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‘विदेह’ ३२ म अंक १५ अप्रैल २००९ (वर्ष २ मास १६ अंक ३२)- part I

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विदेह३२म अंक १५ अप्रैल २००९(वर्ष २ मास १६ अंक ३२ )

NEPAL INDIA

वि दे विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own scriptRoman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi

एहि अंकमे अछि:-

१. संपादकीय संदेश

२. गद्य

२.१ रामभरोस कापडि भमर-गंगाप्रसादक स्‍वायतता

२.२. कथा-सुभाषचन्द्र यादव- दाना

२.३. प्रत्यावर्तन – दोसर खेप कुसुम ठाकुर

२.४. बलचन्दा (संपूर्ण मैथिली नाटक)-लेखिका – विभा रानी (दोसर खेप)

२.५ १. कामिनी कामायनी – चुमाैन आ २.कुमार मनोज काश्यप-परजा

२.६.पन्द्रहम लोक सभा छोट आ क्षेत्रीय दल पर रहत नजरि- फेर गठबंधनक सरकार बनबाक अछि सम्भावना- नवेन्दु कुमार झा

२.७. कथा- अवसरक निर्माण-डॉ.शंभु कुमार सिंह

३. पद्य

३.१. लल्लन ठाकुर जीक किछु रचना

३.२. कामिनी कामायनी: आखिर कहिया धरि

३.३.निमिष झा- जीवन एकटा दुरुह कविता

३.४. सतीश चन्द्र झा- भ्रमित शब्दा

३.५ आयल फेरो समय लगनक- रूपेश

३.६. ज्योति-कलमक टाेह

३.७. विवेकानंद झा

४. बालानां कृते-1देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स); 2. मध्य-प्रदेश यात्रा आ देवीजी- ज्योति झा चौधरी

५. भाषापाक रचना-लेखन पञ्जी डाटाबेस (आगाँ), [मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.]

. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS (Festivals of Mithila date-list)

६.THE COMET- English translation of Gajendra Thakur’s Maithili NovelSahasrabadhani translated by Jyoti.

विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link.

विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे

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१. संपादकीय

मैथिली भाषा-भाषी मध्य काठमाण्डू, ललितपुरमे भेल अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक बेश चरचा भेल। राजनैतिक एजेन्डाक अतिरिक्त ओहि अवसरपर प्रधानमन्त्री प्रचण्ड द्वारा मैथिली भाषा, संस्कृतिमे योगदान देनिहार व्यक्तित्वके सम्मानित कएने रहथि । सम्मेलनमे संस्थागत सुदृढिकरणकर्ता मुखीलाल चौधरी, रंगकर्मी रन्जु झा आ मैथिली पढाइ उत्प्रेरक कार्यदल राजविराजके सम्मानित कएल गेल । तहिना भारत बिहारक रहिका निवासी मैथिली आन्दोलन अगुवा चुनचुन मिश्र आ लोकसाहित्यकार डा महेन्द्रनारायण रामके सम्मानित कएल गेलनि।काठमाण्डूमे मैथिलीक महाकवि विद्यापतिके स्मारक बनएबामे सहयोग करबाक प्रतिबद्धता ओ व्यक्त कएलनि ।नेपाल पत्रकार महासंघक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा देशमे संघीय राज्यप्रणाली हएबाक तय रहल अबस्थामे मिथिला राज्य पर जोड देल जएबाक चाही से कहलनि ।सम्मेलनमे मधेशी जनअधिकार फ़ोरमक सह अध्यक्ष एवं कृषि तथा सहकारीमन्त्री जयप्रकाश प्रसाद गुप्ता मधेशीक मूल समस्या आन्तरिक औपनिवेशीकरण रहल बतौलनि ।अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली परिषदक उपाध्यक्ष तथा प्रवक्ता धनाकर ठाकुर कहलनि मिथिलावासीक संघर्षसं मात्र मिथिला राज्यक स्थापना हएत ।परिषदक अध्यक्ष भुवनेश्वर गुरमैताक सभापतित्वमे भेल उदघाटन कार्यक्रममे सम्मेलनक संयोजक रामरिझन यादव सम्मेलनक औचित्यक विषयमे बाजल रहथि । तहिना कमलकान्त झा, सम्मानित महेन्द्र नारायण राम, मुखिलाल चौधरी अपन मन्तव्य व्यक्त कएने रहथि । उदघाटन कार्यक्रमक बाद मैथिली सास्कृतिक कार्यक्रम भेल छल ।

ओतुक्का नव सविधान सभामे मिथिला राज्यक अस्तित्वमे अनबाक प्रयास जोर पर अछि मुदा भारतमे विभिन्न कारणसँ ई प्रयास शिथिल अछि।

प्राथमिक शिक्षा यावत धरि मैथिलीमे नहि देल जाएत तावत धरि कोनो तरहक बौद्धिक आ सांस्कृतिक लगाव मैथिलगणमे नहि जगतन्हि। रोजी-रोटीक जोगाड़मे सभ किछु गौण पड़ि गेल अछि।

संगहि “विदेह” केँ एखन धरि (१ जनवरी २००८ सँ १३ अप्रैल २००९) ७८ देशक ७८१ ठामसँ १,६८,७०८ बेर देखल गेल अछि (गूगल एनेलेटिक्स डाटा)- धन्यवाद पाठकगण।

अपनेक रचना आ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे।

गजेन्द्र ठाकुर, नई दिल्ली। फोन-09911382078

ggajendra@videha.co.in ggajendra@yahoo.co.in

विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाऊ।

२. गद्य

२.१ रामभरोस कापडि भमर-गंगाप्रसादक स्‍वायतता

२.२. कथा-सुभाषचन्द्र यादव- दाना

२.३. प्रत्यावर्तन – दोसर खेप कुसुम ठाकुर

२.४. बलचन्दा (संपूर्ण मैथिली नाटक)-लेखिका – विभा रानी (दोसर खेप)

२.५ १. कामिनी कामायनी – चुमाैन आ २.कुमार मनोज काश्यप-परजा

२.६.पन्द्रहम लोक सभा छोट आ क्षेत्रीय दल पर रहत नजरि- फेर गठबंधनक सरकार बनबाक अछि सम्भावना- नवेन्दु कुमार झा

२.७. कथा- अवसरक निर्माण-डॉ.शंभु कुमार सिंह

लघुकथा – गंगाप्रसादक स्‍वायतता

रामभरोस कापडि भमर

ओ अपन घरक ओसारामे एकटा पीजडामे स ुगा लाबि क रखने रहथि ।सिखौने छलाह सीताराम कहु गंगापसाद ।स ुगा रटने रहए सीताराम,सीताराम ।घर मालिक पशन्‍न भेल लिअ, आब हमर स ुगा पढुआ भ गेल अछि ।दोसरोके गर्वस स ुनबैत छलाह देखह, हमरा संगे पढ बला स ुगा अछि ।कतेक नीक जकां राम नाम लैत अछि ।भोरेभोर उठलापर जखन सीताराम सीताराम जपैत अछि त मन प्रशन्‍न भ जाइत अछि ।

ई क्रम काफी दिन धरि चलल ।घरमालिक प्रशन्‍न,ओम्‍हर स ुगा सेहो नीक जकां रामनाम जपबाक कारणें मजास बदाम,फलफुल,हरियरमिरचाइ लोलस कतरि कतरि मस्‍ती करए लागल ।

