि रहय, तेँ एहि पर हठात विश्वास नहि भेल । पहिने एना कहियो नहि भेल रहय । हमर ठड़ड़ सँ अकच्छ भs कs ओ कहियो जगौने नहि छलीह । तखन हमर ओ कफ आ घरघरी कोनो भ्रम रहय ? हमरा भीतर जेना किछु कचकल। कने चुप रहि पुछलियनि— ‘खयने छलहुँ कि नहि ?’ कहलनि— ‘हँ, लोक ताला मारने रहैत छैक आ हम खा लैत छिऐक।’
हमरा बुझा गेल रातिमे धीयापूता खा-पी कs सूति गेल होयत आ भनसाघर मे ताला लगा देने हेतैक। पत्नी अपन भूख आ हमर फोंफसँ कुपित भs कs हमरा उठबैत छल हेतीह। हम उठि गेल रहितहुँ तs ओ खइतथि आ खइतथि तs निन्न पड़ि जइतथि । ओ तामसे भेर भेल भूखल रहि गेलीह। ठड़ड़ आघरघरीक दू टा संसार अछि। सभक अपन-अपन संसार होइत छैक। संसारक अपन-अपन सुख होइत छैक, अपन-अपन दुख होइत छैक ।

२.विभा रानी (१९५९- )लेखक- एक्टर- सामाजिक कार्यकर्ता-बहुआयामी प्रतिभाक धनी विभा रानी राष्ट्रीय स्तरक हिन्दी व मैथिलीक लेखिका, अनुवादक, थिएटर एक्टर, पत्रकार छथि, जिनक दर्ज़न भरि से बेसी किताब प्रकाशित छन्हि आ कएकटा रचना हिन्दी आ र्मैथिलीक कएकटा किताबमे संकलित छन्हि। मैथिली के 3 साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखकक 4 गोट किताब “कन्यादान” (हरिमोहन झा), “राजा पोखरे में कितनी मछलियां” (प्रभास कुमार चाऊधरी), “बिल टेलर की डायरी” व “पटाक्षेप” (लिली रे) हिन्दीमे अनूदित छन्हि। समकालीन विषय, फ़िल्म, महिला व बाल विषय पर गंभीर लेखन हिनक प्रकृति छन्हि। रेडियोक स्वीकृत आवाज़क संग ई फ़िल्म्स डिविजन लेल डॉक्यूमेंटरी फ़िल्म, टीवी चैनल्स लेल सीरियल्स लिखल व वॉयस ओवरक काज केलन्हि। मिथिलाक ‘लोक’ पर गहराई स काज करैत 2 गोट लोककथाक पुस्तक “मिथिला की लोक कथाएं” व “गोनू झा के किस्से” के प्रकाशनक संगहि संग मिथिलाक रीति-रिवाज, लोक गीत, खान-पान आदिक वृहत खज़ाना हिनका लग अछि। हिन्दीमे हिनक 2 गोट कथा संग्रह “बन्द कमरे का कोरस” व “चल खुसरो घर आपने” तथा मैथिली में एक गोट कथा संग्रह “खोह स’ निकसइत” छन्हि। हिनक लिखल नाटक ‘दूसरा आदमी, दूसरी औरत’ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य समारोह भारंगममे प्रस्तुत कएल जा चुकल अछि। नाटक ‘पीर पराई’क मंचन, ‘विवेचना’, जबलपुर द्वारा देश भरमे भ रहल अछि। अन्य नाटक ‘ऐ प्रिये तेरे लिए’ के मंचन मुंबई व ‘लाइफ़ इज नॉट अ ड्रीम’ के मंचन फ़िनलैंडमे भेलाक बाद मुंबई, रायपुरमे कएल गेल अछि। ‘आओ तनिक प्रेम करें’ के ‘मोहन राकेश सम्मान’ से सम्मानित तथा मंचन श्रीराम सेंटर, नई दिल्लीमे कएल गेल। “अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो” सेहो ‘मोहन राकेश सम्मान’ से सम्मानित अछि। दुनु नाटक पुस्तक रूप में प्रकाशित सेहो अछि। मैथिलीमे लिखल नाटक “भाग रौ” आ “मदद करू संतोषी माता” अछि। हिनक नव मैथिली नाटक प्रस्तुति छन्हि- बलचन्दा।

विभा ‘दुलारीबाई’, ‘सावधान पुरुरवा’, ‘पोस्टर’, ‘कसाईबाड़ा’, सनक नाटक के संग-संग फ़िल्म ‘धधक’ व टेली -फ़िल्म ‘चिट्ठी’मे अभिनय केलन्हि अछि। नाटक ‘मि. जिन्ना’ व ‘लाइफ़ इज नॉट अ ड्रीम’ (एकपात्रीय नाटक) हिनक टटका प्रस्तुति छन्हि।
‘एक बेहतर विश्र्व– कल के लिए’ के परिकल्पनाक संगे विभा ‘अवितोको’ नामक बहुउद्देश्यीय संस्था संग जुड़ल छथि, जिनक अटूट विश्र्वास ‘थिएटर व आर्ट– सभी के लिए’ पर अछि। ‘रंग जीवन’ के दर्शनक साथ कला, रंगमंच, साहित्य व संस्कृति के माध्यम से समाज के ‘विशेष’ वर्ग, यथा, जेल- बन्दी, वृद्ध्राश्रम, अनाथालय, ‘विशेष’ बच्चा सभके बालगृहक संगहि संग समाजक मुख्य धाराल लोकक बीच सार्थक हस्तक्षेप करैत छथि। एतय हिनकर नियमित रूप से थिएटर व आर्ट वर्कशॉप चलति छन्हि। अहि सभक अतिरिक्त कॉर्पोरेट जगत सहित आम जीवनक सभटा लोक आओर लेल कला व रंगमंचक माध्यम से विविध विकासात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम सेहो आयोजित करैत छथि।

श्रीमति विभारानी सम्प्रति मुम्बईमे रहैत छथि।
प्रस्तुत अछि विभाजीक कथा आऊ कनेक प्रेम करी माने बुझौअल जिनगीक। एहि कथापर हिन्दीमे विभाजीक नाटक लिखल गेल “आओ तनिक प्रेम करें” जकरा २००५ ई. मे मोहन राकेश सम्मानसँ सम्मानित कएल गेल।

