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विदेह २९ म अंक ०१ मार्च २००९ (वर्ष २ मास १५ अंक २९)-part-ii

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विदेह २९ म अंक ०१ मार्च २००९ (वर्ष २ मास १५ अंक २९)-part-ii

३.पद्य
३.१. वसंती दोहा- कुमार मनोज कश्यप
३.२. सतीश चन्द्र झा- हमर स्वतंत्रता
३.३.ज्योति- एक नाैकरी चाही
३.४.जंगल दिस !- रूपेश कुमार झा ‘त्योंथ’
३.५. पंकज पराशर -समयोर्मि
३.६.सुबोध ठाकुर-हम गामेमे रहबइ
कुमार मनोज कश्यप ।जन्म-१९६९ ई़ मे मधुबनी जिलांतर्गत सलेमपुर गाम मे। स्कूली शिक्षा गाम मे आ उच्च शिक्षा मधुबनी मे। बाल्य काले सँ लेखन मे अभिरुचि। कैक गोट रचना आकाशवाणी सँ प्रसारित आ विभिन्न पत्र-पत्रिका मे प्रकाशित। सम्प्रति केंद्रीय सचिवालय मे अनुभाग आधकारी पद पर पदस्थापित।
वसंती दोहा

गेंदा – गुलाब – पलाश संग, फूलल फूल कचनार ।
चिंहुकय आहट पर गोरी, आबि गेला पिया द्वार॥

भरल वसंती मास मे, पिया निर्दय बसल परदेश ।
अल्हड़ – मस्त वसंत, फेर बढ़ा देने आछ क्लेश ॥

धरती सँ मिलन के आछ, व्याकुल भेल आकाश ।
पिया विरह मे राति – दिन, पीयर पड़ल पलाश ॥

रंग – अबीर – गुलाल सँ, धरती भऽ गेल लाल ।
गोरी के गाल पर जेना, मलल चुटकी भरि गुलाल ॥

एम्हर – ओम्हर मटकि रहल, पीबि कऽ भांग वसंत ।
मन चंचल आई भऽ रहल , कि योगी कि संत ॥

पीबि कऽ भांग बसातो आब, लागल करय उत्पात ।
धूड़ा उड़ा कऽ पड़ा गेल, देमय कान ने कोनो बात ॥

सखि वासंती तोंहि हुनका, जा दय दिहनु संदेश ।
जी भरि मलबनि रंग हम, भेटता पिया जखन जे भेष ॥

ककरा सँ मोनक व्यथा कही, बुझत के मोर टीस ।
सुनि कऽ सभ हँसबे करत, बनत के मन-मीत ॥
सतीश चन्द्र झा,राम जानकी नगर,मधुबनी,एम0 ए0 दर्शन शास्त्र
समप्रति मिथिला जनता इन्टर कालेन मे व्याख्याता पद पर 10 वर्ष सँ कार्यरत, संगे 15 साल सं अप्पन एकटा एन0जी0ओ0 क सेहो संचालन।
‘‘ हमर स्वतंत्रता ’’
छी एखनो कमजोर कतेक हम
मौन भेल चुपचाप ठाढ़ छी।
किछु बंधन अछि परंपरा के
किछु समाज सँ भयाक्रांत छी।
भेल रही कहिया स्वतंत्र हम
केना आब इ बिसरि सकै छी।
अछि महान इ पर्व देश के,
सर्व धर्म सब मना रहल छी।
तखन कियै छी हम एखनो धरि
बान्धल जरजर परंपरा सँ।
मुक्त करत के फेर आबि क’
रुढ़िबादिता के पिंजरा सँ।
बिधवा के दुदर्शा, दहेजक
भोगि रहल छी दंश केना हम।
स्वार्थ धर्म लय पुत्रक माया
केना चलायब वंश अपन हम।
अछि सिंघासन उच्च पुत्र के,
पाबि पिता सँ स्नेह भावना।
पुत्री लय एखनो अछि राखल
अनुशासन, तप, ज्ञान,साधना।
डेग-डेग पर नीति समाजक
नारी के निर्बलता दै छै।
अछि स्वतंत्रता बनल पुरुष लय
द्वेत भावना उचित कहाँ छै।
पढ़ा लेब कतबो कन्या के,
मांग दहेजक नहिं किछु कमतै।
अछि विध्वंसक अहं पुरुष के
नारी तैयो चुल्हे फुँकतै।

एक आध टा पावि उच्च पद
केना समाजक दंभ मिटेती।
पुरुष प्रधान समाजक सोझा
के अधिकारक बात उठेती।
पड़त अग्नि नहिं मुख मे, पुत्रक
जायब स्वर्ग केना धरती सँ।
निज संतान पुत्र आ पुत्री
अछि उत्पन सब अपन रक्त सँ।
तखन कियै छै बनल बाध्यता
करत कर्म सब पुत्र पिता के।
चलतै तखने पुस्त- पुस्त धरि
नाम, वंश, सम्मान पिता के।
वंश चलै छै एखनो ओकरे
जे जग मे इतिहास पुरुष छै।
चललै मार्ग बना क अपने,
भुजबल मे जकरा पौरुष छै।
ज्ञान, धर्म अथवा समाज लय
जे देलकै आहुति प्राण के।
अमर बनल ओ रहत ह्रदय मे,
बदलि देलक भाग्यक विधान के।
कतेक उपेक्षित आइ वृद्ध छथि
अपने सँ अपमान पावि क’।
छन्हिं अपने संतान,चकित छथि
पैघ बनेलथि पालि पोषि क’।
अन्नक लेल प्राण गेल जिनका
पड़ल बूंद नहिं दूध कंठ मे।
भोज भेल भारी परगन्ना
गाय दान भेल श्राद्ध कर्म मे।

वर्तमान बितलन्हि बिपदा मे,
की करता परलोक बना क’।
कतेक धर्म अर्जित क सकता
अंत समय मे वेद सुना क’।
एखनो मंदिर के प्रांगन मे
प्रथा देवदासी अछि निन्दित।
छथि पाथर के देव, नीक अछि,
की करता भ’ क’ स्पंदित।
जौं रहितहुँ एखनहुँ स्वतंत्र हम
नै रहितै इ दशा समाजक।
अंतहीन अछि एकर कहानी
पन्ना किछु पढ़ियौ इतिहासक।
ज्योति
एक नाैकरी चाही
एक नाैकरी के तलाशमे छी
जतय काज हुए अपन माेनक
समय पर जाय आबैके लेल
नहिं कखनाे जाेर चलै आनक
जगह हाेय महल सन आऽ
बाॅस हुअय अपन पसन्दक
आन्हर एवम् बहिर हाेय आ
महिला के नहिं भेटै इर् अवसर
वेतन तऽ तेहेन शानदार हुए जे
ललायित रहै दुनियाके सब मिलियनेयर
कम्पनीके कर्ता धर्ता हम बनी
बाॅस अनुसरण करैै हमर आज्ञाक
राेज आॅफिस आबैलेल सेहाे तैयार छी
जॅं लुक हाेय आेकर रितेश देशमुखक
बात सुनाबक हिम्मत नहिं करै
मुस्काइत रहै हमर सब बात पर
फेर विश्वास नहिं ताेड़ै कखनाे
दरमाहा नहिं राेकै कम्पनीके बंदाे भेला पर
जंगल दिस !- रूपेश कुमार झा ‘त्योंथ’

कम नहि, लागल छल भीड़ बेस
सूर्य उगल, फाटल कुहेस
तरुणी-तरुणक एकटा जोड़ा
घूमि रहल छल गुफा एलोड़ा
चश्मा साजल दुनू केर माथ
रखने एक दोसरक हाथ मे हाथ
हिप्पी देखि लागल तरुण अपाटक
जूता छलैक फोरेन हाटक
जिंस लगौने आओर टी शर्ट
देखि मोन कहलक बी एलर्ट
तरुणीक केश बॉब कटक
खाइत चलैत छल चटक-मटक
बढ़ैत चलि जाइत छल सीना तनने
तरुण प्रेमीक संग गप्प लड़ौने
तरुणी देह पर छलैक वस्त्र कम
तकर ने छलैक ओकरा गम
चलैत-चलैत भेल ठाढ़ दुनू
मोने सोचल एना लोक चलैछ कुनू
धेलक एक दोसर केँ भरि पाँज
देखि कऽ हमरा भऽ गेल लाज
मुँह घुमा पुछलियैक-जेबऽ कोन दिस
बाजल दुनू एक संग-जंगल दिस!
पंकज पराशर,