समय परिवर्तन भेलै ।घरमालिक विपतिमे फंसि गेलाह ।ओ स ुगाके मालिकके बचाउ,मालिककेबचाउ सन वाक्‍य सिखब चाहलक ।स ुगा अपना जनिते बुद्धि आ क्षमता प्रयोग क ओ वाक्‍य सिखबाक प्रयास कएलक ।एकदुबेर उच्‍चारण सेहो कएलक मुदा ओ स्‍मरण नहि रहि सकल आ तएं अपन घरमालिककें बचा नहि सकल ।

पैघ बबण्‍डर उठल । सभ किछु परिवर्तन भ गेलै । घर सभक स्‍ँवरुप बदलल ।बाट घाट नव बनएबाकप्रयास भेल, चौडगर आ पक्‍की । घरमालिक सेहो बदलि गेल । ओसारामे टांगल पिजडाक आकार प्रकार सेहो बदलि गेलै मुदा स ुगामे कोनो परिवर्तन नहि भ सकल । ओ एखनो सीताराम सीताराम पढि रहल छल । नवका घरमालिकके स ुगाक ओ रटब नीक नहि लगलैक ।ओ नयां वाक्‍य सिखाब चाहलक जय गणतंत्र कहु गंगाप्रसाद । स ुगा जतेक प्रयास कएलक तैयो सीताराम, सीतारामसं आगा बढिए नहि सकल । घरमालिक अकच्‍छ भ नव पिजडा आ स ुगा लओलक ।सिखब चाहलक जयगणतंत्र,जयगणतंत्र कहु गंगाप्रसाद ।नवका स ुगा किछु

बजितए ताहिस पुर्बे पुरना स ुगा बाजि देलक गोपीकृष्‍ण,गोपीकृण कहु गंगाप्रसाद ।घरमालिकके आश्‍चर्य भेलै ई गोपीकृष्‍ण कत्तस आयल ।पुरना त सीताराम कहैछ,नवकाके जयगणतंत्र सिखाओल जाइछ, तखन ई नयां शब्‍द गोपीकृष्‍ण अएबाक त बाते नहि भेल ।स ुगाके जे पढाओल जाइछ, जे सिखाओल जाइछ सएह ने ओ बाजत ।

बातके तहमे जएबाक लेल घरमालिक एक दिन ढुक्‍का लागल ।देखी के नवका स ु गाके ई नयां शब्‍द सिखबैत अछि ।एक्‍के क्षणमे ओ जे दृश्‍य देखलक,आश्‍चर्यमे पडि गेल ।एक गोटे करिया पोशाकमे ,देह भरि रंगविरंगक हथियार लटकौने,अनुहार पर कारी कपडा लपेटने कोम्‍हरोसं तेजी सं आयल ।स ुगाके आदेशात्‍मक भाषामे कहलक कह त गोपीकृष्‍ण,गोपीकृष्‍ण ।खबरदार,फरक शब्‍दक उच्‍चारण नहि ।

दुन सगा डरसं थरथर कांप लागल ।एक दोसराके हताश नजरिसं देखैछ,मनेमन किछ संकल्‍प करैछ आ बजैत अछि गापीकृष्‍ण,गोपीकृष्‍ण । साबास कहि आकृति कोम्‍हरो हेरा जाइछ ।

अच्‍छा त कथा ई छिऐक । घरमालिक सतर्क भ जाइछ ।घरके आ स ुगाके सेहो स ु रक्षा घेरा बढा देल जायछ ।एकटा आओर नवका पिजडा स ुगा सहित लाओल जाइछ ।मुदा आहो सहयात्री स ुगा सभक देखांउसे गोपीकृष्‍णटा रट्र्र लगैछ ।घरमालिक लाख सतर्कता अपनौलक,मुदा स ुगा अपन रट नहि छोडलक ।पिजडा आ स ुगा बदलैत रहल,रटमे परिवर्तन नहि आयल ।ओसारामे झुलैत पच्‍च्‍ीसो पिजडाक स ुगा एक्‍के स्‍वरमे बाजय गोपीकृष्‍ण कहु गंगाप्रसाद ।

अन्‍तमे आजीत भ घरमालिक पच्‍चिसो पिजडाक आगां हारल जुआरी जकां निरिहभावें ठाढ भ पछलक कह, की छौ तोरा सभक ईच्‍छा ।हम तोरा सभकें सिखब नहि सकलहुं, ने नियंत्रणें क सकलहुं ।आब जे तों सभ चाहबिहि सएह सभ हएतै ।

पच्‍चीसो पिजडाक स ुगासभ एक दोसराके देखैत अछि,ठोढेमे मुस्‍काइत अछि आ गरदनि उठा क घरमालिकके आंखिमे आंखि गडाक आत्‍मसम्‍मानक संग नारा लगबैछ जयगणतंत्र ।

घरमालिक ओकरासभके एकटक्‍क देखिते रहि जाइत अछि ।

अपन टीका-टिप्पणी दिअ।

https://www.blogger.com/comment.g?blogID=7905579&postID=513633139662640904

कथा

सुभाषचन्द्र यादव-दाना

चित्र श्री सुभाषचन्द्र यादव छायाकार: श्री साकेतानन्द

सुभाष चन्द्र यादव, कथाकार, समीक्षक एवं अनुवादक, जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल। आरम्भिक शिक्षा दीवानगंज एवं सुपौलमे। पटना कॉलेज, पटनासँ बी.ए.। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्लीसँ हिन्दीमे एम.ए. तथा पी.एह.डी.। १९८२ सँ अध्यापन। सम्प्रति: अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, पश्चिमी परिसर, सहरसा, बिहार। मैथिली, हिन्दी, बंगला, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, स्पेनिश एवं फ्रेंच भाषाक ज्ञान।

प्रकाशन: घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित।

भूतपूर्व सदस्य: साहित्य अकादमी परामर्श मंडल, मैथिली अकादमी कार्य-समिति, बिहार सरकारक सांस्कृतिक नीति-निर्धारण समिति।

दाना

मोहनकेँ इंटरभ्यू देबाक रहै । ओ लस्त-पस्त आ घबरायल बससँ उतरल । विद्यार्थीक छोट-छोट समूह जैंह-तैंह छिड़िआयल गप्पमे लागल ठाढ़ छलै । एकटा विद्यार्थी सँ ओहि जगह दिआ ओ पुछारि केलकै जतय ओकर इंटरभ्यू रहै। विद्यार्थी हाथसँ इशारा कऽ कऽ बतेलकै जे ओकरा कोन-कोन बाटे जेबाक चाही । लेकिन जे नक्शा ओ बतेलकै से ततेक घुमान आ घुरची-फन्ना वला रहै जे मोहन बिसरि गेल आ ओझरी मे पड़ि गेल । असहाय आ नचार सन ओ फेर विद्यार्थीक मुँह देखय लागल । ओकरा उमेद रहै विद्यार्थी फेरसँ ओकरा रस्ता बतेतै । लेकिन ओकर निवेदनक प्रति छात्र कोनो रुचि नहि देखेलकै आ अपन संगी सँ गप्प करैत रहल । मोहन कने काल ततमतायल ठाढ़ रहल आ निराश भऽ कऽ विदे होइ वला रहय कि तखने ओ दुनू ओम्हरे चलि देलकै जेम्हर मोहनकेँ जेबाक रहै । ओ चुपचाप ओहि दुनूक पाछू-पाछू चलय लागल । कातिक बीति रहल छलैक आ उदास करय वला पछिया हवा बहैत रहै ।

