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विदेह १५ दिसम्बर २००८ वर्ष १ मास १२ अंक २४- part ii

In विदेह १५ दिसम्बर २००८ वर्ष १ मास १२ अंक २४ on जनवरी 13, 2009 at 5:14 अपराह्न

1.महेन्द्र कुमार मिश्र2. ज्योति
नेपाल रल्वेनक दुरावस्था आ सरकारक कानमे तेल
– महेन्द्र कुमार मिश्र, पूर्व सांसद
हमरा सब जकाँ भूपरिवेष्ठिरत मुलुकमे यातायातक चारि प्रणली मध्ये् जल मार्गक विकाशकेँ कल्पशना तत्काहल केनाई सम्भाव नहि । वायुमार्ग अति महग यातायातक साधन भेलाक कारणे आम नेपाली जनता, सर्वसाधारणकलेल सम्भनव नहि अछि । सडक मार्ग आशा अनुरुप्नधहियो होइत बहुतहद धरि निर्माणक पूर्वाधार तैयार करबाक चेष्टाभ अवश्यह कऽलेलगेल अछि । अूदा विडम्व‍ना केहन, विश्वकक सबसँ सस्ते, आरामदामयी, सुरक्षित एवं लोकप्रिय यातायात रेल्वेयसेवा प्रणाली नेपालसँ विस्थानपित होयबाक अवस्थापमे अछि । इन्टकरनेट एवं कम्युषित टरक युगमे जनसँख्या‍क वृद्धि भऽरहल अवस्थाथमे एकठामसँ दोसर ठाम शीघ्रातिशिघ्र पहुँचवाक आतुरता, ताहिक लेल रेलसेवा सनक आरामदायी आ सुरक्षित आधुनिक प्राविधिक सुसम्परन्‍न रेल मार्ग उपेक्षित एवं लावारीश अवस्थाेमे अछि ।
अखनो सँसारक दूर्लभ ईन्जिन मार्टिनवर्नद्धारा निर्मित न्याारेगेज रेल्वेि ईन्ज न नेपालमे उपलब्धम अछि, मूदा संचालनमे नहि अछि । बेलायती शासनकालक रेल्वेआ ईन्जटनसन १९३७, विक्रम संवत१९९४ साल सँ संचालित सेवा आई पूर्णरुपेण उपेक्षित बनल अछि । बहुतो नेपाली जनताकेँ जानकारी नहि हैतनि जे नेपालोमे रेल संचालनमे छैक ।१९९०मे सर्वप्रथम सर्भे कऽ १९९२ सँ निर्माण काज प्रारम्भेभेल विदेशकलेल काठ ढुवानीमे प्रयोग कायलगेल, जखन नेपालक हरियोवन समाप्ता होबऽलागल तत्पकश्चाात ई रेल सेवा मानव सेवामे प्रयोग होवऽलागल । आजुक परिवर्तित अवस्थानमे आवागमनक साधनकेँ रुपमे स्थातपित भेल आजुक परिवर्तित अवस्थाेमे आवागमनक साधनकेँरुपमे स्था पित भेल । वैज्ञानिक युगमे अन्यम विकशित देश अचम्भिपत सवकाश कएलक, भारतमे आजुक दिन सबसँ पैघ रेले मन्त्रा लय छैक । भारतक आर्थिक्‍ रीढक रुपमे रेल्वेव स्थाेपित अछि । जापान, फ्रान्सआ आदि देशक रेल सेवामें आश्चार्यजनक प्रगति कएलक अछि । एक घण्टाढमे ४०० किलो मिटरक दूरी तय करैत अछि । भारतमे वेलायति साम्राज्यमद्धारा रेलसेवा प्ररम्भक आ विस्ताढर भेल । प्रय ओही समय वि.सं. १९९४मे युद्ध शम्शेमरक शासनकालमे नेपाल सरकार रेल्वेे( एन.जे.जे.आर.) नेपाल जनकपुर जयनगर रेलसेवा आ (एन.जी. आर.) भारतक रक्सौसल होइत वीरगँज अमलेखगँज तक साचालित रहै, मूदा बहुत पहिने सँ सेवा बन्दआ अछि । आब मात्र ५१ कि.मि. मार्ग जयनगर विजलपुरा सँचालित सेवा जनकपुर सा विजलपुरा, २०५९ साल अषाढ २३ गते आएल भिषण बाढिक प्रकोप सँ बिग्धील नदी पुल क्षतिग्रस्तर भेने यहो रेल सेवा पूर्णरुपेण बन्दा भऽ २९ कि.मि.मे मात्र सिमीत अछि ई सेवा । सरकारक अकर्मन्यदता, लापरवाही तथा उपेक्षाक कारणे लोहाक लीक माटि सँ भरल अछि, घासपात जनमिगेल अछि, ठाम ठाम निर्मित यात्री प्रतिक्षालय सेहो ध्वास्तँ भऽरहल अवस्था छैक । रेलक जमीन सब सेहो अतिक्रमण मात्र नहि लिकेपर तरकारी बजार छानल गेल अछि, मूदा सरकार आ सम्ब्न्धिसत निकाय रेल प्रशासनक ध्याान एम्हपर नहि देखल जा रहल अछि । वेर वेर जानकारी आ तथादा कएलाक बादो कोनो सुनवाइ नहि भऽरहल जनताक सिकायत रहल अछि ।
देशक ऐतिहासिक धरोहर एवं तराई मात्र नहि नेपालक गौरव रेलसेवा जीर्ण अवस्थातमे अछि । बुझना जाइत अछि जे यहि सेवाकलेल कोनो मायबाप नहि रहल । अखन धनुषा महोत्तरी धरि ई रेलसेवा सँचालित भेल अवस्थाछमे एहि मार्ग सँ जतेक यात्री आवत जावत करैत छल ताही अनुपातमे आन कोनो यातायात एवं सवारी साधन सा आवत जावत नहि होइत अछि जकर सत्य् तथ्यत यात्रीक सँख्याु सँ पुष्टीा होइत अछि । पर्यटनक युगमे रेलसेवा एनो उपेक्षित रहल ताहिसँ तराईवासीके जनमानसमे केहन भावना उत्पँन्नय हायत ?
असमान भेदवाभ सँ ग्रसीत मानल जाए की नहि ? आई जौं एहन छोट समस्यान पहाड मे रहितै तहन की एहीना उपेक्षित रहैत रेल सेवा ? जनकपुरधाम धार्मिक्‍ स्थसल तथा पर्यटनकलेल आवऽबला यात्री मध्येक सर्वाधिक भारतिीय नागरिक रहैत अछि, एकदिनमे कमसँ कम पाँच छौ हजारक सँख्याममे यात्री आवत जावत करैत अछि । दूर्भाग्यावस महोत्तरी जिल्लाकक मध्य क्षेत्रमे एकमात्र यातायातक साधन रेले अछि, ओहो अखन बन्दय अछि । अन्यन यातायातक सुविधा नइ रहल क्षेत्रक ई सेवा वन्द भेने जनजीवन कतेक प्रभावित हेतै तकर अनुमान सहजहिँ कायल जा सकैया । अशक्त विमारी, उद्योगव्यामपार, दैनिकजीवनक उपभोग सामग्रीक आभाव तथा क्रय विक्रयक समस्याा सा एम्हवरके जनमानस बहुत प्रभावित भेल अछि । प्राय प्रत्येजकदिनक ई समस्याककेँ कारण रेलसेवा अभिषाप सिद्ध भऽरहल अछि । नयाँ नेपालक निर्मा०ँम्‍ै ज्‍ू६ल्‍ द्यल्‍ त्ँ्ेलस ज्न्ग‍ प््र.तिनिधि सबहक पूर्ण दायित्वभ होइत छन्हिह, की त रेलसेवा फेर सा सञ्चा लन कएल जाय या रेलसेवा बन्दद कऽ वैकल्पिेक मार्ग निर्माणमे ध्यानन देथि । गणतन्त्रिस्थाापनाक महा अभियानमे एहि क्षेत्रक कम योगदान नहि रहल । राजनीति योगदान करऽबला बीर शहीदक पुण्यिभूमि आई उपेक्षित अछि । आर्थिक योगदानमे सेहो रेलसेवा उल्लेनखनिय काज बरबामे सहायक रहल अछि ।
दाता मित्र राष्ट्र्क सरकार तथा जनप्रतिनिधिद्धारा रेलसेवा विस्तालर आ सुव्यकवस्थिकत करबामे उत्सारहजनक आश्वाछसन सेहो भेटल,मूदा अखन धरि ई काज कियाक नहि सफल भऽरहल अछि ? भारतीय जनता, राजनीीत्क्त‍ द्यल्‍? स्ँ्टल्ीज्क् ‍ क्ँअईकर्ता वेरवेर ई सवाल सदन सँ लकऽ सडक धरि उठा रहल अछि, भाषण एवं सार्वजनिक अभिव्यिक्तिस सेहो सँचार माध्यनमसँ जानकारी भेट रहल अछि । तात्काईलिन रेल मन्त्रि रामविलास पासवान, वर्तमान रेल मन्त्रिह लालू प्रसाद यादवजेक अभिव्यँक्तिर सेहो सार्वजनिक भेल अछि कि जयनगर, जनकपुर, विजलपुरा होइत वर्दिबास धरि ब्रोडगेज रेलसेवा विस्ताभर कायल जाएत । भारतीय राजदूतावास सँ सेहो प्रस्ता व आएल कि जनकपुर विजलपुरा रेल्वेरसेवा विस्ताार कऽ काठमाण्डौभ धरि महुँचाएल जाय तकरालेल नेपाल सरकारद्धारा प्रस्ताुप पेश करओ आ ताहिमे भारत सरकार पूर्ण सहयोग करत । किछु साल पूर्व नेपाल भारत बीच रेलसेवा विस्ताररक सन्देर्भमे बिना विष्कार्ष वार्ता भाग भेल एहि वार्ता सा पूर्वो एकटा वार्ता दिल्लीदमे भेल छल । पहिल आ दोसर चरणक वार्तामे सहभागी सरकारक प्रधिनिधिक कथन अनुसार ई वैसार उपलब्धीे मूलक रहल कुटनीतिक माध्यतम सँ निष्क र्षमे पहुँचवाक मे दुनु पक्ष सहमत भेल ,मूदा आश्च र्यक बात जे एतेक वर्ष बित रहल अछि अखनधरिक ब्रोडगेजक बात छारिदी, सँचालित नेरो गेज लिंक आ ३ कडोर लागतक पूल निर्माण क कियाक नहि भऽरहल अछि ।
पंचायतकालमे सेहो जापान सरकार नेपाल रेलसेवाक विस्तािर निर्माण प्रस्तागव रखने छलाह, हुनकर शर्त रहनि जे जापाने सरकारक रेखदेखमे ई काज हायत, मुदा कमिशनक कारणे ओ म्रस्ता व पतन भेल । एमाले सरकारक सभय तत्कारलिन निर्माण तथा यातायात मन्त्रि भरत मोहन अधिकारी जनकपुर रेल्वे आ नेपालक विकाश विषयक गोष्ठीामे हुनकर अभिव्याक्ति् छलन्हिक, जे जनकपुरधाम सनक पवित्र स्थिलक पर्यटकिय विकाशक लेल राष्ट्रि् य सहमतिक आवश्यअकता अछि । निकट भविष्यरमे निर्माण तथा यातायात मन्त्राजलयद्धारा जापान, भारत तथा फ्रान्सट सरकार सपक्ष रेल्वेयसेवाक आधुनिकीकरण एवं विस्ताारकलेल लिखित प्रस्ता्व पठायब जे प्रतिवद्धता जनौने छलाह । नेपाली काँग्रेसक मन्त्रि गणद्धारा वेरवेर निरीक्षण भेल ओ आशाजनक आश्वािसन भेटैत रहल,मूदा समस्या। अखनो यथावते अछि । अवस्थाि दयनिय अछि, पुरान भौतिक सँरचना, रेल्वेद ट्र्याक,स्लीापर, इन्जिनकोच तथा पूलसब जीर्ण अवस्थातमे अछि । कर्मचारी व्यणवस्थाकपन कमजोर रहलाक कारण रेल कम्प नीक आर्थिक अवस्थान सेहो बहुत कमजोर अछि ।
हालहिमे नेपाल आ भारत सरकार बीच भेल सहमति अनुसार जयनगर सँ वर्दीबास धरि ७० किलोमिटर रेल्वे सेवा विस्ता र करबालेल भारतक राइट्स नामक कम्पसनि सन २००७ जुलाईमे सर्भे काज सम्पान्नल कयलक अछि । तत्प्श्चासत भारतीय रेल सरकारक चीफ इन्जिमनियर आ सहायक इिज्नि०यर सबहक टोली पुन सर्वे काज सम्प।न्नप कयलक जे काजक पूर्णता देवऽमे कम सँ कम पाँच वर्ष लागत, मूदा प्रश्नह अछि जे पाँच वर्षक अवधि धरि एहि क्षेत्रक अवस्थाच कि हायत ? यहि अवस्थाँके ध्यालनमे रखैत नेपाल सरकार तत्का ल सँचालित लीक आ पूल निर्माण क रेल सँचालन मे आवओ । बहुत प्रयासकबाद अर्थमन्त्रि ११ कडोर रुपैया देवाक निर्णय कयलथि । यहि प्रयासमे यातायात मन्त्रि क पूर्ण सहयोग रहलन्हिव, मूदा ११ कडोर रुपैया भऽ की रहल छैक ? ११ कडोर मध्येब ५ कडोर जनकपुरसँ पूर्व आ ६ कडोर जनकपुर सँ पश्चि‍म बिजलपुरा धरिक मर्मत निर्माणकलेल छुटियाओल गेल छल तथापि अखन धरि काज प्ररम्भ६क गँधधरि नहि आबिरहल अछि ।
यातायतक प्रणलीमे रेलसेवा एकटा एहन प्रणली प्रमाणित भेल अछि । जे जतेक लम्बाि खूरी धरि विस्ताार करय ततवे वेसी आरामदायी हायत आ सँगहि ओतवे आमदानी होयवाक निश्चिात अछि । सामान ढुवानी, यात्री आवत जावतमे राजश्वमवृद्धिक सँगहि रोजगारीक अवसर सेहो प्राप्त क साथसाथ आहि क्षेत्रक सर्वाङ्गीन विकासक पूर्वाधार सुनिश्चिवत रहत । रेल्वेअसेवा क्रमश रुपान्तारीत होइत संस्था नसँ कम्पेनिमे परिणत भेल ई स्वासयत्तता प्रप्तद कम्परनिमे सात मन्त्रा लयक शेयर अछि, मनोमानी ढँगसँ बिना मूल्यापङ्कन कयल जायत त कैयक असबके सम्प्ति छैक । कम्पिनि चाहे त अपने बलबूत्तापर रेलसेवा सँचालन कऽ सकैत अछि । एकटा सक्षम व्यकवस्थािपन, पारदर्शिताक आवश्यरकता छैक । आशा राखी लोकतान्त्रि्क सरकार एहि शुभकाजमे सहयोग करय, नहि त वोहि क्षेत्रक जनता आब हाथ पर हाथ धऽ बैसल नहि रहत आ देसर विकल्पयक खोजीमे जुटत, जकर परिणाम सरकारमे सहभागी दल एवं सरकारके भोगहिटा परतैक ।
आतंकवाद महत्वा कांक्षाक खेतमे आकुरण होइत अछि
महेन्द्र कुमार मिश्र
पूर्व सांसद