डॉ पंकज पराशर (१९७६- )। मोहनपुर, बलवाहाट चपराँव कोठी, सहरसा। प्रारम्भिक शिक्षासँ स्नातक धरि गाम आऽ सहरसामे। फेर पटना विश्वविद्यालयसँ एम.ए. हिन्दीमे प्रथम श्रेणीमे प्रथम स्थान। जे.एन.यू.,दिल्लीसँ एम.फिल.। जामिया मिलिया इस्लामियासँ टी.वी.पत्रकारितामे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। मैथिली आऽ हिन्दीक प्रतिष्ठित पत्रिका सभमे कविता, समीक्षा आऽ आलोचनात्मक निबंध प्रकाशित। अंग्रेजीसँ हिन्दीमे क्लॉद लेवी स्ट्रॉस, एबहार्ड फिशर, हकु शाह आ ब्रूस चैटविन आदिक शोध निबन्धक अनुवाद। ’गोवध और अंग्रेज’ नामसँ एकटा स्वतंत्र पोथीक अंग्रेजीसँ अनुवाद। जनसत्तामे ’दुनिया मेरे आगे’ स्तंभमे लेखन। रघुवीर सहायक साहित्यपर जे.एन.यू.सँ पी.एच.डी.।
समयोर्मि
(शक्तिक विरुद्ध मनुक्खक संघर्ष वस्तुतः विस्मृतिक विरुद्ध स्मृतिक संघर्ष थिक। मिलान कुंदेरा, “द बुक ऑफ लाउडर एंड फॉरगेटिंग”)
एहि दिवाकालीन रातिमे कछमछ करैत फड़िच्छ हेबा धरि
एकटक तकैत छी नील-धवल-आकाश
चिड़ै-चुनमुनीक आवाज सुनबा लए आकुल
भोरुकबाक खोज करबा लेल होइत अछि ठाढ़
लगैत अछि अजगरक फाँसमे कुहरि रहल अछि प्रकाश

निशाकालीन दिवसमे शब्द-सूर सब
मल्लोलित-कल्लोलित-शब्दोद्वेलित करैत निस्पृहतासँ
प्रत्यर्पित करैत अछि अवचेतनमे कूटशब्दांधकार

मातृभाषिक संसारमे लहालोट होइत लेखनी घामे-घाम भेल
अंततः भ जाइत अछि ठाढ़
एक-एकटा शब्दकेँ निकतीपर जोखैत

भृतकवीथीसँ दरिद्रवीथी धरि पसरल एक दिस देबालमे
तीन दिस टाट ठाढ़ करैत भृतकगण
सहस्रो वर्षसँ आइ धरि ओहिना पड़ैत छथि देखार
पातंजलिक आँखिमे खचित “कुड्यीभूतं वृषलकुलभिति”

सोतिपुरा आ अग्रहारक बाहर जन्म लेबाक
अभिशापित कालक सांघातिक दंड भोगैत
आदि सभ्यताक अंत पुरुष आइयो भोगैत अछि आर्याचारक
दारुण अरण्याचार
सम-आचारसँ रहित समाचारक नूतन प्रचारक सब
मनुक्ख विरोधी नवाचारक निधोख करैत अछि गोयबल्स केर शैलीमे प्रचार

काल-नियन्ताक क्षुधित मुखाकृति केर असंख्य प्रतिकृति
बौआइत अछि मिथिलाक गाम-गाममे भक्ष्य, भोज्य, चोष्य आ लेह्यक
सांगीतिक गुणानुवाद करैत

उन्नत सभ्यताक सांस्कृतिक साँझमे धर्मधारी विशिष्टाद्वैती प्रवचनकर्ता
विषय-कीर्तनक विशेष कीर्तन करैत अछि सर्वथा विशिष्ट शैलीमे संपादित
विशिष्ट कक्षक विशिष्ट क्षणमे सोमरसमे रंजित

वृद्धा पृथ्वीक आँखिमे उमड़ैत समुद्रोर्मि
आदि पुरुषक नोरसँ आओर होइत अछि नोनछाह
आदि नारीक रक्तसँ पाटल अछि उन्नत सभ्यताक घृणाच्छादित रक्ताकाश

रक्तात सभ्यताक विलुप्त सरस्वतीमे अहर्निश कनैत अछि
द्वारबंगक दू टा माछ

मत्स्यप्रेमी द्वारबंगी सामन्त आ महाराज मत्स्योपभोगक लेल
आकुल-व्याकुल कुल-कुल के मत्स्यक बिना कोनो मात्सर्यक
करैत रहल अछि शिकार

शिकारित जीव सबहक आर्तनादी हाहाकारसँ
परिपुष्ट होइत रहल अछि आखेटक सबहक क्रूरात्मा

एहि दिवाकालीन रातिमे शिकारित जीव सबहक हत आत्मा
पुछैत अछि अपन-अपन अपराध
जैजैवन्ती रागमे निष्णात इतिहास-पुरुषसँ बेर-बेर

उर्वीपुत्रीक दारुण जीवनक व्यथोपकथनसँ द्वारबंगी माछक
अश्रुपूरित आँखिमे अभरि अबैत अछि ऐतिहासिक सभ्यताक सांस्कृतिक रक्तपात

असंख्य मनुक्खक रक्तसँ पाटल द्वारबंगमे बनैत रहल
उजड़ैत रहल बुभुक्षित साम्राज्य

उर्वीजाक भातिज सबहक रक्तसँ शमित करैत रक्त-पिपासा
उर्मिल नदीक कोरमे खेलाइत माछक प्राणांतक कथा
नहि कहत द्वारबंगक मत्स्यभोगी इतिहास-पुरुष

साओन मासक रातिमे जागि कए प्रात करैत
भृतकवीथीक लोकक व्यथा नहि कहत कापुरुष जयदेव

एहि दिवाकालीन रातिमे पातंजलिक बाट तकैत
विदा होइत छी भिनसरे-भिनसर राजघाट दिस

निरन्तर लऽग अबैत शब्दोर्मिमे डुबैत असंख्य माछक ऐतिहासिक अश्रुओर्मिमे
कटैत रहैत अछि हमर हृदय-सिन्धुक पाट!
सुबोध ठाकुर
हम गामेमे रहबइ
रही दूर अपन माटिसँ मेनेजर रहि-रहि कलुशय
छोड़ि अपन गाम मन रहि-रहि बिहुसए

ओ सुन्दर मनभावन पोखरिक घाट
ओ वसंत आर सावनमे सुन्दरि पाबनिहारनिसँ सजल बाट-घाट
बगियामे सदिखन कोयली कूकए
रही दूर अपन गामसँ मेनेजर रहि-रहि कलुशय

अछि सुबोधक कामना, जुनि करू दूर आब पुत्रकेँ माँ
अहीँक सानिध्यमे रहए लेल मन तरसए,
छोड़ि अपन गाम मन रहि-रहि बिहुसए।
बालानां कृते- 1. मध्य-प्रदेश यात्रा आ 2. देवीजी- ज्योति झा चौधरी
1. मध्य प्रदेश यात्रा
पाॅंचम दिन ः
27 दिसम्बर 1991 ़ः
काल्हिक लम्बा पदयात्रा आ देर रातितक फिल्म देखलाक कारण आइर् भाेरे उठैमे बहुत आलस बुझाइत छल।तैयाे हमसब साढ़े छह बजे अपन सामान संगे आगाॅंक यात्रालेल पूर्णतः तैयार छलहुॅं।आइ हमरा सबके जबलपुर पहुॅंचक छल।हमर सबहक यात्रा बस सऽ करीब सात बजे भाेरे प््रा ारंभ भेल।रस्ताभरि प््रा ाकृतिक दृष्य के निहारैत रहलहुॅं।हमर इर्च्छा अछि जे अहि स्थानक शहरीकरण नहिं हाेइर् लेकिन पता चलल जे बढ़िया बढ़िया हाेटलक विकासक प््रा्क्रिया चलि रहल छै।हम कवि भवानी प््रा सादक रचना ‘सतपुरा के घने जंगल’ पढ़ने रही।आेहिमे कवि सतपुराक वन के सघनताक जेहेन वर्णन केने छथि से अक्षरशः सत्यन प््राुतीत हाेइत छल।
जबलपुर पहुॅंचिकऽ सब फिल्मक बात करैत रहै। हमहु सुनैत रही।पता चलल जे फिल्म ‘पत्थःर के फूल’ अभिनेत्री रवीना टण्डन के पहिल फिल्म अछि आ अकर गानामे मुम्बइर्के पूरा प््रामसिद्ध सड़क सबहक नाम अछि।