ओहि दुनूक पाछू चलैत एक बेर ओकरा भेलै कतहु ओ सभ हँसी ने करैत हो । आशंका भेलै भटका ने दिअय। ओ थाकि गेल छल । ओ दुनू छात्र-आन्दोलन लऽ कऽ बहस करैत रहै । भरिसक गप्प खतम भऽ गेलै । ओ सभ पूछय लागलरहै जे ओ कतयसँ आयल अछि आ कथीक इंटरभ्यू छिऐ । फेर दुनू चुप भऽ गेलै आ चलैत रहलै । मोहन केँ ठीक ठीक बुझा नहि रहल छलै ओ दुनू कतय जा रहल छै, ओकरा रस्ता बताबऽ या अपन कोनो गंतव्य दिस । एक ठाम आबि दुनू रूकि गेलै आ बतेलकै इएह छिऐ । ओहि दुनूक एहि उदारता आ मदति सँ मोहन प्रसन्न भेल आ आभार व्‍यक्‍त केलक ।

ओ सभ चल गेलैक तऽ मोहन चारूकात हियासलक । ओकरा पियास लागल रहै । एकटा कूलर अभरलै आ ओ ओम्हरे चलि देलक । जखन ओ कूलर लग पहुँचल तऽ एकटा अधवयसू आदमी जगमे पानि भरैत रहै । ओ गोर रंगक स्वस्थ आ सुंदर व्‍यक्ति छलै । मोहनकेँ ठाढ़ देखि पुछलकै अपने जल पीब ? बस एक मिनट । गिलास अनैत छी । ओकर जग भरि गेल छलै । जग भरिते ओ तेजीसँ चलि देलकै आ अदृश्‍य होइसँ पहिने पलटि कऽ मोहन दिस देखलकै । मोहन केँ ओ व्‍यक्ति बहुत अस्थिर आ चंचल बुझेलै ।

देर भऽ गेलै तँ मोहन केँ ओहि आदमी पर संदेह हुअय लगलै। लेकिन ओहि आदमीक स्वरमे जे विनम्र आग्रह छलै से पानि पीबयसँ मोहन केँ रोकैत रहलै । ओ आदमी कने कालमे आबि गेलै । ओ गिलास केँ खूब चिक्कन सँ धोलकै, पानि भरलकै आ पेनी पकड़ि कऽ मोहनक खिदमतमे पेश केलकै लेल जाय ।

ओकरा हाथसँ गिलास लऽ कऽ मोहन पानि पीबय लागल । ओ आदमी कूलरक टोंटी पकड़ने ठाढ़ छलै ।

आर लेल जाय तीन गिलास पिलेलाक बाद ओ आदमी जेना सवाल आ आग्रह दुनू केलकै । लेकिन ओकरा आब पानि नहि पीबाक रहै । मोहन चिन्ता मे पड़ि गेल जे एहि आदमीक प्रति आभार कोना प्रकट करय । धन्यवाद । – एकर अलावे कहबाक लेल ओकरा किछु नहि सुझलै । और ? – ओकर एहि छोट सन सवाल सँ मोहन केँ लगलै जे ओकरा चाह लेल जरूर कहल जाय ।

चाह पीब ?-खाली धन्यवाद कहला पर जे कमी मोहनकेँ खटकल छलै से एहि प्रश्‍न सँ पूरा होइत बुझेलै ।

बस, एखने चलैत छी ।’- कहैत ओ आदमी बगल वला कोठलीमे घुसि गेलै । ओकर चंचल हावभाव पर, जे चार्ली चैपलिनक स्मरण करबैत रहै, मोहन मुस्कायल ।

बहुत देर धरि ओ नहि अयलै तऽ मोहनकेँ बेचैनी हुअय लगलै । ओ धीरे-धीरे कैंटीन दिस बढ़य लागल । कनेके आगाँ गेल हैत कि ओ आदमी नहि जानि कोम्हरसँ एलै आ तुरत कहैत ओतने वेगसँ दोसर कोठली मे ढुकि कऽ अलोपित भऽ गेलै । मोहन फेर ओकर प्रतीक्षा करय लागल ।

पाँच मिनट बीति गेलै । मोहन आब खिन्न भेल जाइत रहय । तखने ओ आबि गेलै । ओहि आदमीक घर संगरूर जिला रहै आ ओ पहिने सेनामे छल । बीच बीचमे ओकरा ओहने अंगरेजी बोलबाक आदत रहै जेना दिल्लीक जनपथ पर सामान बेचैत स्त्री बजैत अछि — ‘लुक सर … गुड क्वालिटी … चीपेस्ट एंड वेरी-वेरी नाइस सर !

एतय अहाँकेँ नौकरी साइते भेटत ।‘- ई कहि कऽ ओ आदमी मोहनकेँ निराश केलकै । फेर तुरंत जोड़लकै –’ देखियौ, चांस छिऐ । ओना बाहर वलाकेँ नहि लैत छै । जँ पी-एच.डी.क डिग्री रहैत तऽ संभावना छल ।चपरासी होइतो ओकरा हरेक बातक खबरि रहै । ओ दुनू कैंटीन मे बैसि गेल छल आ मोहन चाह आनय कहि देने रहै ।

किछु और लेल जाय, सर । नमकीन, मिठाई-तिठाई ।’- ओहि आदमीकेँ जेना मोहनक बहुत चिंता होइ ।

न ।‘ – ओ बाजल ।

एकटा बर्फी ?’

, किछुनहि ।

लेकिन सर , किछु खेने बिना हम चाह नहि पिबैत छी ।‘—ओ आदमी बनावटी आ कुरूप हँसी हँसल ।

ठीक छै, अहाँ लिअऽ ।

खाली हमहीं टा कोना लेबै, सर । अपनो लियौ ने । कम सँ कम एकोटा बर्फी ।

मोहनक जवाबक प्रतीक्षा केने बिना ओ आदमी नौकरकेँ बजेलकै आ मिठाई लाबऽ कहलकै ।

अखन मोहन चाह पीबते रहय कि ओ आदमी उठि कऽ ठाढ़ भऽ गेलै । ओ बहुत शीघ्रतासँ खा-पी कऽ तैयार भऽ गेल आ आब ओकरा लेट होइत रहै ।

अच्छा, तऽ आब हम चली ?’—विदा लैत काल ओकरा चेहरा पर कारोबारी उदासीनता पसरल छलै ।

ओ आदमी कखनिए ने चल गेल रहै । मोहनक चाहो खतम भऽ गेल छलै । लेकिन ओ बैसल रहल । ओकरा सब चीज बीमार आ उदास लागि रहल छलै ।

कैंटीनमे बहुत रास फुददी आ मैना आबि गेल रहै आ पावरोटीक छोट-छोट टुकड़ी पर चीं-चीं करैत झपटैत रहै; टेबुलक नीचा, टेबुल पर सभतरि ।

अपन टीका-टिप्पणी दिअ।

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उपन्यास

-कुसुम ठाकुर

प्रत्यावर्तन – (दोसर खेप)