आतँक प्राणी जगतमे आदिम प्रत्यु षा सँ चलैत आवि रहल अछि । प्राणीके अपन अकार, शक्ती आ कार्यक्षमताक कारणे आतँकक परिणम आ प्रकार सभमे विविधता देखल जा सकैत अछि । पुराणादीमे वर्णित देवासुर संग्रामसभ आतँकवादीक श्रृंखलाके महागाथा अछि । महिषासुरक क्रिया कलाप सँ आतँककीत देवतागण शक्तिक आराधनामे लागि नारी द्धारा छल प्रपञ्चा रचना कऽ ओकरा समाप्तप कयलगेल प्रसँग दुर्गा सप्ततशीमे वर्णित अछि । रावणक आतँक समाप्तछ करवालैल राम अनेक जातिक सहयोग ल समाजके मुक्ति देवौलन्हिद । तहिना कंशक उन्माणद अती भेलाक पश्चारत एकटा सामान्य गोपाल कृष्णिक रुपमे अवतरीत भेलाह ।
कहवी छैक, बीनु बीज वृक्षक आकुरण नहि होइत छैक । अमेरिका के जन्म‍ओल सद्दाम आ ओसामावीन लादेन अमेरिका विरुद्ध कियाक आततायी भ प्रगट भेल ? इन्दिकरा गाँधीद्धारा पालीत सन्तद जर्नेल सिंह भिण्डयवाल इन्दि राकै प्राणे ल लेलक । ओसामावीन आ ओमार आजुक युगक विश्व्के सर्वाधिक शक्ति सम्पलन्न‍ अमैरिकाक निन्न आ भूख उडादेने अछि । आतँकवाद कहियो महत्वाककाँक्षाक खेतमे अंकुरण होइत अछि आ अन्यापय अत्या चार, शोषण आ दमनक वर्षामै वढैत या त ताही श्रृंखलाके तोडैत अछि कि त अपने समाप्तन भ जाइत अछि । संसारक आतंकके इतिहास व्यानह परिणम देखवैत अछि । हिंसामे प्रतिहिंसा जकां आतंकवादी सभ मात्र अपने हत्याक हिंसा, लुटपाट आ अगिलग्गीअ नहि करैत छैक दोसर पक्षके सेहो ओहने काज करवालेल वाध्यि करवैत अछि । संसारक द्धन्दारत पक्षके गहींर सं अध्यलयन, मनन कयला उपरान्त एकरा सभहक क्रिया कलापक परिनती याह प्रमाणित होइत अछि ।
आतंक शब्दर सं कोनो हैजाक प्रकोप आ कठोर अत्याकचार आदिसं उत्प न्नर होव बला भयके वोध करवैत अछि । आतंकमे वाद जोडिदेलाक बाद एकर अर्थ मनुष्यआकै डेरा क धमका क या त्रास श्रृजना क क हिंसात्मोक विद्रोहक रुपमे अपन प्रभुत्वा स्थासपित क काज सिद्ध करवाक विचार आ सिद्धान्त बुझना जाइत अछि । दोसरके सम्पभति लुटव, घरमे आगि लगाएव, पर स्त्री संग बलात्का्र करब, समाजमे उत्पा्द मचाएव एहन दुष्क र्मीकै दुराचारी कहल जाइत अछि ।
तानाशाही चाहे जेकर होउक, जर्जबुशक हौउक वा मुसर्रफकै एकरा कौनो दृष्टितए नीक नहि मानल जायत । कानो राष्टछक तानाशाही आ दादागिरीके एक न एक दिन विनाश होयबेटा करैत अछि । आव ओ युग नहि रहिगेल जे लोक बुझौक परमेश्वररक अनुकम्पाासं गर्भ धारण भैल, ई लौक मान लेल तैयार नहि रहिगेल । ककरोलेल तोपक सलामी आ केओ लाठी,बुट आ गरमे गोली खाई, आजुक मानव समाजक चैतना एकरा सह लेल तैयार नहि अछि । विश्वकक कोनो ठाम जे विद्रोह भेलैक तकर समाधान करवाक काजक दायित्वत वाहक अपना आपके विशिष्टि नहि समान्योस्तिरक खण्ड मे राखय तखने ई समस्याएक समाधान भ सकैत अछि । २००७ साल सं पालीत, पोषित आ वढैत आएल समाजिक विद्रोहक स्ततरके माओवादी लगायत तथाकथित प्रजातन्त्रकवादी दलसब तराई समस्याटकै जाइन बुझि क अखनो कार्यान्व‍यन पक्षकै कमजोर बनाविक रखने अछि । पिडीत पक्ष अखनो विश्वसस्तय भ नहि पाविरहल अछि । नेपालक सन्दणर्भमै माओवादी १० वर्षधरि हथियार उठा जनविद्रौह कएलो उपरान्तस सबपक्षके समेट नहि सकल । संगही आन पार्टी सैहो पिडीत,उत्पीबडीत,राज्यरक संरचना सं दर रह बला वर्गक प्रति इमान्दाबर नहि रहल त दौसर विद्रोहक सम्भाहवना अवश्सपम्भारवी अछि ।
विद्रोहक अनेक शैलीआ पद्यती मध्येद कम सं कम जनआतंक आ जनधनक क्षति होइक एहने शैली एवं आचरण मात्र विश्मेि अनादिकालसं समाजिक मान्यरता वपैत अछि । समाजिक रुपानतरण हथियार नहि विचार सं कायल जाइक तखने टिकाउ भ सकैत अछि । आसुरी ताल या वृति एकटा स्व भाविक कमजोरी अछि । सहिष्णुिता संस्काारक उदात्तीकरण अछि । मनोविज्ञान याह तथ्यतके मान्य।ता दैत छैक जकर प्रशस्ति प्रमाणसब छैक ।
३० वर्षे पञ्चानयती शासन स्वै च्छानचारी, हुकुमी, निरंकुश सामन्ती प्रवृतिक छलेैक त २०४६ सालक जनआन्दोतलन व्यारवस्थाजमे परिवर्तन लौलक तथापि प्रवृतिमे कोनो परिवर्तन नहि दैखलगेल । पूर्व राजा ज्ञानेन्द्रखद्धारा फैर सं व्याथह शासन प्रणालीके पुनरावृति कर चाहलक मुदा सफल नहि भ सकल । ज्ञानेन्द्राक महत्वानकांक्षा बढैतगेल जकर फलस्वजरुप देशक जनता गणतन्त्रो न्मुदख होइत आई दैशमे गणतन्त्र स्थावपना भ गेल अछि । आव जौ कोनो प्रकारक वाधा व्य वधान उत्पुन्नत करबाक कोशिश कायलगेल त विद्रोह बढवेटा करत । संविधानसभा मूद्दा नहि समाधाने मूद्दा अछि । संविधान सभाक विर्वाचन पश्चाकत मधैशक साथ कोनो दल धोखा देवाक धृष्टमता करत त परिणाम अनिष्टाकारी हायत । राष्टक दोसर दूगिर्तकै आमन्त्र ण करत । मधेशक जनता अखनधरि उपेक्षित, उत्पीणडित रहल, समान अधिकार आ समान पहिचानकलेल लालाइत रहल मधेशक मूद्दापर यदि राजनीति करबाक धृष्ट ता करत त स्वारभिमानी मधेशी जनता फेर विद्रोहमे उतरत, मधेशी जनता मधेशवादी अछि, मात्र मधेशवादी गणतन्त्रहवादी नहि । गणतन्त्ररवादी कहि जनता भोंट नहि देलक आइ किछु नेता कहैत छथि, “हामी गणतन्त्रीवादी हौं” हुनका “हामी मधेशवादी” कह मे लाज किएक ? आबक संविधान जनआन्दोिलन २०६२।०६३ तथा मधेश आन्दोंलनद्धारा प्राप्तद जनाधिकारक सन्द”र्भमै एकटा एहन संविधानक आवश्यदकता छैक जाहि संविधानक माध्यतम सं नेपालक जनता सही अर्थमै समावेशी लोकतन्त्रक, प्रतिस्पकर्धात्म क बहूदलि, बहूभाषिक, बहूसांस्कृ तिक स्व रुपक संगहि सम्बतन्धि्त अधिकार सबहक उपभोग क सकय । एकरा संगही एहि दैशमे सयकडो वर्ष सं शोषित रहल मधेशी समुदाय, दलित, अल्पससंख्य्क, आदिवासी एवं जनजाती आव निर्माण हौव बला नयां संविधानद्धारा एकटा कण्ठाुरहित समुन्न त, समावेशी आ विकाशशील समाजक निर्माण भ सकै आ तकर यथार्थ अनुभूति अनुभव जनता क सकय ।

ज्योतिकेँwww.poetry.comसँ संपादकक चॉयस अवार्ड (अंग्रेजी पद्यक हेतु) भेटल छन्हि। हुनकर अंग्रेजी पद्य किछु दिन धरि http://www.poetrysoup.com केर मुख्य पृष्ठ पर सेहो रहल अछि। ज्योति मिथिला चित्रकलामे सेहो पारंगत छथि आऽ हिनकर मिथिला चित्रकलाक प्रदर्शनी ईलिंग आर्ट ग्रुप केर अंतर्गत ईलिंग ब्रॊडवे, लंडनमे प्रदर्शित कएल गेल अछि। मिथिला पेंटिंगक शिक्षा सुश्री श्वेता झासँ बसेरा इंस्टीट्यूट, जमशेदपुर आऽ ललितकला तूलिका, साकची, जमशेदपुरसँ।
ज्योति झा चौधरी, जन्म तिथि -३० दिसम्बर १९७८; जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी ; शिक्षा- स्वामी विवेकानन्द मि‌डिल स्कूल़ टिस्को साकची गर्ल्स हाई स्कूल़, मिसेज के एम पी एम इन्टर कालेज़, इन्दिरा गान्धी ओपन यूनिवर्सिटी, आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी); निवास स्थान- लन्दन, यू.के.; पिता- श्री शुभंकर झा, ज़मशेदपुर; माता- श्रीमती सुधा झा, शिवीपट्टी। ”मैथिली लिखबाक अभ्यास हम अपन दादी नानी भाई बहिन सभकेँ पत्र लिखबामे कएने छी। बच्चेसँ मैथिलीसँ लगाव रहल अछि। -ज्योति
भूमिका : एम पी टूर
कहै छै जे एक बेर शेर जॅं मनुषक खूनक स्वाद चखि लैत अछि तऽ ओकरा मनुषक आदत भऽ जाएत छै। सैह हाल छल हमर सबहक।एक बेर जे टिस्कोक शैक्षणिक यात्रामे जाइत छल तकरा सबमे बेर-बेर जाइके अभिलाषा जागि जाइत छलै।अही कारण सऽ लगभग आधा सऽ लऽ कऽ दू तिहाई तक विद्यार्थी तेहेने रहैत छल जे पहिनेहो आयल रहैत छल। तकर बाद एहेनो बड होएत छल जे सब तरहक इण्टर स्कूल कॉम्पीटिशनमे एक दोसर के चिन्हार भेल रहैत छल।से बड कमे लोक एहेन होएत छल जे वस्तुत: नऽब होइत छल।पहिल बेर जॅं कनी अन्तर्मुखी रहितो छल तऽ अगिला बेर सऽ खूब खुलीकऽ मज़ा करैत छल।नब विद्यार्थी सबके सहायक सेहो बनैत छल।
हमहुं आन विद्यार्थी जकॉं बहुत आह्लादित छलहुं।टूर लेल चयन भेल से तऽ पिछला सालक रिजल्ट निकलिते देरी पता चलि गेल छल।लेकिन कत जायब से अहिबेरका वार्षिक परीक्षाके समाप्ति दिन बतायल गेल।जहन पता चलल जे मध्यप््रादेश जायके अछि तऽ बहुत खुश भेलहुं।घरक परिवेशक ई असर छल जे उज्जैन आ अमरकंटक लेल बड उत्साहित छलहुं। ताहिपर सऽ कान्हा नैशनल पार्क के देखक लालसा सेहो कम नहिं छल।पहिल बेर ई अवसर छल। अहिबेरका टुरक लक्ष्य निम्नलिखित छल:
(1) विलासपुर
(2) अमरकंटक
(3) जबलपुर
(4) भेड़ाघाट
(5) कान्हा नेशनल पार्क
(6) पचमढ़ी
(7) उज्जैन
(8) इन्दौर तथा
(9) भोपाल
1.अवैद्य नागरिकताः सिक्क मीकरणक प्रयास, 2.तराई/मधेशक आन्दोंलनः लूटमे लटुवा नफ्फास,3.अन्तर्वार्ता-डा. राम दयाल राकेश/आभाष लाभ,4.त्रिभुवन विश्व2विद्यालयद्धारा मिथिलाक्षर फन्टूक विकास
मनोज कुमार मुक्ति-
अवैद्य नागरिकताः सिक्कामीकरणक प्रयास
मनोज मुक्ति