2.देवीजी :
देवीजी ः महिला दिवस
महिला दिवस के अवसर पर देवीजी के बढ़िया अवसर भेटल छलैन भारतीय महिलाक सम्मान पर बात करक। आे सब विद्यार्थी सबलग अपन बात अहि श्लाेक सऽ प््रारारम्भ केली –‘ यत्र नार्येस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ अर्थात् जतय स्त्रीक पूजा हाेयत अछि ततै देवताक निवास हाेयत अछि। देवीजीके अनुसारे इर् बात अक्षरशः सत्‍य छल।
हुन्कर कहब छल जे स्त्री सब तरहे शक्तिूशाली आ सक्षम अछि तखनाे आे समाज मे दुतिभावनाक मारि झेलैत आबि रहल अछि। यद्यपि आेकर स्थिति दिनाेदिन सुधरि रहल छै तैयाे अहि समस्याक पूर्णतः उन्मूलन आवश्यक अछि। कतेक जगह बच्चा जे जन्मलाे नहिं रहैत अछि तकर लिंग परिक्षण कऽ गर्भेमे मरवा देल जायत छै जॅं मार्तापिताके पता चलै छै जे बच्चा स्त्री अछि।इर् बड़का जघन्य अपराध हाेयत अछि जाबै इर् नहिं स्थिति रहैजे बालिका संख्या बेसी हाेय अर्थात् डेमाेग्राफिक रेसियाे गड़बड़ायल हाेय वा चिकित्सैक काेनाे अतिशय दुःखद कारणवस एहेन सलाह दैथ।बाल विवाह़ दहेज समस्या़ सर्तीप््रा़था़ विधवा के सब सुख सऽ वंचित केनाइ़ पढ़ाइर् के बराबर सुविधा नहिं भेंटनाइऱ् महिला संगे दुर्व्यवहार आर जाने काेर्नकाेन तरहक दुःख के स्त्री झेलैत आबि रहल अछि। लेकिन अहि सब वाधाके बादाे स्त्री प््रा्त्येाक क्षेत्रमे अपन स्थान बनाबैत रहल अछि।जतय कताै आेकरा माैका भेटलै आे साबित केलक जे आे ककराे सऽ कम नहिं अछि। आऽ माैका भेटऽके काेन बात छै बहुत जगह आे शुरूआत कऽ इतिहास निर्माण सेहाे केने अछि।उदाहरण लेल श्रीमति किरण वेदी के लियऽ जे भारतके प््रातथम महिला आइ पी एस आॅफीसर छथि।हुनका कहल गेल रहैन जे स्त्रीके अतेक शारीरिक परिश्रम वला काज नहिं करबाक चाही लेकिन आे आरामक पद छाेड़ि आइ पी एसक पद पर अपन क्षमता साबित केलैथ।बेचेन्द्री पाल भारतके प््रा थम महिला पर्वताराेही छैथ जे माउण्ट एवरेस्ट पर चढ़ल छलैथ।तहिना भारतीय मूलके सुनीता विलियम्स व अन्य महिला अंतरिक्षक यात्रा कऽ रहल छैथ। भारतीय राजनीति के सवाेर्च्च पद राष्ट्रपत़ि प््रापधानमंत्री एवम् मुख्यथमंत्री तकके पद के स्त्री सम्मानित कऽ चुकल छैथ।
अहि तरहे आे सब तरह सऽ पुरूषक बराबरी कऽ सकैत छैथ लेकिन बहुत जगह पुरूष हुन्कर बराबरी नहिं कऽ सकैत छथि।जेना बच्चाके अपन गर्भमे राखिकऽ विकसित करैके आर्शीवाद भगवान स्त्रीये के देने छथिन।माॅडलिंग आऽ फैशनक दुनियामे अखनाे महिलाक बाेल बाला छै।लेकिन अकरा विकासक नशा कहबाक चाही जे आधुनिकताक धुन मे स्त्री अपन वास्तविकता के बिसरि गेल अछि। लाेक विवाह आ बच्चाक जन्म देबऽ सऽ दूर हुअ लागल अछि। स्त्रीमे इर् क्षमता छै जे आे पारिवारिक आ व्यवसायिक जीवनमे सामञ्जस्य बना सकैत अछि। तैं आेकरा समान अधिकार भेटबाक चाही।संगहि स्त्रीयाे के चाही जे आे समाज व्यवस्थाके अनुशासनके एकदम सऽ नहिं बिसरै।
तकर बाद इहाे आवश्यक अछि जे स्त्री एक दाेसर के मददि करैथ। जतऽ अपना कमी लगलैन से अपन बेटी पुतहु के नहिं हुअऽ देथिन। समाजमे स्त्रीक स्थिति सुधारक यैह रस्ता अछि। देशमे कानूनक कमी नहिं अछि। सब तरहक कानून छै लेकिन तैयाे स्त्रीक हालत आन देश स कनि पिछड़ले बुझायत छै। अहि के लेल स्त्री शिक्षाके बढ़ाबैके आवश्यकता अछि जाहि लेल घरक स्त्री बेसी बढ़िया काज कऽ सकैत छैथ अपन बच्चा सबके पढ़ैलेल प््रा ेरित कऽ।
देवीजी कहलखिन जे भारतमे सर्वदा स्त्रीके सम्मान भेटल छैन।कहल गेल छै ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ अर्थात् माता एवम् मातृभूमि स्वर्ग जकाॅं पूजित हाेएत अछि।भारतमे आदिकाल सऽ अनेकाे देवी के दुर्गा़ सरस्वती़ लक्ष्मी वा अन्य रूपमे पूजल जायत अछि।तैं आे सबके कहलखिन जे स्त्रीके प््रादति सम्मान भारतीयताक सबसऽ पैघ निशानी अछि।अहि परम्पराके निर्वाह करक अनुराेध करैत आे अपन वक्तरव्य समाप्त केली।

बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
१.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् – विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे – देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽ–बिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।
विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.
१.पञ्जी डाटाबेस २.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.पञ्जी डाटाबेस-(डिजिटल इमेजिंग / मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण/ संकलन/ सम्पादन-पञ्जीकार विद्यानन्द झा , नागेन्द्र कुमार झा एवं गजेन्द्र ठाकुर द्वारा)
जय गणेशाय नम:
उँ नमस्यय शिवाय:
उँ नमस्यय शिवाय:
(64) “32”
गागूंक साण्ड3र सँ नन्दी्श्वार सुत वाणीश्वेर दौ खण्डकवलासँ गौढि़ दो।। गांगु सुत: रति: (41/08) सुत: रति: सरिसन सँरूद दौ।। (17/04) (34/06) रूद्र सुता सकराढ़ी सँ जाई दौ (04/01) कुजौली सँ राजू द्दौ।। एवं गोढि़ मात्रिक चक्र।। (20/05) गोढि़ सुतौ परान ऋषिकेशों टकबाल सँ रामकर सुत बाछे दौ।। नरघोघ टंकबाल सँ बीजी शुचिकर:।। शुचिकर सुतौ थेघ: शेध सुतौ प्रितिकर दामोदरौ (64/06) कमग्राम सकराढ़ीसँ नरपति दौ।। प्रितिकर सुतौ रतिकर लासू कौ खौआनसँ महामहो देवादित्यत सुतजीवे दौ सुरगनसँ गंगाधर द्दौ।। (5/07) रतिकर सुता रामकर रविकर ढोंढेका सकगढ़ीसँ भी दौ।। (4/07) सटुज नाइ सुतौ भीम (64/01) कुरेश्व रौ नरउन सँ गंगादाश दौ।। भीम सुतौ गंगेश्वार रतीश्व।रौ अलसयसँ म म उपा रामेश्वार दौ। (02/01) दरिहरासँ रति द्दौ।। रामकर सुतौ बाछेक: मरउनसँ श्रीकर दौ।। (08/07) (43/07) श्रीकर सुतो दँमे पर उँफौ माण्ड रसँ महो रघुपति दौ।। (18/03) महो रघुपति (57/09) सुता जानपति (264/07) विभापति नजापतिय: सोदापुर सँ महामहो पाच्यादय सरबए सुत खांतू दौ खौआल कृष्ण8पति द्दौ।। एवं बाछेमात्रिक चक्र।। बाछे सुता दरिहरा सँ साने सुत सौरि दौ।। (11/06) महामहो कीर्तिशर्म्मम सुतौ केशव शिवौ बहेराखीसँ लड़ाखवन सुत सुपनदौ पबौलीसँ रूददौणा केशव सुता बाणे सोने कोन (38/02) ऋषय: पनिचोभसँ सोंसे दौ।। (08/05) सफराढ़ीसँ जीवेश्वँर दौहिम दौ।। सोने सुता सिरू कारू (35/02) चन्द्रय मौगरे सौत्रीका: सोदरपुरसँ रामनाथ दौ।। (18/10) (30/07) रामनाथ सुता बलिदान सँ भीख सुत हिरमणि दौ जललकी सँ भवेश दौ।। सोने सुता सिरू (35/02) कारू चन्द्रह मौरे (50/06) सौगीका: सोदरपुरसँ रामनाथ दौ।। (18/10) (30/07) रामनाथ सुता बलिदान सँ भीख सुत हिरमणि हौ जल्ल दीसँ भवेश द्दौ।। सोरि सुतो (32/10) दाशे दिनेकौ पालीसँ रतनपाणि दौ।। (05/04) नरसिहं सुत श्रीधर गुणीश्व र गोपाला (31/06) एकहरासँ रूचिक दौ गोयल सुतौ रतनाणि