आऊ कनेक प्रेम करी माने बुझौअल जिनगीक
‘हे ये…, कत’ गेलहुँ? आऊ ने एम्हर।’
‘की कहै छी? एम्हरे त’ छलहुँ तखनी स’। कहू, की बात?’
‘किछु नञि! मोन होइय’ जे अहाँ अईठाँ बैसल रही।’
‘धुर जाऊ! अहूँ के त’ … एह! एतेक काज सभ पसरल छै। बरखा-बुन्नीक समय छै। दिन मे अन्हार भ’ जाइ छै। तइयो अहाँ कहलहुँ त’ बैसि गेलहुँ आ देखियौ जे लग मे बैसल-बैसल अनेरे कएक पहर निकलि गेलै। ताबतिमे त’ हम कतेको काज छिनगा नेने रहितह।ँ!’
‘आहि रे बतहिया ! सदिखन काजे-काज, काजे-काज ! यै, आब के अछि, जकरा लेल एतेक काज करै छी। सभ किओ त’ चलि गेल हमरा-अहाँ के छोड़ि के, जेना घर स’ बाहर जाएत काल लोग घरक आगू ताला लटका दै छै। हे बूझल अछि ने ई कहबी जे सभ किओ चलि गेल आ बुढ़बा लटकि गेल। तहिना हम दुनू लटकि गेल छी अई घर मे।’
‘एह! छोड़ू आब ओ गप्प सभ। आ हे, अपना धिया-पुता लेल एहेन अधलाह नञि बाजबाक चाही। आखिर हुनको आओरक अपना-अपना जिनगी छै। बेटी के त’ अहां ओहुनो नञि रोकि क’ राखि सकै छी। आनक अमानति जे भेलै। बाकी बचल दुनू बेटा त’ बूझले अछि जे जामुन तडकुन खेबाक आब हुनकर उमिर नञि रहलन्हि। एहेन-एहेन गप्प पर त’ ओ सभ भभा क’ हँसि पड़तियैक।’
‘नञि! से हम अधलाह कत’ सोचलहुँ आ कियैक सोचब। एतेक बूड़ि हम थोड़बे छी। मुदा, जे मोनक पीड़ा अहूँक संगे नञि बाँटब त’ कहू, जे हम कोम्हर जाइ।’
‘कतहु नञि! अहि ठाँ बैसल रहू। हम अहाँ लेल चाय बना क’ आनै छी। अहाँ जाबति चाय पियब, ताबति हम भन्सा-भात निबटा लेब।’
‘ठीक छै, जाऊ! अहाँ आओर के त’ चूल्हि-चौकी आ भन्सा भात स’ ततेक ने फैसिनेशन अछि जे किओ किछु कहैत रहय, अहाँसभ स’ ओ छूटि नञि सकैय’।
‘से नञि कहू। आई कोनो लड़की कि जनीजात चूल्हि मे सन्हियाय नञि चाहै छै। मुदा ओकरा आओर के त’ जन्मे स’ पाठ पढ़ाओल जाइ छै जे गै बाउ, बेटी भ’ क’ जनमल छें त’ चूल्हि स’ नाता त’ निभाबहि पड़तौ। कतबो पढ़ि-लिखि जेबें, हाकिम-कलक्टर भ’ जेबें, मुदा भात त’ उसीनही पड़तौक। आब हमरे देखि लिय’। हम की पढ़ल-लिखल नञि छी कि नौकरी मे नञि छी। माय-बाउजी भने पाइ स’ कने कमजोर छलाह, मुदा मोन स’ बहुत समृद्घ। तैं त’ पढ़ौलन्हि-लिखौलन्हि। नौकरी लेल अप्लाई केलहुँ त’ नीके संयोगे सेहो भेंटि गेल। आर नीक कही अपन तकदीर के जे अहाँ सन जीवन साथी सेहो भेटल जे डेगे-डेग हमर संग रहलाह। मुदा तइयो देखियौ जे बेसिक फर्क जे छै, से अहूँ की बिसरि सकलहुँ? आइ धरि कहियो कहलहुँ जे सपना, रह’ दियऊ अहाँ भानस-भात । हम क’ लेब कि घर ठीक क’ लेब कि धिया-पुता के पढ़ा लेब।’
‘आब लगलहुँ अहूँ रार ठान’। ताइ स’ नीक त’ सएह रहितियैक जे अहाँ किचन मे जा क’ अपन काज करू। हँ, चाय सेहो द’ दिय’।’
‘से त’ अहाँ कहबे कहब। बात लागल जे छनाक स’। अहिना त’ अहाँ आओर हमरा आओरक अबाज के बंद करैत एलहुँए।’
‘सपना, अहाँ एना जुनि सोचू। आई तीस बरख स’ हम दुनू एक संगे छी। पूर्ण भरोस स’, संपूर्ण आत्मसमर्पण, विश्र्वास आ सहयोग स’। हमरा बुते जे भ’ सकल, कहियो छोड़लहुँ नञि। ठीक छै जे हम कहियो एक कप चायोटा नञि बनेलहुँ, मुदा आदमी आओरक सहयोग देबाक माने की खाली भन्से मे घुसनाई होई छै? अहाँ मोन पाडू, हम कहियो कोनो बात पर टोकारा देलहुँ? अहाँ जे पकाबी, जे खुआबी, जे पहिराबी, जेना अहाँ राखी। कहियो कोनो आपत्ति कएल की।’
‘हमरा हँसी आबि रहलए अपन एहेन समर्पित पति पर।’
‘मुदा हमरा नञि आबि रहलए। हमरा गर्व अछि अपन एहेन सहयोगी पत्नी पर जे हमर कन्हा स’ कान्हा मिला क’ हमरा संगे-संगे चललीह। मुदा, आई ई सभ उगटा-पुरान कियैक?’
‘टाइम पास कर’ लेल आ अहाँ जे कहलहुँ, अई ठाँ बैस’ लेल, त’ बैसि के अहाँक मुंह त’ नञि निरखैत रहि सकै छी ने।’
‘निरेखू ने, किओ रोकलकए अहाँ के कि टोकलकए अहाँके।’
‘धुर जाऊ, अहूँ त…! आब ओ सभ संभव छै की? अरे, जहिया उमिर छल, जहिया समय छल, तहिया त’ कहियो हमर मुंह निरेखबे नञि कएलहँु आ नहिए निरखही देलहुं। चाहे हम किछुओ पहिरि-ओढ़ि ली, चाहे बाहर स’ हमरा कतेको प्रशंसा भेटि जाए, अहाँक मुंह स’ तारीफक एकटा बोल सुन’ लेल तरसि गेलहुँ। बोल त’ बोल, एकटा प्रशंसात्मक नजरियो लेल सिहन्ता लागले रहि गेल। आ तहिना अहांक पहिरल ओढ.ल पर कहियो एपी्रशिएट कएलहुँ, तइयो मुंह एकदम एके रस – शून्य, भावहीन …’
‘एह! एना जुनि कहू। अहाँक सज-धज देखिक’ हमरा जे प्रसन्नता होइत छल, से हम कहियो ¬नञि शेयर कएलहुँ अहाँ स’, से कोना कहि सकै छी। दिनभर अहाँक रूप आँखिक सोझा नचैत रहैत छल आ राति मे ओ सभटा प्रशंसा रूपाकार लेइत छल। तहिना अहांक मुंह स’ अपन, प्रशंसाक बोल भरि दिन चानीक घंटी जकाँ मोन मे टुनटुन बाजत रहैत छल आ मोन के उत्फुल्ल बनौले रहै छल। मुदा, अहाँ कहियो ओहि समय कोनो सहयोगे नञि देलहुँ या कहियो संग देबो केलहुँ त’ बड्ड बेमोन से’। हम कहियो पूछलहुँ जे अएं यै, एना कियैक करै छी अहाँ? अहींक मर्जी मुताबिक हम ओहूठाँ चलैत रहलहुँ।’
‘हे! सरासर इल्जाम नञि लगाबी। देखियौ, हमरा लेल जेना अहाँ महत्वपूर्ण छी, तहिना अहाँक प्रत्येक बात हमरा लेल महत्वपूर्ण अछि। हम अहाँक संग नञि देलहुँ अथवा बेमोन स’ देलहुँ त’ कियैक ने अहाँ पूछलहुँ कहियो, अथवा हम झँपले-तोपले किछु कहबो केलहुँ त’ कियैक ने तकरा पर बिचार केलहुँ, कहियो खुलिक’ चर्च केलहुँ.। … हे लिय’…, चाय लिय’… अपनो लेल बना लेलहुँ। भन्साघर स’ चिकरि चिकरि क’ बाज पड़ै छल। किओ सुनितियैक त’ कहतियैक जे बतहिया जकाँ एकालाप क’ रहल छै कि ककरो संगे झगड़ि रहल छै।’
‘चाय त’ बड्ड दीब बनलए।’
‘एह! याहि टा गप्प पहिनहुँ कहियो कहने रहितहुँ। अई तीस बरख में आइए नीक चाय बनलैय’ की?’
‘छोड़ू ने पुरना गप्प सभ! आब धीया-पुताक घर में ई सभ कथा-पेहानी नीक लागतियैक की?’
‘कियैक ने नीक लागतियैक? ई सभ त’ जीवनदायी धारा सभ छै जाहि स’ जीवनरूपी वृक्षक डाल-पात सभके भिन्न भिन्न स्रोत स’ जीवनशक्ति भेटैत रहै छै। अरे, धिया-पुताक सोझा अहाँ कहिये दितहुँ त’ अई मे कोनो ऐहन अधलाह कर्म त’ नञि भ’ जइतियैक जाहि स’ ओकरा आओरक आगाँ हमरा आओर के शर्म कि झेंप महसूस होयतियैक!’
‘अहाँ बात के तूल द’ रहल छी।’
‘नञ! स्थितिक मीमांसा क’ रहल छी। चीज के रैशनलाइज क’ रहल छी।’