हम महादेव झा क विषय मे सोचति सोचति नहि जानि कतय ध्यान मग्न भs गेलहुँ, अचानक हमर ध्यान खुजल तs देखैत छी ई हमरा सोझाँमे ठाढ़ भs मुस्की दs रहल छथि। ई देखि कs हमरा लाज भs गेल, आ ई तुंरत हमरा दिस हाथ आगू कs कहलाह,

लिय, अहाँक लेल हम मुँह बजाओन अनलहुँ अछि, ई हमरा दिस सs अहाँक लेल पहिल उपहार थिक। चतुर्थी दिन वाला तs दादाक कीनल छलन्हि, ई हमरा दिस सs अछि”। ई कहि हमरा दिस एकटा किताब आगू बढ़ा देलथि।

पंचमी दिन भोरे भोर दादी सभ गोटे कs उठा देलथिन। हिनको उठय परि गेलन्हि , इहो भोरे भोर तैयार भs गेलाह, हिनको हमरा संग पूजा पर बैसय कs छलन्हि । पूजा पर बैसैत बैसैत ९ बाजि गेलैक। दादी भरि गामक लोक कs हकार दियबोने रहथि मुदा पूजा काल गामक सभ गोटे नहि आयल छलथि । हँ, अपन दियादि महक सभ कियो अवश्य आयल रहथि। परंच भरि दिन लोकक एनाइ गेनाइ लागल छलय। पूजा आ कथा समाप्त होइत होइत १ बाजि गेलय। सब सs पहिने हिनकर भोजनक व्यवस्था कs हिनका खुआयल गेलन्हि , तकर बाद अहिबाति सबहक खेनाइ कsओरिओन कs हुनका सब कs बैसायल गेलन्हि । हमरो हुनके सबहक संग बीचमे बैसि कs खेबाक छलs। हमरा मिट्ठ खेबाक एको रत्ती इच्छा नहि होइत छलs। सब गोटे खेबाक लेल जिद्द कsदेलथि ई कही जे बस एकर बाद आब मिट्ठ नहि खाय पड़त । दोसर साँझ भेला पर किछु नय खेबाक छल, कहुना कनि खीर खा कs उठि गेलहुँ

पूजा पर सs उठला पर ततेक नय थाकि गेल रही जे होइत छलs जे चुप चाप सुति रही मुदा कनि कनि काल पर कियो नय कियो आबि जाइत रहथि आ हुनका सब लग बैसय लेल तुंरत बजाहटि आबि जाइत छल। दुपहर मे हम सब फेर फूल लोढ़य लेल गेलहुँ ओहि दिन हम बहुत थाकल रही, तथापि जेना जेना सभ गोटे फूल पत्ति तोरथि तहिना हमहुँ तोरि कs राखने जाइ, ओहि दिन बुझि पड़ैत छल सब थाकल रहथि, ओहि दिन हम सभ जल्दिये आपस भs गेलहुँ।

प्रतिदिन हमसब फूल लोढ़य लेल जाइ आ एक पथिया करीब रोज फूल पात आनी। बारहम दिन हमसब कनि जल्दी जाs s फूल जाहि जूही लs अनलियय ओहि दिन बहुत लोकक ओतहि पाहुन कs अयबाक छलन्हि , किनको ससुर कs अयबाक छलन्हि s किनको वर कs। बारहम दिन धरि करीब खिड़की तक फुल पातक टालि लागि गेलैक, ताहि पर उपर सs दूध, जल प्रसाद चढायल जायत छलैक। कोहबर घर मे ओना तs धूप दीप जरति छलैक मुदा तइयो कनेक मनेक गंध रहति छलैक। बारहम दिन साँझ मे पूजा वाला सबटा फूल पात हटाs s ओहि ठाम साफ करायल गेलैक, कियैक तs मधुश्रावणी दिन फेर सs सभटा फूल पात हटेलाक बाद ओतहि साफ कs फेर सs अरिपन परैत छैक। जखैन्ह फूल पात हटायल जायत छलैक तखैन्ह बुझय मे आयल जे हमसभ कतेक फूल पात आ जाहि जूही तोरने रहि, खत्मे नहि होयत छलैक ।

साँझ मे हमर ससुर अपने, हमर एकटा पितिऔत दियोर कs संग भार लs s अयलाह। तखैन्ह सs घर मे सबगोटे आओर व्यस्त भs जाय गेल्थिन।हमर दादी आ माँ भार देखबा आ देखेबा मे व्यस्त छलिह। बिधक की सब आयल अछि की सब नहि। हमर ससुर सेहो विवाहक बाद पहिल बेर आयल छलाह। हिनको अपन दादा (पिताजी) सs विवाहक बाद पहिल बेर भेंट भेल छलन्हि ,गप्प सप मे देरी भs गेलैक।

हम सुनने रहि जे मधुश्रावणी दिन कनिया कs सासुर सs बिधक सामान संग टेमी सेहो अबैत छैक आ ओहि सs कनिया कs दुनु ठेहुन कs डाहल जायत छैक। टेमी सs डाहलाक बाद ओकरा पर पान आ सुपारी दs ओकरा रगरि देल जायत छैक जाहि सs फोका अवश्य होय। फोका भेला सsनिक मानल जायत छैक। सब दिन फुल लोढ़य काल इ सब गप्प होयत रहैत छलैक। हम सांझे सs डरल रहि आ जखैन्ह सs हमर ससुर आबि गेलाह तखैन्ह सs दर्दक कल्पना कs आओर डरि जायत रहि। दादी कs गप्प मोन परि जाय जे “मधुश्रावणी लोकक एके बेर होयत छैक”। किनको सs किछु पुछबो नय करियैन्ह।

राति मे सुतय मे देर तs s गेल छलैक, भगवान भगवान कs सुतय लेल गेलहुँ हम अहुना कम बाजति छलौंह ओहि दिन आओर किछु नय बाजल नहि होयत छलs इ हमरा सs दू तिन बेर पुछ्लाह किछु भेल अछि, हम सब बेर नहि कहि दियनि मुदा हिनका बुझs मे आबि गेलन्हि कि किछु गप्प अवश्य छैक। जखैन्ह इ हमरा बहुत पुछ्लथि तs हम धीरे सs कहलियैन्ह, “हमरा डर होयत अछि”। हिनका किछु बुझय मे नय अयलैन्ह, अचानक हमरा डर कियैक होयत छलs। इ हमरा बहुत निक सs बुझा कs पुछ्लाह “डरबाकs आखिर कोन गप्प छैक”, अहाँ पहिने डरु नय आ हमरा कहु की गप्प छैक”? हम डरैत हिनका कहलियैन्ह “हमरा टेमी सs डर होयत अछि”। “टेमी… कियाक टेमी सs डर होइत अछि”? हम हुनका तुंरत सभटा कहि देलियैन्ह जे काल्हि कsलेल डरि रहल छलन्हु। इ हमरा कहलाह “अहाँ जुनि डरु एकतs हमरा बुझलि अछि जे हमारा ओतय टेमी नहि होयत अछि, दोसर जाओं होयतो होयत तs अहाँ कs नहि होमय देबैक, हमर गप्प के कियो नय काटतिह “। ओहि दिन पता नहि कोना आ कियाक, तुंरत हिनका पर पूर्ण रूपेण विश्वास भs गेल, हम निश्चिंत भs गेलहुँ जे आब हमरा टेमी नहि परत। ओकर बाद हमरा मोन मे कोनो डर नहि छल।