नेपालमे नागरीकता वितरण बहुतो वर्ष पहिने सँ चर्चित विषय बनल अछि । खास कऽ पहिल मधेशवादी दलक रुपमें जानल जाइत नेपाल सदभावना पार्टी अपन स्थाेपने कालसँ नागरीकताके अपन प्रमुख मुद्दाक रुपमे रखैत आएल छल । प्रजातन्त्रलक आगमनकबाद २०४८ सालमे बनल सरकारक समयमे सेहो नागरीकताक प्रश्नर सदन गर्मओने छल ।सदभावना पार्टीक अडान रहैक बहुतो मधेशी जनता नागरीकतासँ बञ्चिमत अछि, सबके नागरीकता देल जाए । सदभावना पार्टीक एहि अडानपर जनमोर्चा लगाएतक दलसब एकरा भारतक विस्तातरवादी नीति कहैत विरोध करैत छल । हूनकर सबहक कहब रहैनि जे मधेशीसबके नागरीकता दऽदेलासँ नेपाल सिक्कलमीकरण भऽ जायत ।
जनआन्दोकलन २०६२/०६३ सँ पहिने सेहो नागरीकता वितरणकलेल आयोग सब बनैत रहल, अपन प्रतिवेदन बुझवैत रहल । कोनो बेर जौं नागरीकता देलोगेल त “सबै भारतीयहरुलाई नागरीकता दियो, देशमा अब विखण्ड न हुन्छो” कहैत, रिट दायर कऽ मधेशमे देल जाचुकल नागरीकताके बदर सेहो कराओल गेल ।
एकटा विदेशी नागरीकके नेपालक नागरीकता देनाई वास्तकवमे बहुत बडका षडयन्त्रे होइत छैक, देशक हीत विपरीत काज होइत छैक । देश हीतक विपरीत काज कयनिहार ककरो नईं छाडल जएबाक चाही । ताहुमे नागरीकता सन सँवेदनशील विषयमें त सबहक नजरि रहब ओतबे जरुरी होइत छैक । मुदा जोर जोरसँ गरजनिहार सबहक मानसिकता एहिबेरक नागरीकता वितरणक समयमे देखागेल । नागरीकता वितरणक तथ्याँतक अनुसार लगभग २४ लाख नागरीकता समुच्चाख देशमे वितरण कायलगेल । जाहिमे लगभग ११ लाख तराई मधेशमे आ १३ लाख पहाड हिमालमें । कि वास्तचवमें नागरीकता प्रप्तय केने चौबिसो लाख व्यछक्ति् नागरीकता लेबाक हकदार रहथि ? ई एकटा पैघ प्रश्न् अछि । हँ सदनमे बहुत हँगामा कायलगेल, अपनाके देशक ठिकदार कहनिहार देखावटी देशभक्तख पार्टीसबद्धारा । अहु हँगामा सबहक एकहिटा कहब छल जे तराई मधेशमे सबटा भारतीय सबके नेपाली नागरीकता द कऽ देशके सिक्कामीकरण करबाक तैयारी कायल जाऽरहल अछि । मुदा कि नागरीकता वितरण कयनिहार अधिकारीमे कएटा व्याक्तिण तराई या मधेशी मूलक रहथि ? आँगुरपर गनल जा सकैया । अवैद्य रुपसँ वितरण कायलगेल नागरीकता मधेशक विरोधमें बहुत पैघ षडयन्त्री अछि । मधेशमें जाऽक गैर मधेशी अधिकारीसबद्धारा जे किछु मात्रामे विदेशी सबके मोटगर पाई ल कऽ नागरीकता वितरण कायलगेल अछि से मधेशीसबके अपने धर्तीमे गुलाम बनयबाक चालि अछि । एकर दू टा पक्ष अछि, जौ नागरीकता लेने विदेशी भुख्खेब मरत त उदारवादी मधेशी अपनो हिस्सा क भोजन देबऽमे पाछा नई रहत, आ मानसिक एवं शारीरिक यातनाक पीडा मेलैत रहत । जौ पाइके बलपर नागरीकता लेने कोनो धन्निपक विदेशी गाममे रहत त गामक जिमदार बनिकऽ सबके फेरसँ कमैया बनालेत जेना पश्चिनमी तराई मधेशमे थारु सबके पहाड सँ विस्थामपित पहाडी सबद्धारा कमैया बनालेल गेल । ताएँ एहि बातपर मधेशीसब सचेत रहथि आ विदेशी सबके नागरीकता लेबऽसँ सकभर रोकलथि । मुदा तैयो पाइयक भुखल आ द्धेष भावनासँ कुटिकुटिकऽ भरल गैर मधेशी अधिकारीसबद्धारा मधेशोमे किछु नागरीकता अवैद्यरुपसँ वितरण कायलगेल ।
दोसर दिश पहाड आ हिमालमे जे जनसँख्योद सँ बेसी नागरिकता वितरण भेल ताइके विषयपर सदनमे ककरो बकार धरि नहि फुटल । कत चलिगेल ओई देशभक्तय नेता सबहक देशभक्तिव ? ई अहिने प्रष्टम कऽदैत अछि जे ओइ खोखला देशभक्तफसबक नियति, ओसब कि चाहैत अछि, आ कत सँ सञ्चाकलित अछि ?
वास्तसवमे अवैद्य नागरीकता वितरण क कऽ नेपालके सिक्क मीकरण करबाक प्रयाश सोंचल समझलरुपमें शुरु भऽगेल अछि । नेपालमे लाखोके सँख्या में तिब्बकती, भुटानी आ भारतीय(दार्जिलिङ्ग) नागरीकके नागरीकता द कऽ वैद्य नागरीक बनयबाक खेल शुरु भऽगेल अछि, आ तकरा सब मधेश विरोधी मानसिकताक लोक भितरिया मोन सँ स्वागगत करैत गदगद भऽ रहल अछि । एकर कारण एक्काहिटा अछि जे नागरीकता लेनिहार तिब्बाती, भुटानी आ भारतीय(दार्जिलिङ्ग) लोकके मुँहकान आ प्रायःके भाषा नेपालक ओइ बेतुक्काम देशभक्ती नेता सबसँ मिलैत जुलैत अछि । ई सिक्कामीकरण नईं त कि अछि ? देशक सम्पूार्ण सचेत नागरीकके सोंचबाक चाही ।
तराई/मधेशक आन्दो्लनः लूटमे लटुवा नफ्फा
मनोज झा मुक्तिक
सँयुक्त लोकतान्त्रि क मधेशी मोर्चाक नामपर भेल तराई/मधेशक आन्दोचलन अन्तोुगत्वा सातदलक सरकारके फागुन १६ गते वाध्य कऽदेलक आ सातदलक सरकारके तरफसँ प्रधान मन्त्रीर गिरिजाप्रसाद कोइराला, तात्काालीन नेकपा एमालेक मुखिया माधव नेपाल आ नेकपा माओवादीक अध्यकक्ष पुष्पत कमल दहाल “प्रचण्डलक” उपस्थिनतिमे आठबुँदे सम्म झौता पत्रपर हस्ताआक्षर कएलक । सम्मतझौता लागू कायल जाएत ताहि शर्तपर मधेशवादी दलसब तत्कादल आन्दोझलन स्थतगित कएलक आ संविधान सभाक चुनाव संभव भऽसकल ।
तराई/ मधेशक आन्दो लनके विखण्डननकारीक आन्दोऽलन, संविधान सभा विरोधीक आन्दो लन एवं राजावादीक आन्दोईलनके आरोप लगौनिहार, देखावटी कऽरहल आ अपनाके गणतन्त्रकवादी कहऽबला एवं द्वेषक मानसिकतासँ कुटिकुटिकऽ भरल नेपालक सञ्चाारकर्मीके मुँहपर पैघ झापड लागल जखन शान्ति।पूर्णरुपसँ तराई मधेशमे संविधान सभाक चुनाव सम्पसन्नच भेल ।
संविधान सभाक चुनाव सम्परन्नन भेलाकवादमें जहन संविधान सभाक पहिल बैसार भेल त तराई/मधेशक विरोधमे सबदिनसँ मेंहक काज करैत आएल राजतन्त्र क समाप्तिन भेल जे तराई/मधेशक जनताके सबसँ पैघ विजय छल । जखन संविधान सभाक काज आगु बढल त मधेशी जनताक भोंटसँ जितिकऽ आएल मधेशी सभासदसब विगतके सम्मवझौताके सुनिश्चिलत करबाकलेल अन्ततरिम संविधानमे लिखएबाक माँग सहित सदन अवरुद्धक काज करऽलागल । अवरुद्धक काजके फेरसँ, नेपालके अपन बपौटी सम्पआति बुझनिहार विभिन्ना दलक नेतासब आ संकिर्णतासँ भरल प्रयः छोटसँ पैघ सँचारकर्मीसब( अपवादकरुपमे किछु छोडिकऽ) सदन अवरुद्धक काजके विदेशीक ईशारापर कराओल जाऽरहल, देशके विखण्डअनकेलेल कायल जाऽरहल लगाएत नाना प्रकारक आरोप लगेबाक शुरु कऽदेलक । आरो त आरो तराई/मधेशक जनताक भोंटसँ जितिकऽ आएल आन–आन पार्टीक तराई/मधेशक ठिक्का लेने मधेशी नेतासबसँ विरोध करौनाई शुरु कऽ देलक । ओना विरोधक मोहराक रुपमें किछु नेता आगा आबिकऽ अपन मालिकके मन जितबामे सफल सेहो रहलाह आ मधेशीदलक नेता मात्र मधेशक हीत नई सोचत, हमहुँसब मधेशेकलेल लडव, कहिकऽ जितल मधेशवादी दल बाहेकके नेतासब सेहो अपन पद बँचेवाक डरसँ मौने रहऽमे भलमन्सामहत बुझलथि ।
एम्ह र, कहियो अञ्चिलाधिश रहल राप्रपाक नेता नरेन्द्रो चौधरी अध्यिक्ष रहल थारु कल्या णकारिणी सभा थरुहट स्वारयत्त प्रदेशक माँग करैत मधेशीदल आ सरकार सँगभेल सम्महझौताके लागु नई करबाकलेल दबाव स्वहरुप जुलुश,बन्दक आ चक्काकजामके आयोजना करऽलागल । ओना जौ एहि आन्दोसलनक नेता सबहक विगतके पृष्ट भूमि देखि त किछु सोंचबाकलेल विवश भेल जाऽसकैया । अखन एहि आन्दो्लनक अगुवाई कऽरहलछथि– राजकुमार लेखी, जे एमालेमे बहुत दिनसँ लगितो टिकट पएवामे असफल रहल अछि । आब राजनीतिक विश्लेाषकके मानी त एमालेसँ राजकुमार लेखीक टिकट पक्काअ–पक्कीक अछि एहि विरोध प्रदर्शनक बाद । किशोर विश्वाास, जे विशुद्धरुपसँ मधेशीके पार्टीक नामसँ जानल जाएबला नेपाल सदभावना पार्टीसँ अपन राजनीतिक जिवनक शुरुवात कएलक । माघ आन्दो लकबाद मधेशी जनाधिकार फोरममे सक्रिय भेल, फोरमद्धारा निष्कारसित भऽ भाग्यकनाथ गुप्तादके अध्य क्षतामे मधेशी जनाधिकार फोरमक दर्ता करौलक जकर उपाध्य‍क्ष किछुदिन रहल आ पुनः निष्काासित कऽदेलगेल । एहि थरुहटके आन्दोजलनसँ हुनको एकटा प्लेरटफार्म भेंटगेल अछि, आब देखबाक ई अछि जे एहि प्ले्टफर्मपर हूनकर गाडी कतेक दिन धरि रुकत
आरो जे हुए, थारुसब नेपालक आदिवासी अछि एहिमे कोनो शंका नहि । सबके अपन–अपन अधिकार भेंटवाक चाही । मूदा अपन अधिकारकलेल दोसरके अधिकारक हनन कायल जाए, कतेक ऊचीत गप्प। अछि मधेश हुए, तराई हुए, थरुहट हुए या कोनो अन्येछ नाम किया नई दऽदेल जाए ओहि प्रान्त के जनताकेँ समान अवसर, पहिचान, अधिकारक ग्याटरेन्टी् एवं स्वा यत्तता भेंटवाक चाही । एकटा बात जे सबके आश्चआर्य कएने अछि– मधेशी चोर देश छोड, एक मधेश एक प्रदेश नई थरुहट चाही ! ई कहिकऽ कायलगेल विरोध प्रदर्शनमें मगर सँघक व्या।नरके, चुरे भावरक लोक सबके । मानिलेल जाए जे मधेश शब्द के बदलिकऽ तराई या थरुहट राखिदेल जाए त ताईमें मगरके आ चुरे भावरके कोन तरहक फायदा भेटतैक जौं मधेश स्वादयत्त भऽ जएतैक त झलनाथ खनाल लगाएतके कोन श्रीसम्परति हरण कऽदेल जेतैक किया ओ सब एकर विरोध कऽरहल अछि ऊत्तर ताकब जरुरी अछि ।
सबदिन सँ तराई/मधेशके चरणकेरुपमे बुझने, महेन्द्र क फूटक नीति अनुरुप पहाडसँ तराईमें आबि सोझसाझ आदिवासी थारुके सम्पिति हडपिकऽ ओकरा हरुवा आ कमैया बनेने एहि तरहक शोषक मानसिकताके पृष्टूपोषक झलनाथसब किया चाहतैक जे ओतुक्काि थारु लगाएत आन समुदाय सुखी आ सम्पकन्नत बनय आ जाधरि तराई/मधेशके स्वाओयत्तता नई भेटतैक ई सम्भसव नहि से ओकरा सबके बुमल छैक । अन्तनमे संघीयता या स्वांयत्तता देलो जाए तराई/मधेशके त अपना अनुसारके बाँटिकऽ जे कहियो तराई/मधेशक जनता शक्ति सम्पषन्नय आ सामर्थवान नहिं भऽ सकय । ओकरा सबके नींक जकाँ बुमल छैक जे सम्पूरण तराई/मधेश या थरुहट कोनो नामपर एक प्रदेश भऽगेल त हमरा सबहक कोनो चारा नई चलत ओतऽ । दोसरदिस अपनाके जनताके आवाज कहनिहार नेपालक सँचारकर्मी आ नागरिक समाज लगाएत बुद्धिजिबीपर पैघ प्रश्नन उठाओल जाऽरहल अछि– सातदलक शिर्षस्थँ नेताक सहमति/उपस्थिधतिमे,सातदलक सरकारक प्रमुख एवं राष्रान ध्यकक्ष रहल व्य्क्तिकद्धारा हस्तावक्षरित सम्मौसताके लागु करबाकाल आयोग निर्माण आ विभिन्न बहाना कायल जाति छैक से हूनका सबके नई सुमाति छन्हिस आ भेल सम्मौबताके कार्यान्वियनके सुनिश्चियतताक माँगमे हुनका सबके विदेशीक ईशारा आ विखण्डषनके बात सुमाति छन्हिह ।कि सम्मौकताके सँग भऽरहल मजाकक बाद कोनो समूह सरकार या ककरो सँगे वार्ता करत ? माधव नेपालक सम्मौहतामे रहल सहमति एमालेक सहमति छल की माधव नेपालक व्यकक्तिरगत,जे मलनाथ सम्मौिताक पुनःविचारक बात करैत छथि ?जौं से बात छैक त हूनका पार्टीक नाम सेहो बदलि लेबाक चाही ।एहि बातपर किया नागरिक समाजके मूँह बन्द? भऽगेल अछि, किया सँचारकर्मीक कलम ठमहि गेल अछि ? हूनका सबके ई नई बुमल छन्हिक, जे देशक कोन पार्टी आ नेता कत–कतऽसँ सञ्चामलित अछि ?निश्चिनत रुपसँ बुमल छन्हि , मूदा कोनो वर्ग विषेशके पकडमें रहल सँचारकर्मीसब अपना अनुसारे विश्लेाषण करैत अपन मनमर्जी अनुसार नङ्गा नाँच कऽरहल अछि आ आम जनमानसमे मिडियाक छविकेँ तहसनहस कऽ रहल अछि । बजतैक केँ ? जौं एक ठाम कोनो अदना तराई/मधेशक लोक देशक विखन्ड नक गप्पज करैत छैक त सब मिडियाक प्रमुख समाचारकरुपमे ओकरा परसल जाइत छैक,मूदा सदनसन सर्वोच्चऽठाममे जहन एकटा प्रतिष्ठिित मधेशी नेता सरकारमे सहभागि सबके दोष प्रमाणित करैत देशमे विखण्डननके बीजा रोपणक गप्पह करैत छथि त ओ नाहियोंटा समाचार नई बनि सकैया ?
अन्तो गत्वाख जौं राष्ट्रीप्रमुखद्धारा कायलगेल सम्मौओता लागू नईभेल त देशमे केओ ककरो पर विश्वाहस नई करत आ एतेक पैघ सँकटके ई जन्मतदेत से सबके बुमितो मौन अछि । आ दोसर बात तराई/मधेशक जनताके ई बात बुझनाई जरुरी अछि कि तराई/मधेशक जनताके अधिकार सम्पमन्नदता चाही आ स्वाशयत्तता चाही । तराई/मधेशक जनता अधिकार सम्प न्न/ नई भऽजाए आ सबदिन दास बनल रहय से मानसिकतासँ जे अपना घरमे फूट कराओल जाऽरहल अछि तकरा समयेमे बुझनाई जरुरी अछि । ओतुक्कास जनताके एकैहिटा प्रदेश चाही या १०टा, तकर निर्णय ओतहिक जनता करत नई कि फूटाकऽ राज करबाक सोंचनिहारसब । जौं अपनाके मधेशवादी कहऽबला दलसब सेहो कोनो तरहक गलत निर्णय करैत छथि त हूनको सबहक विरोध होबहिक चाही ।
अन्तर्वार्ता-डा. राम दयाल राकेश/आभाष लाभ…..