‘हमरो दुनूक जिनगी केहेन रहलए। नेना छलहुँ त’ पढ़ाई, पढ़ाई, पढ़ाई! माय-बाउजी कहैत छलाह जे बाउ रौ, इएह त’ समय छौक तपस्याक। एखनि तपस्या क’ लेबें त’ आगाँ एकर मधुर फल भेटतौ। पढ़ बाउ, खूब मोन लगाक’ पढ़ ! आ हम पढ़ैत गेलहुँ – फर्स्ट अबैत गेलहुँ। नीक नोकरीयो लागि गेल। बाउजी सत्यनारायण भगवानक कथा आ अष्टयाम सेहो करौलन्हि। हुनका बड्ड सौख छलै जे हुनकर पुतौहु पढ.ल-लिखल, समझदार आ मैच्योर्ड हुअए। तकदीरक बात कहियौ जे हुनकर ईहो सेहन्ता पूर्ण भ’ गेलै। हुनका अहॉँ सन पुतौहु भेटलै, रूप आ व्यवहारक गरिमा स’ परिपूर्ण।
‘चाय त’ सठि गेल। आओरो ल’ आबी की?’
‘नञि! हमरो जिनगी सोगारथ भेल अहाँ के पाबि क’। कतेको परेशानी भेल, अहाँ सभस’ निबटैत गेलहुँ, एकदम स’ धीर थिर भ’ क’।’
‘त’ की करितहुँ! जहन हम दुनू प्राणी एकटा बंधन में बंधा गेलहुँ त’ तकर मान मरजाद त’ निभाबही पड़तियैक ने! आ कथा खाली हमरे आ अहाँटाक संबंध धरि त’ सीमित नञि रहै छै। एकर विस्तार अहाँक परिवार, हमर परिवार आ फेर अपन बाल-बच्चा धरि होइत छै, आ हे, एहेन नञि छै जे हम सीता-सावित्री जकाँ मुंह सीने सबकुछ टॉलरेट करैत गेलहुँ। कएक बेर हम अपन टेम्पर लूज केलहुँ। मुदा अहाँक तारीफ, अहाँ अपन टेम्पर कहियो नञि लूज केलहुँ।’
‘महाभारत स’ बच’ लेल। आह! पत्नीक आघात स’ कोन एहेन मनुष्य अछि जे बाँचि सकलए।’
‘मजाक जुनि करू! अहँू सीरियस छी त’ हमहूँ सीरियस छी। हमर अपन इच्छा छल नान्हिटा स’ जे पढ़ब-लिखब। पढ़ि लिखिक’ अपना पएर पर ठाढ़ होएब। आर्थिक परतंत्रता अस्वीकार्य छल। हमरा अई बात पर पूर्ण संतोख अई जे हमर ई इच्छाक पूर्ण आदर आ सम्मान भेटल अहां स’। हमर नौकरी पर हमरा स’ बेसी प्रसन्नता अहाँक बाउजी के भेल छल। हमर एकगोट संगी हमरा चेतौने छल जे देखब, बुढ़बाक खुशी अहाँक पगार ओसुलबा स’ त’ नञि अछि। हमरो लागल छल। मुदा धन्न कही हुनका, नञि कहियो पुछलन्हि जे हमरा की आ कतेक दरमाहा भेटैय’ आ नञि कहियो ओकरा मादे कोनो खोजे-पुछारी कएलन्हि। सएह अहँू संगे भेल। अहँू कहियो नञि पूछलहुँ जे हम की सभ करै छी। अपन पगार के कोना खर्चै दी॥ हमरा त’ कएक बेर इएह होइत रहल जे अहाँ पूछै छी कियैक ने? तहन ने हम अपन आमदनी आ आमद स’ बढ़ल खर्चाक हिसाब अहाँ के दितहुँ। नतीजा, आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कएलो सन्ता कहियो आर्थिक रूपे स्वतंत्र नहिं भ’ सकलहुँ। कहियो अपना मोने अपना ऊपर किछु खर्च नञि क’ सकलहुँ। अहाँ संगे ई नञि छल। अहाँ त’ ‘ईट, ड्रिंक आ बी मेरी’ मे यकीन करैत एलहुँ आ एखनो करै छी।’
‘अई मे अधलाहे की छै? मनुक्खक अई जिनगी मे अछिए की? खाई, पीबि, मस्त रही।’
‘भने ओहि मे सभ किओ सफर करी।’
‘से कोना? कहियो अहाँके हम कोनो कष्ट देलहुँए?’
‘किऐक ने? कोनो समय एहेन नञि भेल जे कोनो खास खास बेर पर हमर नोर नञि खसल हुअए। कहियो कोनो काज-परोजन भेल, कि तीज तेवहार कि ककरो बर्थ डे कि वेडिंग, सभठाँ त’ पल्ला झाड़ि लेइत अएलहुँ जे पाई नञि अछि।! तहन हम की लोकक ओहिठाँ खाली हाथे पहुँचतहुं आ कहितहुं जे हमर हस्बैंड कहै छथि जे हुनका लग पाइ नञि छै तैं हम आओर हाथ झुलबैत चलि ऐलहुँए। किओ पतियैतियैक।’
‘अहाँ लग त’ रहै छल ने।’
‘हँ, कियैक ने कहब। ई बुझलहुँ जे ई ‘छल’ के मेंनटेन करबा लेल हम कतेक बेर अपन मोन के मारि-मारि के राखलहुँ।’
‘एह छोड़ू ई सभ गप्प। खाएक लेल की बनाएब?’
‘जे कही अहाँ? हमरा आओर के त’ ईहो कहियो स्वतंत्रता नञि रहल जे अपना मोने, अपन पसीनक खाना बनाबी।’
‘फेर ब्लेम! आइ अहाँ के भ’ की गेलए?’
‘अहाँ संग लड़ियाएबक खगता। जिनगी भर जकरा लेल अहां पलखतियो भरि समय नञि देल।’
‘हम अहाँके संतुष्ट नञि क’ सकलहुँ कहियो, अहाँ से कह’ चाहै छी?’
‘हँ, सएह कह’ चाहै छी?’
‘बाई एवरी पॉसिबल वे?’
‘यस, बाइ एवरी पॉसिबल वे?’
‘फिजिकली, मेंटली, मौनेटरली, सेक्सुअली।’
‘हँ, सभतरहें।’
‘अहाँ हमरा कमजोर बना रहल छी।’
‘अहसास करा रहल छी।’
‘अपन परिस्थिति पर गौर नञि क’ रहल छी। हम बिजी, अहां बिजी। हमर अएबाक-जेबाक कोनो निश्चित समय नञि। अहाँके ऑफिसक संगे-संगे घरक, धिया-पुताक जिम्मेवारी। बखत कत’ छल जे प्रेम-मुहब्बतक मादे सोचितहुँ।’
‘तैं त’ जीवन झरना सुखा गेल ने? व्यस्तता त’ जिनगीक अभिन्न अंग छियै। तैं, अई व्यस्तताक कारणे हम आओर कहियो की नहाएब-धोएब आ कि कपड़ा पहिरब छोड़ि देलियै, वा बिसार गेलियै?’
‘धिया-पुताक घर मे, आई कुंड बी सो फ्रैंक …’
‘व्यर्थ इल्जाम द’ रहल छी। फ्रैंकनेसक माने ई नञि जे अहाँ हमरा कोरा मे बैसेने रहू सभ समय। फ्रैंकनेस माने छै फुल व्यवहारक, फुल अप्रोचक फ्रैंकनेस। अहाँ से फ्रैंक नञि भेलहुँ, नतीजा हम नञि भ’ सकलहुँ, नतीजा धिया-पुता सभ नञि भ’ सकल।’
‘धिया-पुता के त’ बड्ड नीक जकाँ राखलहुँ। बेटीयो जीन्स आ मिनी पहिरि क’ घूमल, फ्रेंड्स सभक संगे सिनेमा गेल, पार्टी कएल, कहियो टोकारा नञि केल।’
‘मुदा, कहियो फ्रैंक भ’ क’, खुलिक’ गप्प-सप्प सेहो त’ नञि कएल। एकदम फॉर्मल फैमिली बनिक’ रहि गेल अपन परिवार। ई हमर कहबा नञि, अहाँक बेटीयेक कहब अछि।’
‘अही स’ सभ किओ सभ किछु कियैक कहैत अछि। हमरा स’ त’ आइ धरि किओ किछु नञि कहलक?’
‘अहाँ से मोके कोम्हर देलियै? तैं त’ कहलहुँ, बेहद फॉर्मल फैमिली।’
‘चलू छोड़ू, आब फेर स’ शुरू करब जिनगी – सभटा शौख पूरा क’ देब।’
‘जिनगीक ओ बीति चुकल 30 साल आ तीस वर्षक पल-पल पहिने घुरा दिय’।’
‘जे भ’ सकै छै से कहू।’
‘त’ कहू जे भन्सा की बनाबी? छीमीक खिचड़ी कि छीमीक परोठा।’
‘आब जे अहाँ खुआबी। बजला पर कहब जे हम अहाँ के मौके नञि देइ छी।’
‘से त’ कहबे करब। अपरोक्ष रूप स’ अहाँक पसीन-नापसीन पूरा घर पर हावी रहलै।’
‘से कोना?’
‘चलू, भन्से से शुरू करी। अहाँ के सौंफ देल मलपुआ पसीन नञि, इलाइची देल खीर, सेवई पसीन नञि। आ हमरा आओर के ओ सभ बड्ड पसीन। हमरा बिन सौंफक पुआ आ बिनु इलाइचीक खीर सेवई बनेबाक आदत पार’ पड़ल।’
‘त’ ई त’ नञि कहलहुँ जे अहाँ आओर नञि खाई।’
‘ईहो त’ नञि कहल जे ठीक छै, कहियो-कहियो हमहूं सौंफ-इलायचीबला पुआ, खीर, सेवई खा लेब, तहन ने बुझितहुं? आ अपना स्वादक अनुसारे अलग स’ चीज बनाबी, ई कोनो जनीजात स’ पार लागलैये जे हमरा स’ लागितियैक।’