भोरे उठी कs तैयार भेलन्हु मुदा मोन मे कनिको डर नहि छल। मधुश्रावणी दिन पूजा मे कनेक आओर बेसी समय लगलैक, जखैन्ह टेमी देबाक भेलs s जहिना हमर बिधकरि उठलथि इ तुंरत कहि देलथिन हमरा सब मे टेमी नय होयत अछि। इ सुनतहि हमरा ततेक नय खुशी भेल जकर वर्णन नहि कयल जा सकति अछि। बिधकरि उठि कs एकटा टेमि आनि कहलथिन ठीके हिनका सभके शीतल टेमि होयत छैन्ह। एकटा टेमि मे चंदन लगा ओहि सs हमर दुनु ठेहुन मे लगा देल गेल।

ओहि दिन फेर अहिबातिक संग खेबाक छलs। हमर ससुरक सौजनि सेहो छलन्हि । पाबनि सsउठलाक बाद हिनकर भोजनक व्यवस्था आ हमर ससुरक सौजनि भेलैन्ह आ हम खेलाक बाद जहिना सोचलौन्ह आब आराम करैत छि कि माँ आबि कs कहलैथ तैयार होयबाक अछि हमर ससुर, दादा जी आबैत होयताह। दादा जी कs आदेश छलन्हि जे ओ हमरा भगवति घर मे देखताह। हम फेर तैयार भs भगवति घर चलि गेलंहु । दियोर आ दादा जी दुनु गोटे भगवति घर अयलाह आ कनि दूर ठाढ़ भs गेलाह। हमरा संग जे छलिह ओ हमरा जाs s गोर लागय लेल कहलैथ, हम ठाढ़ भsदादा जी लग जा हुनका गोर लागि लेलियैन्ह आ ओहि ठाम बैसि गेलंहु, ओ तुंरत देखेबाक लेल कहलैथ आ हुनका जहिना देखा देल गेलन्हि हमरा हाथ मे एकटा गहना दs ओतय सs चलि गेलाह।

दादा जी साँझ मे चलि गेलाह। हमारो सबके दू दिन बाद जेबाक छलs। हमर छोट भायक मुंडन छलन्हि अरेराज मंदिर मे, हुनकर मुंडन करा हमरा राँची मे छोरति, छोटका भाय आ तिनु बहिन के संग माँ बाबुजी कs अरुणाचल जयबाक छलन्हि बाबुजी कs छुट्टी से ख़तम भs गेल छलन्हि । । हिनका सेहो मुंडन मे उपस्थित रहबाक लेल माँ बाबुजी सब कहैत रहथि।

राति मे इ हमरा सs हमर मोन जांचय लेल पुछ्लथि अहाँक माँ बाबुजी हमरो मुंडन मे उपस्थित होयबाक लेल कहैत छथि, हम की करि । हम पहिने त चुप रहि मुदा टेमी वाला बातक बाद स हमर कनि धाख टुटि गेल छल। हम धीरे सs कहलियनि छुट्टी अछि त अहुँ हमरे सब संग चलु ,मुंडन कs बाद अहाँ मुजफ्फरपुर चलि जायब आ हम सब राँची चलि जायब। इ हमरा कहलथि हमर कॉलेज मे हरताल चलैत अछि। जाहि दिन शुरू भेल छलैक ओहि दिन अहाँक बाबुजी पहुँचि गेलाह , हम सोचिते छलहुँ अयबाक लेल ताधरि हमरा बाबुजी कहि देलथि छुट्टी अछि तs अहि ठाम कि करब चलु हमरा संग आ हम चलि आयल रहि। दोसर अहाँ चिट्ठी जे लिखने रही, हमरा ततेक नय ख़ुशी भेल जे हम तुंरत आबय चाहति रहि।

हम हिनकर गप्प सुनी कs मोने मोन बड खुश भेलहुँ , मुदा ई हमर मोनक गप्प कोना बुझि गेलाह से नहि जानि। इ हमरा अपने मोने कहय लगलाह राँची तs अहि ठाम स दूर छैक परंच हम कोशिश करब जखैन्ह छुट्टी होयत हम आबि जायब अहाँ चिंता जुनि करब, खूब मोन स पढ़ब। हम इ सुनतहि उदास भ गेलौहुं, तखनि हमरा लागल जे आब हमरा हिनका सs अलग रहय मे निक नय लागत।

तेसर दिन हम दुनु गोटे, माँ बाबूजी, हमर भाय बहिन सब दादी बाबा कs संग गाम सs अरेराज कs लेल बिदा भs गेलहुँ। राति सबगोटे मोतिहारी मे रुकि भोरे भोर हमसब मन्दिर पहुँची गेलहुँ आ मुंडन भेला पर सबगोटे मन्दिर दर्शन करय लेल जाय गेलथि , हम आ ई बाहरे सs भोला बाबा कsगोर लागि लेलियैन्ह। दादी कहने छलथि विवाहक एक बरख धरि लोग मन्दिर कs भीतर नहि जायत छैक। सबगोटे वापस फेर मोतिहारी आबि गेलहुँ, दादी बाबा गाम चलि गेलाह आ हमसब ओहि दिन मोतिहारी रुकि गेलहुँ , दोसर दिन हमारा सब के मुजफ्फरपुर सs राँची के लेल रेल गाड़ी छलs

दादी बाबा कs गाम गेलाक बाद माँ, बाबुजी, हम सब छहु भाई बहिन, आ ई, ओहि दिन मोतिहारी रही गेल रही। हमारा सब कs दोसर दिन मोतिहारी सs मुजफ्फरपुर जेबाक छsल। साँझ मे ई हमरा कहलाह माँ के कहि दियौन्ह आ चलू हम सब सिनेमा देख कs अबैत छी। पहिने तs हम तैयारे नहि होइत छलिये मुदा जखैन्ह ई बहुत कहलाह तs हम जएबाक लेल तैयार तs s गेलहुँ मुदा माँ सs कहबा मे हमारा लाज होयत छलs। जखैन्ह हम माँ सs कहय लेल तैयार नहि भेलहुँ तs ई हमर छोटकी बहिन अन्नू के बजा कs कहलथिन, “अहाँ अपन माँ सs चुप चाप कहि दियौन हम दुनु गोटे सिनेमा जाइत छी”। अन्नू बेचारी तs ठीके माँ सs चुप चाप जा कs ई गप्प कहलथि,मुदा कोना नय कोना हमर तेसर बहिन बिन्नी ई गप्प सुनि लेलथिन आ तकर बाद एक के बाद एक सब भाई बहिन सब सिनेमा जएबाक लेल हल्ला करय लागय गेलीह, सब छोटे छोट छलथि। माँ सब के बुझबति छलिह मुदा कियो मानय लेल तैयार नहि छलथि।बहुत बुझेला पर आओर सब गोटे तs मानि गेलिह बिन्नी नहि मानलिह। हमरा आर हिनका “अपना देश “, विवाह कs बादक पहिल सिनेमा बिन्नी कs सँग देखय परल। हम सब सिनेमा की देखब बिन्नी के सम्हारय मे हमर सबहक समय बीति गेल।हम की कहियो ओहि दिनका देखल सिनेमा बिसरी सकैत छी।