सरकारके ध्या.न छठि पावनिपर देवाक चाही…..डा. राम दयाल राकेश ( सँस्कृेति विद)
छठि पावनि मधेसके संस्कृाति कियाक मानल जाईत अछि ?

–छठि पावनके अपने मौलिक विशेषता छइ,, ई पावनि शुरु होबऽ सँ एकमहिना पहिने सँ पावनि कयनिहार सब तैयारी मे लाईग जाईत छथि । एकर तैयारी आ पुजाके जौं देखल जाय त अईमे विशुद्ध मधेसी संस्कृदति पाउल जाईत अछि । पावनि केनहार सँ लक ओईके तैयारीमे लागल हरेक व्यमक्ति ओ संस्कृदतिमे भिजल रहल पाओल जाइत अछि । ओकर प्रसाद सँ लऽक हरेक सामगी्रमे मधेसक संस्कृरति देखल जाईत छक, ओ पावनिके अवसरमे गावै वाला विभिन्नर धुन तथा गीत सब मैथिल संस्कृ्तिमे गाओल जाईत अछि ।

ई पावनि कियाक मनाओल जाईत अछि ?

–एकर अपने पहिचान आ विशेषता छैक । सब पावनि सँ अई पावनिके अपने इतिहास छैक किया त कोनो पावनि एसगरे अपना घर परिवार मे रहिकऽ मनाओल जाइत अछि मुदा ई एकटा एहन पावनि अछि जे खुला जगहमे सामूहिक रुप सँ मनाओल जाइत अछि । अई पावन के मात्रे लोकतान्त्री क पावनि कहल जा सकैय कियाक त अई पावनि मे कोनो भेदभाव उच्च नीच, जात भात नई देखल जाइत अछि । अई पावनिमे सूर्यके पुजा भेलाके कारण आओर एकर गरीमा के उच्चउ देखल जा सकैय । सूर्य जहिना ककरो पर भेदभाव नई क कऽ सम्पू र्ण जगतके रोशनी प्रदान करैत अछि, तहिना छठि पावनि सब के एक समान रुप सँ देखैत आईव रहल छैक ।
ई पावनि अपना परीवार के सुख समृद्धिके लेल तथा कोनेा रोग व्यसधा नई लागै से मनोकामना सँ मनाओल जाइत अछि । भोर आ साँझक सूर्यके किरणमे एक प्रकारके गरीमा होईत अछि जकरा रोशनी सँ शरीरमे रहल विभिन्नि विमारी फैलाब वाला किटाणु सबके नष्टअ सेहो करैत चर्मरोग सँ बचाबैत अछि । चर्म रोगके अचुक दवाई मानल जाईत अछि छठि पावनि ।

छठि पर्व मे महिला सब अपना आचरा पर नटुवा कियाक नचवैत छैथ ?

–एकरा एकटा श्रद्धाके रुपमे लेल जा सकैय, छठि माताके ध्यारनमे राखि क कोनो किसीमके मनोकमना केला सँ जौं ओ पुरा भ जाईछै त ओई देवता पर आरो श्रद्धा बैढ जाईछै आ ओहि किसीमके कौबुला क क अपना आँचर पर नटुवा नचवैत छैथ ।

छठिक घाट पर चमार जाईत सब ढोल( डुगडुगीया) बजावैत छथि, ओकर कि विशेषता अछि ?

–ओकरो जातिय तथा संस्कृढति परिचयके रुपमे लेल जा सकैय, ओ जाईत सब अपन संस्कृिति आ संस्काौरके बचएबाक लेल ओ काज क रहल अछि । ओ ढोल बजला सँ घाट पर कतेक मधुरता आ रौनक महशुस होईत रहैत अछि, ओना त कते लोक सब अग्रेजी वाजा बाजा क पावैन मानावैत छैथ मुदा जतेक ढोल पीपही के आवाजमे संस्कृ ति के झलक भेटैत अछि ओते कोनो बाजामे नई ।

अई पावनि मे सूर्यके पुजा होईतो पर छठि माता या छईठ परमेश्वारीके नाम सँ कियाक जानल जाईत अछि ?

–सूर्यके अर्थ उषा होईत अछि, उषा भगवतिके रुपमे पुजलाके कारण एकरा छठी माताके रुपमे सम्बोछधन कायल जाइत छैक । ओना त स्पछष्टउ रुपमे कतौ ने अई विषयमे चर्चा भेल अछि लेकीन किछ शास्त्रकमे महाभारत के कुन्तिक शुरुमे छठि पावनि केनेे रहैथ ओही दिन सँ छठि पावनि शुरु भेल अछि से कतौ कतौ उल्ले ख पाएल जाईत अछि ।

दिनकर के आ जलके कि सम्बरन्धस अछि ?

–जल के आ दिनानाथके बहुत गहिर सम्बसन्धि अछि, बिना जलके दिनकरके पुजे नई भऽ सकैय हुनका खुश करबाक लेल जल चाहबेटा करी । छठिएके उदाहरणके रुपमे लऽ लिय, ओ पावनि बिना जल के नई भऽ सकैय कोनो जलासय नई भेला पर अपना घरमे खधिया खनि क ओइमे जल राईख क पावनि सम्पवन्नक करैत अछि, कियाक त दिनानाथे सूर्य छथि । एकटा एहो कहि सकै छि कि सूर्य मे बहूत गर्मी भेला के कारण जल के अर्घ देला सँ ओ किछ ठन्ढाा होइत छैथ ।

लोकतान्त्रिरक गणतन्त्रथमे छठि पावनिके संस्कृ्तिके बारे मे अपने कि कहब अछि ?