‘अच्छा, आगां बढू।’
‘बढ़ब, पहिने भन्सा चढ़ाइए आबी।’
‘आइ उपासे पड़ि जाइ त’ केहेन रहत। तखनि स’ अहाँक मुंह स’ भानस-भानस सुनि क’ कान पथरा गेल आ पेट अफरि गेल।’
‘उहूँ! एखनि त’ डिनर गोल क’ देब आ अधरतिया के हाँक पाड़ब जे हमरा भूख लागलए। उठू, किछु अछि बनल त’ दिय’। किछु नञि अछि त’ ऑमलेटे ब्रेड सही।’
‘जाऊ तहन, जे मर्जी हुअए, करू।’
‘हे, हम एखने गेलहुँ आ एखने एलहुँ। ताबति अहाँ बउआक ई मेल पढ़िक’ ओकरा जवाब पठा दियऊ।’
‘हँ, ओहो लिखलकए जे बड्ड नीक लागि रहलए। अपन देश स’ एकदम अलग, सभकिछु एकदम व्यवस्थित। मर्यादित, संतुलित। आखिर अमेरिका छियई ने। धन्न कही आईटी बूम के जे बच्चा सभक रोजगारक नव अवसर भेंटि रहल छै। भारतीय कंप्यूटर इंजीनियर्स के कतेक डिमांड छै फॉरेन कंट्री मे। देखबै जे दस मे स’ तीन टा इंजीनियर अमेरिका त’ आन आन देशक रूख क’ रहल अछि।’
‘प्रतिभाक पलायन थिकै ई। इंर्पोटेस ऑफ टेक्नॉलाजी संगे इंपोटेंसी ऑफ अवर टैलेंट छै। बाहरी टेक्नॉलॉजी पर बिढ़नी जकाँ लूझै छी। ओ सभ रोटी देखबैत अछि, हम सभ कुकुर जकाँ बढ़ि जाइ छी।’
‘अहाँक बेटो बढ़ल अछि, से जुनि बिसरी।’
‘हम इन जेनरल कहि रहल छी। अपन देशक त’ ई स्वभावे बनि गेल छै, घरक जोगी जोगड़ा, आन गामक सिद्घ। इंटर्नल टैलेंट के पहिचान’ लेल, रिकग्नाइज कर’ लेल पहिने कोनो बुकर प्राइज, ऑस्कर अवॉर्ड, नोबल प्राइज चाही, नञि त’ सभ किओ फ्रॉड, धोखेबाज …’ अपने ओहिठां त’ लोक आओर एतेक तरहक एक्सपेरिमेंट करैत अछि। लोक कतेक महत्व दइत छै।’
‘से सभ त’ छै। ई नियति हमही आओर बनाक’ राखल अछि। तैं त’ आइ अनिमेष हमरा आओर लग नञि अछि। अमेरिका मे अछि। पता नञि कहिया घुरत?
‘आ जौं नञि घुरलै आ ओम्हरेक मेम ल’ आनलक तहन?’
‘तहन की? अहाँ सासु पुतौहु रार मचाएब। हमर काज त’ आशीर्वाद देबाक धरि अछि। से भूमिका हम निबाहि लेब।’
‘त’ सभटा सासु अपना पुतौहु स’ रारे मचबै छै? हमही दुनू सासु-पुतौहु मे ई देखलहुँ कहियो? आब अनिमेष जकरा स’ विवाह करौ, हमरा लेल धन सन! हमरा कोना आपत्ति नञि!’
‘भन्सा भ’ गेल त’ दइए दिय’। खाअक’ सूतब।’
‘एतेक जल्दी?
‘थकान लागि रहल अछि।’
‘पहिल बेर एतेक बतियौलहुँए ने? हरारति त’ लागबे करत। घरवाली संग एतेक बेसी गपियेनाइ कोनो मजाक बात छै!’
‘हे, एके प्लेट मे निकालू ने।’
‘आई एतेक प्रेम कथी लेल ढरकि रहल अछि?’
‘सभटा पिछला हिसाब रफा-दफा कर’ लेल।’
‘त’ पुरनका तीस बरख पहिने घुराऊ!’
‘से त’ नञि भ’ सकैय’, मुदा पुरना तीस बरख के अगिला तीस बरख मे मिलाक’ जिनगीक ताग के आओर मजबूत करबै। आऊ! बैसू एम्हर। हे, लिय। हमरा हाथे खाऊ!’
‘हमरा डर होइयै जे हमर हार्ट फेल नञि भ’ जाए।’
‘नञि होएत। आ हेएबो करत त’ हमहूँ संगे-संगे चलि जाएब। हे, लिय’ ने। खाऊ ने। अहींक हाथक बनाओल त’ भोजन अछि।’
‘हम अपने हाथे खाएब। दोसराक हाथे खएला स’ पेट नञि भरत।’
‘मोन भरत। आई पेट भर’ लेल नञि’, मोन भर’ लेल खाऊ।’
‘तहन त’ आओरो नञि खाएब। मोन जहन भरिए जाएत त’ जीबि क’ की करब? मोनक अतृिप्त त’ जिनगी जिबाक बहाना होइ छै।’
‘ई सभ फिलॉसफी छोडू आ खाना खाऊ। अरे, अरे, दाँति कियैक काटलहुँ।’
‘भोजन में चटनी नञि छल नें, तैैं…’ हे, भ’ गेल। आब नञि खाएल जाइत हमरा स’।’
‘ठीक छै। चलू तहन।’
‘कत’।’
‘चलू त’ पहिने। आई चलू, हमर कन्हा थाम्हि क’ चलू। अइ्‌ दुनू बाँहक घेरा मे चलू।’
‘व्हाई हैव यू बीकम सो रोमांटिक?’
‘कहलहुँ ने जे पछिला तीस बरख के अगिला तीस बरख मे शामिल कर’ जा रहल छी। हे, इमानदारी स’ कहब’, अहां के नीक लागि रहलए हमर ई स्पर्श!’
‘कोनो भावना नञि उमड़ि रहलए। अहाँ ईमानदारीक प्रश्न उठाओल, तैं कहि रहल छी।’
‘आब?’
‘ऊँहूँ।’
‘आब? मोनक दरवज्जा बंद क’ क’ नञि राखू। कनेक फाँफड़ि छोड़ि दियौक। भावनाक बयार के घुस’ दियौक।’
‘हमरा रोआई आबि रहलए।’
‘त’ कानि लिय’ अई ठाँ, हमर छाती पर माथ राखिक’। मोन हल्लुक भ’ जाएत।’
‘बेर-बेर सोचना आबि रहल अछि पुरना दिन। तखन कियैक ने … एतेक व्यस्तताक की माने भेलै जहन हमही दुनू अपना के अपना दुनू स’ अलग ल’ गेलहुँ।’
‘माने छलै ने? अपन जिनगी बनेबाक। धिया-पुताक जिनगी बनेबाक। ई सभ लक्ष्य छल आ अर्जुन जकाँ हम सभ ओहि लक्ष्यक प्राप्ति लेल चिड़ैक आँखिक पुतली धरि तकैत रहलहुँ।’
‘हमर पलक मिझा रहलए।’
‘मिझाए दियऊ। बन्द पलक, फुजल अलक। एखनो अहाँक केश ओतबे नरम, आ मोलायम अछि।’
‘आब त’ सभ टा’ झड़ि गेलै।’
‘जे छै से बहुत सुंदर छै। आह! मोनक कोन्टा मे ठेलि-ठूलि क’ राखल सुषुप्त भावना सभ… जेना छोट-छोट फूँही बनिक’ रोम-रोम के भिजा रहल अछि। रोम-रोम भुलुकि रहल अछि। ई की अछि?’
‘अहसास। हमहँू अई अहसासक फूंही मे भीजि रहल छी। अहाँक तन स’ माटिक सोन्हपनि आबि रहल अछि। थाकल दकचाएल जिनगी मे एकगोट नव संचार आबि रहलए। नस-नस वीणाक तार जकाँ झंकृत भ’ रहलए। सृष्टिक ई अमूर्त आनंदक क्षण अछि, दिव्य, भव्य, अलौकिक !’
‘एक-एक साँस स’ बजैत स्वर्गीय संगीत। आइ धरि कहियो नञि अनुभव कएने छलहुँ। आई अनुभव क’ रहल छी।’
‘आऊ, अई अनुभव सागर मे डूबि जाइ- गहीर, आओर गहीर, कामनाक सीपी फोली! भावनाक मोती बटोरी। आसक ताग मे ओइ मोती के गँूथि माला बनाबी आ दुनू एकरा पहीरि ली।’
‘जिनगी एतेक सुंदर नञि लागल पहिने कहियो।’
‘मौने मुखर रहल सदिखन। आई शब्द मौनक देबाल के ढाहि रहल अछि।’
‘ढह’ दियऊ ! सभटा वर्जना ढह’ दियऊ !’
‘जिनगीक बदलइत रूप किओ नञि बूझि सकलए। अहाँक रोम-रोम स’ झरैत ओस बुन्न ! एक-एक श्र्वास स’ अबैत जुही, गुलाब, मौलश्रीक सुगंधि। आऊ, डूबि जाइ अइ मे!’
‘———‘
‘———‘
‘———‘
‘———‘
‘जिनगी पहेली अछि, बुझौअल अछि।’
‘ऊँहूँ! जिनगी जिनगी अछि।’
‘माने?’
‘माने की? एखनि धरि मतलबे बूझ’ मे लागल छी? धुर जाऊ! अहाँ बड्ड ओ छी।’
‘ओ छी, माने केहेन छी?’
‘ओ माने ओ। आओर किछु नञि!’
‘अहूँ एकदम नेन्ना जकाँ करै छी।’
‘नेन्ना त’ बनिये गेलहुँ। अहाँ नञि बनलहुंए की?’
‘बनलहुँए ने।’
‘तहन?’
‘तहन की?’
‘तहन माने जिनगीक रूप देखी आ मस्त रही।’
१. रिस्क आऽ मैथिल- ब्रज कु. कर्ण 2. कोना बचत मिथिलाक स्मिता ?- ओमप्रकाश झा