(63)
रूद्रपाणि माण्डसर मिश्र गटान सुत वीर दौ राउढ़सँ श्रीमाथ द्दौ।। (24) रतनपाणि सुता महाई (50/05) विक्रम (55/03) राम (53/01) राम का: खौआलसँ श्रीकर दौ।। (19/04) गंगोरसँ नोन द्दौ।। रामरान मात्रिक्रकं।। परान सुतौ (96/09) अर्जुन कामदेवौ खडीक खौआल सँ कुश सुत वेणी दौ।। (20/11) (48/08) माधव सुतौ रूचिनाथ: धुसोतसँ धृसौतसँ धृतिकर सुत हरिकर दौ सरिसदसँ सुधाकर द्दौ।। रूचिनाथ सुता (56/10) लव कुश शिव (52/02) गौरी (35/01) केशवा पालसँ हरिकर दौ।। (10/05) प्राणधर सुता हरिकर सुधाकर (34/02) शुभकरा हरिहरासँ (63/05) रूद्र दौ (195/01) हरिकर सुतौ गुणाकर (29/01) गाईका: माण्डहरसँ आडवनि दौ।। (18/03) आडन्निँ (27/09) सुतौ नरपति (40/07) रविपति द्दो।। कुश वेणीक: सोदरपुरसँ शिव दौ।। (55/07) डालू सुताशिव (42/08) अफैल (74/04) (26/01) गाइका: माण्डनरसँ आडनि दौ।। (18/03) (27/09) आडन्निद सुतौ (40/07) नरपति रविपति करमहासँ गंगेश्व7र दौ।। (02/08) खौआलसँ आडू द्दौ।। शिव सुतौ उद्योरण (51/07) काशी सतलखासँ भाष्कशर द्दौ: सतलखासँ बीजी मतिकर: ए सुतौ सिधूक ख सुतौ रतनाकर: बुधवालसँ मधुकर दौ खण्ड5दना सँ सुथे द्दौ।। रतनाकर (24/04) सुता हरिकर भाष्कसर (39/09) दिवाकर चन्द्रतकर (38/09) शकरा: बेलउँच धरादित्य दौ।। (10/04) भरेहासँ गणपति द्दौ।। (56/08) भाराकर सुतो थेप्यर: बुधवालसँ शुभंवर सुतदामोदौ वलियासँ नितिकर द्दौ।। एक वेणी मात्रिक चक्र।। वेणी सुतौ पीताम्बणर टकबालसँ रूद सुत गांगु दौ (09/10) रूद सुतौ गांगुक नल्ह नउर संजोर दौ गोविन्दि सुतौ जोर: माण्डेरसँ अमतू सुंत हरदत्त दौ फनन्द हसं शोरे द्दौ।। गांगु सुतो नन्हीूपति बेलहररिहर दौ( 02/04) हिरद सुत्रौ (65/06) हरिहर:

(64)
हरिहर मधुसरवाटू (50/02) ठाम (145/03) का: पबौलिसँ शिवदत्त (20/05) देवदत्त (35/07) सुतौ सदुपाध्याौय शिवदत्तू भवदन्तौ0: माण्ड रसँ गयन दौ।। (20/06) तिसुरीसँ नरसिहं द्दौ।। सदुपाध्यागय (30/08) शिवदत्त सुता जालयसँ महिधर दौ।। (72/011) महामस्तधकमाधि सुता सोम (56/09) भोगा जीवे का: यमुगामसँ गताई दौ।। हरिहर सुता वर्दन ठकरू भमर सकराढ़ी से देवे दो।। (08/05) चांड़ो सुतौ गुणीश्वार गंगोलीसँ बराह दौ।। ए सुतौ रतीश्वार (39/10) मतीश्वनरौ गंगोलीसॅ माने द्दौ।। रतीश्वधर सुता (34/09) भोगे देवो गोढ़े का: (3/06) खण्डाबलासँ मतिश्वसर सुत सिधूदौ थरिया सँ रविनाथ द्दौ।। देवे सुता (63/01) नागे शिव बढाई का: सोदरपुर सँ शमदत्त (21/01) हरदत्त सुतौ माधवदन्त : सकराढ़ीसँ कुली दौ माधवदन्त सुतौ शुभ दत्त फरमाहासँ मांगु दौ।। शुभदन्त:सुता शिरू देवे (85/07) (47/08) सुता नागे शिव महाई का: (61/09) सोदरपुर सँ शमदत्त (21/01) हरदत्त सुता माधवदत: सकराढ़ी सैकुली दौ माधवदन्त/ सुतौ शुभदन्तद: करमहासँ मांगु दौ।। शुभदन्त/ सुता (85/07)शिरू देवे सोमा: (47/08) सतलखासँ सिधू सुत रतनाकर दौ (24/07) अपरा रतनाकर सुता पालीसँ दुर्गादित्यन दौ।। (19/07) बलियासँ रामशर्म्म द्दौ एवम ठ रघुपति मात्रिक चक्र।। ठ. रघुपति सुतो धराधर लक्ष्मीभ धरौ पुड़े नरउनसँ बाबू दौ।। (08/03) दिवाकर सुतौ दिनकर: टकबालसँ प्रितिकर दौ।। (23/03) खौआलसँ जीवेश्वलर द्दौ।। (67/03) दिनकर सुता (60/04) परम (76/04) वीर (36/05) (56/01) शिरू का: तत्रदयासत्रय दरिहरासँ कुसुमाक दौ अन्योल प्रथमा परौक्षे दरिहरासँ कुसुमाक सुत मितू दौ।। (11/08) (48/04) कुसुमाकर सुता रूचि मित सिधू नन्दसका: कनन्दोत सिधू नन्दूकका: कनन्दततसँ सोरिसुत गोविन्द6 दौ माण्ड रसँ वागीश्व(र द्दौ।। मित सुता नाथू पॉं महनू मानू का: पानिचोभसँ मधुकर दौ।। (18/05) मधुकर सुता बलियास सँ रूचिकर सुत कुसुमाकर दौ एकहरा सँ शुकल दौहित्र दौ।। अपरा (14/05) ठ. रघुपति (69/03) सुता बुधवालसँ परान सुत नारायण दौ बलियासँ श्री राम द्दौ।।