– हम गणतन्त्रि नई कहिक लोकतन्त्र के चर्चा करैत ई कहव कि छठि एकटा विशुद्ध लोकतान्त्रििक पावन अछि, समानुपातिक ढगं सँ एकरा मनाओल जाइत अछि । सामूहिक रुपमे मनबाक सँगहि अई मे कोनो भेद भाव नई होइत अछि । गरीब सँ लक धनीक तक सब एकरा समान ढगं मनावैत अछि ।
जनता गणतन्त्रएके रस्ताै चलनाई शूरु कदेलक मुदा सरकार अखुनोे पाछा परल अछि । अखनोे मधेसी पहाडी बीच , दलित गैर दलित बीच, गरीब धनीकके बीच भेदभाव अछि, कि एकरे गणतन्त्र कहबै ? नवका नेपाल बनाबऽ लागल नेेतागण सबके छठि पावनि सँ किछ सिखवाक चाहि ।

अन्त र्वाता …आभाष लाभ

(२०२८ सालमें डा.राजेन्द्रल विमल आ श्रीमति विणा विमलक सन्ताछनक रुपमें जनकपुरक देवीचौकक निवासमें जन्म२ लऽ २२ वर्ष पहिने सँ निरन्तआर मैथिली गीत सँगितक आकाशमें ध्रुवतारा जकाँ चमकैत रहऽबला एकटा मिथिलाक बेटा छथि, गायक आभाष लाभ । बाल्येनवस्थाम सँ विभिन्नआ मँच सबपर अपन आवाज सँ दर्शक श्रोता सबके हृदयमें वास कयनिहार आभाष लाभ, मैथिली आ मिथिला सँ सम्बलन्धन रखनिहारकलेल चीरपरिचीत नाम अछि । प्रस्तुवत अछि, गायक आभाष लाभ सँगक भेल बातचीतक प्रमुख आश )
१. आभाष जी गीत सँगीतमें कहिया सँ लगलहुँ?
कहिया सँ लगलहुँ से त नईं बुझल अछि, मूदा बच्चेस सँ जनकपुर आ लऽग परोसक गाँव सबहक एकौटा मञ्चप हमरासँ नई छुटैत छल ।
२. पहिलबेर आहाँक रेकर्डेड गीत कोन अछि
– पहिलबेर हम नेपाल सँ बहराएल अशोक चौधरीक मैथिली क्यािसेट पानस में गीत गएने छलहुँ ।
३. मैथिली गीत सँगीतक अवस्थाश केहन बुझा रहल अछि?
जतेक होयबाक चाही ओतेक सँतोष जनक नहि अछि । नव नव प्रतिभा जाई तरहें एबाक चाही, नई आबि रहल छैक । दोसर बात अखन प्रविधि एतेक परफेक्टव भऽगेल छैक जे पाइ सेहो वड खर्च होइत छैक ।
४. की बुझाइया, मैथिली गीत सँगीतमें लागिकऽ अखनुक युगमें बाँचल जा सकैया
एकदम नीक जकाँ बाँचल जा सकैया एही क्षेत्रमें लागिकऽ । मैथिलीक क्षेत्र बहुत पैघ छियै । जौं मेहनतिसँ नीक काज कायल जाए त मैथिलीयो सँगीतक क्षेत्रमें बहुत पाई छै । उदाहरण लऽ सकैत छी, हमरे सबहक क्यँसेट “रे छौंडा तोरा बज्जमर खसतौ”के जे १५ लाख प्रति बिकाएल छल । तहिना “गीत घरघर के” जे जहिया सँ बहरायल तहिया सँ आइयोधरि बिकाइते अछि । हँ, काज नीक होयबाक चाही ।
५. प्या रोडीके प्रभाव केहन पडि रहल छैक मैथिली गीत सँगीत पर?
प्या.रोडी मौलीकताके साफ साफ खतम कऽ दैत छैक । गीत सँगीतक क्षेत्रमें लागल श्रष्टा? सबके मनोवलके तोडिकऽ राखिदेने छैक प्याीरोडी गीतसब ।
६. प्या‍रोडी गीत सँगीत सँ पिण्ड छुटबाक उपाय की
देखियौ, जखन अपन सँगीत या गीत नई हुए तखन प्या‍रोडीके किछु हद धरि पचाओल जाऽ सकैया,मूदा मैथिलीमे अपन मौलीक सँगीतक आभाव त कहियो नई रहलै । जहातक प्याँरोडी गीत सँगीत सँ पिण्डर छुटेवाक बात छई त अइमे आम जे श्रोता सब छथि, जे वास्ततविक रुपमें चाहैत छथि की अप्परन मौलीक सँगीतक विकास होइ, हूनका सबके प्याथरोडी गीतके निरुत्सातहीत करबाकलेल ताई प्रकारक क्यामसेट किनऽसँ परहेज करऽ पडतन्हिय आ सँचार माध्य म सबके सेहो ओहन गीत बजेवा सँ बचऽ पडतन्हिव, तखने ई सँभव अछि ।
७. नेपालीय आ भारतीय मिथिलाञ्चीलमें मैथिलीक बहुत रास काज भऽ रहल छैक, की अन्त र बुझाऽ रहल अछि दूनु देशक मैथिलीक काजमे
हम त मात्र एतबा बुझैत छियै जे एकटा हमर सहोदरा विदेशमे कमाऽरहल अछि आ हम नेपालमे । दूनु ठाम अपना अपना तरहें काज भऽरहल अछि एतबे बुझु ।
८. अखन सऽभ भाषाक गीतमे रिमिक्स के बाढि आएल बुझाति छई, एकरा कोन रुप सँ आहाँ देखैत छियै?
बहुत नीकबात छई रिमिक्सष गीत औनाई । समय अनुसार आधुनिकीकरण होयबाके चाही । समाजकलेल आ बजारकलेल गीत गौनाई दूनु दूटा बात छियै, ताहिमें गीत सँगीतक व्यायवसायीकरणमे रिमिक्सज बहुत नीक सँकेत छई । रिमिक्स गीत बहरेवाक चाही बशर्ते अपन सँस्कागर नई लुप्तय भऽ जाई ताइके ध्याँनमें रखैत ।
९. अखनधरि कतेक गीत गएलहुँ जे रेकर्डेड अछि?
अखनधरि लगभग साढे तीनसय गीत हम गाबि चुकल छी जे रेकर्डेड अछि ।
१०. क्याससेटके अलावा कोन फिल्मडमें अपन स्वुर देने छी आहाँ ?
मैथिलीमे दहेज,ममता,प्रितम,आशिर्वाद फिल्मेमे, तहिना भोजपुरी फिल्महसब सजना के आगना, ममता, तहार गलिया आदिमे ।
११. स्टेमज शो के सीलसीलामे कतऽ कतऽ गेलहुँ?
अपन देश नेपालक लगभग सबठामके अलावा, कतार (४बेर),दूवई(२बेर),मलेशिया,पाकिस्ताहन,बंगलादेश, भारतक विभिन्नक शहरमें अखन धरि जाऽचुकल छी ।
१२. नव की आबि रहल अछि मैथिल श्रोता सबहक लेल?
बहुत जल्दिनए निखिल राजेन्द्रैक सँगीतमे भेनस क्यापसेट सँ रिलिज भऽ रहल अछि….
त्रिभुवन विश्व विद्यालयद्धारा मिथिलाक्षर फन्टेक विकास
मैथिली लेखक एवं अन्यष मैथिली भाषी लोकनिक भावनाकेँ सम्माभन करैत त्रिभुवन विश्वरविद्यालय भाषाविज्ञान केन्द्रि य विभाग तथा मदन पुरस्काेर पुस्त कालय भाषा सञ्चामर परियोजना अन्तसर्गत यूनिकोड पर आधारित जानकी नामक मिथिलाक्षर(तिरहुता) फन्टपक विकास कयलक अछि । एहि फन्ट‍क मादे आब सँसार भरि इमेल मिथिलाक्षरमे पढल जा सकैत अछि । सँगहि, वेबसाइट पर मिथिलाक्षरमे पाठ्यसामग्री साखल जा सकैत अछि ।
मुद्रणक कठिनाई सँ मैथिली भाषा देवनागरी लिपिमे सामान्या रुपसँ लिखल जाइत अछि आ मिथिलाक्षरक प्रयोग बहुत सीमित क्षेत्रमे होइत जाऽ रहल अछि । यूनिकोडमे आधारित जानकी फन्टरक आगमन सँ मिथिलाक्षरक प्रयोगक विस्तामर होयबाक सँभावना बढल अछि । ओना दू वर्ष पहिनहिँ निजी स्त रपर श्रविण झा आ गँगेश गुञ्ज्न मिथिलाक्षर फन्टयक निर्माण कयने रहथि ।
मकर सँक्रान्तिर अर्थात तीला सकराँइत-/जितिया पावनि-मनोज झा “मुक्ति”
मकर सँक्रान्तिर अर्थात तीला सकराँइत-मनोज झा “मुक्ति”
मकर सँक्रान्तिा अर्थात तीला सकराइँत माघ महिनाक पहिल दिन, प्रायः माघ मासक १ गतेके मनाओल जाइत अछि । मकर सँक्रान्तिि माघभरि लोक भोरमे स्नाकन करैत अछि । माघ मासक सँक्रान्तिनक दिन लोक उडीदक दालि, चाउर,तिलबा, चुल्लौैर आदि दान करैत अछि । धनवान लोकसब गोदान, उनीवस्त्र , कम्ब,ल, सोन आदि सेहो दान कायल करैछथि । एहि दिनमे खिच्च रि खएबाक चलन चलि आएल अछि । आजुक दिन भगवान भगवतीके चुल्लौुर, तिलबा चढाओल आइत अछि । बहुतो ठाम दिनमें चूडा,दही,चुल्लौ र आ रातिमे भोजन काएल जाइत अछि । आ किछु ठाम चुल्लौठर, तिलबा, चूडा,दही जलपान कऽ दूपहरक भोजन खिच्चअरि सँ सँम्पलन्नल होइत अछि ।
मिथिलाञ्चनलमे भेरे स्ना न कऽ कऽ तीलक डाँठ अर्थात तीलाठीक आगि तापल करैत छथि । जौं तीलक डाँठ उपलब्धल नई होमय सकल त आगिमे तीलक किछु दाना धऽ आगि तापि परम्प राके निर्वाह कायल करैछथि । ताइकेबाद अपना सँ पैघ या कहु श्रेष्ठ द्धारा चाउर, तील आ गुँड मिलाबिकऽ बनाओलगेल तील खुवाबिक अपना प्रतिके कर्तव्यकबोध कराओल जाइत अछि, जकरा “तील बहव” कहल जाइत अछि ।
ई पावनि सँ आयु, आरोग्यइ, सम्प ति, रुप, गुणक प्राप्ति होएबाक सँगहि सब तरहक पापसँ मुक्तिि भेटबाक विश्वाखस कायल जाइत अछि । माघ स्नासनके बृहत मन्त्रि सेहो होइत अछि जे एहि प्रकारक अछि
ॐ माघमासमिमं पुण्यंा स्नालम्य हं देव माधव ।
तीर्थस्यािस्थ जले नित्यंय प्रदीदा भगवन हरे ।
दु ःख दरिद्रयनाशाय श्रीविष्णो स्तो।षणय च ।
प्रातः स्नारनं करोम्यणद्य माघे पाप प्रणाशनम् ।
मकरस्थेर रवौ माघे गोविन्दा च्युअत ।
स्नामनेनानेन मे देव यथोक्ति फदो भव ।
दिवाकर जगन्ननथ प्रभाकर नमोऽस्तुयते ।
परिपूर्ण कुरुष्वेादं माघस्ना्नं महाव्रतम् ।

ओना वैज्ञानिक दृष्टि‍कोणे गुँड खएला सँ शरीरमे गर्मी अएबाक कारणे जाढ मासमे एही पर्वके अति उपयोगी मानल जाइत अछि ।

जितिया पावनि- मनोज झा “मुक्ति”
मिथिलामे बहुतो पावनि बड श्रद्धापूर्वक मनाओल जाइत अछि । मिथिलाके साँस्कृ्तिक रुपसँ धन्निाक कहऽजायबामे एहि पावनितिहार सबहक बहुत पैघ महत्वथ रहल अछि । ओना सब पावनि सबहक अपन हटले महत्वे रहल करैत अछि, सब पावनिके अपन अपन प्रयोजन सेहो ओतबे विशेष भेल करैत छैक ।
मिथिलामे मनाओल जाएबला एकगोट महत्विपूर्ण पावनि सबमे सँ जितिया पर्वके अपने तरहक महत्व रहल अछि । मिथिलाञ्चोलमे प्रचलित अछि जे केओ पुरुष कोनहुँ दूर्घटनासँ बाँचिगेल त कहल जाइत अछि,माय षडजितिया केने छलै ताहिसँ बाँचि गेलै । ई वाक्य स्पघष्टि करैत अछि जे जितिया पावनि एकटा बेटाकेलेल हूनक मायद्धारा कायल जाइत अछि ।
भविष्य पुराणमे सेहो उल्ले ख अछि जे पुत्रक दिर्घायुक कामनासँ ई व्रत कायल जाइत अछि । जितिया पावनि, कृष्णा अष्टलमीक दुनू साँझ उपवास कऽ भोरमे तिथि बदललापर पारणा करबाक विधान रहल अछि । मिथिलाञ्चृलमे जितिया व्रतसँ एक दिन पूर्व अहिवात स्त्रि सब माछ मरुआ अरबधिकऽ खाएल करैत छथि । तहिना पावनि केनिहार विधवा लाकनि अर्वा अर्वाइन खाइत छथि । भिनसरमे जौं अष्टामी नहि पडल रहैत छैक त चूडा दही ल ओंगठन करैत छथि । ताएँ बुझाइया ई कहबी बनल छई, जितिया पाबनि बड ध्या न रखैत छथि । एहि तिथिमे योग विशेष भेलापर षडजितिया मनाओल जाइत अछि, जकरा बहुत पैघ मानल जाइत अछि । जाहि दिनमे प्रदोष कालमे अष्टनमी पडैत छैक ओह दिन व्रत होइत अछि, जौं दू दिन प्रदोष कालमे अष्ट मी पडैत अछि त खोसर दिन जितिया पावनि व्रत करबाक लोकाचार व्या प्त अछि । जाहिबेर उदय कालमे अष्ट मी पडैत अछि तहिया व्रत काएल जाइत अछि आ नवमीमे दोसर दिन पारणा कएल जाइत अछि ।
अष्ट मी जाहि दिन पडैत अछि ताहिदिन व्रत कयनिहार जाहि ठाम स्नारन करैत छथि( पोखरि,नदी या इनारपर ) ओकर प्राँगणमे पूवमुँहे ठाढ भऽ तामक अर्घामे मन्त्रा पढिकऽ सूर्य भगवानके अर्घ दैत छथि, एवं व्रतक सँकल्पँ लइछथि । सँकल्पम कऽ भरिदिन व्रत रहि साँझमे गायक गोबर सँ नीपि आँगनकेँ शुद्ध कऽ एकटा खधिया खुनि पोखरीक निर्माण कायल जाइत अछि । पोखरीक मोहारपर एकटा पाकडिक ठाढि आनि गारि देल जाइत अछि, गाछक डाढिपर गोबर माटिक चिल्हा राखिदेल जाइत अछि । गिदरनीक आकृति बनाबिकऽ डाढिक नीचामे राखि देल जाइत अछि । तकरा लगेमे जलसँ भरल कलश राखल जाइत अछि ।कलशमे कुशक जिमूतवाहनक मूर्तिक निर्माण कऽ राखल जाइत अछि । ताइकेवाद समय अनुसारक फलफूलके नैवेद्यक व्यतवस्थार ककऽ राखल जाइत अछि । नैवेद्यमे केरावक आकुरी आ खीराके राखब आवश्य्क मानल जाइत अछि । सब सामग्रीक ओरियाओन केलाकबाद व्रति महिला सब पूजा करैत छथि ।
जितिया पावनिके बहुत कठीन पावनि मानलगेल अछि । ई पावनि केनिहार व्रति महिलासब पानि त नहिंए पिवैत छथि, एतऽधरि कि ओसब खढोधरि नई खोंटैत छथि ।