बी.के कर्ण(1963-),पिता श्री निर्भय नारायण दास गाम- बलौर, भाया- मनीगाछी, जिला-दरभंगा। पैकेजिंग टेक्नोलोजीमे स्नातकोत्तर आऽ यू.एन.डी.पी. जर्मनी आऽ इग्लैण्डक कार्यक्रमक फेलोशिप, २२ वर्षक पेशेवर अनुभव आऽ २७ टा पत्र प्रकाशित। डायगनोस्टिक मिथिला पेंटिंग आऽ मिथिलाक सामाजिक-आर्थिक समस्यापर चिन्तन। सम्प्रति इन्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग, हैदराबादमे उपनिदेशक (क्षेत्रीय प्रमुख)।
रिस्क आ मैथिल
मुद्दा व्यवसाय
विकसित देश वा विकसित राज्यक पाछु यदि सुक्ष्म रूपसॅं देखु तॅं भेटत जे ओहि क्षेत्रक व्यवसाय विकासक मुल कारण अछि। मिथिलामे विद्वान वा ज्ञानी मैथिलक कमी नहि। व्यापारी वर्ग नोइसो बराबरि नहि।
मैथिल व्यापारो करताह ?
सिन्धी़ माड़वारी आ पंजाबी समाज मिथिलामे अपन व्यवसायमे मैथिल जकॉं संस्कार अपनोने के साथ केवल ५० सालमे बढ़िया धाक जमा लेलाह, परन्तु हम मैथिल जे छी जे डींग हकैसॅं फुर्सतेऽ नहि भेट रहल अछि।
मैथिल मिथिलामे की करताह ?
मिथिलामे किछु मैथिलके देखबाऽ मे आयत जे़ मिथिलाक सिन्धी़ माड़वारी आ पंजाबी के व्यवसायमे नौकरी करताह।
हिन्दी अखबार मॉंगि कए पढ़ताह़ परञ्च मिथिलाक विद्वान वा ज्ञानी अखबार प्रिन्ट आ बाजार मे आनबाक जोखिम नहि ऊठैऽताह।
मिथिलामे चाहक दुकान पर प्रतिदिनक दिनचर्यामे लालु के लालूवाणी पर अखण्ड बहस करताह।
मिथिलामे सुइदसॅं किछु मैथिल सुइदखोर व्यवसायमे वृद्धि केलाह हऽ। कोनो नियमके पालण नहि़ कए रहल छथि। अपन नियम बना कऽ अपराध मे रमल छथि। मिथिला बैंकक शुरआत होए अपराधी सुइदखोर मैथिल के झेलनाइ एकटा बढ़ पैघ अपराध अछि।
!!!!Great Risk !!!!
मुदा बहुतो अछि़ पर रिक्सो सॅं ज्यादा भयावह।
सन २००१क जनगणणा के अनुसाऱ मिथिलाक आबादी करीब ६ करोड़ छल। जाहिमे़ व्यवसायिक वर्ग २ प्रतिशतो कम।
बहुतोसॅं पुछलहु़ जे एतबा प्रतिशत कियाक कम अछि़ परञ्च एकर कारण की से नहि जानि सकलहुं।
मिथिलासॅं आयात आ निर्यातक बातेऽ छोड़ू, व्यापार तॅं बद सँ बदतर
मिथिलाक पाँच जिलाक केस स्टडी:

पांचो जिलाक कुल आबादी सन २००१ जनगणनामे करीब एक करोड़ अठाइस लाख छल। जनसंख्या अनुमानित ५ वा ७ प्रतिशतसॅं प्रतिसाले वृद्धि भऽ रहल अछि। एकटा बात महसूस भऽ रहल अछि जे मिथिलामे गरीबी कम भेल अछि। यदि़ सन १९८० सॅं पहिने हरेक गॉवमे हरेक दिन ४ या ५ घरमे उपवास रहैत छलैक़ परञ्च से उपवास आब गरीबीक उपवास पुजा पाठक उपवास होइत अछि।
मुदा भौतिक सुविधाक पिछड़ापन तॅ पारकाष्ठा पर अछि। जिनगी भगवानक भरोसे।
पांचो जिलाक मैथिल पर यदि ध्यान देल जाए तॅं एकटाक सदस्य परिवारमे नौकरी करयबाला बॉकी आश्रित सदस्य किछु नहि करयबाला बल्कि गप छटय बाला आ शान बघारय वाला।
पर आश्रित भेनाए अपनेमे एकटा रिक्स एहन जे भावुक जरूरतसॅं ज्यादा आ कर्मठहीन ज्यादा बनाबैत अछि। !!!!ग्रेट रिस्क !!!!