(65)
एवम् गिरू मातृक चक्र।। गिरू सुतौ सदुपाधय जीवनाथ: माण्डनर सँ (25) बसाउन दौ।। (20/01) सुरपति सुतौ गुणीश्ववर: पनिचोभसँ हरिकर दौ (22/05) गंगोलीसँ पौखू द्दौ।। गुणीश्व‍र सुता (65/06) राम बसाउन (32/01) दिनू का: (66/08) भराम जजि ढाम दौ (22/03) दाम सुतौ (39/03) दामू सुतौ (39/05) पागुक: उचतिसँ माधव दौ।। (06/10) माधव सुतौ (68/02) शुचिकर: खौआल सँ शुभे दो।। (107/01) बसाउन सुतौ (93/06) रूचिनाथ गोपीनाथौ (132/06) सरिसबसँ परान दौ।। (20/05) विरेश्व र सुतौ परान: खौअसँ हरिपति दौ।। (07/09) (36/01) हरिपति सुतौ (47/05) कउरू क: सोदरपुरसँ विश्वेवश्वार दौ।। (15/06) दरि मुनि द्दौ।। परान दौ (20/05) विरेश्वचर सुतौ परान: खौअनसँ हरपति दौ।। (35/07) सँ हरिपति दौ।। 07/09) (36/01) हरिपति सुतौ (47/05) कउरू क: सोदरपुरसँ विश्वे3श्वतर दौ।। (15/06) दरि मुनि द्दौ।। परान सुता बहेराढ़ीसँ गदाधरदौ।। (07/10) ठ. गदाधर सुतौ चाण: सुदई बेल रूद्रादित्ये दौ।। (10/;3) रूद्रादित्यि सुतौ (30/07) होरेक: नाउनसँ हरिश्वौर दौ।। (10/06) हरिश्व7र सुता गदाघर जगद्दा मशे देवधर विस्कीबरसँ हददनत सुत होराई दौ निरसूतिसँ महिघर द्दौ।। एवम जीवनाथ मत्रिकसुंप्रथा सदुपाध्या0य जीवनाथ सुता रामचन्द्रत परनामक बामू (84/106) (85/04) महिनाथ (113/08) राममद्र अनिरूद्धा: हरिश्रमसँ भवदन्तप दौ।। (18/08) गांगु सुतौ केशव: (27/05) खौआलसँ विश्व)नाथ दौ।। केशव सुता मागु नरहरि (31/08) मागु नरहरि (27/06) बहमपुर वालसँ नारू दौ। (20/09) नारू सुता बरूआरीसँ रविकर दौ।। (12/06) रविकर सुतौ सुधकर: खण्ड7 जाई दौ।। (09/02) मालिछसँ देहरि द्दौ।। मांगुसुताह पुरदबू गोपाला: दरिहरासँ बासू (1123/05) भवशर्म्म( सुतो बागूक: हरिणरति दौ।। बागू सुतौ बासूक सोदर म.म रतिनाथ दौ (22/01) मा मा वहेड वासू सुतो गढ़ धुसौतसँ रतिकर सुत कुलपति दौ बलियासँ मधुकर दौ।। हरकू सुतौ भवन्द्तल एक बसावन दौ।। (22/08) मते सुता केशव (76/06) महादे माधव लव कुश रतन का: सतलखा सँ रतनाकर द्धौ

(66) ”25”
(24/05) पालीसँ दुर्गादित्यर द्दौ।। कन्हौसली कहरासँ (29/01) माधव सुतोटूनी बसावनौ (33/01) सुधाकर सुत चान्दव दौ कुधलासँ दाश द्दौ।। बसावन सुता बहेरिढ़ाी सोने दौ (07/01) नरहरि सुताबाराह (42/03) बाउरे (48/08) नरउनसँ कोने दौ।। (14/05) सक जीवेश्व र द्दौ।। (42/03) बाराह सुता नोने सोने इबे चौवेका: माण्ड रसँ रघुपति दौ तिसूसँ सिधू दौहित्रदॉं सोने सुता यद सुधकर प्रढ सुधे महाईका: (46/01) खौआलसँ रति दौ।। (16/07) रमापति सुतो हरिहर बेलउच सधरदित्यन दौ।। (10/05) मरेहासँ गणपति द्दौ।। हरिहर (29/09) सुतो रति: टकबाल सँ केशव दौ।। (09/05) केशव सुता हरदत्त (43/06) भवदन्त रविदन्त देवदन्ता : (49/04) जजिवालसँ बानू द्दौ।। रतिसुत जल्ल(कीसँ मतिकर दौ।। (12/01) रतिघर सुत मतिकर सुतौ टकबालसँ केशव दौ (09/05) केशव सुता हरदन्त) (43/06) भवदनत रविदन्तक (41/05) देवत्ता: (49/04) जजिबालसँ बाबू द्दौ।। रतिसुत जल्की दौ सँ मतिकर दौ।। (12/010) म म रतिघर सुत मतिकर सुतौ लक्ष्मी‍कर: माण्डउरसँ सुरसव दौ (22/02) कुजौलीसँ राजू द्दौ।। एवं भवदन्तन मात्रिक चक्र। भवदत्त सुता खौआल विशोदा (21/04) आमरू सुतोविशोक: कर श्रीकान्तड दौ (1121/011) खौआल स गोविन्दं द्दौ।। विशो सुतो (302/02) गोविन्दन बुध हलधर दौ।। (19/04) पॉंखु सुतो हरधर: दरि गिरी दौ।। (22/04) गिरी सुताशमकरी (39/04) (57/02) माधवा: सोदहर दौ।। (23/10) कु वंशवर्द्धन द्दौ।।हलधर सुतौ (91/04) थे ध: वितरखा माण्डसरसँभाने दौ// (19/10) भानुकर सुतो रामकर: घटे रवि दौ।। रामकर सुतौ मानेक: घुसौतसँ गुणाक दौ। (20/01) गुणाककर सुतौ गोढि़ बलि श्रीधर दौ।। (94/04) वितरका माण्डरर सँभाने दौ।। (19/10 भानुकर सुतो रामकर: घंटे रवि दौ।। रामबर सुतो मानेक: घुसौतसँ गुणाक ढौ।। (20/101) गुणकर सुतौ गोंढि़ बलि श्रीधर दौ।। (94/04) माने सुतौ पीताम्बरर: (23/08) हरि विभू दौ (16/03) नोने सुता चाण (28/04) विभू परम (36/03) लाखूक। (37/02) पन्दौहीजनि रूद्रपाणिदॉंकश्यसम गोत्रे बा्रहमपुरासँ हरदिहर द्दौ।। मिमांशक (33/03) वम सुता बुद्धिकर (50/08) होरे 66/01) जोरे का: तयहनपुरसँ गोपाल दौ।। 24/09) गोविन्दु सुतौ गोपाल: पालीसँ कामेश्वुर दौ गोपाल सुतौ लान्हूकक: पालीसँ नादू दौ (61/04) (112/05) लाइ सुतौ यशु डुगरू (38/05) बागे का: माण्डंरसँ जीवेश्व‍र दौ।। एवम बाबू मात्रिक नक्रा।

(67)
रामचन्द्राौ परनामक बाबू सुतो (84/06) (97/04) दामोदर: कटका सोदरपुरसँ विशो सुत (26) भानु दौ।। (24/05) शादू सुता महाई गोनू (17/02) विशो (67/05) जीवे पराना: माण्ड रसँ जोर दा।। (07/110) चौबे सुतौ शिव धमौ।। (253/01) शिव सुतौ कामेश्वनर: बेलउँचसँ सुत केशवदौ।। कामेश्वेर सुता पीते सागर विठूका: कोइयार सँ विनायक दौ महो सागर सुता सदु भीवे महामहात्तक जोर जाने का बहेराढ़ीसँ धृतिकर सुत बाराहदौ दरिहरासँ हश्शिर्म्म‍ द्दौ महामहत्तक (39/07) जोर सुता पालीसॅं सँदुगुरू दौ।। (25/01) (35/10) डगरू सुतो रघु शिवौ खौआल सँ जीवे दौ।। (20/10) अपरा शुचिकर सुतौ नाने जीवों करमहा सँ नितिकर दौ जीवे सुता रतन (29/07) मांगु हरय: पनिचोभ सँ धराई दौ वीरपुर पनिचोभ सैवांसी महेश्वइर ए उतौ कामेश्वअर ए सुतौ रतनेश्वदर ए सुतौ नाथू बारू कौ ।। बारू सुतौ धराईक: माण्डभरसँ महामहोपाधय जगन्नामथ दौ निरबूति से विदयाधर द्दौ।। (29/01) धएई सुता करूआनी सकराढ़ी सँ भीम दौ एवं विशोमातृक चक्र।। दिशो सुताकेशव म भानु (88/03) कुमार राजा का: माण्डिरसँ गागे दौ।। (21/03) भवदत्त सुतो कान्ह।: हरिश्रमसँ रूचि दो ।। कान्हभ सुतो रवि गिरी कौ बोहाल करमाहासँ शिववंश सुत सुपन दौगंगुआल सँ गोविन्दा द्दौ।। गिरी सुतौ कुले गागे कौ पालीसँ पौखू दौ।। (13/09) खौआलसँ नरसिहं द्दौ।। गांगु सुतौ महन रंजनो (40/01) (229/07) कुजौली से सुरपति दौ।। (04/04) रूद्र सुतौ रघुक: ए सुतौ कानह: पबौली सँ महिपतिदों