दोसर दिन भोरे हम सब मुजफ्फरपुर के लेल बिदा भs गेलहुँ। पहिने तs हमर सबहक कार्यक्रमक अनुसारे हमारा सबके मुजफ्फरपुर मे रहबाक नय छलs मुदा हिनकर आग्रह के बाबुजी मानि गेलाह आ हमसब मुजफ्फरपुर मे सेहो दू दिन रहि गेलहुँ। ओहि दिन हमरा सब के पहुँचलाक बाद इ अपन हॉस्टल इ कहि कs गेलाह जे अपन सामान राखि आ जानकारी लs कि कॉलेजक हरतालक की भेलैक इ आबि जेताह आ दिनका भोजन इ हॉस्टल सs करि कs अओताह। दुपहर मे इ अयलाह आ हिनक सँग हमर दीयरि सल्लन जी, जे हिनका सs दू बरखक छोट छथि आ हिनके कॉलेज मे पढैत छलाह हमारा सs भेंट करय कs लेल सेहो अयलाह।

सल्लन जी सs हमरा पहिल बेर भेंट छल। बरियाति आयल छलाह, मुदा एक तs गामक बरियाति,दोसर बरियाति सब पहिने आँगन मात्र सुहाग देबय कs लेल आबति रहथि। थोरेक काल गप्प, आ चाह नाश्ताक बाद इ हमरा आ सब बच्चा(हमर भाय बहिन) सब के सिनेमा लs जयबाक लेल कहि तैयार होयबाक लेल कहलथि सब खुशी खुशी तैयार भs जाय गेलथि आ हमर छोटका भाय के छोरि, बाकि पूरा बटालियनक सँग हम सब सिनेमा देखबाक लेल बिदा भs गेलहुँ। हमरा सब सँग सल्लन जी सेहो रहथि हम मोने मोन सोचलहुं आय इ एतेक गोटे सँग सिनेमा देखबाक लेल तैयार कोना भs गेलाह। फेर मोन मे आयल ओहि दिन बच्चा सब कानैत रहथि, इ सोचि सब के लsजयबाक सोचने होयताह, सल्लन जी आ बौआ(हमर बडका भाय ) सेहो सँग रहबे करथि।

घर सs निकलतहि रिक्शा भेंट गेलs एक टा रिक्शा पर हम दुनु गोटे आ बाकि दू टा पर सल्लन जी आ बौआक सँग सब बच्चा सब बैसि जाय गेलथि। ओना हम मुजफ्फरपुर दोसर बेर आयल छलहुँ, मुदा पहिल बेर मात्र राति भरि जनकपुर सs राँची जाय काल लंगट सिंह कॉलेजक गेस्ट हाउस मे रहि। हमर सबहक रिक्शा पाछू छलैक आ तेहेन ख़राब सड़क जे हमर ध्यान दोसर दिस नहि छल, हमरा होयत छल कहीं खसि नय परी। हम मात्र सड़क आ रिक्शा दिस देखैत सिनेमा हॉल लग पहुँची गेलहुँ।

रिक्शा सs उतरतहि इ रिक्शा वाला के पाई दs हमरा कहलथि चलू। हम किछु बूझलियैक नहि आ पुछलियैन्ह,”आ बाकि सब गोटे”? इ मुस्कुरैत कहलाह बच्चा पार्टी के सल्लन अपना सँग दोसर सिनेमा देखाबय लेल लs गेलाह। हम हुनका सँग सिनेमा हॉल मे जा जखैन्ह बैसलहुं तs सिनेमा शुरू होयबा मे थोरेक समय छलैक। इ हमरा कहलाह हमरा सिनेमा देखबाक ओतेक इच्छा नहि छलs हमरा तs अहांक सँग रहबाक छलs आब फेर कतेक दिनक बाद भेंट होयत नहि जानि, आ ओहि ठाम इ सम्भव नहि छलs। हमर कोरा वाली सारि सब जे छथि, ओ हमरा एको मिनट असगर कथि लेल रहय देतीह। सल्लन हमरा सँग आबिते छलाह, हुनका अहाँ सs भेंट करबाक छलन्हि । हम सोचलहुं सिनेमा देखबाक नाम पर सब तैयार भs जेतिह , आ सल्लन सs पुछलियैन्ह तs कोरा खेलाबय वाली सारि सब सँग सिनेमा देखय लेल तैयार भs गेलाह। ओहि ठाम कहितौंह त फेर हल्ला भs जायत तकर आशंका सs हम अहूँ के किछु नहि कहलहुं। प्रकाश(हमर पैघ भाय ) आ सल्लन के सबटा बुझल छलन्हि , ताहि लेल हुनकर सबहक रिक्शा आगू गेलन्हि आ हमर सबहक पाछू छsल । इ सुनि हमरो निक लागल, जखैन्ह सs हम सब गाम सs निकललहुं तखैन्ह सsनहि जानि कियाक हमरो मोन इ सोचि उदास छलs जे पता नहि आब कहिया भेंट होयत। हमरो आ हिनको दुनु गोटे के कॉलेज खुजल छsल दोसर हमरा लागैत छsल जे रांची सs मुजफ्फरपुर बहुत दूर छैक।

हम सब सिनेमा की देखब गप्पे मे समय बीति गेल। इ तs निक छsल जे दीपक सिनेमाक सब हिनका चिन्हैत छलन्हि दोसर ओहि दिन एकदम कम भीर छलैक आ हमरा सब के एकदम कात मे सीट भेन्टल छल जाहि ठाम कियो बैसल नही छलथि राति मे हम सब आपस अयलहुं तs बच्चा सब सल्लन जी आ बौआ कs सँग आपस हमरा सब सs पहिनहि आबि गेल रहथि हमरा तs होयत छल हमर बहिन सब हमरा सब के देखि कs हल्ला करतीह मुदा ओ सब किछु नही बजलिह। सल्लन जी अपन हॉस्टल आपस चलि गेलाह।

ओहि राति हमरा एको रत्ती नींद नहि भेल। दोसर दिन हमर सबहक रेल गाड़ी छल। हिनकर कॉलेज तs खुजि गेल छलन्हि मुदा इ हमरा कहि देने रहथि जे एक दिनक गप्प छैक, ताहि लेल इ हमरा सबके गेलाक बाद सs अपन क्लास करताह। साँझ मे हमरा सब के छोरय के लेल हमरा सब सँग इहो स्टेशन अयलाह हमरा स्टेशन पर ठाढ़ हेबा मे सब दिन सs बड़ ख़राब लागैत छsल मुदा ओहि दिन नहि जानि कियाक, होइत छsल जे रेल गाड़ी जतेक देरी सs आबैक से निक। कथी लेल, गाड़ी अपन निर्धारित समय पर आबि गेलैक आ हमरा ओहि पर सवार होमय परल।

रेल गाड़ी खुजय सs पहिनहि ई मौका देखि कs चुपचाप हमरा लग आबि कहलाह

आब चिट्ठी अवश्य लिखब नहि तs हमारा पढ़य मे मोन नहि लागत”।

हमहू मुडी हिला जवाब दs देलियैन्ह। जहिना जहिना गाड़ी खुजय के समय होयत छलैक हमरा बुझाइत छsल जेना हमरा कियो जबरदस्ती पठा रहल अछि। गाड़ी आब ससरय लागल मुदा हम दूनू गोटे एक टक एक दोसरा के ताबैत देखैत रही गेलहुँ जाबैत धरि आँखि सs ओझल नहि भsगेलहुँ।