धीरेन्द्र प्रेमर्षि (१९६७- )मैथिली भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति आदि विभिन्न क्षेत्रक काजमे समान रूपेँ निरन्तर सक्रिय व्यक्तिक रूपमे चिन्हल जाइत छथि धीरेन्द्र प्रेमर्षि। वि.सं.२०२४ साल भादब १८ गते सिरहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाममे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि। सरल आ सुस्पष्ट भाषा-शैलीमे लिखनिहार प्रेमर्षि कथा, कविताक अतिरिक्त लेख, निबन्ध, अनुवाद आ पत्रकारिताक माध्यमसँ मैथिली आ नेपाली दुनू भाषाक क्षेत्रमे सुपरिचित छथि। नेपालक स्कूली कक्षा १,२,३,४,९ आ १०क ऐच्छिक मैथिली तथा १० कक्षाक ऐच्छिक हिन्दी विषयक पाठ्यपुस्तकक लेखन सेहो कएने छथि। साहित्यिक ग्रन्थमे हिनक एक सम्पादित आ एक अनूदित कृति प्रकाशित छनि। प्रेमर्षि लेखनक अतिरिक्त सङ्गीत, अभिनय आ समाचार-वाचन क्षेत्रसँ सेहो सम्बद्ध छथि। नेपालक पहिल मैथिली टेलिफिल्म मिथिलाक व्यथा आ ऐतिहासिक मैथिली टेलिश्रृङ्खला महाकवि विद्यापति सहित अनेको नाटकमे अभिनय आ निर्देशन कऽ चुकल प्रेमर्षिकेँ नेपालसँ पहिलबेर मैथिली गीतक कैसेट कलियुगी दुनिया निकालबाक श्रेय सेहो जाइत छनि। हिनक स्वर सङ्गीतमे आधा दर्जनसँ अधिक कैसेट एलबम बाहर भऽ चुकल अछि। कान्तिपुरसँ हेल्लो मिथिला कार्यक्रम प्रस्तुत कर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक धीरेन्द्रक अबाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। “पल्लव” मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ “समाज” मैथिली सामाजिक पत्रिकाक सम्पादन।
नव भोर जोहैत मिथिला
—धीरेन्द्रम प्रेमर्षि
राज्यी पुनर्संरचनाक लेल भऽ रहल अभ्यापसक असरि देशक समग्र क्षेत्रक सङहि मिथिलामे सेहो व्या पक देखल जा रहल अछि । जनता जागरुक आ उत्सुलक अछि— नेपालक नव–निर्माणमे मिथिला क्षेत्रकेँ अपन पृथक आ विशेष पहिचानक सङ्ग देखबाक लेल । सौँसे देशमे गणतन्त्रर आ सङ्घीय व्य–वस्थामक माङ जोर पकड़िरहल अछि । एहनमे मिथिलावासीमे सेहो एहन भावना जागब आ तकराप्रति सक्रियता देखल जाएब जतबए स्वामभाविक अछि, ततबए उत्सानहवर्द्धक सेहो । उत्सािह देशक स्व त्व‍ आ स्व तन्त्रएताप्रेमी ओहन नागरिकक लेल जे अपन माटिपानिक प्रति इमान्दा्र छथि, अपन राष्ट्रि य स्वातभिमानपर गर्व करैत छथि, जे मिथिलाक स्वीर्णिम इतिहासकेँ वर्तमान बनएबाक आकांक्षी छथि, आ जे यथार्थमे नेपाली जनताक सर्वतोमुखी विकास आ उन्नततिक पक्षपाती छथि ।
भूगोलसँ मिथिलाक अलोपित होएबाक पीड़ा हमसभ शताब्दिआयोसँ भोगैत आबिरहल छी । खास कऽ कर्णाटवंशीय मिथिला राज्यलक पतनक बाद विभिन्नभ कालखण्डिमे हमसभ यवन, अङरेज, गोर्खाली आदिक प्रहार निरन्त र सहैत आएल अछि । एतबा उत्पीयड़नक बाद जँ कोनो आन सभ्यणता वा संस्कृयति रहितए आ कि कोनो आनठामक लोक रहितए तँ आइधरि छिन्नयभिन्न होइत नेस्त्नाबूद भऽ गेल रहितए । मुदा मिथिला, मैथिल आ मैथिलीक अस्तिनत्वर निरन्ततर सात सए वर्षसँ चलैत आएल अनेको तरहक कुचक्रक मारि सहितो जीवन्तम अछि । एकरा पाछाँ निश्चिैत रूपेँ मैथिल सभ्याता–संस्कृोतिक सर्वाधिक योगदान रहलैक अछि । साँस लेबामे पर्यन्तप अशौकर्य भऽ रहल आइधरिक अवस्थाभमे सेहो अपनाकेँ जियाकऽ रखनिहार मैथिलीक एहि गौरवशाली आधारसभक प्रति नतमस्तपक होइत हम किछु पाँति गढ़ने छी—
मानैत छी जे आब रहल नइ दुनियाकेर भूगोलमे
तैयो हमसभ बचाकऽ रखलौँ जकरा माइक बोलमे
सोहर, लगनी, जटाजटिन कि झिझिया–साँझ–परातीमे
एकहकटा मिथिला जीबैए एकहक मैथिल छातीमे
उपर्युक्त काव्यांैश भूगोलविहीनताक घाओमे मलहम लगएबाक आभास दऽ सकैत अछि, मुदा मात्र छातीमे जीवैत भूगोल हमरासभकेँ सम्पूंर्णता नहि दिआ सकैत अछि । एहन–एहन कविता गढ़िकऽ असलमे कही तँ हमसभ अपनाकेँ परतारल करैत छी । एहि तरहेँ अपनाकेँ परतारिकऽ नहि राखल जाए वा जाहि बातपर हमसभ गौरव करैत छी तकरा युग–युगन्तरधरिक लेल जँ चिरस्थारयी करबाक हो तँ आवश्यरक अछि जे खालि छातीमे सैँतल मिथिलाकेँ हमसभ जमीनपर उतारी आ मैथिल भूगोलकेँ पुनः नामकरण करैत उर्वर बनाबी । एकरा लेल देशक एखनुक राजनीतिक वातावरण हमरासभकेँ सर्वोत्तम अवसर प्रदान कएने अछि ।
मुदा देशमे जाहि तरहक क्रियाकलापसभ देखल जा रहल अछि ताहिसँ ई नहि बुझाइत अछि जे हमसभ एहि अवसरक सदुपयोग करबाक दिशामे पर्याप्त सचेत आ गम्भी र छी । सर्वप्रथम तँ ई बात अबैत अछि जे एखनधरिक सरकारसभ वास्तरविक रूपमे सत्ताधारी वर्गसँ बाहरक लोकक लेल सेहो लोकतन्त्रम आएल छैक से मानैत–सन अपन चरित्र देखबिते नहि अछि । ई कटुसत्यस हमरासभक सोझाँ अछिए । वस्तु‍तः देशमे अखनो ओहने राजनीतिक दलक दबदबा अछि जे माघ १९ सँ पहिने संविधानसभाक नामे सुनैतदेरी कोनो बिगड़ैल साँढ़जकाँ भड़कि उठैत छल । वि.सं. २०४७ सालक संविधानमे कऽमा–फुलस्टागॅपधरिमे परिवर्तन करबाक आवश्य कता नहि देखनिहारसभ आइ नव संविधान बनएबाक बीड़ा उठौने छथि । एहनमे ओहि व्‍यक्तिसभक मानसिकता कतेक बदलल होएतैक से सहजहिँ अनुमान लगाओल जा सकैत अछि । जँ माओवादी जनयुद्ध नहि शुरू भेल रहितैक आ एखन जे मुद्दासभ उठल अछि से नहि उठाओल जइतैक तँ निश्चिात अछि जे हमसभ आजुक ई स्वकर्णिम वातावरण नहि पबितहुँ । मुदा जनयुद्धक मार्फत मैथिलीसभमे अधिकारक भूख तँ माओवादी जगा देलकैक, मुदा भुखाएलसभकेँ अन्नह देखैतदेरी जाहि तरहक कछमछी भऽ सकैत छैक, तकरा व्यावस्थि त करबा हेतु कोनो ठोस प्रयत्नभ कऽ सकबाक अवस्थार माओवादीक सेहो नहि छैक ।
मिथिलामे भेल पहिचानक आन्दो लनक क्रममे आयोजित एकटा पत्रकार–सम्मेकलनमे माओवादी नेता बाबुराम भट्टराई बाजल छलाह— ‘मधेशमे जे चेतना जागल छैक तकर वीजारोपण वा गर्भाधान के कएलक ? मधेश आन्दोालनक बाप के ?’ खास कऽकऽ २०४६ सालक परिवर्तनक बादक अवस्थाककेँ देखलापर हमरा जवाबक रूपमे ई कहबामे कनेको द्विविधा नहि होइत अछि जे माओवादी । मुदा एहिठाम ध्या्न देबायोग्या बात ई अछि जे कोनो योग्या नागरिकक सम्पू र्ण निर्माणमे बापक वीर्यक भूमिका अत्यबन्तय न्यूबन होइत छैक । मुख्यो भूमिका रहैत छैक— नओ मासधरि गर्भमे राखिकऽ जन्म‍ देनिहारि आ लालन–पालन कएनिहारि माएक । मुदा दुर्भाग्य्, मिथिलासहित देशक अनेको क्षेत्र, जाति, समुदायमे जागल चेतनाक बाप तँ माओवादी बनल, मुदा आब जखन माए बनबाक समय आएल अछि तँ देखा चाही जे ई भूमिका ओ कतेक कुशलतासँ निर्वाह करैत अछि । एहिसँ पहिने मधेशक पार्टी वा सङ्गठनसभ ओहोसभ खालि बाप बनबाक दम्भक मात्र देखा सकल । ई बात खास कऽ मिथिलाक भाषा–संस्कृ तिजन्यह भावनापर बेरबेर कुठाराघात करैत ओसभ देखा चुकल अछि । जँ मधेशी आन्दो–लन/विद्रोह बाप बनबाक अहङ्कारमे मोँछक लड़ाइ नहि बनितए, एकरा समटिकऽ–सहेजिकऽ चलनिहार एकटा माए भेटितैक, तँ आइ अवस्था् किछु भिन्नह रहितैक ।
अवस्था् तैयो बिगड़ल नहि छैक । सम्पूैर्ण मिथिलावासीक मनोबल अखनो ओतबए उच्चम छैक । एहि मनोबलकेँ सकारात्म‍क आ सार्थक परिणामपर अवतरण करएबाक लेल क्रियाशील होएबाक जिम्मेनदारी हमरेसभपर अछि । संसद आ सड़कसँ जनआवाज बुलन्द कएनिहारसभ बेर–बेर ई बात दोहराओल करैत छथि जे संविधानसभा सभसँ बेसी मधेशी, दलित एवं जनजातिएक लेल आवश्येक अछि । ओहि आवश्यकक संविधानसभा आ तकरा बाद बनल सरकारमे मैथिलसभक उल्लेुख्यज सहभागिता अछि । तेँ संविधानसभाकेँ अपन हकमे उपयोग करबाक दिशामे सभक क्रियाशीलता आवश्येक अछि । रहि गेल बात सशस्त्र आन्दोभलन कएनिहार जनतान्त्रिाक तराई मुक्ति मोर्चासभक, हमर विचारमे ओहोसभ राज्य सत्ताकेँ समदर्शीए बनएबाक लेल ई मार्ग अपनौने छथि । जनभावसँ निरपेक्ष राजनीति हुनकोसभक नहि भऽ सकैत छनि ।
सुदीर्घ राजनीतिक इतिहास समटिकऽ बैसल व्यनक्तिसभ एखन क्रियाशील मोर्चासभमे छथि । हुनकासभक आगाँ इहो चुनौती छनि जे हुनकेसभक देखासिखी कतेको अवाञ्छिकत तत्वीसभ मिथिलामे पएर पसारिरहल अछि । ओ तत्वचसभ हमरासभक मूल मुद्दाकेँ दरकिनार करबाक लेल जी–जानसँ लागल अछि । एहन अवस्थााकेँ विचारैत सेहो अपनाकेँ जनताप्रति उत्तरदायी बुझनिहारसभकेँ अपना–अपना दिससँ सेहो सहमतिक विन्दुअ तलाशैत रहबाक चाही । एम्हँर अन्यर पक्ष सेहो जँ व्याक्तिगत ईर्ष्याद–द्वेषसँ उपर उठि जनताक प्रति इमान्दा।र भऽकऽ आगाँ आबए तँ निश्चि त अछि जे सशस्त्रय समूहसभ सेहो आमिल पीबिकऽ नहि बैसल रहत । एहि काजमे सरकार आ विशेष कऽ माओवादीक भूमिका विशेष महत्वतपूर्ण भऽ सकैत अछि । किएक तँ जेसभ अलग बाट धएने छथि सेसभ अधिकांश माओवादीएसँ बहराएल छथि । जँ माओवादीसभ गम्भी रतासँ ई सोचथि जे जेसभ ओहन विकट–विकराल समयमे सङ्ग छल से आइ किएक अलग भऽ गेल तँ ई समस्याक जल्दीचए सलटि जाएत । ई विशुद्ध रूपसँ दियाद–वादमे होबऽ वला भावनात्मकक प्रहारक कारणे उत्पान्न‍ मतभिन्न ता भऽ सकैत अछि । एहिमे अलग विचार रखनिहार दियादक बात सुनिकऽ ओकर सम्मापन मात्र कऽ देल जाए तँ जतऽ कतौ ककरो अहंकेँ ठेस लागल होएतैक, से शान्तर भऽ जएतैक । शान्तिलक जोरक आगाँ केहनो कड़गर हथियारकेँ घमऽ पड़तैक आ घमि जएतैक से हमर दृढ विश्वा स अछि । रहल मिथिलाकेँ साकार रूप देबाक बात, तँ एहिमे एतबए कहब—
जखन जनजन ई मिथिलाक जागि जेतै भाइ
हेतै सोन मढ़ल भोर, राति भागि जेतै भाइ ।
३.पद्य
३.१. १.राम नारायण देव २.निमिष झा
३.२. १.अमरेन्द्रण यादव २.मनोज मुक्तिे
३.३.-१.ज्योति-२.गजेन्द्र
३.४. १. सच्चिणदानन्दग यादव २. विनीत उत्पल ३.जितमोहन
३.५. १.पंकज पराशर, २.भवनाथ दीपक ३.मयानन्द्र मिश्र ४.सूर्यनाथ गोप
३.६. कुमार मनोज कश्यप
१.राम नारायण देव २.निमिष झा
मिथिला राज्यन- राम नारायण देव