(68) ”26”

कान्ह8 सुतो सुरपति: सकराढ़ी सँ चण्डेपश्वुर सुत देहरिदौ दिधोय सँ जगन्ना थ द्दौ।। सुरपति सुतौ बेध मेघौ तिसुरीसँ पौखू पौत्र खाजो सुत गुदिदौ खॉंजो सुतौ गुदिक: खण्डढ शुभदत्त दौ।। गुदिसुता कौर पाली दरिहरासँ मधुकर सुतमांगु दौ कोयूयारसँ सुधाकर द्दौ।। मानुमात्रिक मिश्र मानुसुतो (63/04) भवानीनाथ रामनाथौ (32/06) बाली परिहारासँ होराई दौ।। (22/04) रूपन (49/10) सुतौबासूक: पालीसँ केशव दौ।। (14/04) नाउनसँ कोने द्दौपा (62/05) जासुतेर बुधा (67/03) सुधाईकौ हरिअम सँ रति दौ।। (16/03) रतिसुतौ महाइक: (85/02) भाण्डँर सँ कृष्ण पति दै।। (18/08) कृष्णअपति सुतौ रामपति सर्वपति (48/01) बुधवालसँ भानु दौ (19/04) ढीह प्रतिनाथ द्दौ।। बुधाई सुतौ चिकू होराई कौ पनि माने दौ (17/011) गोविन्दई सुतो मानेक: चत चान्दण दौ।। 24/07) (28/09) चान्दन सुतो मतिकर: फनन्दप महेश्व(र दौ।। माने सुतौ रामपाणि रतनपाणि एक महाई दौ। (22/06) जानपति सुतौ रवि (83/08) ढामोदरौ बुधपाल सॅ महेश्वतर दौ।। (19/04) महेश्व र सुता पबौली सँधराधर सुत विशो दौ बलि दिनकाणि द्दौ।। होराई मात्रिक चक्र।। होराई सुता (82/05) देवनाथ काशीनाथ महिनाथा: मरमहासँ रघुनाथ दौ (02/08) श्री वत्सक सुता बाछे (36/08) शम्मुई हरय: दरि कोचे दौ (15/01) कोचे सुतौ दुगीदित्यल गोनू (53/02) कौ गढ़ धोसातसँ रविकर दौ।। 19/01 भण्डा6रसँ हरदत्त

(69)
बाछे सुतो (27/02) भवे कौ खण्डहबला सँ लाख दौ।। (011/06) लाख सुता राम रूद कुल्प/तिय: बभनियामसँ किठो दौ।। (06/08) खण्ड2दलासँ रविकर द्दौ।। (13/05) भवे सुतौ रघुनाथ: नरउन सँ विदू दौ।। (08/02) चन्द्राकर सुतौ (28/10) बागे ओहरि बहेराढ़ीसँ बासू दौ।। (07/08) तल्ह(नपुरसँ रतनाकर द्दौ।। (80/08) अहरि सुतौ विदूक: तिसूरीसँ ग्रहेश्वोर सुतदिधदॉं माण्ड र सँ माने द्दौ।। विदू सुता श्रीपति गिरपति (704/07) पाखूका: पनिचोभसँ महेश्वमर दौ।। (20/03) माण्डोरसँ रूचिकर द्दौ रघुनाथ मात्रिक रघुनाथ सुतौ श्री नाथ हरिनाथ सोदारपुरसँ मीन दौ।। (16/08) राम सुतौ भीम: न रउन सँ दिनकर दो।। (24/08) दरिहरा सँ कुसुमाकर द्दौ।। (8/01) भी सुतो जीवनाथ (62/04) विश्व नाथा: बलि हरिअमसँ भवे दौ (25/07) (54/01) नरहरि सुता (55/06) रवि मवे (74/02) (31/04) (45/02) कुश मधुकर साधुकर बुद्धिकर (75/06) (334/09) कृष्णा( सिमरौनी माण्डनरसँ गिरीश्वसर दौ।। (20/07) गिरीश्वसर सुता विशोराम हल्ले श्वधरा: कुजौली से चन्द्र कर सुत मितू दौ खौआल सँ डालू द्दौ।। (44/07) भवे सुतो गणेश: नरउनसँ मेघ दौ।। 1903) शुचिका (74/03) सुतौ मेध: वमनि इशर दौ।। (06/07) महिपति सुतौ इशर (51/10) रघुकौ बलि जयानन्दँ दौ।। इशर सुता शादू कुलपति (35/08) गोदिका जगतिसँ धाम दो।। (15/05) बास सुतो धरेश्व/र: ए सुतो धाम: सरौनी सँ इशर रधुकौ (51/01) बलि जयानन्दि दौ।। इशर सुता शादू कुलपति (15/05) बारस सुतो धरेश्व/र: ए सुतो धाम: सतैनी से महादेव दौ।। धाम सुतो भवेक: तपोवन सँ विढ दा (52/09) मेघ सुतौ गौरीपति बाबू (136/10) इन्द्र/पतिय: माण्डमरसँ कुलपति दौ।। (24/05) (31/08) आड़नि सुतो कुलपति सोदा विश्व9नाथ दौ।। (22/110) मम विश्वेनाथ सुतौ गोपीनय: (29/020) वलियासँ सँ शंकारसुत कृष्णे दौ असयसँ गोती द्दौ।।

(70) ”27”
(38/03) कुलपति सुतौ मांगुक: बहेराढ़ी सँ पांखू दौ।। (09/04) त्रिपुरे (40/07) पौखूक: परसंडा सं श्री दत्त

२.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
मैथिलीक मानक लेखन-शैली

1. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली आऽ 2.मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली

मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन

१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना-
अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।)
पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।)
खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।)
सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।)
खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।)
उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओलोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि।
नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोकबेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोटसन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽकऽ पवर्गधरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽकऽ ज्ञधरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।

२.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आनठाम खालि ढ लिखल जएबाक चाही। जेना-
ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि।
ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि।
उपर्युक्त शब्दसभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।

३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहिसभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।

४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएवला शब्दसभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, याबत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।

५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि।
प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि।
नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि।
सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्दसभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारूसहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि।
ए आ “य”क प्रयोगक प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।

६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।

७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।

८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि:
(क)क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमेसँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक।
अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक।
पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक।
(ख)पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह।
अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह।
(ग)स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि।
अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल।
(घ)वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि।
अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि।
(ङ)क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक।
अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ।
(च)क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि।
अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।

९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटिकऽ दोसरठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु(माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्दसभमे ई नियम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।

१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्दसभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषासम्बन्धी नियमअनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरणसम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्षसभकेँ समेटिकऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनिकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽवला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषीपर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़िरहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषतासभ कुण्ठित नहि होइक, ताहूदिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। हमसभ हुनक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ चलबाक प्रयास कएलहुँ अछि।
पोथीक वर्णविन्यास कक्षा ९ क पोथीसँ किछु मात्रामे भिन्न अछि। निरन्तर अध्ययन, अनुसन्धान आ विश्लेषणक कारणे ई सुधारात्मक भिन्नता आएल अछि। भविष्यमे आनहु पोथीकेँ परिमार्जित करैत मैथिली पाठ्यपुस्तकक वर्णविन्यासमे पूर्णरूपेण एकरूपता अनबाक हमरासभक प्रयत्न रहत।