रांची पहुँचलाक दोसर दिन हम कॉलेज गेलहुँ मुदा हमर कॉलेज मे एको गोट हमर स्कूलक संगी नहि भेंटलिह। हम चुप चाप जा कs पछुलका बेंच पर बैसी गेलहुँ। क्लास मे हम असगर रही जनिकर कि बियाह भेल छलैक। हमरा क्लास मे नन सब सेहो कैयेक टा छलिह। हमरा बगल मे सब दिन आबि कs एकटा नन बैसि जाइत छलिह।

एक सप्ताहक बाद बाबुजी जएबाक चर्च करय लगलाह, हुनका गेनाइ आवश्यक छलन्हि । ओ तsआयल छलाह नीलू दीदी, हमर पितिऔत बहिनक बियाहक हिसाबे छुट्टी लs s मुदा हमर विवाहक चलते हुनका छुट्टी बढाबय परि गेलन्हि । हमर माँ बाबुजी अरुणाचल मे रहैत छलथि, जाहि ठाम मात्र छोटका बच्चा सब के लेल स्कूल छलैक ।हम आ बौआ (हमर बडका भाय ) तीन चारि बरख सs पढ़ाई लेल माँ बाबुजी लग नहि रहि छोटका काका लग राँची मे रहैत छलहुँ। हुनका लोकनि के जएबाक चर्च जखैन्ह जखैन्ह होय हमर मोन छोट भs जायत छs, हम कात मे जाय खूब कानी। हमर माँ सैत इ देखि लेत छलिह, एक दिन हमरा पुछि देलथि “अहाँ कियाक कानैत छी”। हमरा आओर कना गेल मुदा हम बजियैन्ह किछु नहि। हमरा सब दिन सs इ रहल, यदि हमरा मोन मे दुःख होइत अछि तs हम किनको किछु नहि कहैत छियैन्ह आ कात मे जा असगरे कानैत छी।एक दिन माँ हमरा असगरे लs जाय कs पुछलथि हमरा कहु अहाँ कियाक कानैत छी नय तsहमरा ओतहु जाय कs ध्यान लागल रहत। इ सुनतहि हमरा आओर कना गेल। माँ तखैन्ह बुझि गेलैथ आ पुछलथि कहु तs हम नहि जाई आ किछु दिन अहाँ लग रही जाइ, अहाँक बाबुजी असगरे चलि जयताह। हम किछु नहि बजलियैन्ह मुदा हमरा इ सुनि निक लागल।

हमर माँ, बाबुजी के कहि सुनि कs हुनका असगर जएबाक लेल तैयार कs लेलकनि। हमर चाचा इ सुनि कs पहिने माँ के रूकबा लेल मना कयलथि मुदा माँ के मोन देखि कs ओहो चुप भsगेलथि। एक सप्ताहक बाद बाबुजी के अरुणाचल जायब तय भेलैंह। बाबुजी के रांची सsमुजफ्फरपुर जा ओतहि सs अवध आसाम मेल सs अरुणाचल जएबाक छलन्हि ।

(अगिला अंकमे)

अपन टीका-टिप्पणी दिअ।

https://www.blogger.com/comment.g?blogID=7905579&postID=513633139662640904

बलचन्दा

(मैथिली नाटक)

विभा रानी

स्त्री (जेना कोनो सम्मोहन मे) हमर जनम पर हमर बाउजी एतेक प्रसन्न भेल छलाह जेनातीनू लोकक राज-पाट हुनका भेटि गेल होइन्ह। सोहर, बधावा, पमरियाक नाच,भरि गामक भोज, मिठाई..। एह, एहेन कोनो वस्तु उठा नयिं रखलाह। हे, देखियौ,आइ-माइ-दाइ सभ सोहर गाबि रहल छथि बाउजीक हुनका सभक संगे रार-तकरार सेहो चलि रहल अछि। हम, हम अपना मायक कोरा मे आराम सुतल छलहुं। (शनै.. शनै.. प्रकाश बदलइत अछि.. स्त्री कोरा मे एक गोट नेन्नाके बैसैत अछि गीत गबैत अछि। गीतक बीच मे ओकर अन्य देखभाल,काजल लगेनाइ, मालिश केनाइ, स्नान करबेनाइ, दूध पियेनाइ आदि कार्य-व्यापारकरैत रहैत अछि।)

कहँवा ही रामजी जनम लेले

कहवाँ बधइया बाजे हो

ललना किनकर हियरा जुड़ाएल

खेले आएल अंगना हो

अजोध्या मे रामजी जनम लेले

मिथिला बधइया बाजे हो

ललना दशरथ के हियरा जुड़ाएल

खेले आएल अंगना हो

स्त्री सोहर समाप्त भेलै कि सभ किओ उठेलीह बधावा।

(सोहरक धुन क्रमश: बधावा मे बदलइत अछि..स्त्री नेन्ना के मंचक पाछां चलि जाइत अछि।फ़ेर चुन्नी उतारि अथवा पमरियाक रूप में बधावा गबैत अछि नचैत अछि)

रूपइया माँगे ननदी, लाल के बधाई

दसे रूपइया मोरा ससुर के कमाई

पाँच ले लू ननदी, लाल के बधाई!

बाउजी: बाउजी काकी बजलाह- की भउजी? रामजीक सोहर लालक बधाई? अरे,हमरा घर मे राम जी नञि, सीता जी, पार्वती जी, लक्ष्मी जी, सरस्वती जी.. दुर्गाजी सभटा देवी एकरूप ऐलीहए! हुनका लेल सोहर गबियौ, हुनकर बधावासुनबियौ!

औरत : काकी कहलखिन्ह- अहूँ किसुनदेव बउआ, सठिया गेलहुँए की? अरे, बेटी लेलसोहर बधावा? ओकर जनम खुसनामा छै की? अरे, जनमाबी, पाली-पोसी,पढ़ाबी-लिखाबी, बियाह मे भरि-भरि ढाकी दान-दहेज दी, तकरा बाद परब-त्यौहार,बाल-बच्चा.. जिनगी भरि नेग रसम पाबनि तिहार। बाप रौबाप.. भारी खर्चाक घर छै भारी खर्चाक घर..। एहेन मे के राग जै जैवन्तीसुनाओत? कहू भला।

बाउजी : बाउजी काकी के बारैत कहलखिन्ह- एना नञि बजियौ भउजी। स्त्री स्त्रीएलेल.. अहाँके नञि बूझलए.. रहिकावाली सभ बेर दगा जाइत छली.. अरे, बेटासभक की? सभ खानगी पढैत, एम्हर ओम्हर डोलैत-डालैत कोनो ने कोनजुगुत बैसाइये लेत। असली कथा छै बेटीक..। बिनु कन्यादाने हम सभअई मनुक्ख जनम उऋण सकै छी की? एक-एककसात..सात पूतकबाद.. अई देवीक आगमन.. धन्न भाग हमर.. गाऊ, गाऊ… देवीक स्वागतकरू..(पार्श्र्व गीत.. स्त्रीक पूजा करबाक अभिनय)

निमिया के डार मइया लागले हिंडोलबा कि रूनु झुनु

मइया खेले ले सिकार कि रूनु झुनु

खेलिते खुलिते मइया लागले पियसवा कि चली गेली

मइया भगत के द्वार कि चली गेली

पिता : बाउजी फ़ेर काकी के चेतेलखिन्ह- हमर कान मे बेटीक बधावा पड़बाक चाही भउजी,नञि अहाँ हमर बाजब भूकब बन्न!