उठल मधेशी कयल हुँकार
लऽके रहत, अप्प न अधिकार
जन जनकेँ, एके आवाज
सबहक माँग, मिथिला राज्य
अप्प न भाष, अप्पथन सँस्कृ ति
अप्प न अर्थनीति, अप्प‍न राजनीति
मधेशी आन्दो्लनक यैह सन्देपश
अप्पीन बात, अप्प्न परिवेश
निरँकुश राजतन्त्र क भेल अवसान
भेंटल लोकतन्त्र्क बरदान
मेची—महाकाली उमडिगेल अछि
राज्य शक्तिी मुकिगेल अछि
उठू बन्धून, उठाउ तरवार
भगाउ सामन्ती‍ राजदरवार
गठन करु गणतन्त्र क सरकार
करु राज्यणक पुर्नसँरचना
समावेसी लोकतन्त्रक आ समानुपातिक कल्परना
अप्प न विकार, अप्पेन विचार
आव कियो नहि रहत, शिक्षित वेरोजगार
छोडू आपसी मेल, करु विकासक मात्र खेल
उखाडि फेकू, राजाक ताज
तखन भेटत अप्पहन स्वजराज
जन—जनके एके आवाज
सबहक माँग, मिथिला राज्यआ ।

जीवन एकटा दुरुह कविता

निमिष झा
अर्थहीन शब्द क
अर्थ खोजबाक अभिलिप्साकमे
अनायास थमि जाइत अछि आँखि
फाड़ि दैति छियै
पन्ना क पन्नाँ
चेतनाक शब्दछकोश
आ भोगैत छी
एकटा पराजयक थकान
जतय नहि भेटैत छै
जीवनक यर्थाथक अर्थ
आ ताएँ
बुझाइत अछि
जीवन एकटा दुरुह कविता छै ।

बजैत छै
लयात्मकक गीत
जीवनक मधुर सङ्गीत
आ छम…छम…कऽ नचैत सङ्गीतसँग
असंख्यम कलात्म क पायर
आ प्रस्फु.टित भऽ जाइत छै जीवन उपवनमे
मुदा
अनायास फेर
बन्दा भऽ जाइत छै सङ्गीतक धुन
थाकि जाइत छै पायर
मुरझा जाइत छै उपवनक फूल
आ ताएँ
बुझाइत अछि
जीवन एकटा सारहीन सङ्गीत छै ।

आन्न द छै
माछ जकाँ
जीवन सरोवरमे हेलब
उल्लासस छै
एकटा गुड्डी जकाँ
आकाशमे उड़ब
मुदा उड़ि नहि सकैत अछि
हमर आल्हा दित मोन
आ अनायास
उल्लायसक धरातलसँ
दुर्गतिक चट्टान पर
अनवरत खसैत छै मोन
आ डुबि जाइत छै
सरोवरमे
आ ताएँ
बुझाइत अछि
गुड्डी जकाँ उड़ि नहि सकबाक
आ माछ जकाँ
हेलि नहि सकबाक
नियतिक भोग छै
जीवन ।
हाइकु
निमिष झा
१)गरम देह
छिछैल गेल मोन
अमृत–वर्षा ।

२)रामनवमी
एलै एहू बेर
मुदा राम नै ।

३)नै छै उत्सा ह
कुचाग्रक छुवन
ई शरीरमेँ ।

४)अपन पीडा
आँचरिमे नुकबै
हमर माय ।

५)छाह खोजैछ
ग्‍ााछ काटि काटिकऽ
सभ्यम मानव ।

६)प्‍ाावस राति
गवै उन्मुोक्तक मोन
विरह गीत ।

७)नकली हँसी
कुटील व्य।वहार
आजुक छौडी ।
(१)
पीयर पात
पतझरक बाद
तुत्छ होइछ ।

(२)
लोचन नीर
नहि बुझै जगत
बहैछ स्फूजर्त ।

(३)
प्रेमक द्वारि
बन्दम भऽ जाइत छै
स्वामर्थक आगू ।

(४)
खुलल वेणी
पियाक प्रतीक्षामे
खुल्लेप रहलै ।

(५)

हम भ्रमर
नोचि देलियै फूल
विजेता बनि ।

(६)

पावस राति
गवै उन्मु क्त मोन
विरह गीत ।

(७)

अन्त र नहि
कागज आ हृदय
जखन फटै ।
असमर्पित उन्माकद-निमिष झा

अहाँक वएह नयन, वएह मोन आ वएह तन
हम देखिरहल छी, सुनिरहल छी आ भोगिरहल छी
समयक लम्बा अन्तोरालक बाद सेहो
आँखि खोलैत आ मिचैत सेहो
आ अहाँ हमर शरीरक अदृश्यो सरित प्रवाहमे
सर्वाङ्घ समाहित छी, सज्जिरत छी ।

ई अभीष्ट रूप अहीँक थिक
जकर अनुपस्थि‍तिमे हमर चित्त
शुष्कन सिकतातुल्यह भङ्ग गेल अछि
ई शीतल छाहरि अहीँक थिक
जकर अभावमे
हरेक निमिष हमरा लेल
नीरस आ उदास वसन्ते बनि गेल अछि ।

अहाँ पाइन छी हमर पियासक
अहाँ वसन्ता छी हमर बसातक
तएँ एकटा अतृप्ती उन्माेद
नाचि रहल अछि भैरव बनि
हमर मानसमे ।

हमर स्ना युक रोबरोबमे
एकटा विषाक्त तृष्णार
बहिरहल अछि
आ बहिरहल अछि
हमर धमनीक कणकणमे
एकटा उन्मुकक्त तृषा ।

बहुत बेर उघारि दलियै, फाडि देलियै
नृशंस बनि आवेशसँ
लज्जा क पर्दासभ
आ बन्दब क’ देलियै नैतिक मूल्य सँ
पाशविक उन्माददसभ ।

हँ
आईयो ओहिना स्मृ तिमे लटपटायल अछि
अहाँक गरम साँसमे
गुञ्‍जित हमर जीवन संगीत
अहाँक आँचरिमे ओझरायल हमर सर्टक बट्टम
अनार जकाँ अहाँक दाँत पर
पिछरैत हमर जीह
अहाँक ब्ला उजक हुकसँ खेलैत
हमर दसो आँगुर
आ अहाँक सुन्दहर छाल पर
दौडैत हमर ठोर ।

तथापि किएक नहि मिझाइत अछि
छातिक ई उन्महत्त मोमबत्ति
किएक निष्कामम नहि होइत अछि
मोनक उत्तप्त‍ बोखारसभ
जेना अहाँ
दारुक प्या्ला होई
आ हम चुस्कीत ल’ रहल छी
मदहोस भ’ रहल छी
अहाँक स्वकप्निहल लज्जाीनत तनमे
निमिष निमिषमे ।

मुदा उफ
ई केहन विडम्ब ना
नित्यनशः
एक्केनटा विन्दू पर दुर्घटना होइत गेल
हमर उच्छृडङ्खल वासनासभ
अहाँक दर्शन आ सिद्धान्तवक शिखरसँ
नितदिन एक्केआ रस्ता‍ घुरि जाइत छल
अभिशप्तए अहाँक विचार
हमर अभिशून्य‍ मस्तिाष्काके झकझोरैत छल ।

शायद कमजोरी हमरा मे छल
कि, गिद्ध बनि हम युद्ध नहि क’ सकलौं अहाँक तनसँ
शायद महानता अहाँक छल
माला बनि अहाँ समर्पित नहि भ’ सकलौं हमर गलासँ ।
१.अमरेन्‍द्र यादव २.मनोज मुक्ति
कल्प.ना आ यथार्थ- अमरेन्द्रि यादव- दिघवा, सप्त४री ।
जिनगीक हड़हड़ खटखटसँ दूर
मृत्यु क तगेदासँ अन्जाान बनल
जिनगीक अति व्यकस्तअ समयसँ
किछ पलखति चोराकऽ
अहाँक यादक उडनखटोलामे
उडि जाइ छी हम
प्रेमक अन्तहरिक्षमे ।
नदीक ओहि पार
दू गछिया तऽर
हमर कोरामे औङ्गठल
हमरासँग हँसैत बजैत
खाइत छी अहाँ सप्पतत
खाइत छी हमहूँ सप्पात
अहाँक तरहत्थी केँ चुमिकऽ
खोसि दैत छी हम
एकटा गेनाक फूल
अहाँक खोपामे ।
तखने हमर नाकमे अचानक
ढकैत अछि जरल तरकारीक गन्ध
आ अकचकाइत उठैत छी हम
मिझबय लेल स्टो भ
तखने हमर नजरि पडैत अछि
टेबुलपर राखल चिठीपर
जे काल्हिाए एलै हमर गामसँ
आ हमर आगा नाचय लगैत अछि
भरना लागल खेत
बाबुक फाटल बेमाय
बहिनक कुमारि सिँथ
भायक पढाइ खर्च
आ मायक दम्मा् बेमारी ।

हमर मैथिली-अमरेन्द्रन यादव

डाक्ट र चन्देमश्व रजी,
अहाँक बाबुजी पियौने हेथिन्ह्
उठौना दूध
अहाँकेँ पोसने हेथिन्हन भाड़ापरक माए
लेकिन हमरा नओ महिनाधरि गर्भमे
मैथिलीए केलखिन्हि सम्हाार
सोइरी घरमे सेहो मैथिलीए केलखिन्ह‍ दुलार
हम कनियाँक स्पोर्श विना जीबि सकैत छी
हस्थनमैथुनक उत्क र्ष विना जीबि सकैत छी
लेकिन मैथिलीक आकाश विना नहि
मैथिलीक श्वाथसप्रश्वािस विना नहि
डाक्टीर चन्देवश्वररजी,
हमर खाँडो, खुट्टी आ बलानमे बहै हइ मैथिली ।
हमर दिनाभदरी आ सलहेशक दलानमे रहै हइ मैथिली ।

स्मिभताक लडाई- मनोज मुक्ति
पशुपतिनाथक देशमे होइछ व्यईभिचार सब भेषमे
आन ठाम त बाते छोडू अबुह लगैया अपनो देशमे ।
प्रकृतिक देल ई आँखि,कान ओ बडका नाक आब दुष्म न प्रतित होइया
सँसारमे अपन अलग छाप छोडने मिथिलावासी,डरपोकक हूलमे सरिक होइया ।
अपना समस्तन अधिकार सऽभसँ बन्चिनत होइतो,बँचल छी काइल्हुवक आशामे
भ्रष्टम प्रशासन ओ नेताक लोभ सँ, जकडा रहल अछि देश, विदेशीक पाशामे ।
एतेक कठीन आ दूर्लभ मनुष्येक जीवन पाओल स्वजर्ग समान एही मिथिलामे
मूदा लगैछ जे जन्मभजाते अभागल थिकहुँ जे दूर्दशा होइत देखैछी, मिथिलाके अपन आगामे ।
सम्पू र्ण श्रृँगार सँ सुशोभित जगतक माय ओ विलक्षणा सीता आई घरसँ निकालल जाऽरहल अछि
मिथिलावासी एम्ह्र ओम्हसरक वात सुनैत, घरक एकटा कोनामे बहादुरी देखाबि रहल अछि ।
भऽरहल अछि सस्ता् रँग सँ शोणीत जाहिसँ सब छथि नहाएल
कतेक दिन सऽब चुप्पे् रहतै, बैसतइ एना नुकाएल?
ताहि सँ,
एहि स्मिहताक लडाईमे बचने मात्र सँ काज नई चलत
सम्पू्र्ण मैथिलमे नव चेतना भरैत, सबके लडहिटा पडत ।
१.ज्योति२.गजेन्द्र