कक्षा १० मैथिली लेखन तथा परिमार्जन महेन्द्र मलंगिया/ धीरेन्द्र प्रेमर्षि संयोजन- गणेशप्रसाद भट्टराई
प्रकाशक शिक्षा तथा खेलकूद मन्त्रालय, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र,सानोठिमी, भक्तपुर
सर्वाधिकार पाठ्यक्रम विकास केन्द्र एवं जनक शिक्षा सामग्री केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुर।
पहिल संस्करण २०५८ बैशाख (२००२ ई.)
योगदान: शिवप्रसाद सत्याल, जगन्नाथ अवा, गोरखबहादुर सिंह, गणेशप्रसाद भट्टराई, डा. रामावतार यादव, डा. राजेन्द्र विमल, डा. रामदयाल राकेश, धर्मेन्द्र विह्वल, रूपा धीरू, नीरज कर्ण, रमेश रञ्जन
भाषा सम्पादन- नीरज कर्ण, रूपा झा

2. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन
ठाम
जकर,तकर
तनिकर
अछि

अग्राह्य
अखन,अखनि,एखेन,अखनी
ठिमा,ठिना,ठमा
जेकर, तेकर
तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य)
ऐछ, अहि, ए।

2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय:भ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत:जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।

6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।

9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:-हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।

19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

20. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

21.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा’ ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा “सुमन” ११/०८/७६

आब 1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आऽ 2. मैथिली अकादमी, पटनाक मानक शैलीक अध्ययनक उपरान्त निम्न बिन्दु सभपर मनन कए निर्णय करू।

ग्राह्य / अग्राह्य

1.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/ होएबाक
2. आ’/आऽ आ
3. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए
4. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल
5. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
6. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’
7. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करै बला/क’र’ बला
8. बला वला
9. आङ्ल आंग्ल
10. प्रायः प्रायह
11. दुःख दुख
12. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
13. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन
14. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
15. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
16. चलैत/दैत चलति/दैति
17. एखनो अखनो
18. बढ़न्हि बढन्हि
19. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ
20. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ
21. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
22. जे जे’/जेऽ
23. ना-नुकुर ना-नुकर
24. केलन्हि/कएलन्हि/कयलन्हि
25. तखन तँ तखनतँ
26. जा’ रहल/जाय रहल/जाए रहल
27. निकलय/निकलए लागल बहराय/बहराए लागल निकल’/बहरै लागल
28. ओतय/जतय जत’/ओत’/जतए/ओतए
29. की फूड़ल जे कि फूड़ल जे
30. जे जे’/जेऽ
31. कूदि/यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद
32. इहो/ओहो
33. हँसए/हँसय हँस’
34. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/नौ वा दस
35. सासु-ससुर सास-ससुर
36. छह/सात छ/छः/सात
37. की की’/कीऽ(दीर्घीकारान्तमे वर्जित)
38. जबाब जवाब
39. करएताह/करयताह करेताह
40. दलान दिशि दलान दिश
41. गेलाह गएलाह/गयलाह
42. किछु आर किछु और
43. जाइत छल जाति छल/जैत छल
44. पहुँचि/भेटि जाइत छल पहुँच/भेट जाइत छल
45. जबान(युवा)/जवान(फौजी)
46. लय/लए क’/कऽ
47. ल’/लऽ कय/कए
48. एखन/अखने अखन/एखने
49. अहींकेँ अहीँकेँ
50. गहींर गहीँर
51. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
52. जेकाँ जेँकाँ/जकाँ
53. तहिना तेहिना
54. एकर अकर
55. बहिनउ बहनोइ
56. बहिन बहिनि
57. बहिनि-बहिनोइ बहिन-बहनउ
58. नहि/नै
59. करबा’/करबाय/करबाए
60. त’/त ऽ तय/तए 61. भाय भै
62. भाँय
63. यावत जावत
64. माय मै
65. देन्हि/दएन्हि/दयन्हि दन्हि/दैन्हि
66. द’/द ऽ/दए
67. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम)
68. तका’ कए तकाय तकाए
69. पैरे (on foot) पएरे
70. ताहुमे ताहूमे

71. पुत्रीक
72. बजा कय/ कए
73. बननाय
74. कोला
75. दिनुका दिनका
76. ततहिसँ
77. गरबओलन्हि गरबेलन्हि
78. बालु बालू
79. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
80. जे जे’
81. से/ के से’/के’
82. एखुनका अखनुका
83. भुमिहार भूमिहार
84. सुगर सूगर
85. झठहाक झटहाक
86. छूबि
87. करइयो/ओ करैयो
88. पुबारि पुबाइ
89. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि
90. पएरे-पएरे पैरे-पैरे
91. खेलएबाक खेलेबाक
92. खेलाएबाक
93. लगा’
94. होए- हो
95. बुझल बूझल
96. बूझल (संबोधन अर्थमे)
97. यैह यएह
98. तातिल
99. अयनाय- अयनाइ
100. निन्न- निन्द
101. बिनु बिन
102. जाए जाइ
103. जाइ(in different sense)-last word of sentence
104. छत पर आबि जाइ
105. ने
106. खेलाए (play) –खेलाइ
107. शिकाइत- शिकायत
108. ढप- ढ़प
109. पढ़- पढ
110. कनिए/ कनिये कनिञे
111. राकस- राकश
112. होए/ होय होइ
113. अउरदा- औरदा
114. बुझेलन्हि (different meaning- got understand)
115. बुझएलन्हि/ बुझयलन्हि (understood himself)
116. चलि- चल
117. खधाइ- खधाय
118. मोन पाड़लखिन्ह मोन पारलखिन्ह
119. कैक- कएक- कइएक
120. लग ल’ग
121. जरेनाइ
122. जरओनाइ- जरएनाइ/जरयनाइ
123. होइत
124. गड़बेलन्हि/ गड़बओलन्हि
125. चिखैत- (to test)चिखइत
126. करइयो(willing to do) करैयो
127. जेकरा- जकरा
128. तकरा- तेकरा
129. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
130. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/करबेलहुँ
131. हारिक (उच्चारण हाइरक)
132. ओजन वजन
133. आधे भाग/ आध-भागे
134. पिचा’/ पिचाय/पिचाए
135. नञ/ ने
136. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय
137. तखन ने (नञ) कहैत अछि।
138. कतेक गोटे/ कताक गोटे
139. कमाइ- धमाइ कमाई- धमाई
140. लग ल’ग
141. खेलाइ (for playing)
142. छथिन्ह छथिन
143. होइत होइ
144. क्यो कियो
145. केश (hair)
146. केस (court-case)
147. बननाइ/ बननाय/ बननाए
148. जरेनाइ
149. कुरसी कुर्सी
150. चरचा चर्चा
151. कर्म करम
152. डुबाबय/ डुमाबय
153. एखुनका/ अखुनका
154. लय (वाक्यक अतिम शब्द)- ल’
155. कएलक केलक
156. गरमी गर्मी
157. बरदी वर्दी
158. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
159. एनाइ-गेनाइ
160. तेनाने घेरलन्हि
161. नञ
162. डरो ड’रो
163. कतहु- कहीं
164. उमरिगर- उमरगर
165. भरिगर
166. धोल/धोअल धोएल
167. गप/गप्प
168. के के’
169. दरबज्जा/ दरबजा
170. ठाम
171. धरि तक
172. घूरि लौटि
173. थोरबेक
174. बड्ड
175. तोँ/ तूँ
176. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
177. तोँही/तोँहि
178. करबाइए करबाइये
179. एकेटा
180. करितथि करतथि