भउजी : काकी फ़ेर उपराग देलीह- देखियौ बताह के! बेटीक जनम पर जहन प्रसन्नते नञितकेहेन सोहर केहेन बधावा .. मुदा के कहय अई बौराहा के?.. सात-सात गोबेटा भेल, किछु नञि कएल बेटी भेला पर अपने ताले नचने घुरैय‘.. कतआनी गै दाइ बेटीक सोहर बधावा?.. अबै जो गै, बेटाक ठाम पर बेटी दहीआ गाबि दही..। जेतै गीत बेटीक किसुनदेव बउआक जी सेहो जुड़ा जेतै..

रूपइया माँगे ननदी लाली के बधाई

सौए रूपइया मोरा पिया के कमाई

छदाम ना दँू ननदी लाल के बधाई!

स्त्री : हमर पीसी तुनकि के बजलीह- वाह चाची वाह! लाल के बधाई दस टाकाककमाई! लालीक बधाई सौ टाकाक कमाई ओहि मे पांच टाका ननदि के।आ लाली के बधाई सौ टाकाक कमाई .. तइयो एकोटा पाइ ननदि के नञि!एह।

भउजी : काकी बरजलीह- गै, बेटी भेलै भारी खर्चाक घर! बाप बेसी नञि कमेतै कोनाओकर घर भरतै.. चल, चल, गीत गो..

सुनू राजा, घर पइसा कौड़ी

सासु जे अइहें, देवता पुजइहें

देवता पुजौनी के नेग-जोगा मंगिहें

बाहर से पिया तुम ललकारो,

भीतर से हम पिया मुक्का देखाएब। सुनू राजा..

स्त्री भरि गाम मे सोर गेलै जे बाउजी हमर माय के हमर जनमक खुशनामा मे ठोससोनाक सीताहार देलखिन्हए। बाउजी माय से कहलखिन्ह-

बाउजी : हे लियरहिकावाली! अहाँक सीताहार! कतेक सुन्दर बेटी देलहुँए अहाँ हमरा.. हमएकर नान्हि-नान्हि टा पएर मे पायल पहिराएब, एकर केश मे लाल-लाल फीताबान्हब, छोट-छोट हाथ मे रंग बिरंगा चूड़ी पहिराएब.. कन्हा पर घूमब..जतेक चाहत, जतचाहत, ततेक ततपढ़ाएब.. डाक्टर, इंजीनियर, कलक्टर, जे चाहत, बनाएब.. खूब धूमधाम एकर विवाह करब..

स्त्री : (युवतीक स्वर अभिनय मे) बाउजीक स्नेहक छांहरि मे हम पलैत गेलहुं, बढैतगेलहुं। हम इंजीनियर बनचाहैत छलहुं। मुदा हमर माय मोहल्लाक आइ-माइ-दाइककहब मे आबि गेलीह पड़ि गेलीह हमर विवाहक पाछां। हमर की? हमर एक्केगोट शरणस्थली कहियौ कि दाता दरबार- हमर बाउजी। से हम लगेलइयन्हि हुनकालग अपन गोहारि.. बाउजी, हम इंजीनियर बनब.. देखियौ ने! माय कहै छथिन्ह जेहमर बियाह.. बाउजी.. हम एखनि पढ़ब.. हम इंजीनियर बनब बाउजी प्लीज! हमएखनि बियाह नञि करब। बाउजी, प्लीज़… (स्त्रीक चेहरा पर पहिने अदंक आफ़ेर प्रसन्नताक भाव अबै छै, जेना पिताक सहमति भेंटि गेल हुअए। प्रसन्नतासपूरा मंच पर घूमि जाइत अछि.. ) हं, हम इंजीनियर बनब.. अपना गामकपहिला लड़की.. जे इंजीनियर बनत.. आई धरि जे बनल से खाली डाक्टर किटीचर अथवा नर्स.. हम इंजीनियर..बाउजी, अहां कतेक नीक छी। हम कतेकबड्ड सौभाग्यशाली जे अहां सन पिता भेटलन्हि हमरा।

(प्रेमक अनुभूतिक अभिनय.. प्रसन्नता नाचैत अछि विद्यापतिक गीत पढैत अछि-

सखि की पूछसि अनुभव मोय,

सेहो पिरीत अनुराग बखानति,

तिल तिल नूतन होय।

स्त्री हम रोहित रोहित संगे अपन भविष्यक स्वप्न मे डूबल छलहुं कि एकदिन मा भरिघर के अपना माथ पर उठा लेलकन्हि। चिकरि-चिकरि के बाउजी कहलगलन्हि-

माँ : नाक कटाकआबि गेल अहाँक सुलच्छनी! जे कहियौ नञि भेल खन्दान मे, सेआब रहल अछि। बेसर्मीक हद छै। प्रेम, एह, देह मे जेना आगि सन्हियाएलछलै..

बाउजी रहिकावाली, आस्ते बाजू। बेटी हमर थिक। जेना हम कहब, तेना हएत।आखिर जिनगी हिनका आओर के संगे संगे नेमाहके छैक। जाहि मे दुनु सुखीरहथु। लड़िका नीक छै, पढनुक छै। देखहु-सुनय मे कोनो राजकुमार कमनयि छै। अरे, हमहूं तकितहुं एकरा बेसी नीक वर भेटितय, ताहि मेसंदेहे.. खाली जातिए कने दोसर छै ने..।

मां किन्नहुं नञि होबदेबै हम संबंध.. अहां हम कहि रहल छी।… गै दाइ गै दाइ, गै कियै जनमेलौं एहेन धिया के रौबाप..जनितहुं सोइरीए मे नून चटा मारि देने रहितियैक गै दाइ.. अरे, अहां ठाढ़ ठाढ़ हमर मुंह की देखि रहलछी? ताकू कोनो हरही सुरही, बूढ़, अधबयसू.. दुहेजू.. ककरो संगे.. भगाऊ एकरा..

बाउजी से नयि हेतै रहिकावाली। विवाह ओही ठां हेतै, जतहमर बेटी कहत।

(वर्तमान। स्त्री मंच पर अबैत अछि।…. पार्श्र्व समदाओन चलैत अछि। स्त्रीक विवाहक बाद विदा लेबाक अभिनय। एकरा अपन लालओढनी से प्रतिध्वनित करैत अछि। समदाओन सुनाइ पड़ैत अछि)

(अगिला अंकमे)

अपन टीका-टिप्पणी दिअ।

https://www.blogger.com/comment.g?blogID=7905579&postID=513633139662640904

मैलोरंग मैथिली रंगमंचक एकटा प्रतिष्ठित नाम अछि। ओकरा द्वारा प्रस्तुत कएल जाएवला नवका नाटकमे अभिनय करबाक लेल नव-पुरान कलाकार आमंत्रित छथि। संपर्क करू: प्रकाश झा, निदेशक फोन नं. 011-22446622 09811774106

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