जनसंख्याक वृद्धि मानु जे कष्टक पहाड़। हर क्षण हरेक दिस स्थिति दयनीय हेबे कड़त।
मिथिलामे मैथिल रिक्स लेताह ?
मिथिलामे मैथिल तॅं अपन जिनगीक रिक्स लेबाऽमे सर्वोपरि छथि। जेना की़ सोचु ऩदि के ऊपर जड़ जड़ हालमे पुल ओहि पर खचाखच बस़ आ रेल गाड़ी जाहिमे छत सेहो भड़ल। फोटो देखल जाए।

सोचु कनिऽ जे जिनगी आओर मौत के बीच केवल एकटा रिक्स फैक्टर अछि।
मैथिल जिनगीक रिक्स हर क्षण।
मिथिलामे जिनगीक रिक्स बड़ आसान पऱ व्यापारक रिक्स बड़ कठिन अछि।
शेष मंथन अगला अंकमे।
2. कोना बचत मिथिलाक स्मिता ?- ओमप्रकाश झा

ओमप्रकाश झा, गाम, विजइ, जिला-मधुबनी।

कोना बचत मिथिलाक स्मिता ?

आई जहन अपना सबहक चहुतरफ़ा विकास भ रहल अछि त हम सब अपन महत्वांक्षा के पाबि के अत्यधिक प्रसन्न भ रहल छी,हेबाको चाही। मुदा कि महत्वाकांक्षा के रथ पर सवार भ कअ हम सब कतेक मगरुर नहि भ गेल छी जे अपन स्मिता अपना स कोसो दूर पाछु छुटि रहल अछि। मुदा तकरा समेतनिहार कियो नहि अछि। आय अपना अहिठामक युवा वर्ग अत्यधिक दिग भ्रमित भ रहल अछि,ओकरा कियो सहि मार्ग दर्शक नहि भेट पाबि रहल अछि। अखुनका समय कतेको पाबनि तिहार क महिना आबि गेल अछि आ कतेको गाम मे दुर्गा पूजा के अवसर पर सास्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कैल जायत अछि मुदा किछु वर्ष पूर्व मे चलु-आइ सअ आलो पहिले हर गाम मे युवक सब नाटक खेलाय छलाह,महिनोतक रामलिला ले आयोहन होयत छल,ओ सब आय कतह चलि गेल छथि। कि आर्केस्ट्रा आ परोसी (तवायफ़) के नाच मे ओ सब हरा गेल छथि। परोसजी के कार्यक्रम इ असर पड़ैत अछि जे मंदिरक कार्यकर्ता सब सेहो एकर मजा उठाबअ लागैत अछि। इमहर मौका पाबि कुकुर,बिलाड़ि मैया के प्रतिमा के सेवा मे लागि जाइया। देखने हैब जे कुकुर मुर्ती के चाटि रहल अछि। उमहर हम सब अपन तीन पुस्तक (पुरुखा) संग माने बाप- बेटा आ पोता समेत बाईजी पर पाई लुटाबय के अवसर के नहि गवांबैत छी। अधिकतर गोटे अहि स अवगत होयब।
दोसर कतअ जा रहल अछि अपन संस्कार? हयउ,आब शायद कतौ महिनो तक चलैबला रामलिलाक तम्बु गाम मे देखायत होयत? हम अपन छोट सनक अनुभव अपने संग बांटअ चाहब। पहिले रामलीला के टोली के कियो माला (मने एक दिनक भोजन) उठेनिहार नहि होइ,माने इ जे मात्र पेटे पर जे टीम सबहक मनोरंजनक वास्ते तैयार रहैत छल,ओकरा अपन समाज नकारि देलक मुदा आखन प्रायःहर छोट पैघ शहर अतह तक कि देशक राजधानी मे दुर्गा पूजा के अवसर पर लाखो आदमी रामलीलाक खुब लुफ़्त उठबैत छैथ। कतो कतो तअ रामलीला देखै के लेल टिकट सेहो लागैत अछि,कि हम झूठ बाजि रहल छी। एना मे दु टा गप्प जे हमरा स्पष्ट भेल-पहिल जे लोक के ओहि प्रति ओ रुझान नहि रहलन्हि जे कि बाईजी के नाच मे वा कौआल-कौआली मे जे कि राति भरि सबके गरिया क चलि जाइया आ हजारो आदमी मंदिरक आस पास ततबाक गोत गोबर कअ दैत छथि जे अगिला किछु महिना तक उमहर नहिये जाय मे कुशल बुझैत छी। अहि स गामक कलाक ह्रास खूब पैघ स्तर पर भेल अछि,सब गोटे बुझिति अंजान छी।
तेसर आ गंभीर गप्प इ जे समाज मे जे भाई चारा प्य््रव मे छल कि ओ खत्म भ गेल अछि। कि अपन समाज ततेक गरीब तअ नहि भ गेल अछि जे आहिठम दस गोटे के भोजन करेनाय आय कठिन भ गेल अछि। एकर एकटा छोट सनक उदाहरण हम देबअ चाहैत छी जे जौं अंहा सब मे स किछु आदमी दिल्ली-बंबई स कमा क मास दिनक लेल गाम जायत होय तअ अनुभव करैत होयब जे गाम मे बीतल समय के संगे संग अपनेक मेंटिनेन्स पर होय वला खर्च मे कटौति सेहो सबगोटे व्यक्तीगत अनुभव के गहराई स देखु। अखन बस अतेबैक।
इति
महाप्रकाश (१९४६- ), जन्म वनगाँव, सहरसा। १९७२ ई. मे पहिल कविता संकलन “कविता संभवा”।
आधुनिक मैथिली कथा-साहित्यमे एकटा नाम जे सर्वाधिक स्वीकृत आ प्रसिद्धि पौलक अछि, ओ थिक- सुभाष चन्द्र यादव। सुभाषक कथा-यात्रा पर दृष्टिपात करैत ई लगैत अछि जे ओ कथाक अन्वेषण कयलनि अछि। प्रायः लेखनक आरम्भ करिते ओ अनेक स्थान आ अनेक भाषाक यात्रा शुरू कयलनि। ई यात्रा वा भटकाव, जे हुनक नियति सेहो रहल अछि, हुनका अनुभव सँ लैस कयलक, तीक्ष्ण दृष्टि देलक आ अपन समकालीन सँ अलग विशिष्ट सांचामे ढालि देलक।
चित्र श्री सुभाषचन्द्र यादव छायाकार: श्री साकेतानन्द
ओ एकटा अलग भाषा-संस्कार, शब्द-संस्कार ग्रहण कयलनि जे अपन स्वरूप मे व्यासजन्य अछि। लेकिन ई स्वरूप कतहु सँ ओझराबैत नहि अछि, अपितु कलाक सहजता आ सहजताक कला केँ विलक्षण ढंगेँ उद्घाटित करैत अछि। ओ अपन कथा मे परिवेशक कोनो पैघ आयोजन कि पसारमे नहि फँसैत छथि; हुनक अनुभवसिद्ध भाषा, अविकल्प शब्द सहजहि अपेक्षित परिवेश आ यथार्थ केँ एकटा पैघ फलक दऽ दैत अछि। सुभाष कोनो राग-विरागक उत्तेजनामे जतेक लिप्त छथि, ओतबे निर्लिप्तो। सुभाषक जीवन आ साहित्य ऊपर सँ जतेक शांत आ स्थिर बुझाइत हो, भीतर सँ ओतबे अशांत आ अस्थिर अछि। हुनक अन्तर्दृष्टि स्याह आ सफेदकेँ निर्ममता सँ उद्घाटित करैत अछि। हुनक रचनाकार समयक समुद्र मे डूबि-डूबि मोती-माणिक ताकि अनैत अछि। एहि तरहेँ सुभाषक लेखन यथार्थक अमूल्य दस्तावेज बनि जाइत अछि।