181. पहुँचि पहुँच
182. राखलन्हि रखलन्हि
183. लगलन्हि लागलन्हि
184. सुनि (उच्चारण सुइन)
185. अछि (उच्चारण अइछ)
186. एलथि गेलथि
187. बितओने बितेने
188. करबओलन्हि/ करेलखिन्ह
189. करएलन्हि
190. आकि कि
191. पहुँचि पहुँच
192. जराय/ जराए जरा’ (आगि लगा)
193. से से’
194. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
195. फेल फैल
196. फइल(spacious) फैल
197. होयतन्हि/ होएतन्हि हेतन्हि
198. हाथ मटिआयब/ हाथ मटियाबय
199. फेका फेंका
200. देखाए देखा’
201. देखाय देखा’
202. सत्तरि सत्तर
203. साहेब साहब
204.गेलैन्ह/ गेलन्हि
205.हेबाक/ होएबाक
206.केलो/ कएलो
207. किछु न किछु/ किछु ने किछु
208.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ
209. एलाक/ अएलाक
210. अः/ अह
211.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन)
212.कनीक/ कनेक
213.सबहक/ सभक
214.मिलाऽ/ मिला
215.कऽ/ क
216.जाऽ/जा
217.आऽ/ आ
218.भऽ/भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक)219.निअम/ नियम
220.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
221.पहिल अक्षर ढ/ बादक/बीचक ढ़
222.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं
223.कहिं/कहीं
224.तँइ/ तइँ
225.नँइ/नइँ/ नञि
226.है/ हइ
227.छञि/ छै/ छैक/छइ
228.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
229.आ (come)/ आऽ(conjunction)
230. आ (conjunction)/ आऽ(come)
231.कुनो/ कोनो
English Translation of Gajendra Thakur’s (Gajendra Thakur (b. 1971) is the editor of Maithili ejournal “Videha” that can be viewed at http://www.videha.co.in/ . His poem, story, novel, research articles, epic – all in Maithili language are lying scattered and is in print in single volume by the title “KurukShetram.” He can be reached at his email: ggajendra@airtelmail.in )Maithili Novel Sahasrabadhani by Smt. Jyoti Jha Chaudhary
Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor’s choice award from http://www.poetry.com and her poems were featured in front page of http://www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London.

SahasraBarhani:The Comet
translated by Jyoti
When Nand saw the advertisement of the Mahabharata in the television he asked his wife, “Why cannot we see Mahabharata in our TV?” His wife replied, “We only have DD1. Someone in the upper floor could see DD Metro because his son bought him a machine worth 300 rupees. That machine when attached to the TV avails DD Metro channel. Mahabharat is telecasted in that channel. Why don’t you buy that machine with your next salary to complement the TV given by our son?”
Nand disagreed, “That will be given by him who gave this TV”
When Aaruni came to know about that he laughed. He arranged the machine in next day and when Nand watched Mahabharata in next week end then everyone was very happy. Aaruni went out of Patna for arms training in that month. Durga Puja was in that one month’s period of training. That was the first time when Aaruni’s fathere had not visited village in Durga Puja. Aaruni also came to Patna in a weekend within the festive season of Durga Puja. It was Sunday. Mahabharata was being telecasted in TV. Aaruni had only one friend. Aaruni was out with him without eating any thing. He returned with his friend. Mother served both of them food.
“Did father have lunch?” he asked his mother.
“Yes, it is three o’clock now. He is taking nap after watching Mahabharata and having lunch. I must give him tea otherwise he will not wake up.”
Aaruni couldn’t eat more than two three spoon. His friend asked him that what the reason was.
“I don’t know. I am not feeling good”, he replied.
“You have to go for training tomorrow so you are worried”, his friend consoled him.
“Don’t know”.
Meanwhile some sound came from inside and everyone ran towards him.
“What happened mother?”
“I gave him tea and he is not getting up. Earlier he used to get up as soon as tea time was announced.”
His body was stretched and senseless.

(continued)

महत्त्वपूर्ण सूचना (१):महत्त्वपूर्ण सूचना: श्रीमान् नचिकेताजीक नाटक “नो एंट्री: मा प्रविश” केर ‘विदेह’ मे ई-प्रकाशित रूप देखि कए एकर प्रिंट रूपमे प्रकाशनक लेल ‘विदेह’ केर समक्ष “श्रुति प्रकाशन” केर प्रस्ताव आयल छल। श्री नचिकेता जी एकर प्रिंट रूप करबाक स्वीकृति दए देलन्हि। प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (ISBN NO.978-81-907729-0-7 मूल्य रु.१२५/- यू.एस. डॉलर ४०) आऽ पेपरबैक (ISBN No.978-81-907729-1-4 मूल्य रु. ७५/- यूएस.डॉलर २५/-) मे श्रुति प्रकाशन, १/७, द्वितीय तल, पटेल नगर (प.) नई दिल्ली-११०००८ द्वारा छापल गेल अछि। ‘विदेह’ द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-15 e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com website: http://www.shruti-publication.com
महत्त्वपूर्ण सूचना:(२). पञ्जी-प्रबन्ध विदेह डाटाबेस मिथिलाक्षरसँ देवनागरी पाण्डुलिपि लिप्यान्तरण- श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत। पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- तीनू पोथीक संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा ।
महत्त्वपूर्ण सूचना:(३) ‘विदेह’ द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा’ रहल गजेन्द्र ठाकुरक ‘सहस्रबाढ़नि'(उपन्यास), ‘गल्प-गुच्छ'(कथा संग्रह) , ‘भालसरि’ (पद्य संग्रह), ‘बालानां कृते’, ‘एकाङ्की संग्रह’, ‘महाभारत’ ‘बुद्ध चरित’ (महाकाव्य)आ ‘यात्रा वृत्तांत’ विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। – कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर
महत्त्वपूर्ण सूचना (४): “विदेह” केर २५म अंक १ जनवरी २००९, ई-प्रकाशित तँ होएबे करत, संगमे एकर प्रिंट संस्करण सेहो निकलत जाहिमे पुरान २४ अंकक चुनल रचना सम्मिलित कएल जाएत।
महत्त्वपूर्ण सूचना (५):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे।
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उपन्यास

मोनालीसा हँस रही थी : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.100.00

कहानी-संग्रह

रेल की बात : हरिमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 70.00
छछिया भर छाछ : महेश कटारे प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
कोहरे में कंदील : अवधेश प्रीत प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00
आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 90.00
कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 90.00

शीघ्र प्रकाश्य

आलोचना

इतिहास : संयोग और सार्थकता : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर

हिंदी कहानी : रचना और परिस्थिति : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर

साधारण की प्रतिज्ञा : अंधेरे से साक्षात्कार : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर

बादल सरकार : जीवन और रंगमंच : अशोक भौमिक

बालकृष्ण भट्ïट और आधुनिक हिंदी आलोचना का आरंभ : अभिषेक रौशन

सामाजिक चिंतन

किसान और किसानी : अनिल चमडिय़ा

शिक्षक की डायरी : योगेन्द्र

उपन्यास

माइक्रोस्कोप : राजेन्द्र कुमार कनौजिया
पृथ्वीपुत्र : ललित अनुवाद : महाप्रकाश
मोड़ पर : धूमकेतु अनुवाद : स्वर्णा
मोलारूज़ : पियैर ला मूर अनुवाद : सुनीता जैन

कहानी-संग्रह

धूँधली यादें और सिसकते ज़ख्म : निसार अहमद
जगधर की प्रेम कथा : हरिओम

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अंतिका प्रकाशन
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श्रुति प्रकाशनसँ
१.पंचदेवोपासना-भूमि मिथिला- मौन
२.मैथिली भाषा-साहित्य (२०म शताब्दी)- प्रेमशंकर सिंह
३.गुंजन जीक राधा (गद्य-पद्य-ब्रजबुली मिश्रित)- गंगेश गुंजन
४.बनैत-बिगड़ैत (कथा-गल्प संग्रह)-सुभाषचन्द्र यादव
५.कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आऽ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर
६.विलम्बित कइक युगमे निबद्ध (पद्य-संग्रह)- पंकज पराशर
७.हम पुछैत छी (पद्य-संग्रह)- विनीत उत्पल
८. नो एण्ट्री: मा प्रविश- डॉ. उदय नारायण सिंह “नचिकेता”
९/१०/११ ‘विदेह’ द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-15 ३.पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आऽ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर , नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा ।
श्रुति प्रकाशन, रजिस्टर्ड ऑफिस: एच.१/३१, द्वितीय तल, सेक्टर-६३, नोएडा (यू.पी.), कॉरपोरेट सह संपर्क कार्यालय- १/७, द्वितीय तल, पूर्वी पटेल नगर, दिल्ली-११०००८. दूरभाष-(०११) २५८८९६५६-५७ फैक्स- (०११)२५८८९६५८
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विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

(c)२००८-०९. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।(c) 2008 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ’ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ’ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ’ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ’ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु

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