जाड़ आयल-ज्योति
जाड़ आयल अछि बदरीक संग
धुन्धक कुहराम सऽसब अछि तंग
दृष्टिक सीमा छोट़ धूमिल सब रंग
शीतलहरी अपन धुनमे अछि मतंग
सूर्यक निष्ठुरता देखि सब अछि दंग
कियैक नहिं करैत अछि शीतक गर्व भंग

बुच्ची सबके छैन माघ नहायक पारी
गाँती बन्हने बच्चा करैत स्कूलक तैयारी
संघर्षरत नवयुवक सबहक के करै पुछारी
चायक चुस्की लैत छैन चौक पर बैसारी
कनिके देर मे करता सायकिल के सवारी
नहिं तऽ पकड़ता कॉलेज दिसका टायर गाडी

दलानपर घूर लागल लोकक जुटान भेल
कोन साल बेसी जाड़ छल से बखान भेल
देश विदेशक समाचार शान्त भऽ सुनल गेल
जखन गीतक कार्यक्रम रेडियो पर आरंभ भेल
विचारक आदान प्रदान फेर सऽ प्रारंभ भेल
भोजनक समय जानि सभाक समापन भेल

पुरोहित- गजेन्द्र ठाकुर
लघु उद्योगक पुरोहितक
घर जेना राजा सभक,
दारू पीबि मँतल,
मुदा सरकारक छन्हि जिद्द,
लघु उद्योगकेँ करताह समृद्ध,
लघु उद्योगकेँ वा लघु उद्योगक पुरोहितकेँ,
बना कय कम्पनी, लए सरकारी ऋण,
बन्द करथि कम्पनी,
कम्पनी मालिक नहि,
निदेशक छी हम,
कम्पनीकेँ होइछ घाटा तँ
मजदूर छथि मरैत,
नहि किछु होइछ निदेशकक,
कम्पनी अछि मरैत।
अर्थशास्त्र बनबैत अछि कम्पनीकेँ मनुक्ख,
आऽ मनुक्ख बनैछ कनमुँह।

वेश्यावृत्तिक संसार
आब नर्तकीक घर नहि,
गेल अछि पैसि राजनीति,
धननीति आऽ पर्यटननीतिम्र्,
आम्रपाली पहिरि चश्मा करैत छथि चालन वाहनक,
नायक मृच्छकटिकक, होटल व्यवसायी,
नव जाति व्यवस्थाक पुरोहित,
आम्रपाली बनलि अनुलोम व्यवस्थाक शकुन्तला,
मुदा गाम एखनो वैह,
विधवा, दलित, गरीबीक खेरहा सैह।
पीयर आऽ लाल होइत
चौबटियाक बत्ती सभ,
लुधकैत, गाड़ीक शीसा पोछैत,
अखबार पत्रिका बेचैत,
नव जाति-व्यवस्थाक दलित,
बचिया-बच्चा सभक पाँती।
कोरामे बच्चा लेने युवा भिखमंगनी,
निरीह आँखि, पैर खञ्जित,
खञ्जित पएरे बढ़ैत आगाँ।
मुदा भने ओहि चौबटियापर
शानसँ भीख मँगैत अछि बालगोविनक झुण्ड,
भीख नहि आशिरवादी,
पाइ देलहुँ तँ ठीक नहि तँ
गारिक प्रसादी।
औद्योगिक क्षेत्रमे सेहो
कोयलाक भट्ठीक धुँआसँ
कारी भूत भेल श्रमिक
ईहो छथि नव जाति व्यवस्थाक दलित।

घृणाक आस्वाद
घृणामे आस्वाद
संवादक अन्त
मतवैभन्यक प्रारम्भ

दिल्ली-मुम्बईक हाट,
तरकारी माँछक बजार,
होटलक बनथि भनसिया,
पुत्र-पुत्रीक विवाह दानोमे जाति गौण,
विधवा-विवाह क्षम्य,
मुदा जखन यैह सभ घुरैत छथि गाम,
नील-टीनोपाल दए नव व्यवस्थाक दलित,
बनि जाइत छथि पुरातन व्यवस्थाक पथिक,
तरकारी बेचनिहार जयबार,
औद्योगिक क्षेत्रक कारी मुरुत,
साबुनसँ रगड़ि चाम,
भए जाथि गामक भलमानुष,
होटलक भनसिया भऽ जाइत छथि सोइत,
सरदारजीक मोहर्रिर कयस्थ,
पासवानजी भऽ जाइत छथि दलित,
घुरैत काल ट्रेनहिमे फेर सभ मिलि
नव व्यवस्थाक आऽ पुरातनक करथि मेल।
ट्रेन अछि साक्षी
एहि मनसि द्वैधक
अमूर्त व्यवस्थाक धँसल आँखिक,
उजड़ा नूआक व्यथाक, युवा विधवाक,
आम्रपालीक आऽ मृच्छकटिक नायक चारुदत्तक,
आऽ बसन्तसेनाक।
१. सच्चिछदानन्दद यादव २. विनीत उत्पल ३.जितमोहन

आई हम ठाढ़ भेल छी- सच्चितदानन्द यादव,रायपुर– ६, सप्त री

आई हम ठाढ़ भेल छी
चौबटियापर नइँ,
बाट तऽ एक्केँटा छै
मुदा ओकरा रुकय पडतै
जे हमरा एतय अनलकै
हम ठाढ़ भेल छी ठीक ओहिना
जेना कपड़ाक दोकानमे पुतरा
सभदिन नव नव पहिरनमे
ठाढ़ भेल रहै छै
आ, किनयबला देखै छै
उन्टा पुन्टाबकऽ ।

३.विनीत उत्पल (१९७८- )। आनंदपुरा, मधेपुरा। प्रारंभिक शिक्षासँ इंटर धरि मुंगेर जिला अंतर्गत रणगांव आs तारापुरमे। तिलकामांझी भागलपुर, विश्वविद्यालयसँ गणितमे बीएससी (आनर्स)। गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालयसँ जनसंचारमे मास्टर डिग्री। भारतीय विद्या भवन, नई दिल्लीसँ अंगरेजी पत्रकारितामे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्लीसँ जनसंचार आऽ रचनात्मक लेखनमे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कनफ्लिक्ट रिजोल्यूशन, जामिया मिलिया इस्लामियाक पहिल बैचक छात्र भs सर्टिफिकेट प्राप्त। भारतीय विद्या भवनक फ्रेंच कोर्सक छात्र।
आकाशवाणी भागलपुरसँ कविता पाठ, परिचर्चा आदि प्रसारित। देशक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे विभिन्न विषयपर स्वतंत्र लेखन। पत्रकारिता कैरियर- दैनिक भास्कर, इंदौर, रायपुर, दिल्ली प्रेस, दैनिक हिंदुस्तान, नई दिल्ली, फरीदाबाद, अकिंचन भारत, आगरा, देशबंधु, दिल्लीमे। एखन राष्ट्रीय सहारा, नोएडामे वरिष्ट उपसंपादक।
हम पुछैत छी

इतिहास साक्षी अछि
आय धरि हम अहां स
कोनो सवाल नहि पुछलहुं
कोनो गप नहि बुझलहुं

मुदा, समय एतेक बदलि गेल
जाहि सं हम पुछैत छी
नहि त जे रहत तटस्थ
समय लिखत हुनको इतिहास

जन्म सं मृत्यु धरि
संस्कार आ समाजिकताक
बंधन स लोकवेद क
जकड़हि छी किया, हम पुछैत छी

हम पुछैत छी, सबकए अपन
तरहै जिबाक छैक अधिकार
तखन अपन कर्तव्य बिसरि कए
दोसरक अधिकारक हनन किया

हम पुछैत छी, अंगरेज चलि गेल
मुदा, अंगरेजियत लबादा किया अछि
किया अछि क्लासक पढ़ईक सिस्टम
जिनका जे नीक लगिते ओ से विषय पढ़िते

हम पुछैत छी, नेना स जीवनक लक्ष्य
निर्धारित किया नहि होइत छैक
समयक पाछु किया हम चलैत छी
समयक आगू चलैक मे कोन तकलीफ़

हम पुछैत छी, सूर्य सेहो उगैक काल बदलैत रहैत अछि
तखन हम अपन सुतबाक, उठबाक आ खाईके
समय किय निर्धारित करैत छी
किया निर्धारित होइत अछि आफ़िसक टाइम

हम पुछैत छी, गाम-घरक लोक
अपन गाम आ अपन जिलाक आगूक दुनिया
किया नहि देखैत अछि
जखन कि चिड़ैय-चुनमुन कतय नहि जाइत अछि

हम पुछैत छी, अठारह साल मे
जकरा देशक नेता चुनैक सूझ छैक
ओ अपन करियर आ अपन भविष्यक सूझ
किया नहि रखैत अछि

हम पुछैत छी, रामायण आ महाभारत अहि ठाम लिखल गेल
एकरा मे जतेक खिस्सा छैक
ओकरा स बाहर किछु नहि भ रहल छैक
तखन आश्चर्य किया होइत अछि

हम पुछैत छी, ई देशक नेता
चुनावक काल मे सेवा करैक शपथ खाइयै
मुदा, समय बीतलाह पर देश कए खाइयै
तखन हिनका लेल अहां तामस किया नहि फ़ूठैत अछि

हम पुछैत छी, जति आ धर्म, गोरि आ कारि
जखन भारत स ल कए अमेरिका तक
झगड़ाक कारण छैक
तखन एकरा खत्म करबा लेल अहांक खून ठंडा किया परि जाइत अछि

हम पुछैत छी, दुनियाक शांति लेल
पूरा दुनिया एक छैक
मुदा, घरक शांति लेल
हम किछु नहि करैत छी

हम पुछैत छी, दुनिया मे बेरोजगारी
महामारिक रूप धरि रहल अछि
मुदा, अपन रोजगार खोलबाक लेल
जर किया भो जाइत अछि

हम पुछैत छी, बाढ़ि आ सूखाढ़ से छी त्रस्त
दू सांझक रोटीक जुगाड़ लेल छी पस्त
तखन ई शासन कए बदलबाक लेल
अहां कए वोट देबा मे दिक्कत की होइत अछि

हम पुछैत छी, चोरी-लूटपाट होइत अछि रोज
पुलिस करि रहैत अछि अपराधिक खोज
तखन अहि सब से सचेत हेबाक मे
किया नहि रहैत अछि आहंक होश

हम उत्पल
जाति-धर्म-भेदभाव से
उपर उठि कए पुछैत छी
अहांक अपन व्यवहार
अहांक अपन आचार
अहांक अपन जति
अहांक अपन धर्म
अहांक अपन स्थान
अहांक अपन कर्म
अहांक अपन पेशा
अहां कए जे लागैत अछि गलत
ओकरा बदलहि मे
की होइत अछि

मुदा, अहि ठाम करैत छी घोषणा
जखैन धरि अहां अपनै नहि बदलब
ताहि धरि नहि बदलत समाज
नहि बदलत राष्ट्र
नहि बदलत दुनिया.

जितमोहन झा घरक नाम “जितू” जन्मतिथि ०२/०३/१९८५ भेल, श्री बैद्यनाथ झा आ श्रीमति शांति देवी केँ सभ स छोट (द्वितीय) सुपूत्र। स्व.रामेश्वर झा पितामह आ स्व.शोभाकांत झा मातृमह। गाम-बनगाँव, सहरसा जिला। एखन मुम्बईमे एक लिमिटेड कंपनी में पद्स्थापित।रुचि : अध्ययन आ लेखन खास कs मैथिली ।पसंद : हर मिथिलावासी के पसंद पान, माखन, और माछ हमरो पसंद अछि।
जखन जनता जागि जाइत अछि !

मुम्बईकेँ अपन कहै वला नज़र कियेक नञि आबैत छथि !
मुम्बईक दुश्मन सभ सँ ओ कियेक नञि टकराबैत छथि !!

की ताज, ओबेराय, मरीन हाउस, मुम्बई मs नञि अछि !
या फेर मुम्बईक ठेकेदार अपन मौत सँ घबराबैत छथि !!

दोसर प्रान्तक कहीकेँ अपने सभ लोग कs मारैत छथि !
दोसरे प्रान्तक लोग सभ मुम्बई पर जान लुटाबैत छथि !!

अपने देशक लोग जखन रहैत छैथ तिनका केँ तरहे !
ओ कनियोटा वारसँ लकड़ीक तरह टुईट कs बीखैर जाइत छथि !!

शर्मो नञि आबैत छैन अपन देशक निकम्मा नेता कs !
बजैत छला की पैघ-पैघ शहर मs छोट-मोट हादसा होयते रहैत अछि !!

मुम्बईक जंगमे शहीद तँ बहुत जवान भेला मगर !
शहर मे खाली चंद शहीदक फोटो लगायल जैत अछि !!

जे दुश्मन हमरा देश पर करैत अछि छुप – छुप कs वार !
हमर नेतागन ओकरा कs दावत पर इज्जत सँ बजाबैत छैथ !!

सुइन लिय सभ नेतागन जखन जनता जैग जैत अछि !
तखन कुर्सी खुद – ब – खुद निचा भैग जैत अछि !!
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।(c) 2008 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ’ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ’ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ’ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ’ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु

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