२.स्वरक माला गँथती अंशु- जितेन्द्र झा

हम सभ अपने भाषाकेँ हेय दॄष्टिसँ देखैत छी तें हमर भाषासाहित्य, गीतसंगीत आ संस्कृति पछुआ रहल अछि । ई कहब छन्हि अंशुमालाक । अंशु दिल्ली विश्र्वविद्यालयमे संगीतमे एम फ़िल कऽ रहल छथि। मैथिली गीत संगीतकेँ गुणस्तरीय बनएबाक लक्ष्य रखनिहारि अंशु मैथिलकेँ अपन भाषा-संगीत प्रतिक दृष्टिकोण बदलबापर जोड दैत छथि।
अंशुमाला संगीतक विद्यार्थी छथि । दिल्ली विश्र्वविद्यालयमे एम. फ़िल.मे अध्ययनरत अंशुक माय हिनक पहिल गुरु छथिन्ह। ई माय शशि किरण झासँ मैथिली लोक संगीतक शिक्षा लेने छथि । तहिना एखन किछु बर्षसं ई रेडियो कलाकार हॄदय नारायण झासँ संगीत शिक्षा ल’ रहल छथि । बाल कलाकारक रुपमे सीतायण एलबममे गाबि चुकल अंशु बिभिन्न रेडियो कार्यक्रम आ स्टेज प्रोग्राममे सहभागी भ’ क’ मैथिली गीत गाबि अपन स्वरसं प्रशंसा बटोरने छथि ।
एखन दिल्लीमे रहिकऽ संगीत साधनामे जुटल अंशु दिल्लीमे आयोजित विभिन्न कार्यक्रममे मैथिली गीत संगीत परसल करैत छथि ।
मैथिली भाषीमे अन्य भाषाक गीत संगीतक प्रति बढैत रुचि मैथिली गीतसंगीत लेल हितकर नञि रहल हिनक कहब छन्हि । दिल्लीमे आयोजित एकटा कार्यक्रमकेँ याद करैत ई कहैत छथि जे जाहि कार्यक्रममे लगभग ८ हजार मैथिल रहथि ताहि कार्यक्रममे चाहियोकऽ मैथिली गीत नहि गाबि सकलहुं । ओहि कार्यक्रममे भोजपुरीक डिमाण्ड पुरा करैत अंशुके मैथिली डहकन गेबाक लेल मोन मसोसिक’ रह’ पडलनि । मुदा अंशु स्वीकारैत छथि जे गायक स्रोताक रुचिक आगु विवश होइत अछि, ‘जनता जे सुनऽ’ चाहत हमरा सएह गाबऽ पडत अंशु कहलनि । पटनामे मैथिली गीत गाबिक स्रोताक तालिक गडगडाटिसं खुश हएबाक आदति पडि चुकल अंशुकेँ दिल्लीमे आबिकऽ मैथिल भाषीक बदलल सांगीतिक स्वादसं अकच्छ लागि गेल रहनि ।
मैथिलीमे लोकप्रिय धुनक अभाव रहबाक बात अंशु किन्नहु मान’ लेल तैयार नहि छथि । धुन वा लयक अभाव नहि, स्रोता एहिसं अनभिज्ञ रहल हिनक दाबी छन्हि। मैथिली संगीतकर्मी एखनो आर्थिक समस्यासँ लडि रहल छथि, अंशु कहैत छथि । एहिक अभावक कारण प्यारोडी गीतक सहारा लेबालेल संगीतकर्मी बाध्य बनल अछि । मौलिक गीत,संगीतमे लगानीकर्ताक अभाव रहलासं सेहो प्यारोडी संगीत लोकप्रिय भऽ रहल अछि, हिनक कहब छनि । ‘सभसँ पैघ कमजोरी स्रोतामे छै कलाकार तँ सभ ठाम हारल रहैया’ प्यारोडी प्रेमीपर रोष प्रकट करैत अंशु कहैत छथि । मुदा मैथिलीमे स्तरीय गीत संगीत स्रोताकेँ भेटक चाही से अंशुक विचार छन्हि । मैथिली लोकरंग मन्चद्वारा दिल्लीमे आयोजित कार्यक्रममे स्रोतासँ भेटल वाहवाहीक उदाहरण दैत अंशु कहैत छथि जे स्रोताक मनोरन्जनक लेल स्तरीय कार्यक्रम सेहो हएबाक चाही ।
मैथिली रंगकर्ममे लगनिहारकेँ उचित सम्मान तक नञि भेटि सकल, अंशुमालाक अनुभव छन्हि । मैथिली कलाकारकेँ आब’ बला दिनमे बहुत मान सम्मान भेटक चाहि, हम इएह चाहैत छी अंशु कहैत छथि । मैथिली संगीतकेँ एकटा ऊँचाई पर पंहुचएबाक लक्ष्य रखनिहारि अंशु मैथिली रंगकर्ममे एखनो लडकी लेल बहुतो कठिनाई रहल बतबैत छथि ।
अंशु आगु कहलनि-मैथिल समाजसँ जाधरि कलाकारकेँ सम्मान नञि भेटतै ताऽ धरि एहि क्षेत्रमे लडकी अपन प्रतिभा देखाब’ लेल आगु नञि आओत।

(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।(c) 2008 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ’ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ’ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ’ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ’ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु

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